NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
दिल्ली नगर निगमों और सरकार की लापरवाही से रोज़ जा रही हैं सफाई कर्मियों की जान: एसकेयू
रिपोर्ट के मुताबिक़ तीनों नगर निगमों में कुल 94 कर्मचारियों की मौत कोरोना से हुई है जबकि इसमें 39 सफ़ाई कर्मचारी है। यूनियन ने कहा जिनकी महामारी के दौरान मृत्यु हुई है, सरकार और निगम उन सभी सफाई कर्मचारियों के परिवारों को 1 करोड़ मुआवज़ा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 May 2021
दिल्ली नगर निगमों और सरकार की लापरवाही से रोज़ जा रही हैं सफाई कर्मियों की जान: एसकेयू
फोटो साभार : अमर उजाला

दिल्ली नगर निगम के तीन नगर निगमों - उत्तर, दक्षिण और पूर्व - में 39 सफाई कर्मचारियों ने कोरोना के कारण अपनी जान गंवई। जबकि तीनों नगर निगमों में कोरोना से कुल  94 कर्मचारी की मौत हुई। इसको लेकर सफाई कर्मचारी यूनियनों का कहना है ये मौतें सरकारी लापरवाही से हुई हैं। सफाई कामगार यूनियन (एसकेयू) ने दिल्ली के विभिन्न नगर निगम और दिल्ली सरकार द्वारा सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के जरूरी उपायों में लगातार हो रही लापरवाही की कड़ी निंदा की और कहा कि  एक प्रमुख अखबार में आई खबर के अनुसार विभिन्न नगर निगमों में कोविड-19 से मृतक हुए कर्मियों में आधे सफाई कर्मचारी हैं| दहला देने वाला यह तथ्य इंगित करता है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में कोरोना महामारी से सबसे अधिक त्रस्त सफाई कर्मी ही रहे हैं।  

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 29 में से 16, उत्तरी दिल्ली नगर निगम  में 49 में से 25 और पूर्वीदिल्ली  नगर निगम  में 16 में से 8 मौतें   सफाई कर्मचारियों की हुई हैं, जो कोरोना के दौरान काम कर रहे थे।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लगभग 50,000 सफाई कर्मचारी तीन निगमों के स्थायी या अस्थायी कर्मचारी हैं ,जो  कोरोना महामारी के बाद से लगातर शहर में सफ़ाई का काम कर रहे है।  

इसमें कहा गया है कि शेष 45 मौतों में से 13 स्वास्थ्य कर्मियों थे , जिनमें पांच डॉक्टर भी शामिल हैं। दो डॉक्टर दक्षिणनगर निगम  से थे, एक पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद अस्पताल के थे, जबकि एक उत्तरी दिल्ली के  हिंदू राव अस्पताल में मेडिसिन के प्रोफेसर और वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी थे। कोरोना  से शिक्षा विभाग के सात अधिकारियों की मौत हुई, जिनमें से कुछ राशन वितरण में भी लगे हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार शिक्षक, दो प्रिंसिपल और एक स्कूल अटेंडेंट  की भी मौत कोरोना के कारण हुई है।

पूर्वी दिल्ली के मेयर निर्मल जैन ने अखबार को बताया कि मंडल के प्रत्येक कर्मचारी जिनकी कोविड-19 से मृत्यु हुई है, उन्हें 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और एक योजना तैयार की जा रही है ताकि उनके परिवारों में किसी एक को नौकरी  दी जा सके।

दिल्ली नगर निगम सफाई मजदूर संघ के प्रभारी राजेंद्र मेवाती ने कथित तौर पर कहा कि सुपरवाइजर  को मास्क दिए जाते हैं इसके बावजूद  शायद ही कभी कर्मचारियों को मास्क मिला हो। उन्होंने समाचार पत्र को बताया कि "इन चीजों के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, प्रत्येक सफ़ाई कर्मचारी को मौत के एक सप्ताह में 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए और उनके आश्रितों के लिए स्थायी नौकरी दी जानी चाहिए। ज्यादातर ऐसा होता है कि एक या दो पीड़ितों को लाभ दे दिया जाता है, उनके परिवार के सदस्यों के  साथ फोटो खिचवाएं जाते हैं, जबकि अन्य लोगों की फाइलों को प्रक्रिया में रखा जाता है, जिससे अत्यधिक देरी होती है।”

पूर्वी दिल्ली के मेयर ने कहा कि पूर्वी एमसीडी में सात लोगों को पहले ही मुआवजा दिया जा चुका है और वे शेष मामलों में कागजी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।  

नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक परिवार के एक आश्रित को नौकरी मिले और पांच से दस लाख रुपये के राहत कोष की व्यवस्था की जा रही हो। उन्होंने कथित तौर पर कहा, "हम दिल्ली सरकार को एक फाइल भी भेज रहे हैं, जिसमें कोरोना  ड्यूटी पर मरने वालों के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की गई है।"

एसकेयू के नेता हरीश गौतम द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सफाई कर्मियों की सुरक्षा में अनदेखी के पीछे समाज में व्यापक रूप से व्याप्त जातिवादी मानसिकता और वर्गीय भेदभाव हैं।  बहुसंख्यक सफाई कर्मी दलित समुदाय से आते हैं और बेहद खराब हालातों में काम करने और रहने के लिए मजबूर हैं। इन आर्थिक व सामाजिक अक्षमताओं के चलते ही वे सरकार व अधिकारियों की उदासीनता का शिकार होते हैं।

उन्होंने  कर्मचारियों की इस दशा के लिए ठेकाकरण को ज़िम्मेदार माना और कहा  "सभी सरकारी विभागों में सफाई कर्मचारियों की कान्ट्रैक्ट आधारित नियुक्ति उनके लिए और भी मुश्किलें खड़ी करती हैं।  अधिकतर सरकारी व निजी संस्थानों द्वारा ठेके पर नियुक्त किए गए सफाई कर्मियों को जरूरत अनुसार न तो मास्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं और न ही सैनिटाइज़र दिया जाता है। कोविड-19 की जांच करवाने में अनदेखी, जबरन काम पर बुलाया जाना बेहद आम है, जबकि जान का खतरा सभी को समान रूप से है।"

हरीश ने दिल्ली सरकार के तहत आने वाले अंबेडकर विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि "जहाँ विश्वविद्यालय अधिकारियों, दिल्ली के श्रम मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को तमाम माध्यमों से सूचित करने के बावजूद, लगातार लापरवाही बनी हुई है। इसी तरह के हालात दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थानों में भी देखने को मिल सकते हैं।"

एसकेयू ने प्रेस बयान के माध्यम से मांग उठाई  कि सभी सफाई कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी के साथ महामारी भत्ता सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, यदि कोई सफाई कामगार संक्रमित हों, तो उन्हें और उनके परिवारों को अनिवार्य रूप से इलाज मुहैया किया जाए। इसके अतिरिक्त, उन सभी सफाई कर्मचारियों के परिवारों को 1 करोड़ मुआवज़ा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, जिनकी महामारी के दौरान मृत्यु हुई है, और टीकाकरण प्रक्रिया में सफाई कामगारों को प्राथमिकता दी जाए।

इसके साथ ही सफाई कामगार यूनियन ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को भी एक ज्ञापन भेजा है और कहा है कि वो  प्रण लेते हैं कि आने वाले दिनों में सफाई कर्मचारी के प्रति उदासीनता के खिलाफ अपना आन्दोलन तेज़ करेंगे।

Delhi Municipal Corporations
NDMC
EDMC
SDMC
safai karmachari
COVID-19
SKU

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • RAHANE PUJARA
    भाषा
    रणजी ट्राफी: रहाणे और पुजारा पर होंगी निगाहें
    23 Feb 2022
    अपने फॉर्म से जूझ रहे आंजिक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा अब रणजी ट्रॉफी से वापसी की कोशिश करेंगे। 24 फरवरी को होने वाले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों पर खास नज़र होगी।
  • ibobi singh
    भाषा
    मणिपुर के लोग वर्तमान सरकार से ‘ऊब चुके हैं’ उन्हें बदलाव चाहिए: इबोबी सिंह
    23 Feb 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा "मणिपुर के लोग भाजपा से ऊब चुके हैं। वह खुलकर कह नहीं पा रहे। भाजपा झूठ बोल रही है और खोखले दावे कर रही है। उन्होंने अपने किसी भी वादे को…
  • तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: बीजेपी के गढ़ पीलीभीत में इस बार असल मुद्दों पर हो रहा चुनाव, जाति-संप्रदाय पर नहीं बंटी जनता
    23 Feb 2022
    पीलीभीत (उत्तर प्रदेश): जैसा वायदा किया गया था, क्या किसानों की आय दोगुनी हो चुकी है? क्या लखीमपुर खीरी में नरसंहार के लिए किसानों को न्याय मिल गया है?
  • vaccine
    ऋचा चिंतन
    शीर्ष कोविड-19 वैक्सीन निर्माताओं ने गरीब देशों को निराश किया
    23 Feb 2022
    फ़ाइज़र, मोडेरना एवं जेएंडजे जैसे फार्मा दिग्गजों ने न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवाक्स में ही अपना कोई योगदान दिया और न ही गरीब देशों को बड़ी संख्या में खुराक ही मुहैया कराई है।
  • vvpat
    एम.जी. देवसहायम
    चुनाव आयोग को चुनावी निष्ठा की रक्षा के लिहाज़ से सभी वीवीपीएटी पर्चियों की गणना ज़रूरी
    23 Feb 2022
    हर एक ईवीएम में एक वीवीपैट होता है, लेकिन मतों की गिनती और मतों को सत्यापित करने के लिए काग़ज़ की इन पर्चियों की गिनती नहीं की जाती है। यही वजह है कि लोग चुनावी नतीजों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License