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स्वास्थ्य
विज्ञान
स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन के इस्तेमाल से कोविड के गंभीर रोगियों की मौतों में कमी लाई जा सकती है: अध्ययन
अध्यययन से इस तथ्य का पता चला है कि डेक्सामेथासोन के इस्तेमाल से जो रोगी वेंटीलेटर पर हैं उनकी मौतों को एक तिहाई तक कम किया जा सकता है, इस अध्ययन को 16 जून के प्रेस वक्तव्य में सार्वजनिक किया गया है।
संदीपन तालुकदार
18 Jun 2020
स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार: नेचर

यूके में चलाई गई एक क्रमरहित (randomised) और नियोजित (controlled) क्लिनिकल स्टडी के जरिये इस तथ्य के बारे में जानकारी मिली है कि हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाने वाली स्टेरॉयड दवा डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल कोरोनावायरस से गंभीर तौर पर संक्रमित मरीजों के इलाज के मामले में चमत्कारिक तौर पर असरकारक साबित हो सकता है। इस बात का पता चला है कि डेक्सामेथासोन के इस्तेमाल से जो रोगी वेंटीलेटर पर हैं उनमें से मौतों को एक तिहाई तक कम करने में मदद मिल सकती है, इस अध्ययन को 16 जून के प्रेस वक्तव्य में कहा गया है।

डेक्सामेथासोन की उपयोगिता रिकवरी (कोविड-19 थेरेपी के क्रमविहीन मुल्यांकन) से निकली है। मार्च में स्थापित यह रिकवरी प्रोजेक्ट कोरोनावायरस रोगियों के उपचार के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े क्रमरहित नियंत्रित परीक्षणों में से एक है।

डेक्सामेथासोन के अध्ययन में 2,104 रोगियों को 10 दिनों तक रोजाना एक बार 6 मिलीग्राम की खुराक में स्टेरॉयड दिया गया था। जिन रोगियों को डेक्सामेथासोन दिया गया था उनकी तुलना 4,321 रोगियों के एक समूह से की गई, जिन्हें कोई दवा नहीं दी गई थी और उन्हें आम उपचार ही मुहैया कराया गया था।

“जिन रोगियों को आम उपचार ही मुहैया कराया जा रहा था उनमें से 28-दिवसीय मृत्यु दर उन लोगों में सबसे अधिक थी जिन्हें वेंटिलेशन (41%) की जरूरत पड़ी थी, जबकि उन रोगियों में यह मध्यवर्ती पाई गई जो ऑक्सीजन की मदद ले रहे थे (25%), और उन लोगों में सबसे कम जिन्हें किसी भी प्रकार के साँस संबंधी सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ी थी (13%)। जो रोगी वेंटीलेटर पर थे, डेक्सामेथासोन ने ऐसे रोगियों की मृत्यु दर को एक तिहाई तक कम कर दिया था (दर अनुपात 0.65 [95% आत्मविश्वास अंतराल 0.48 से 0.88]; पी = 0.0003) और जिन मरीजों को ऑक्सीजन दिया जा रहा था, उनमें 20% (0.80 [0.67 से 0.96]; पी = 0.0021) तक कम करने में सफलता मिली। जबकि उन मरीजों में इसका लाभ देखने को नहीं मिला जिन्हें किसी भी प्रकार के बाहरी स्रोत से श्वसन सम्बंधी सहायता की दरकार नहीं थी (1.22 [0.86 से 1.75; p = 0.14)”-  जैसा कि रिकवरी के प्रेस वक्तव्य में उद्घोषणा की गई है।

इन परिणामों से जो संकेत मिले हैं उसके अनुसार यदि आठ रोगियों को वेंटिलेशन पर रखा गया है तो उनमें से कम से कम एक की मौत को रोका जा सकता है और जो ऑक्सीजन के सहारे हैं, लेकिन उन्हें वेंटिलेशन पर रखने की जरूरत नहीं है उनकी मौत के जोखिम में 20% तक की कमी ला सकता है। वहीं उन रोगियों पर इस स्टेरॉयड का कोई असर नहीं नज़र आया जिनमें रोग के लक्षण हल्के बने हुए हैं, और न तो वे ऑक्सीजन पर हैं और न ही उन्हें वेंटिलेशन पर रखने की जरूरत पड़ी है।

इन नतीजों की घोषणा के तुरंत बाद ही ब्रिटेन की सरकार ने अपनी ओर से फौरन घोषणा कर दी है कि कोरोनावायरस से गंभीर रूप से पीड़ित रोगी, जो ऑक्सीजन और वेंटिलेशन के सहारे हैं उनके इलाज के लिए डेक्सामेथासोन के उपयोग को अधिकृत कर दिया गया है।

कोरोना के मरीजों पर स्टेरॉयडस के इस्तेमाल से उत्पन्न संशय

लेकिन कोविड-19 जैसी वायरल साँस से जुड़ी बीमारियों के मामले में स्टेरॉयड का इस्तेमाल विवादास्पद रहा है। सार्स (SARS) और मेर्स (MERS) के समय में स्टेरॉयड के साथ उपचार के पिछले मामले किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके थे। डब्लूएचओ ने भी स्टेरॉयड के साथ नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण के इलाज पर अपनी चेतावनी जारी कर रखी है। इन चिंताओं के मूल में यह तथ्य छिपा है कि स्टेरॉयड के इस्तेमाल से इम्यून सिस्टम अपना काम सुचारू तौर पर नहीं कर पाता है। जबकि वायरस से लड़ने के लिए हमें सक्रिय इम्यून सिस्टम की आवश्यकता होती है।

लेकिन इस सबके बावजूद डेक्सामेथासोन की व्यापक तौर पर उपलब्धता और सस्ते दामों के साथ-साथ पिछले प्रकोपों में स्टेरॉयड के अध्ययन से प्राप्त आशातीत नतीजों के चलते इस परीक्षण के मुख्य शोधकर्ता और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सक्रामक रोग विशेषज्ञ पीटर होर्बी के अनुसार रिकवरी शोधकर्ताओं ने अपने परीक्षण में स्टेरॉयड को शामिल करने का मन बनाया था।

कोविड-19 से गंभीर तौर पर प्रभावित रोगियों में अतिसक्रिय इम्यून सिस्टम को काम करते पाया गया है। ऐसी स्थिति में कभी-कभी इम्यून सिस्टम की अतिसक्रियता को यदि संयमित रखा जा सके तो यह फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इम्यून सिस्टम पूरी तरह से काम करना बंद कर दे, यह स्थिति काफी घातक हो सकती है। परिक्षण के दौरान डेक्सामेथासोन के खुराक की जो मात्रा दी गई है वह मामूली रही है। और यदि हम परिक्षण के निष्कर्षों पर भरोसा करते हैं तो स्टेरॉयड के इस्तेमाल से होने वाले लाभ, इससे होने वाले नुकसान की तुलना में कहीं अधिक हैं, फेफड़े के फेल हो जाने से होने वाली संभावित मौत से काफी अधिक है।

डेक्सामेथासोन क्या है?

डेक्सामेथासोन का संबंध कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स नामक दवा के एक वर्ग से है। कॉर्टिकोस्टेरॉइड को समझने के लिए हमें इस बात को जानने की जरूरत है कि स्टेरॉयड क्या है। यह एक मानव निर्मित रसायन है जो अपनी संरचना और काम के सिलसिले में एक हार्मोन से मिलता जुलता है। जबकि कॉर्टिकोस्टेरॉइड कहीं अधिक विशिष्ट हैं, यह एक रसायन है जो कोर्टिसोल से मिलता जुलता है, इसमें हार्मोन का निर्माण एड्रेनल ग्रंथियों द्वारा संपन्न किया जाता है।

कोर्टिकोस्टेरॉयड भी कोर्टिसोल की तरह ही अपना काम कर सकता है। वे ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर की तरह व्यवहार करते हैं, जो कि एक प्रोटीन है और डीएनए में एक विशिष्ट स्थान पर जुड़ा होता है और ऐसा करते हुए वह जीन की अभिव्यक्ति को प्रभावित कर सकता है- चाहे उसे दबा कर रखने में या अभिव्यक्त करने के तौर पर।

सूजन को कम करने के लिए डेक्सामेथासोन का उपयोग कई प्रकार के दाहक रोगों के उपचार में किया जाता है। डेक्सामेथासोन का उपयोग गठिया, एलर्जी से होने वाले रिएक्शन, त्वचा और आँखों के विभिन्न प्रकार के रोगों इत्यादि में इस्तेमाल में लाया जाता रहा है।

मूल रूप से अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस ख़बर को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

COVID-19: Readily Available Steroid Dexamethasone Can Reduce Deaths in Critical Patients, Finds UK Study

Dexamethasone
COVID-19
Dexamethasone May Reduce Mortality in COVID19 Patients
UK Study

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