NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
मैनपावर की कमी से बेहाल बिहार में एक महीने और तीन महीने के लिए बहाल हो रहे डॉक्टर
पहले से ही मैनपावर के गंभीर संकट को झेल रहे बिहार की सरकार को डॉक्टरों और नर्सों की स्थायी नियुक्ति के बारे में सोचना चाहिए। इस तरह की ठेके वाली नीति से राज्य का कोई भला नहीं होने वाला।
पुष्यमित्र
10 May 2021
मैनपावर की कमी से बेहाल बिहार में एक महीने और तीन महीने के लिए बहाल हो रहे डॉक्टर

पिछले डेढ़ साल से दुनिया भर को तबाह कर रही कोरोना आपदा से मुकाबले के लिए बिहार सरकार ने एक महीने और तीन महीने के लिए डॉक्टर-नर्स बहाल करने की घोषणा की है। जबकि राज्य में पहले से ही स्वास्थ्य कर्मियों के आधे से अधिक पद खाली हैं। पटना हाईकोर्ट ने खुद इस मसले पर टिप्पणी की थी। राज्य सरकार ने भी जल्द से जल्द खाली पड़े पदों को भरने की बात कही थी। सोशल मीडिया पर बिहार के स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले की सख्त आलोचना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि पहले से ही मैनपावर के गंभीर संकट को झेल रहे बिहार की सरकार को डॉक्टरों और नर्सों की स्थायी नियुक्ति के बारे में सोचना चाहिए। इस तरह की ठेके वाली नीति से राज्य का कोई भला नहीं होने वाला।

दरअसल इस संबंध में गुरुवार, 6 मई को बिहार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने घोषणा की कि राज्य में तीन महीने के लिए अस्थायी तौर पर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की बहाली होगी। 

जिलों के स्वास्थ्य विभाग में मानव बल की बढ़ेगी संख्या। तीन महीने के लिए अस्थायी तौर पर होगी चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति, दिए जाएंगे मानदेय।

— Mangal Pandey (@mangalpandeybjp) May 6, 2021

मंत्री महोदय ने इस घोषणा को ट्वीट भी किया। इतना ही नहीं पूर्णिया जिले के सिविल सर्जन कार्यालय ने तो सिर्फ एक महीने के लिए 13 डॉक्टरों और 3 पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। इन घोषणाओं और विज्ञापनों से यह स्पष्ट है कि बिहार सरकार स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों के लिए स्थायी नियुक्ति के बारे में गंभीर नहीं है। वह बस तात्कालिक आपदा के लिए पदों को भरने की प्रक्रिया को अंजाम दे रही है।

28 अप्रैल, 2021 को पटना हाईकोर्ट को जानकारी देते हुए बिहार सरकार ने बताया था कि राज्य में सरकारी अस्पतालों के कुल 91921 स्वीकृत पदों में से 46256 पद खाली पड़े हैं। इनमें से 4149 विशेषज्ञ चिकित्सकों के और 3206 सामान्य चिकित्सकों के पद हैं। राज्य में चिकित्सकों के कुल 11645 पद स्वीकृत हैं, इनमें से 7355 पद खाली हैं। यानी लगभग तीन चौथाई। राज्य के अस्पतालों में मैनपावर का यह संकट लंबे समय से है। 2019 में चमकी बुखार के प्रकोप के वक्त भी बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि राज्य में डॉक्टरों के आधे और नर्सों के तीन चौथाई पद खाली हैं। पिछले साल मई महीने में ही राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने पटना हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में डॉक्टरों के 8768 पद खाली हैं।

इन आंकड़ों से जाहिर है कि लंबे समय से राज्य के अस्पतालों में मैनपावर की घोर कमी है। और सरकार इन कमी को पूरा करने में बहुत गंभीर नहीं है। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त भी खाली पड़े सरकारी नौकरी के पदों को भरने का वादा सभी दलों ने किया था, मगर सरकार बनने के लगभग छह माह बाद भी ये पद खाली हैं।

आज 10 मई से राज्य में डॉक्टरों की अस्थायी भर्ती के लिए वाक इन इंटरव्यू की प्रक्रिया सभी जिले के अस्पतालों में शुरू हुई है। मगर डॉक्टरों में इस भर्ती को लेकर बहुत उत्साह नहीं है। क्योंकि ये भर्तियां कहीं तीन महीने तो कहीं एक महीने के लिए हो रही है। पिछले दिनों 4 मई को भागलपुर में रेलवे की तरफ से ऐसे ही एक वाक इन इंटरव्यू का आयोजन किया गया था, जिसमें भाग लेने के लिए कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा।

इन मसले पर बात करते हुए मुजफ्फरपुर के जाने माने चिकित्सक निशिंद्र किंजल्क कहते हैं कि राज्य में चिकित्सकों के साथ सरकार का जो व्यवहार है, उस लिहाज से कोई क्यों इंटरव्यू देने जायेगा। वे कहते हैं कि राज्य में अब तक कोरोना से 48 चिकित्सकों की मृत्यु हो गयी है। यह सूची आईएमए ने जारी की है। मगर सरकार उनकी सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। ठेके पर बहाल डॉक्टरों को नियमित वेतन नहीं मिल रहा। यहां तो स्थिति ऐसी है कि कई डॉक्टर बहुत गंभीरता से अपना पेशा छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

अगर सरकार नियमित और स्थायी नियुक्ति नहीं करती। डॉक्टरों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं करती, तो शायद ही कोई डॉक्टर इस वाक इन इंटरव्यू में भाग लेने के लिए पहुंचे।  

(पुष्यमित्र पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bihar
COVID-19
Coronavirus
Nitish Kumar
health care facilities
Bihar government
Health Sector
Health workers

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • RELIGIOUS DEATH
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु : किशोरी की मौत के बाद फिर उठी धर्मांतरण विरोधी क़ानून की आवाज़
    27 Jan 2022
    कथित रूप से 'जबरन धर्मांतरण' के बाद एक किशोरी की हालिया खुदकुशी और इसके ख़िलाफ़ दक्षिणपंथी संगठनों की प्रतिक्रिया ने राज्य में धर्मांतरण विरोधी क़ानून की मांग को फिर से केंद्र में ला दिया है।
  • cb
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बीजेपी-कांग्रेस दोनों को पता है कि विकल्प तो हम दो ही हैं’
    27 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में 2000, 2007 और 2017 में भाजपा सत्ता में आई। जबकि 2002 और 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनाई। भाजपा और कांग्रेस ही बारी-बारी से यहां शासन करते आ रहे…
  •  नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    27 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • सोनिया यादव
    यूपी: महिला वोटरों की ज़िंदगी कितनी बदली और इस बार उनके लिए नया क्या है?
    27 Jan 2022
    प्रदेश में महिलाओं का उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने का औसत भले ही कम रहा हो, लेकिन आधी आबादी चुनाव जिताने का पूरा मददा जरूर रखती है। और शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सभी पार्टियां उन्हें लुभाने…
  • यूपी चुनाव:  उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    27 Jan 2022
    यूपी में महिला उम्मीदवारों के लिए प्रियंका गांधी की तलाश लगातार जारी है, प्रियंका गांधी ने पहले उन्नाव रेप पीड़िता की मां पर दांव लगाया था, और अब वो सोनभद्र नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी महिला को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License