NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
दिल्ली: झुग्गी तोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
सुप्रीम कोर्ट के झुग्गी तोड़ने के फ़ैसले से असहमति जताते हुए नई दिल्ली के वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले झुग्गी निवासियों ने प्रदर्शन किया। इनमें से ज्यादातर लोग रेल पटरियों के पास बसी झुग्गियों में रहते हैं और वजीरपुर समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Sep 2020
 झुग्गी तोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में रहनेवाले झुग्गी निवासियों ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए झुग्गी तोड़ने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। इनमें से ज़्यादातर लोग रेल पटरियों के पास बसी झुग्गियों में रहते हैं और वजीरपुर समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं। प्रदर्शन के दौरान इन मजदूरों ने ‘झुग्गी उजाड़ने’ के फैसले को लाकर अपना गुस्सा व्यक्त किया।

प्रदर्शन में मौजूद वजीरपुर झुग्गी निवासी शकुंतला देवी ने कहा, “हम किसी भी सूरत में अपना घर नहीं छोड़ेंगे। सरकार ने हमसे झुग्गी के पास मकान का वादा किया था। आज जब चारों तरफ कोरोना और लॉक-डाउन के चलते हमारा रोज़गार जा चुका है, हमें ये कहा जा रहा है कि हमारी झुग्गी भी तोड़ दी जाएगी। ”

b67c5ebd-dabd-4a0a-8217-0808cbfc7d18.jpg

झुग्गी में ही रहने वाले अजय कुमार ने प्रदर्शन के दौरान बताया, “चुनाव के वक़्त भाजपा के लोगों ने जहां झुग्गी वहाँ मकान की बात कही थी। आज जब चुनाव ख़त्म हो गए हैं तो हम मोदी जी से पूछना चाहते हैं कि हमारे मकान कहाँ हैं?”

भाकपा माले राज्य सचिव रवि राय ने प्रदर्शन में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “ये बहुत शर्म की बात है कि रेल मंत्रालय सीधे तौर पर इस तरह के जन विरोधी फैसले में शामिल है। हम दिल्ली के विभिन्न इलाकों में इस फैसले से प्रभावित लोगों के बीच गए हैं, सरकार को इन लोगों की रहने की समुचित व्यवस्था करनी होगी। जोर-ज़बरदस्ती करके झुग्गी गिराने के खिलाफ जनता हर संघर्ष के लिए तैयार है।”

आपको बता दे सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में दिल्ली में लगभग 140 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक के आसपास में फैलीं करीब 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ये कार्य तीन महीने के भीतर पूरा कर लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘किसी भी तरह का राजनीतिक या अन्य हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और न ही कोई अदालत इस मामले में अतिक्रमण हटाने को लेकर स्टे लगाएगी।’

इसके बाद ही सवाल उठ रहे हैं कि इन झुग्गियों में रहने वाले लाखों लोगों का क्या होगा? झुग्गी निवासियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि कोर्ट ने हटाने का आदेश तो दिया लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बताई। इसके बाद से वाम दलों सीपीएम और भाकपा माले ने इस आदेश को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की। इसके साथ कांग्रेस ने भी सवाल किया कि इन मज़दूरों का क्या होगा?

परन्तु 2014 के लोकसभा में और उसके बाद भी कई मौकों पर जहाँ झुग्गी वही मकान का वादा करने वाली बीजेपी जोकि निगम और केंद्र में सत्ता पर काबिज़ है उसने पूरी तरह इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है। इसी तरह का वादा कर विधानसभा में झुग्गीवासियों का वोट लेने वाली आम आदमी पार्टी जो दिल्ली की सत्ता संभाले हुए है, उसने भी इस मामले पर कोई स्टैंड नहीं लिया है। इसको लेकर भी झुग्गीवासियों में भारी रोष है।

5fb23412-2231-441c-a738-85d2a92ab1e7.jpg

सीपीआई(एम) दिल्ली राज्य कमेटी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को संवेदनशून्य बताया और कहा कि कोई भी न्याय मानवीय संवेदना से शून्य होकर न्याय नहीं रह जाता। इन 48 हजार झुग्गियों में रहने वाले लाखों लोग मेहनतकश हैं जो न सिर्फ देश के नागरिक हैं, बल्कि विकास का आधार हैं। आज जब चारों तरफ महामारी का प्रकोप फैला हुआ है, आर्थिक मंदी एवं बेरोजगारी की मार से देश क्षत विक्षत है ऐसे में स्वच्छता के नाम पर झुग्गियों में रह रहे हजारों बच्चों, महिलाओं एवं बूढ़ों को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए सड़कों पर छोड़ दिया जाने का संवेदनहीन फैसला क्या न्याय कहला सकता है?

आगे उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में मार्च 2000 में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत के हस्तक्षेप से बाजपेयी सरकार में यह नीति बनी थी कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के झुग्गियों को नहीं हटाया जाएगा। आज मोदी सरकार उस नीति के खिलाफ़ दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चुप है।

सीपीएम ने गंभीर सवाल करते हुए कहा कि केंद्र एवं दिल्ली की राज्य सरकार लगातार इन लाखों मेहनतकशों के जीवन को संकीर्ण राजनीति के कारण फुटबॉल की तरह एक दूसरे के पाले में डालने का काम कर रही है। सबको मकान देने की जुमलेबाजी से इन लाखों मजदूरों की जिंदगी नहीं सुधरेगी। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उनको हटाने की कोई भी कार्रवाई मजदूर वर्ग के ऊपर हमला है। इसलिए उन्होंने माँग की है कि मोदी सरकार तुरंत ऑर्डिनेंस लाकर इन हजारों परिवारों की वैकल्पिक व्यवस्था करे और जबतक वैकल्पिक व्यवस्था न हो तब तक इन्हें न हटाया जाए।

118765519_2622913247961242_1169088091777644619_o.jpg

इसको लेकर उन्होंने माननीय उपराज्यपाल को एक पत्र भी लिखा कि वो इस मामले में हस्तक्षेप करें और केंद्र सरकार को इस संबंध में ऑर्डिनेंस लाने पर सहमत करे,क्योंकि यह लाखों जीवन से जुड़ा मामला है।

Supreme Court
Slum Area
48000 slum Demolition
Protest
CPIM
CPIML
BJP
Congress
AAP

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध


बाकी खबरें

  • CDSCO
    भाषा
    CDSCO ने कोवोवैक्स, कोर्बेवैक्स और मोलनुपिराविर के आपात इस्तेमाल को स्वीकृति दी
    28 Dec 2021
    सीडीएससीओ की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने ‘कोवोवैक्स’ और ‘कोर्बेवैक्स’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने की सिफारिश की है। कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (…
  • sunil
    भाषा
    पेले से आगे निकले छेत्री, भारत ने आठवां सैफ ख़िताब जीता, महिला टीम भी चमकी
    28 Dec 2021
    भारतीय फुटबॉल को वर्ष 2021 में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली । पचास और साठ के दशक का अपना खोया गौरव लौटाने की कोशिश में जुटी टीम उस पल का इंतजार ही करती रही जो देश में इस खेल की दशा और दिशा बदल सके।
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: किसानों की आय दोगुनी होने का टूटता वादा, आत्महत्या का सिलसिला जारी
    28 Dec 2021
    बुंदेलखंड के बाँदा ज़िले में युवा किसान राम रुचि और प्रमोद पटेल ने इसी साल क़र्ज़ के दबाव में आत्महत्या कर ली। न्यूज़क्लिक ने दोनों परिवारों से मिल कर बात की और जानने की कोशिश की कि सरकार का किसानों…
  • officers of Edu dept eating MDM with students
    राजेश डोबरियाल
    उत्तराखंड: 'अपने हक़ की' लड़ाई अंजाम तक पहुंचाने को तैयार हैं दलित भोजन माता सुनीता देवी
    28 Dec 2021
    “...चूंकि क्रिसमस की बैठक में सभी पक्ष अभी क्षेत्र का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखने पर सहमत हुए हैं इसलिए वे जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रहे हैं। नियमानुसार तो सुनीता देवी की ही भोजनमाता…
  • UP Election 2022
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव 2022: बेरोज़गार युवा इस चुनाव में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं
    28 Dec 2021
    मोदी-योगी से नाउम्मीद युवाओं को विपक्ष से चाहिए रोजगार का भरोसा
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License