NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लॉकडाउन के चलते घरेलू हिंसा के मामले बढ़े, महिला उत्पीड़न में यूपी सबसे आगे
राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक, घरेलू हिंसा की शिकायतें लगभग दोगुनी हो गईं हैं जबकि अभी सिर्फ ऑनलाइन शिकायतें ही आ रही हैं। घर बैठे पुरुष तनाव में अपनी भड़ास महिलाओं पर निकाल रहे हैं इसलिए ऐसी शिकायतें अधिक आ रही है।
सोनिया यादव
03 Apr 2020
Violence against women

‘लॉकडाउन की वजह से इस वक्त घरेलू हिंसा की बहुत-सी शिकायतें आ रही हैं। महिलाएं पुलिस तक नहीं पहुंच पा रहीं हैं या फिर वह पुलिस के पास नहीं जाना चाहती क्योंकि उन्हें डर है कि जब उनका पति पुलिस स्टेशन से एक-दो दिन बाद बाहर आ जाएगा तब और टॉर्चर करेगा। इस समय वह अपने पेरेंट्स के घर भी नहीं जा सकती हैं।’

ये बातें राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने देश में लागू लॉकडाउन के बीच महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर मिलने वाली शिकायतों के संदर्भ में कहीं। उन्होंने कहा कि घर बैठे पुरुष तनाव में अपनी भड़ास महिलाओं पर निकाल रहे हैं इसलिए ऐसी शिकायतें अधिक आ रही है।

हाल ही में जर्मन फेडरल एसोसिएशन ऑफ वीमन्स काउंसलिंग सेंटर्स एंड हेल्प लाईन्स (बीएफई) ने कोरोना महामारी के बीच घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा था कि “कई लोगों के लिए उनका घर ही पहले से सुरक्षित नहीं है।”

इसे पढ़ें : कोरोना संकट के बीच दुनियाभर में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले

बीएफई ने दुनिया के देशों को आगाह किया था कि सोशल आइसोलेशन के चलते लोगों में तनाव पैदा हो रहा है और इससे “महिलाओं और बच्चों के खिलाफ घरेलू और यौन हिंसा में बढ़ोत्तरी हो रही है।” 

पहले आस्ट्रेलिया, विक्टोरिया, श्रीलंका और कई देशों में बड़े पैमाने पर ऐसी घटनाएं देखने को मिली लेकिन अब भारत में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक, घरेलू हिंसा की शिकायतें लगभग दोगुनी हो गई हैं जबकि अभी सिर्फ ऑनलाइन शिकायतें ही आ रही हैं।

इस संबंध में गुरुवार, 2 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग ने बीते 10 दिनों का आंकड़ा जारी किया। जिसके मुताबिक आयोग के पास 23 मार्च से 1 अप्रैल तक कुल 257 शिकायतें आईं हैं, जिसमें घरेलू हिंसा की करीब 69 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और ये एक के बाद एक बढ़ती जा रही हैं। कई शिकायतें आयोग की अध्यक्ष और स्टाफ को निजी ईमेल पर भी की गई हैं। इसी प्रकार, रेप या रेप की कोशिश की 13, सम्मान के साथ जीने के अधिकार के संबंध में 77 शिकायतें महिलाओं की ओर से मिली हैं। तो वहीं महिलाओं से साइबर अपराध के 15 मामले सामने आए हैं।

महिला उत्पीड़न मामले में यूपी टॉप पर

आयोग द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 90 शिकायतें मिली हैं तो दिल्ली से 37 और बिहार, महाराष्ट्रा से 18, मध्य प्रदेश से 11, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान से 9 मामले दर्ज हुए हैं।

IMG-20200403-WA0006_0.jpg

राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा के अनुसार समाज के निचले तबके की ज्यादातर महिलाएं डाक के जरिए अपनी शिकायतें आयोग को भेजती हैं, लॉकडाउन की वजह से वो शिकायतें अभी तक आयोग के पास नहीं पहुंची हैं। इस लिहाज से यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। कई महिलाएं शिकायत ही नहीं करती होंगी क्योंकि उस दौरान मारपीट करनेवाला उनके सामने ही रहता होगा। उन्होंने बताया कि राज्य महिला आयोगों ने भी घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़त देखी है। कई महिलाएं इसलिए भी शिकायत नहीं करती हैं कि अगर उनके पति को पुलिस ले गई तो सास-ससुर उन्हें ताने देंगे।

एक वीडियो संदेश जारी कर रेखा शर्मा ने मीडिया को बताया, “मुझे आज नैनीताल से एक शिकायत मिली है। जिसमें महिला ने कहा कि वह बाहर नहीं निकल पा रही है और उसने बताया कि घर में उसका पति उसके साथ मारपीट करता है लेकिन वह लॉकडाउन की वजह से दिल्ली अपने घर नहीं आ पा रही है।”

एक ओर देश में कोरोना का कहर जारी है। महामारी के वायरस को फैलने से रोकने के लिए संपूर्ण लॉकडाउन लागू है, करोड़ों लोग अपने घरों कैद हैं तो वहीं दूसरी ओर आधी आबादी संघर्ष कर रही है। पितृसत्ता की जड़ो में जकड़ा समाज रोज़ उसके अस्तित्व का एक नया इम्तिहान ले रहा है।

घरेलू हिंसा अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते महिलाएं घरेलू हिंसा झेलने को मज़बूर हैं। इस दौरान शिकायतें केवल उन महिलाओं द्वारा की जा रही हैं, जो शिक्षित हैं, जागरूक हैं। वास्तव में ये मामले कहीं ज्यादा हैं क्योंकि ग़रीब तबक़े से आने वाली महिलाओं के लिए अपने जीवनसाथी के हाथों उत्पीड़न की शिकायत कर पाना क़रीब क़रीब नामुमकिन है। इस लॉकडाउन के दौरान वे उन मर्दों के साथ रहने को मजबूर हैं, जो उनका लंबे समय से उत्पीड़न करते आए हैं।

पितृसत्तात्मक सोच और महिलाएं

महिला अधिकारों के लिए कार्यरत शबनम बताती हैं, “औरत और मर्द का फर्क हमारे समाज की सोच में हमेशा से रहा है। पहले पुरुष काम के लिए बाहर चले जाते थे तो शायद थोड़ी देर के लिए महिलाओं को पितृसत्ता के बंधन से मुक्ति मिल जाती थी। लेकिन अब जब पुरुष दिन भर घर में रहता है, तो जाहिर है उसकी सोच उस पर और हावी हो जाती है। अच्छी बात ये है कि अब महिलाएं शिक्षित हैं, जागरूकता बढ़ रही है इसकी वजह से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं। हालांकि अभी भी ऐसे मामलों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है जो दर्ज नहीं हो पाते।”

गैर सरकारी संगठन 'मैत्री' के साथ काम करने वाली वकील मनीषा जोशी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, जब लॉकडाउन के चलते दुनियाभर में महिलाओं के उत्पीड़न की खबरें आईं तभी ये बात साफ थी कि भारत में भी ऐसे मामले बहुत बड़ी संख्या में देखने को मिलेंगे। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब दुनियाभर में संकट का दौर चल रहा है तब महिलाएं एक और संकट का सामना कर रही हैं। इस वक्त लोग घरों में बंद हैं तो जाहिर है ज्यादा चिड़चिड़ापन हो जाता है और इसकी सारी कसर फिर घर की औरतों पर ही निकलती है। ऐसे में कोशिश सामंजस्य की होनी चाहिए। काम में कमियां निकालने की बजाय पुरुषों को महिलाओं के काम में हाथ बंटाना चाहिए क्योंकि औरतों के लिए इस वक्त वर्क फ्राम होम के साथ ही घर की भी दोहरी जिम्मेदारी है।”

मनीषा आगे बताती हैं कि घरेलू हिंसा की जड़ पितृसत्तात्मक सोच में है- जिसमें महिलाओं को पुरुषों से कमतर समझा जाता है। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार को माफ़ कर दिया जाता है और महिलाओं के साथ मार पीट को सही ठहराया जाता है। महिलाएं स्वीकार नहीं करना चाहती हैं कि वे घरेलू हिंसा का शिकार हैं। अपने घर में क्या चल रहा है, ये बताना नहीं चाहती।

गौरतलब है कि हमेशा से ही आपदाएं और महामारी महिलाओं के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर देती हैं। एक ओर उन्हें कठिन परिस्थिति का सामना करना होता है तो वहीं दूसरी ओर खुद को शोषण से बचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। मौजूदा समय में घर में कैद होने के कारण महिलाओं के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के मामले भी बढ़ गए हैं। ऐसे में महिला आयोग ने महिलाओं से अपील की कि अगर उनके साथ घरेलू हिंसा होती है तो पुलिस से संपर्क करने या राज्य महिला आयोगों तक पहुंचने की कोशिश करें।

COVID-19
Coronavirus
India Lockdown
violence against women
exploitation of women
crimes against women
gender discrimination

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • bjp -sp
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: मौसम ठंडा, राजनीति गर्म, भाजपा-सपा ने पूर्वांचल पर लगाया ज़ोर
    10 Nov 2021
    403 सीटों वाली प्रदेश की विधानसभा में क़रीब 164 सीटें पूर्वांचल के 28 ज़िलों में हैं। माना जाता है जिसका पूर्वांचल पर क़ब्ज़ा होता है, वही प्रदेश पर राज करता है।
  • lal
    लाल बहादुर सिंह
    ‘डबल इंजन’ सरकार का हाल: पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स में इस साल भी यूपी सबसे नीचे
    10 Nov 2021
    यह कोई चुनाव पूर्व माहौल बनाने के लिए होने वाला प्रायोजित सर्वे नहीं है, अपितु ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में काम कर रहे थिंक-टैंक की रिपोर्ट है, जो शासन की गुणवत्ता के आधार…
  • minimum wage
    रौनक छाबड़ा
    ट्रेड यूनियनों के मुताबिक दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन वृद्धि ‘पर्याप्त नहीं’
    10 Nov 2021
    ट्रेड यूनियनों की ओर से मांग की जा रही है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ा कर 26,000 रूपये करने के साथ-साथ असंगठित श्रमशक्ति को 7,500 रूपये का मासिक नकद समर्थन दिया जाए। इन्हीं मांगों पर दबाव बनाने के लिए उनकी…
  • climate
    अजय कुमार
    क्लाइमेट फाइनेंस: कहीं खोखला ना रह जाए जलवायु सम्मेलन का सारा तामझाम!
    10 Nov 2021
    जलवायु सम्मेलन में क्लाइमेट फाइनेंस का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। अगर क्लाइमेट फाइनेंस पर सहमति नहीं बनी तो क्लाइमेट जस्टिस नहीं हो पाएगा। नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन से जुड़े सारे वादे खोखले रह जाएंगे। 
  • corna
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,466 नए मामले, 460 मरीज़ों की मौत
    10 Nov 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 43 लाख 88 हज़ार 579 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License