NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
करनाल में तीसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी, SDM पर कार्रवाई की मांग
वहीं सरकार का पक्षकार माने जाने वाले किसान संगठन ''भारतीय किसान संघ'' जो आरएसएस से जुड़ा हुआ है, ने भी विवादित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और दिल्ली में प्रदर्शन किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Sep 2021
करनाल में तीसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी, SDM पर कार्रवाई की मांग
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

28 अगस्त के दिन करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज करने का आदेश देने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी आयुष सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी रहा जारी है। किसानों ने अब सिंघु, टिकरी की तरह ही करनाल में भी एक नया मोर्चा खोलने का एलान कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसान भी अपने आंदोलन को मज़बूत करने में लग गए हैं। वहीं सरकार का पक्षकार माना जाने वाला किसान संगठन ''भारतीय किसान संघ'' जो सीधे तौर पर आरएसएस से जुड़ा हुआ है, उसने भी विवादित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कल दिल्ली में प्रदर्शन किया। उन्होंने मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा आज न्यूनतम समर्थन मूल्य एक भ्रम है।
 
SDM पर कार्रवाई की मांग को लेकर करनाल सचिवालय के बाहर डटे किसान
 
करनाल लघु सचिवालय पर बैठे  प्रदर्शनकारी किसानों और जिले के अधिकारियों के बीच एक और दौर की वार्ता बुधवार को विफल रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे यहां जिला मुख्यालय के द्वारों के बाहर डटे रहेंगे।
 
करनाल में महापंचायत के बाद स्थानीय प्रशासन से बातचीत विफल रहने पर मंगलवार शाम को किसान लघु सचिवालय के प्रवेश द्वारों के बाहर बैठे रहे। किसानों ने वहीं अब दिन-रात का धरना लगा दिया है। करनाल के लघु सचिवाल को घेरे बैठे किसानों का गुस्सा बढ़ता ही जा रही है।  संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सरकार ने किसानों का सिर फोड़ने का आदेश देने वाले एसडीएम आयुष सिन्हा को तबादले के साथ प्रमोशन दे दिया है, जबकि उस पर मुकदमा चलना चाहिए। मोर्चा ने तुरंत आयुष सिन्हा को निलंबित करने की माँग की है।
 
प्रदर्शनकारी किसान, 28 अगस्त को यहां पुलिस के लाठीचार्ज करने पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।  उनकी मुख्य मांग करनाल के पूर्व एसडीएम सिन्हा से संबंधित है, जिनका नौकरशाही में बड़े फेरबदल के तौर पर तबादला कर दिया गया है।
 
किसान नेता, सिन्हा के निलंबन की मांग कर रहे हैं. सिन्हा को एक टेप में पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि अगर प्रदर्शनकारी सुरक्षा तोड़ते हैं तो उनका ‘‘सिर फोड़ देना’’. भारतीय जनता पार्टी की एक बैठक स्थल की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान पुलिस के साथ झड़प में करीब 10 प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे. उनके नेताओं ने यह भी दावा किया कि एक किसान की बाद में मौत हो गयी. हालांकि प्रशासन ने इस आरोप से इनकार किया है.
 
गतिरोध को समाप्त करने के मकसद से जिला प्रशासन ने एक बार फिर बुधवार अपराह्न दो बजे संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया था. तीन घंटे चली बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेता योगेंद्र यादव ने संवाददाताओं से कहा, ‘वार्ता पूरी तरह विफल रही क्योंकि सरकार अड़ियल रवैया अपना रही है.’
 
उन्होंने कहा, यहां तक कि सरकार आईएएस अधिकारी को निलंबित तक करने को तैयार नहीं है, उनके खिलाफ केवल एक मुकदमा दर्ज कर छोड़ दिया गया है. इससे पहले, कई नेताओं के साथ किसानों ने लघु सचिवालय के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर रात बितायी. सुबह प्रदर्शनकारी घटनास्थल पर चाय बनाते हुए और नाश्ता देते हुए दिखायी दिए.
 
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने इसी जगह पर धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। अब ये सिंघु टिकरी की ही तरह एक और मोर्चा बनेगा।  
 
इस बीच करनाल में किसानों के आंदोलन के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए पूरे हरियाणा और भारत में किसान समर्थन में आ गए हैं। राकेश टिकैत के नेतृत्व में यूपी के किसानों ने अपना समर्थन दिया, और घोषणा की कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया तो वे करनाल में किसानों के साथ शामिल होंगे। झज्जर, बहादुरगढ़, शाहजहांपुर, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़ समेत कई जगहों पर सीएम खट्टर का पुतला दहन किया गया।
 
भारत बंद की तैयारी जोरों पर
 
इस बीच पूरे देश में भारत बंद की तैयारियां जोरों पर हैं। किसान संगठनों द्वारा तैयारी बैठकें और सभाएं की जा रही हैं। 29 सितंबर को उत्तर प्रदेश के तिलहर में किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। 10 सितंबर को शाहजहांपुर बार्डर पर किसान संगठनों की बैठक होगी, जिसमें 33 जिलों के लोग शामिल होंगे। इस बीच गन्ना किसानों ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ भी एक आंदोलन शुरू कर दिया है, जहां 2017 से गन्ने का एसएपी नहीं बढ़ाया गया है। उत्तराखंड में किसानों का आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी है। आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा। राजस्थान के जयपुर में 15 सितंबर को, और छत्तीसगढ़ में 28 सितंबर किसान संसद का आयोजन किया जाएगा।.
 
MSP'की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय किसान संघ (BKS) ने अपने देशव्यापी आंदोलन के तहत बुधवार को राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया। बीकेएस की मांग है कि सरकार किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए कानून लेकर आए। बीकेएस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। संगठन के नेताओं ने दावा किया है कि देश के कई हिस्सों में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नहीं मिल रहा है। हालाँकि संयुक्त मोर्चा इनकी मंशा पर सवाल उठा रहा है, उसने अपने एक बयान में कहा कि किसान-मजदूर महापंचायत की सफलता के बाद भाजपा की सहयोगी, अपना दल किसान आंदोलन के समर्थन में आ गई है। मेघालय के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने भी किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। आरएसएस से जुड़े, बीकेएस ने मौजूदा एमएसपी शासन के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया है, इसे एक भ्रम और धोखाधड़ी बताया है।
 
बीकेएस दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष हरपाल सिंह डागर ने कहा, 'ऐसा कानून होना चाहिए जो सुनिश्चित करे कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिले। पिछले साल लागू किए गए तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। इसे लेकर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसानों की एक बड़ी बैठक के कुछ दिनों बाद बीकेएस ने कहा था कि वह बुधवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को उनकी फसल के बदले उचित दाम मिले।

बीकेएस महासचिव बद्रीनारायण चौधरी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'न्यूनतम समर्थन मूल्य एक भ्रम है। किसानों को देश के सभी हिस्सों में एमएसपी नहीं मिल रहा है। एक नया सख्त कानून लाया जाना चाहिए जो यह सुनिश्चित करता हो कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिले। चौधरी ने दावा किया था कि केवल एक या दो राज्यों के किसान ही एमएसपी का लाभ उठा रहे हैं, जबकि देश के बाकी किसान इसके लाभों से वंचित हैं।

Karnal
Mahapanchayat in Karnal
karnal kisan andolan
farmers protest

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

जीत कर घर लौट रहा है किसान !

किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत , 11 को छोड़ेंगे मोर्चा


बाकी खबरें

  • CORONA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 15 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 278 मरीज़ों की मौत
    23 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 15,102 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 67 हज़ार 31 हो गयी है।
  • cattle
    पीयूष शर्मा
    यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान
    23 Feb 2022
    20वीं पशुगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पूरे प्रदेश में 11.84 लाख छुट्टा गोवंश है, जो सड़कों पर खुला घूम रहा है और यह संख्या पिछली 19वीं पशुगणना से 17.3 प्रतिशत बढ़ी है ।
  • Awadh
    लाल बहादुर सिंह
    अवध: इस बार भाजपा के लिए अच्छे नहीं संकेत
    23 Feb 2022
    दरअसल चौथे-पांचवे चरण का कुरुक्षेत्र अवध अपने विशिष्ट इतिहास और सामाजिक-आर्थिक संरचना के कारण दक्षिणपंथी ताकतों के लिए सबसे उर्वर क्षेत्र रहा है। लेकिन इसकी सामाजिक-राजनीतिक संरचना और समीकरणों में…
  • रश्मि सहगल
    लखनऊ : कौन जीतेगा यूपी का दिल?
    23 Feb 2022
    यूपी चुनाव के चौथे चरण का मतदान जारी है। इस चरण पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में हर पार्टी की गहरी हिस्सेदारी है।
  • Aasha workers
    वर्षा सिंह
    आशा कार्यकर्ताओं की मानसिक सेहत का सीधा असर देश की सेहत पर!
    23 Feb 2022
    “....क्या इस सबका असर हमारी दिमागी हालत पर नहीं पड़ेगा? हमसे हमारे घरवाले भी ख़ुश नहीं रहते। हमारे बच्चे तक पूछते हैं कि तुमको मिलता क्या है जो तुम इतनी मेहनत करती हो? सर्दी हो या गर्मी, हमें एक दिन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License