NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
दोहरा संकट : बिहार में कोरोना के साथ चमकी बुख़ार भी शुरू, लेकिन व्यवस्था वही बदहाल
बिहार के सामने अब दोहरी समस्या आ गई है। एकतरफ जहाँ कोरोना का संकट जारी है, वहीं अब चमकी बुख़ार से भी मौत की ख़बरें आने लगी हैं। इसके साथ ही क्वारंटीन सेंटर में तीन मज़दूरों की मौत ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 May 2020
चमकी बुख़ार
Image courtesy: The Indian Express

अभी पूरा देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है और देश में इससे लगातर मरीज़ों की संख्या और मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। बिहार में भी लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन बिहार के सामने एक और चुनौती आ गई है। वह है चमकी बुख़ार। पिछले साल इस चमकी बुख़ार ने सैकड़ों की संख्या में बच्चों की जान ले ली थी। इस बार भी मौतों की ख़बर आने लगी है। लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ दिखता है। इसके साथ ही बिहार में चल रहे क्वारंटीन सेंटरों में भी तीन मौतें रिपोर्ट हुई हैं।

इन सब सवाल को लेकर लगातार वाम दल और मुख्य विपक्षी दल आरजेडी सरकार को घेर रहा है लेकिन सरकार की तरफ बार-बार यही दावा किया जा रहा है कि वो जो कुछ कर सकती थी वो कर रही है, और इस सबपर राजनीति न की जाए।  

चमकी बुख़ार से मौतें शुरू लेकिन अभी तक अस्पताल शुरू तक नहीं हो सका!

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि चमकी बुख़ार ने अपना कहर बरपाना आरम्भ कर दिया है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने विगत साल 500 से अधिक बच्चों की हुई दर्दनाक मौतों के बाद भी कोई सबक नहीं सीखा और इस बार भी लापरवाही ही बरत रही है। अब तक 5 बच्चों की मौत हो चुकी है, और यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो पिछले साल की घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है।

अभी 5 बच्चों की मौत की ख़बर मुज़फ़्फ़रपुर की है, लेकिन पिछले साल चमकी बुख़ार का असर न केवल मुज़फ़्फ़रपुर बल्कि लगभग पूरे राज्य में देखा गया था। इसलिए, सभी का कहना है कि सरकार को मुज़फ़्फ़रपुर पर केंद्र करते हुए पूरे राज्य पर सोचना चाहिए।

कुणाल ने आगे कहा कि काफी आंदोलन के बाद मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों का 60 बेड वाला अस्पताल बन जाने की ख़बर है, लेकिन उसमें बच्चों के विशेषज्ञ की स्थायी बहाली अभी तक नहीं हुई है। इसकी बजाय सरकार यहां-वहां से जिस किसी डाक्टर को भेजना चाह रही है। इससे समस्या खत्म नहीं होगी। बच्चे मर रहे हैं, लेकिन अभी तक अस्पताल शुरू तक नहीं हो सका है। यह लापरवाही नहीं तो और क्या है? अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर की व्यवस्था करना सरकार का पहला काम है।

पिछले सालों की त्रासदी से और सैकड़ों बच्चो की मौत से सरकार ने कोई सबक लिया है? अभी तक के इंतजाम से तो ऐसा नहीं लग रहा है। चमकी बुख़ार का बड़ा कारण गरीबी बताया जाता रहा है। लेकिन प्रभावित इलाकों में गरीबी उन्मूलन की भी किसी विशेष योजना की रिपोर्ट नहीं है। राज्य और जिला अस्पतालों में कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है।

माले का कहना है कि सरकारी व्यवस्था को देखकर लगता है कि इस बार भी बड़ी संख्या में बच्चे मारे जाएंगे। हर बार रिसर्च की बात होती है, लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति की रिपोर्ट नहीं है।  

भाकपा माले ने मांग की है कि सरकार बिना किसी देरी के राज्यस्तरीय और मुज़फ़्फ़रपुर सहित राज्य के सभी जिला स्तरीय अस्पतालों में आईसीयू की संख्या बढ़ाये, बेडों की संख्या बढ़ाए और प्रखंड से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को चमकी बुख़ार से लड़ने के लिए न्यूनतम सुविधाओं से लैस करे। गरीबों की टोलियों में सफाई पर विशेष ध्यान दे और प्रभावित इलाकों के बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन की गारंटी करे। गांवों तक ज़रूरी दवाइयों की भी पहुंच होनी चाहिए। साफ पानी आदि की व्यवस्था अविलंब करे।
 
बिहार में चल रहे क्वारंटीन सेंटरों की हालत भी ख़राब

बिहार में चल रहे क्वारंटीन सेंटरों की हालत पर जो मीडिया रिपोर्ट आ रही हैं वो डराने वाली हैं। वहां दूसरे राज्यों से वापस लौटे मज़दूरों को बेहद अमानवीय ढंग से रखा गया है। स्थिति इतनी खराब है कि अब वहां से भागने के अलावा मौत की दुखद खबरें भी आ रही हैं।

भाकपा-माले की जिला स्तरीय टीमों ने अपने-अपने ज़िलों के केंद्रों का दौरा कर जो रिपोर्ट भेजी है, वह बेहद मार्मिक है। ऐसा लगता है कि कोरोना से पहले लोग भूख और अन्य त्रासदियों से मर जायेंगे।

विगत दिनों जहानाबाद के रामलखन सिंह यादव कॉलेज में चल रहे क्वारन्टीन सेंटर का दौरा करने के बाद माले नेताओं ने पाया कि लोगों को भरपेट सामान्य भोजन भी नहीं मिल रहा है। बच्चों के लिए दूध और अन्य सुविधाएं की बात तो जाने ही दी जाए।

भोजपुर में माले विधायक सुदामा प्रसाद और मनोज मंजिल भी ने कई केंद्रों का दौरा किया और व्यवस्था ठीक करने की अपील प्रशासन से की। सिवान में विधायक सत्यदेव राम और कटिहार में महबूब आलम भी लगातार सेंटरों का दौरा कर रहे हैं। कटिहार सेंटर से खराब व्यवस्था के कारण कई मजदूर भाग भी गए थे।

रविवार को हुई तीन मौतें मधुबनी, औरंगाबाद और भागलपुर से जुड़ी हुई हैं। माले ने कहा कि  सुनने में आता है कि मुख्यमंत्री हर दिन सेंटरों की जानकारी लेते हैं। फिर इस तरह की लापरवाही क्यों बरती जा रही है? क्या मजदूरों को सरकार इंसान नहीं समझती? भाकपा-माले ने तमाम केंद्रों की स्थिति में तत्काल सुधार करने और न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। 

Bihar
Coronavirus
COVID-19
chamki bukhar
Chamki Fever
Encephalitis
Nitish Kumar
Nitish Kumar Government
health care facilities
CPIML

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 10 लाख से नीचे आए 
    08 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 67,597 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 9 लाख 94 हज़ार 891 हो गयी है।
  • Education Instructors
    सत्येन्द्र सार्थक
    शिक्षा अनुदेशक लड़ रहे संस्थागत उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हक़ की लड़ाई
    08 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि 2019 तक उन्हें नियमित कर दिया जायेगा। लेकिन इस वादे से भाजपा पूरी तरह से पलट गई है।
  • Chitaura Gathering
    प्रज्ञा सिंह
    यूपी चुनाव: मुसलमान भी विकास चाहते हैं, लेकिन इससे पहले भाईचारा चाहते हैं
    08 Feb 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव के मुआयने से नफ़रत की राजनीति की सीमा, इस इलाक़े के मुसलमानों की राजनीतिक समझ उजागर होती है और यह बात भी सामने आ जाती है कि आख़िर भाजपा सरकारों की ओर से पहुंचायी जा…
  • Rajju's parents
    तारिक़ अनवर, अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी
    08 Feb 2022
    महामारी की शुरूआत होने के बाद अपने पैतृक गांवों में लौटने पर प्रवासी मज़दूरों ने ख़ुद को बेहद कमज़ोर स्थिति में पाया। कई प्रवासी मज़दूर ऐसी स्थिति में अपने परिवार का भरण पोषण करने में पूरी तरह से असहाय…
  • Rakesh Tikait
    प्रज्ञा सिंह
    सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत
    08 Feb 2022
    'वो जाटों को बदनाम करते हैं क्योंकि उन्हें कोई भी ताक़तवर पसंद नहीं है' - राकेश टिकैत
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License