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भारत
राजनीति
गंभीर के पास बड़ी मात्रा में फैबीफ्लू मिलने की सही जांच नहीं करने के लिए औषधि नियंत्रक को फटकार
उच्च न्यायालय ने क्रिकेट खिलाड़ी से नेता बने गंभीर द्वारा दवा खरीद के मामले की जांच के सिलसिले में दाखिल औषधि नियामक की स्थिति रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि इस संस्था से अदालत का भरोसा डगमगा गया है।
भाषा
31 May 2021
Gautam Gambhir
Image courtesy : Hindustan Times

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा सांसद गौतम गंभीर द्वारा कोविड-19 के उपचार में काम आने वाली दवा फैबीफ्लू बड़ी मात्रा में खरीदे जाने की उचित तरीके से जांच नहीं करने के लिए औषधि नियामक को फटकार लगाई और कहा कि मददगार के रूप में दिखाने के लिए हालात का फायदा उठाने की लोगों की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा होनी चाहिए।

उच्च न्यायालय ने क्रिकेट खिलाड़ी से नेता बने गंभीर द्वारा दवा खरीद के मामले की जांच के सिलसिले में दाखिल औषधि नियामक की स्थिति रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि इस संस्था से अदालत का भरोसा डगमगा गया है।

इसने कहा, ‘‘जिस तरीके से आपने जांच की है वह सवालों के घेरे में है।’’

अदालत ने कहा कि यह हर किसी को पता था कि इस दवा की कमी है और गंभीर द्वारा दवा के हजारों पत्ते खरीद लेने के कारण उस दिन जरूरतमंद लोगों को वह दवा नहीं मिल पाई।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी तथा न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा, ‘‘आपका (दवा नियंत्रक) यह कहना कि दवा की आपूर्ति कम नहीं थी, यह गलत है। आप चाहते हैं कि हम अपनी आंखें मूंद लें। क्या आपको ऐसा लगता है कि आप इससे बच कर निकल जाएंगे। ’’

पीठ ने कहा, ‘‘आप हमें हल्के में नहीं ले सकते। आपको अगर ऐसा लगता है कि हम कुछ नहीं जानते तो ऐसा नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपना काम करें। आप अपना काम नहीं कर पा रहे तो हमें बताएं, हम आपको निलंबित कर देंगे तथा आपका काम किसी और को सौंप देंगे।’’

अदालत ने गंभीर द्वारा पुन: ऐसा बयान देने पर भी नाराजगी जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि वह ऐसा काम करना जारी रखेंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘हम पहले ही कह चुके हैं कि यह गलत चलन है। हालात का फायदा उठाना और फिर एक मददगार की तरह खुद को पेश करना, जबकि समस्या खुद उनकी ही खड़ी की हुई होती है, लोगों की ऐसी प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना होनी चाहिए। उसके बाद भी व्यक्ति फिर से यह कहता है कि वह उस काम को दोबारा करेगा। यदि ऐसा जारी रहता है तो हम जानते हैं कि इससे हमें कैसे निबटना है।’’

अदालत ने आप विधायक प्रीति तोमर और प्रवीण कुमार के खिलाफ मेडिकल ऑक्सीजन खरीदने और जमा करने के आरोपों की जांच की स्थिति रिपोर्ट भी देखी।

अदालत ने तोमर के खिलाफ आरोपों पर दायर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया जबकि इसने गंभीर और कुमार के खिलाफ स्थिति रिपोर्ट को खारिज कर दिया और दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रक को तीन दिनों का वक्त दिया कि वह बेहतर रिपोर्ट दायर करे और मामले में सुनवाई की अगली तारीख तीन जून तय की।

इसने कहा, ‘‘आप (औषधि नियंत्रक) पर हमारा विश्वास पूरी तरह डगमगा गया है। इस बारे में हम स्पष्ट कर देते हैं। अब आप पर निर्भर करता है कि विश्वास फिर से बना पाते हैं अथवा नहीं।’’

उच्च न्यायालय एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें इन आरोपों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई कि नेता बड़ी संख्या में कोविड-19 दवाओं को खरीदने और वितरित करने में सक्षम हैं, जबकि मरीज उन्हें हासिल करने के लिए परेशान हैं।

gautam gambhir
BJP
Delhi High court
Fabiflu

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