NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की मांग में भाकपा-माले विधायकों का प्रदर्शन
“2.75 लाख शिक्षक के पद नीचले स्तर पर खाली हैं और कॉलेज लेवल पर अभी भी करीब 70 प्रतिशत शिक्षक के पद खाली हैं। पढ़ने-लिखने वाले गरीब के बच्चे शिक्षा महंगी होने के चलते वे इससे दूर हो रहे हैं।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Mar 2022
bihar school
Image courtesy : Hindustan Times

बिहार की चरमराई शिक्षा व्यवस्था किसी से छुपी नहीं है। यहां की खस्ताहाल स्कूल की इमारतें, शिक्षकों के खाली पद, क्लास में बच्चों की अनुपस्थितियां, बच्चों को किताबों की कमी बिहार में आम बात है। अक्सर इन सबको लेकर खबर पढ़ने और सुनने को मिल ही जाती है। पिछले दो वर्षों में कोरोना के चलते समय समय पर बंद किए गए स्कूलों के चलते बच्चों के भविष्य को चौपट कर दिया है।

बिहार की विपक्षी पार्टियों द्वारा राज्य की शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा अक्सर उठाया जाता रहा है लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। प्रदेश की विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है। इस बीच गत सोमवार को बिहार विधानसभा परिसर में सीपीआइएमएल के विधायकों द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और खाली पदों पर शिक्षकों की भर्ती करने समेत अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सीपीआइएमएल से पालीगंज के विधायक संदीप सौरभ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “2.75 लाख शिक्षक के पद नीचले स्तर पर खाली हैं और कॉलेज लेवल पर अभी भी करीब 70 प्रतिशत शिक्षक के पद खाली हैं। पढ़ने-लिखने वाले गरीब के बच्चे शिक्षा महंगी होने के चलते वे इससे दूर हो रहे हैं।"

उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि, "क्या बच्चे स्कूल में सिर्फ पोशाक पहनने के लिए जा रहे हैं या वे सिर्फ खिचड़ी खाने के लिए जा रहे हैं? सरकार का ही आंकड़ा कह रहा है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति केवल 27 प्रतिशत है। सरकार कुछ भी घोषणा कर दे रही है लेकिन ग्राउंड पर कोई सुधार नहीं हो रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत बिहार में शिक्षा को निजीकरण की तरफ तेजी से बढ़ाया जा रहा है। हमने सरकार से ये भी कहा कि सरकार जिन सरकारी स्कूलों में किताब देने के बदले पैसा देने की योजना चला रही है जिसका कोई फायदा नहीं है। आज भी सरकारी स्कूलों में बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। इसलिए सरकार को पैसा देने के बजाय किताब देनी चाहिए ताकि बच्चे उससे पढ़ाई कर सकें।"

बता दें कि कुछ दिनों पहले विधानमंडल पास हुए बजट में सरकार ने 2022-23 के लिए शिक्षा विभाग का बजट बढ़ा दिया लेकिन पुरानी व्यवस्था में सुधार को लेकर कोई योजना नहीं बनाई गई है। नीतीश सरकार ने कुल बजट का 16.5% खर्च शिक्षा पर करने का निर्णय लिया है लेकिन इसमें पुरानी व्यवस्था में संसाधनों और भवनों को लेकर कोई योजना नहीं बताई गई है। सरकार ने 39,191.87 करोड़ रुपए शिक्षा के मद में दिया है लेकिन विशेषज्ञ इसे महज खानापूर्ति बता रहे हैं।

वहीं शिक्षा के मद में बजट आवंटन को लेकर सीपीआइएमएल विधायक संदीप सौरभ कहते हैं कि, "शिक्षा पर सदन से बजट आवंटन और शिक्षा विभाग को आवंटित राशि का मिलने वाला हिस्सा, ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं।"

बिहार में शिक्षकों की भर्ती की बात करें तो सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी बहाली को लेकर धरना प्रदर्शन करते रहे हैं। वर्ष 2019 में जारी विज्ञप्ति की परीक्षा में पास हुए इन अभ्यर्थियों ने सातवें चरण की बहाली को लेकर राजधानी पटना में 3 मार्च से आंदोलन किया।

उधर बिहार के स्कूलों की इमारतों और वहां शौचालयों की सुविधाओं की बात की जाए तो हाल ही में दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राजधानी पटना के एजी कॉलोनी में एक ऐसा स्कूल है जहां बेटियां टॉयलेट के डर से पानी पीकर नहीं जाती हैं। गर्मी में प्यास से गला सूखता है, इसके बाद भी वह स्कूल में पानी नहीं पीती हैं। स्कूल में 6 से 7 घंटे वह कैसे बिताती हैं, यह वही जानती हैं। यह बिहार सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के दावों की पोल खोलती है। स्कूलों में इस तरह की बदहाल स्थिति बालिका शिक्षा में बड़ी बाधा है।

पटना के एजी कॉलोनी में 1988 से ये मध्य विद्यालय चल रहा है। अखबार को टीचर बताते हैं कि स्कूल के पास न तो अपना भवन है और न ही अपनी कोई व्यवस्था है। 1988 से ऐसे ही स्कूल चलाया जा रहा है। स्कूल में एक छोटा सा टूटा फूटा एक जर्जर कमरा है, पास में ही पुराना टूटा टॉयलेट है। टीचर नूतन बताती हैं कि स्कूल में 408 स्टूडेंट्स हैं जिसमें 80% छात्राएं हैं। दो कमरे होने के कारण स्टूडेंट्स को मैनेज करने में बड़ी समस्या होती है। इस कारण से दो शिफ्ट में बच्चों को पढ़ाना पड़ता है। इस कारण से बच्चों की पढ़ाई में भी बड़ी बाधा आती है।

वर्ष 2020 में भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट में बिहार कम साक्षरता दर वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर रहा। इसमें 70.9 फीसदी समग्र साक्षरता दर के साथ बिहार राष्ट्रीय औसत (77.7 फीसदी) से 6.8 फीसदी कम दिखाय गया था।

इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में पुरुषों की साक्षरता दर महिलाओं से अधिक थी। बिहार में जहां 79.7 फीसदी पुरुष साक्षर थें वहीं 60 फीसदी महिलाएं पढ़ी-लिखी थीं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिला साक्षरता दर 58.7 फीसदी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 75.9 फीसदी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष साक्षरता दर 78.6 फीसदी और शहरी इलाके में 89.3 फीसदी थी। बिहार में कुल ग्रामीण साक्षरता दर 69.5 फीसदी जबकि शहरी साक्षरता 83.1 फीसदी थी।

Bihar
Bihar Schools
Nitish Kumar
Education system in Bihar
CPI-ML
CPI-ML protests

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं

बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया

बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक कांड मामले में विपक्षी पार्टियों का हमला तेज़

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार और यूपी पढ़ाई में फिसड्डी: ईएसी-पीएम

बिहारः प्रारंभिक शिक्षकों की काउंसलिंग टलने के बाद दसवीं और बारहवीं शिक्षकों की नियुक्त‍ि पर भी ग्रहण


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Russia Ukraine war
    अजय कुमार
    बेहतर भविष्य का रास्ता युद्ध से होकर नहीं जाता है
    03 Mar 2022
    चाहे जितने भी जायज तर्क हों, लेकिन वह युद्ध को जायज नहीं बता सकते। युद्ध वर्तमान को तो बर्बाद करता ही है, साथ में भूत और भविष्य सबको तबाह कर देता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License