NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
क्या पृथ्वी के चारों तरफ़ है चुम्बकीय सुरंग? नए शोध में किया गया दावा
नया "टनल मॉडल" अंतरिक्ष विज्ञान में सौर मंडल के बारे में नया नज़रिया लेकर आया है।
संदीपन तालुकदार
28 Oct 2021
Is Earth Surrounded by a Giant Magnetic Tunnel

क्या पृथ्वी और पूरा सौर मंडल एक बड़ी चुंबकीय सुरंग में फंसे हुए हैं? हाल में हुआ एक शोध संकेत देता है कि यह सच हो सकता है। पृथ्वी, बाकी सौर मंडल और लस के कुछ तारे  एक बेहद बड़ी चुम्बकीय सुरंग में फंसे हो सकते हैं। हालांकि खगोलविदों को इसके पीछे की वजह नहीं मालूम है। इस चुंबकीय तरंग का रेडियो तरंगों से पता चलता है। 

यह शोध हाल में एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ था । इसका नेतृत्व कनाडा में टोरंटो यूनिवर्सिटी में डनलप इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के जेनिफर वेस्ट कर रहे थे।

वेस्ट की रिसर्च में जो बातें सामने आईं हैं, वे आसमान के दूसरी तरफ दो बड़े प्रकाश से युक्त ढांचों की मौजूदगी पर आधारित है। इन्हें "नॉर्थ पोलार स्पर" और "फैन रीजन" के नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिकों को इन ढांचों के बारे में दशकों से मालूम था। उजले धब्बों को आसमान में अलग आकृति माना जाता था। वेस्ट और उनकी टीम ने बताया कि यह अलग आकृतियां नहीं हैं, बल्कि ये आपस में जुड़े हुए हैं और रस्सियों की तरह के तत्वों से बने हुए हैं। इन तत्वों का यह संबंध सौर मंडल के आसपास एक सुरंग का निर्माण करता है।
यह ढांचे आवेशित तत्वों, चुंबकीय क्षेत्र से बने हैं और इनका आकार लंबी रस्सियों की तरह है। ये पृथ्वी से 350 प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं। इनकी लंबाई 1000 प्रकाश वर्ष है।

इस व्याख्या को समझाने के लिए वेस्ट कहते हैं, "अगर हमें आकाश में देखना हो तो हमें सुरंग की तरह का यह ढांचा हर दिशा में दिखाई देगा।"

इन ढांचों में मौजूद बेहद दूर दूर स्थित अलग आकृतियां, किसी एक इकाई की तरह जुड़ी हुई हैं। वेस्ट और उनके साथियों का मानना है कि ऐसा पहली बार हुआ है। इससे सौर मंडल के बारे में नई खोजों का रास्ता भी बना है।

वेस्ट इन ढांचों पर पिछले 15 साल से काम कर रही हैं, तब पहली बार उन्होंने "रेडियो स्काई" का पहली बार परीक्षण किया था। रेडियो स्काई का नक्शा वेस्ट के लिए वह संकेत था, जिसने उन्हें इस ढांचे पर ज्यादा बारीकी से देखने को प्रेरित किया  वेस्ट ने हाल में एक कंप्यूटर मॉडल विकसित किया था, जो यह बता सकता था कि पृथ्वी से किसी को "रेडियो स्काई" कैसा दिखाई देता। उनका कंप्यूटर लंबी रस्सियों की स्थिति और आकार में बदलाव के वक्त भी गणना कर सकता था।

वेस्ट द्वारा बनाए गए मॉडल की मदद से शोध टीम हमारे आसपास का ढांचा बनाने में कामयाब रही और यह बता सकी कि टेलीस्कोप से आसमान कैसा दिखेगा। यह पूरी तरह एक नया आयाम था। इसने वेस्ट और उनकी टीम को मॉडल की आंकड़ों से तुलना में मदद की।

वेस्ट ने कहा कि 1965 में प्रकाशित एक पुराने शोध पेपर ने उन्हें नए विचार के निर्माण में मदद की। इस संबंध में वेस्ट ने कहा, "कुछ साल पहले, एक सह लेखक टॉम लेंडेकर में मुझे बताया कि रेडियो एस्ट्रोनॉमी के शुरुआती दिनों, 1965 का एक पेपर है। उस समय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लेखकों (मैथ्यूसन और मिलने) ने अनुमान लगाया कि यह ध्रुवीकृत रेडियो तरंगें ब्रह्मांड के भीतर से  उपजी हो सकती हैं।"

उस पेपर ने मुझे इस विचार को बनाने के लिए प्रेरित किया और मैंने अपने मॉडल को हमारे समय में मौजूद टेलीस्कोप से मिले व्यापक आंकड़ों से जोड़ दिया।"

पृथ्वी के आम नक्शे में उत्तरी ध्रुव शीर्ष पर होता है और भूमध्यत रेखा बीच में। वेस्ट ने इस नक्शे को नए नज़रिए से दोबारा बनाया। हमारे ब्रह्मांड के नक्शे के बारे में भी यह बात सही है। वेस्ट कहती हैं, "ज्यादातर खगोलविद नक्शे में उत्तरी ध्रुव को ऊपर और मंदाकिनीय केंद्र (गलैक्टिक सेंटर) को बीच में देखते हैं। इस विचार को प्रेरित करने में एक अहम हिस्सा इस नक्शे को दोबारा बनाना था, जिसमें केंद्र में कोई दूसरा बिंदु होना था।"

नए "टनल मॉडल" से अंतरिक्ष विज्ञान में सौर मंडल के बारे में  नया नजरिया विकसित होगा। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक यह नई शुरुआत लाने वाली अवधारणा है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Is Earth Surrounded by a Giant Magnetic Tunnel? New Findings Suggest Possibility

Magnetic Tunnel
Tunnel Model
Jennifer West
North Polar Spur
Far Regions
Solar System Entrapped by Magnetic Tunnel
Astronomy

Related Stories


बाकी खबरें

  • UP Teachers Protest
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी : आगामी चुनाव से पहले लाखों शिक्षकों ने योगी सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने को कहा
    02 Dec 2021
    विरोध करने वाले शिक्षकों ने संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, पूर्व वेतन आयोग के अनुसार कर्मचारियों की वेतन वृद्धि, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, डीए की किस्त और बक़ाया राशि जारी करने सहित कई मांगें…
  • bhopal gas tragedy
    अनिल जैन
    भोपाल गैस त्रासदी के 37 बरस, अभी भी थमा नहीं है लोगों का मरना! 
    02 Dec 2021
    आज से ठीक 37 वर्ष पहले दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड के कारखाने से निकली जहरीली गैस (मिक यानी मिथाइल आइसो साइनाइट) ने अपने-अपने घरों में सोए हजारों लोगों को एक झटके में ही…
  • putin
    एम. के. भद्रकुमार
    मजबूत गठजोड़ की ओर अग्रसर होते चीन और रूस
    02 Dec 2021
    चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने उच्च-स्तरीय “स्रोत” के हवाले से खुलासा किया है कि बीजिंग का 2022 के शीतकालीन ओलंपिक में अमेरिकी एवं पश्चिमी राजनेताओं को आमंत्रित करने का कोई इरादा…
  • left
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बढ़ते हमलों के विरोध में सीपीआई(एम) का प्रदर्शन
    02 Dec 2021
    इस प्रदर्शन को सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात, प्रकाश करात, हन्नान मौल्ला और दिल्ली राज्य कमेटी के नेताओं ने संबोधित किया। इस प्रदर्शन में सांप्रदायिकता का दंश झेल चुके उत्तर पूर्वी दिल्ली…
  • covid
    संदीपन तालुकदार
    ओमिक्रॉन: घबराने की नहीं, सावधानियां रखने की ज़रूरत है
    02 Dec 2021
    विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया सूचना के मुताबिक़, यह साफ़ नहीं है कि ओमिक्रॉन डेल्टा वैरिएंट समेत, पिछले वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैल सकता है या नहीं। फिर भी यह सुझाव है कि अब भी उतनी ही सावधानी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License