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भारत
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झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
सीपीआईएम ने मांग की है कि जब तक प्राधिकरण या सरकार द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती है तब तक इन झुग्गी बस्ती में रह रहे गरीब लोगों को वहीं पर रहने दिया जाए। और यदि किसी कारणवश उन्हें जनहित में हटाना आवश्यक हो, तो आसपास ही उन्हें स्थानांतरित कर दिया जाए तथा झुग्गी वासियों के लिए पुनर्वास की नीति बनाकर निशुल्क मकान दिए जाएं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Jul 2021
झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

नोएडा, सेक्टर 6  में वर्षों-वर्ष से बसी झुग्गी बस्ती को नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों व अतिक्रमण दस्ते द्वारा अचानक 29जून  को तोड़ दिया।  साथ ही वहां के निवासियों के  सामान नष्ट कर/जब्त कर 50 से अधिक परिवारों को बेघर कर दिया गया है। इसके खिलाफ बुधवार 7 जुलाई  को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के बैनर तले पार्टी नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, भरत डेंजर, विनोद कुमार, पूनम देवी, राम सागर आदि के नेतृत्व में नोएडा प्राधिकरण कार्यालय सेक्टर- 6, नोएडा पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश  और मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा विकास प्राधिकरण को ज्ञापन दिया।

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी श्री संजय सिंह ने ज्ञापन  लिया और उन्होंने समस्याओं के समाधान करवाने का आश्वासन दिया।

सीपीआईएम नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान मजदूरों की मदद करने के बजाय प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा झुग्गी बस्ती में तोड़फोड़ कर सामान जब्त करना/ नष्ट कर उन्हें भयंकर गर्मी में सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया जाना पूर्णतया गलत है और संवैधानिक अधिकार व माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश/ निर्देशों का खुला उल्लंघन है क्योंकि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीब लोगों को उजाड़ा नहीं जा सकता। केंद्र व प्रदेश सरकार भी जहां झुग्गी वहीं मकान की नीति पर कार्य कर रही है इस तरह देखा जाए तो प्राधिकरण की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट व सरकार के दिशा निर्देशों की अवहेलना ही है।

 ज्ञापन के माध्यम से सीपीआईएम पार्टी ने मांग किया है कि उपरोक्त झुग्गी बस्ती के नागरिकों को सरकार या प्राधिकरण द्वारा रहने की जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती है तब तक इन गरीब लोगों को वहीं पर रहने दिया जाए और यदि किसी कारणवश जनहित में हटाना आवश्यक हो तो आसपास ही उन्हें स्थानांतरित कर दिया जाए तथा झुग्गी वासियों के लिए पुनर्वास की नीति बनाकर निशुल्क मकान दिए जाएं। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी थी कि यदि उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं रुकी तो सभी झुग्गी वासियों को लामबंद कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

मोदी सरकार का लोकसभा चुनाव में बहुत बड़ा वादा था कि जहाँ झुग्गी वहीं मकान, लेकिन इसके विपरीत वर्तमान महामारी के समय में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई सहित कई राज्यों में अवैध अतिक्रमण के नाम पर हज़ारों लोगों को बेघर किया जा रहा है। बेघर करके उन्हें सड़कों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर किया जा रहा है। ऐसे समय में जब देश ही नहीं दुनिया अभूतपूर्व संकट कोरोना माहमारी का सामना कर रही है। जिस दौरान सरकार स्वयं घर में रहें, सुरक्षित रहें जैसे नारे और सबक जनता को दे रही है। ऐसे में लोगो के आशियाने को छीनकर सड़क पर लाना कई सवाल खड़े करता है।

हाल ही में फरीदाबाद के  खोरी गांव के निवासी अपने घरों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी मौजूदा कोरोना काल में ही कई इस तरह की दमनात्मक कार्रवाई हो चुकी हैं। राष्ट्रीय आवास अधिकार अभियान की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस महामारी और लॉकडाउन के समय में देशभर में ऐसे 100 से अधिक डेमोलिशन यानी तोड़-फोड़ की कार्रवाई हुईं हैं।

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