NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
कोरोना संकट में निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन, बताई अपनी दुर्दशा, कहा इसके लिए सरकार ज़िम्मेदार
मज़दूरों ने इन प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार से मांग की और चेतावनी भी दी कि यदि मज़दूरों के कल्याण के लिए बने क़ानून और कल्याण बोर्डों को खत्म किया गया तो आने वाले समय में मज़दूर सड़कों पर उतर कर विरोध करने के लिए मजबूर होंगे।
मुकुंद झा
14 Jul 2020
CITU

सोमवार 13 जुलाई को देशभर में निर्माण मज़दूरों ने अपनी समस्याओं और सामजिक सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन किया। ये सभी दिहाड़ी मज़दूर हैं, कोरोना माहमारी ने इनके जीवन को सबसे अधिक प्रभावित किया है, इन्होंने अपनी दुर्दशा को बताने के लिए यह प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का आह्वान सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) से जुडी कंस्ट्रक्शन वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (CWFI) ने किया था।

CWFI के अध्यक्ष सुखबीर सिंह ने कहा, "देश भर में कम से काम 22-23 राज्यों में लगभग 50,000 कार्य स्थलों पर विरोध प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया था। विभिन्न राज्यों से जो रिपोर्टें हमे प्राप्त हुई हैं, उसके मुताबिक पूरे देश में मज़दूरों ने इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अपनी भागीदारी की है।"

हालांकि कोरोना माहमारी को देखते हुए विरोध प्रदर्शन छोटे समूहों में, दिल्ली और बेंगलुरु सहित शहरी क्षेत्रों में निर्माण परियोजना स्थलों पर, हरियाणा और राजस्थान, हिमाचल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गाँव या ब्लॉक स्तरों पर विरोध प्रदर्शन हुए।

107702806_1539954386176236_2993374598594173628_n.jpg

मांगों को सूचीबद्ध करते हुए, सभी संबंधित अधिकारियों को, सभी स्तरों पर - गांवों में सरपंच से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन सौंपे गए।

मज़दूरों की दुर्दशा के लिए सरकार की नीतियां और कुप्रबंधन ज़िम्मेदार

सुखबीर ने कहा कि “हर दिन गुजरने के साथ, निर्माण मज़दूरों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनके लिए, खुद का जीवन यापन करना और अपनी सुरक्षा करना कभी आसान नहीं था। परन्तु अब जैसे-जैसे हालात खराब हो रहे हैं, सरकार के साथ मिलकर काम करना जरूरी है और सरकार पर दबाव बनाया जाए कि वह इन कामगारों की परेशानी को दूर कर सके।"

लॉकडाउन से पूर्व भी इन मजदूरों को औसतन 300 से 400 और एक मिस्त्री को 400 से 500 रुपये रोज़ाना मिलता है, वो भी 12 घंटे काम करने के बाद, जो बहुत ही कम है। परन्तु 24 मार्च को घोषित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने निर्माण गतिविधियों को एक झटके में बंद कर दिया। जिससे इस उद्योग में करोड़ो दिहाड़ी मज़दूरों के रोजी रोटी ख़्त्म हो गई। यहां तक कि लॉकडाउन के ख़त्म होने से भी इन श्रमिकों को अधिक राहत नहीं मिली है क्योंकि बाजार में नौकरी के अवसर ही नहीं हैं ।

मार्च में ही श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी एक सलाह, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को BOCW अधिनियम, 1996 के तहत भवन निर्माण और अन्य निर्माण के तहत वर्षों से एकत्र किए राशि को निर्माण मज़दूरों के खाते में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। अधिनियम के तहत, निर्माण फर्मों को एक उपकर (सेस) लगाया जाता है, जो कुल निर्माण लागत का 1% होता है। एकत्रित राशि निर्माण मज़दूरों के सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए रखी जाती है, जिसमें निर्वाह भत्ते भी शामिल हैं।

108213492_1539954459509562_7496816384684739760_o.jpg

श्रम मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक सेस फंड के तहत लगभग 52,000 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। बाद में, निर्माण मज़दूरों के लिए इस पैसे या फंड का स्थानांतरण केंद्र द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत घोषित राहत पैकेजों का हिस्सा बना दिया गया।

परन्तु इसमें भी कई तरह की समस्याए आईं और मज़दूरों के एक बड़े तबके को इसका लाभ नहीं मिल सका। योजना के तहत कवर किए गए निर्माण मज़दूरों में से केवल एक-तिहाई के खातों में ही नकद हस्तांतरण मिला है।

सुखबीर की मानें तो दोनों सरकारों केंद्र और राज्यों ने BOCW फंडों के समुचित उपयोग करती तो आज स्थति इससे बेहतर होती। फंड की इसी अनियमिता को लेकर पिछले साल दिसंबर में, हजारों निर्माण मज़दूरों ने राष्ट्रीय राजधानी में संसद में मार्च किया था।

सुखबीर ने कहा, " अगर अतीत में हमारी मांगों पर विचार किया जाता,शहरों से प्रवासी कामगारों का पलायन रुक सकता था।"

निर्माण मज़दूर कौन हैं?

आपको बता दे निर्माण मज़दूर की संख्या पूरे देश में करोड़ो में है और ये पूरा क्षेत्र असंगठित है। निर्माण मज़दूर उसे कहते जो किसी भी तरह से निर्माण कार्य से जुड़े हुए हैं। जैसे भवन बनाने व मरम्मत करने सड़क\पुल, रेलवे बिजली का उत्पादन, टावर्स बांध \नहर \जलाशय, खुदाई, जल पाइप लाइन बिछाने, केबल बिछाने जैसे कार्यों से जुड़े होते हैं जैसे राजमिस्त्री, बढ़ई, वेल्डर, पॉलिश मैन, क्रेन ड्राईवर, बेलदार व चौकीदार ये सभी निर्माण मज़दूर कहलाते हैं।

107514336_1539954359509572_6959109080986724051_n.jpg

निर्माण क्षेत्र में अधिकतर प्रवासी मज़दूर ही काम करते हैं। इसलिए इस प्रदर्शन में प्रवासी मज़दूरों की समस्या और मज़दूरों को सीधे नगद भुगतान करने की मांग की गई।

केंद्र की मोदी सरकार लगातार मज़दूर विरोधी फैसले ले रही है!

मज़दूरों की सबसे बड़ी शिकायत है कि इनके पास किसी भी तरह की कोई सुरक्षा नहीं है। काफी लंबे संघर्ष के बाद इनके सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार द्धारा निर्माण मज़दूरों के कल्याण के लिए वर्ष 1996 में क़ानून बना, जिसे अब केंद्र सरकार ख़त्म करने और उसे दूसरे श्रम अचार सहिंताओं में जोड़ रही है। मज़दूरों ने इसका विरोध किया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 'केंद्र सरकार द्धारा कल्याण कानूनों व राज्य स्तर पर बने श्रमिक कल्याण बोर्डों को भंग करने की योजना बनाई जा रही है जिससे निर्माण व मनरेगा मज़दूरों को मिल रही सहायता बन्द हो जाएगी।'

यदि ऐसा होता है तो राज्यों के श्रमिक कल्याण बोर्ड से पंजीकृत लाखों मजदूरों बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप व विवाह के लिए सहायता राशि के अलावा मेडिकल व प्रसूति सुविधा, 60 साल के बाद पेंशन औऱ मृत्यु होने पर मिलने वाली लाखों रुपए की सहायता बन्द हो जाएगी।

मज़दूरों ने इन प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार से मांग की और चेतावनी भी दी कि यदि मज़दूरों के कल्याण के लिए बने क़ानून और कल्याण बोर्डों को खत्म किया गया तो आने वाले समय में मज़दूर सड़कों पर उतर कर विरोध करने के लिए मजबूर होंगे।

108158176_1539954326176242_3249396295356281170_n.jpg

हिमाचल प्रदेश निर्माण मज़दूर फ़ेडरेशन के शिमला जिला महासचिव बाबू राम ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार लगातार मज़दूर विरोधी फैसले ले रही है।

बाबू राम ने निर्माण मज़दूरों के साथ ही मनरेगा मज़दूरों को लेकर भी भी सरकार से मांग रखी और कहा कि मनरेगा मज़दूरों को साल में दो सौ दिनों का काम और 600 सौ रुपये मज़दूरी दी जाए ।

यूनियन ने इसके साथ ही पूरे देश में कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन यूनियन मांग करती है कि हर मजदूर को 10 किलो का राशन दिया जाए ओर बिना आयकर दाता के मजदूरों को महीने का 7500 रुपये की मासिक सहायता दी जाए।

इसके साथ ही सरकार को 1979 का अंतरराज्य प्रवासी मजदूर अधिनियम व 1996 का भवन एवं अन्य सहनिर्माण कामगार अधिनयम में किसी भी तरह का बदलाव न करने की चेतावनी दी है।

मज़दूर संगठन CWFI ने साफ किया कि वो सरकार द्वार मज़दूरों के हको पर किये जा रहे हमलों के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। सरकार अपने मज़दूर विरोधी सभी फैसले वापस ले और मज़दूरों की मांगों को पूरा करे अन्यथा मज़दूर अपना आंदोलन और उग्र करेगा। 

workers protest
construction workers
Coronavirus
COVID-19
CITU
CWFI
BOCW
Workers and Labors
Labors Right
Lockdown

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: कोविड वॉरियर्स कर्मचारियों को लेडी हार्डिंग अस्पताल ने निकाला, विरोध किया तो पुलिस ने किया गिरफ़्तार


बाकी खबरें

  • Raja Mihir Bhoj (left) and Raja Mahendra Pratap (right)
    बादल सरोज
    पुरखों को गोद लेने की चतुराई : वंशबेल बताने के लिए या विषबेल फैलाने के लिए!
    01 Oct 2021
    आरएसएस की दरिद्रता आनुवंशिक है। ऐसे में इतिहास में सेंध लगाकर किसी स्थापित व्यक्तित्व को उड़ाकर, रंग-पोत कर उसे हड़पने के सिवा कोई चारा ही नहीं बचता। 
  • Ganga Farrukhabad
    शंभूनाथ शुक्ल
    संकट: गंगा का पानी न पीने लायक़ बचा न नहाने लायक़!
    01 Oct 2021
    सफ़ाई और स्वच्छता के नाम पर नए-नए अभियान चल रहे हैं, समारोह हो रहे हैं। लेकिन हक़ीक़त कुछ और है। भाजपा ने केंद्र में आते ही पहला अभियान नमामि गंगे शुरू किया था किंतु सात साल में गंगा और मैली ही हुई…
  • Bhawanipur
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल : कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ भवानीपुर में उपचुनाव, विपक्ष ने लगाया अनुचित व्यवहार का आरोप
    01 Oct 2021
    पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की शर्मनाक हार के बाद भवानीपुर के उपचुनाव करवाना पड़ा।
  • UP
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: ‘प्रेम-प्रसंग’ के चलते यूपी के बस्ती में किशोर-उम्र के दलित जोड़े का मुंडन कर दिया गया, 15 गिरफ्तार 
    01 Oct 2021
    कुछ ग्रामीणों के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना “नाबालिग” जोड़े को “सबक सिखाने” के पंचायत के फैसले का नतीजा थी।
  • commando
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार पहला राज्य जहां देश का पहला महिला कमांडो दस्ता तैयार
    01 Oct 2021
    बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस से चुनी गईं इन 92 महिला सिपाहियों को महाराष्ट्र के मुतखेड स्थित सीआरपीएफ की सेंट्रल ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण दिलाई गई है। तीन महीने के प्रशिक्षण के दौरान इन्हें हर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License