NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
अर्थव्यवस्था का लड़खड़ाना जारी, तिमाही जीडीपी विकास दर 4.7 प्रतिशत तक पहुंची
लेकिन लोगों की समस्या के प्रति उदासीन मोदी सरकार ट्रम्प को लुभाने और समाज का ध्रुवीकरण करने में व्यस्त है।
सुबोध वर्मा
29 Feb 2020
Economy Continues to Flounder

यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है लेकिन वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि के नवीनतम तिमाही का अनुमान लगभग 4.7% तक पहुंच गया है। ये अनुमान 28 फरवरी को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए थे।

नीचे दिए गए चार्ट में देखा जा सकता है कि 2017-18 (चार्ट में नहीं दिखाया गया है) की चौथी तिमाही से शुरू हो कर पिछली सात तिमाहियों तक जीडीपी वृद्धि में लगातार गिरावट आई है। इस अवधि में विकास दर लगभग आधी हो गई है जो भारत की अर्थव्यवस्था की बड़ी कमज़ोरी का संकेत देता है। 2019-20 की तीसरी तिमाही के लिए नवीनतम अनुमान पिछली तिमाही में 4.5% से 4.7% तक मामूली वृद्धि को दर्शाता है।
graph 1_6.JPG

जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की विशाल योजनाओं की पृष्ठभूमि और आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत का बाज़ार सरकार और इसके प्रचारकों के लिए इस दुर्बल विकास के एक कटु सत्य की पड़ताल करता है।

विशेष रूप से ध्यान देने वाली बात ये है कि देश में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाले कृषि क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धित या जीवीए की वृद्धि दर हालिया रिपोर्ट के अनुसार पिछली तिमाही में 2.1% से मामूली रूप में बढ़कर तीसरी तिमाही में 3.7% हो गई है। [नीचे दिए गए चार्ट में देखा जा सकता है]

यह इस सच्चाई के बावजूद है कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुमान के अनुसार ग्रामीण बेरोज़गारी जनवरी 2020 में लगभग 6% अनुमानित है जो कि शहरी रोज़गार से कम है। ये दर्शाता है कि आउटपुट को बढ़ाए बिना कृषि बेरोज़गारों की बढ़ती संख्या को खपा रही है। इसका मतलब यह है कि कृषि में श्रमिकों की एक बड़ी संख्या के बीच इतनी ही आमदनी बांटी जा रही है जो कि एक गंभीर स्थिति है।

graph 2_3.JPG

विनिर्माण के अन्य प्रमुख क्षेत्र में विकास और भी ज़्यादा निराशाजनक है जो कि पिछली तिमाही में 1% की नकारात्मक वृद्धि की तुलना में तीसरी तिमाही में औसतन 0.9% था। यह उद्योग में गहरी यानी लगभग मंदी की स्थिति को दर्शाता है। पिछले कई महीनों से कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में नौकरी खत्म होने की खबरें आ रही हैं जिनमें ऑटोमोबाइल, वस्त्र, जवाहरात और आभूषण, दूरसंचार, आईटी, आदि शामिल हैं। इस मंदी की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि जीडीपी में सकल स्थिर पूंजी निर्माण (ग्रास फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन-जीडीएफ) का हिस्सा जो कि अचल संपत्तियों में निवेश का एक उपाय वह पिछले वर्ष में 31.9% से 30.2% तक पहुंच गया है।

यह सब अर्थव्यवस्था को संभालने में मोदी सरकार की पूर्ण विफलता को भी दर्शाता है और कॉर्पोरेट करों में कटौती, सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना, विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी पूंजी को आमंत्रित करना और विशेष रूप से लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं में सरकारी खर्चों की बड़ी कटौती इसकी नीतियों की पूरी तरह से विफलता को भी दर्शाता है।पहले से ही पूरी दुनिया में बदनाम हो चुके नवउदार सिद्धांत के इस पैकेज को विनाशकारी परिणामों के साथ भारत में लोगों के गले के नीचे उतारा जा रहा है।

सामाजिक ध्रुवीकरण पर नज़र

इस बीच भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार इन महीनों में हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती रही है, जिसमें सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेता अपना अधिकांश समय और ऊर्जा बहुसंख्यक प्रभुत्व और अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने के लिए रणनीतियों को तैयार करने में लगा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रेरित इस एजेंडा के चलते देश ने परेशानियों का सामना किया है क्योंकि हाल ही में राजधानी दिल्ली में भयावह सांप्रदायिक हिंसा देखी गई जिसमें अब तक 42 लोगों की जान जा चुकी है। इस महीने के शुरू में हुए दिल्ली के विधानसभा चुनावों के चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ और खुला सांप्रदायिक प्रचार दिल्ली हिंसा का प्रत्यक्ष परिणाम था।

दिसंबर के बाद से देश सरकार द्वारा लाए गए भेदभावपूर्ण नागरिकता कानून और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) का तैयार करने के प्रस्ताव पर विरोध और तनाव की ज़द में आ गया है जो न पूरा होने वाले दस्तावेज की मांग करता है और मुसलमानों के खिलाफ होने की आशंका जताई जाती है।

हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प के मेगा इवेंट में देखे गए अमेरिकी हितों के लिए नतमस्तक और विदेशी और घरेलू दोनों कॉर्पोरेट द्वारा देश की लूट की अनुमति देते हुए इस तरह की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना गंभीर स्थिति को दर्शाता है जो वर्तमान सरकार देश और इसके लोगों को विनाशकारी रास्ते की ओर ले जा रही है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Economy Continues to Flounder, Quarterly GDP Growth Just 4.7%

Economic slowdown
GDP growth
Communalism
BJP
Hate Speeches
communal polarisation
Delhi Violence
Anti CAA-NRC-NPR
Trump Event
Modi Govt

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • असद रिज़वी
    CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा
    06 May 2022
    न्यूज़क्लिक ने यूपी सरकार का नोटिस पाने वाले आंदोलनकारियों में से सदफ़ जाफ़र और दीपक मिश्रा उर्फ़ दीपक कबीर से बात की है।
  • नीलाम्बरन ए
    तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है
    06 May 2022
    रबर के गिरते दामों, केंद्र सरकार की श्रम एवं निर्यात नीतियों के चलते छोटे रबर बागानों में श्रमिक सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
  • दमयन्ती धर
    गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया
    06 May 2022
    इस मामले में वह रैली शामिल है, जिसे ऊना में सरवैया परिवार के दलितों की सरेआम पिटाई की घटना के एक साल पूरा होने के मौक़े पर 2017 में बुलायी गयी थी।
  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती
    06 May 2022
    नज़रिया: ऐसा लगता है इस दौर की रणनीति के अनुरूप काम का नया बंटवारा है- नॉन-स्टेट एक्टर्स अपने नफ़रती अभियान में लगे रहेंगे, दूसरी ओर प्रशासन उन्हें एक सीमा से आगे नहीं जाने देगा ताकि योगी जी के '…
  • भाषा
    दिल्ली: केंद्र प्रशासनिक सेवा विवाद : न्यायालय ने मामला पांच सदस्यीय पीठ को सौंपा
    06 May 2022
    केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाएं किसके नियंत्रण में रहेंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License