NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
आरटीआई में ख़ुलासा : पिछले 2 साल में छापे गये क़रीब 19,000 करोड़ रुपये के चुनावी  बॉन्ड
इन दो सालों में छापे गये 6,64,250 बॉन्ड में से अब तक केवल 12,452 बॉन्ड ही बिक पाये हैं, ऐसे में सवाल तो बनता ही है कि आख़िर सरकारी ख़ज़ाने की भारी क़ीमत पर इतने सारे बॉन्ड छापे क्यों गये?
रवि नायर
08 May 2020
आरटीआई

जाने-माने कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) द्वारा आरटीआई के तहत भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से पूछे गये एक सवाल के जवाब से पता चला है कि 2018 और 2019 में सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व में भारत सुरक्षा प्रेस (ISP) द्वारा 18,531.5 करोड़ रुपये के कुल 6,64,250 चुनावी बॉन्ड छापे गये थे।

चुनावी बॉन्ड राजनीतिक धन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक वचन पत्र होता है, जिसे किसी कंपनी या भारतीय नागरिक द्वारा SBI की चुनिंदा शाखाओं से ख़रीदा जा सकता है। चुनावी बॉन्ड 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग के होते हैं।

2018 में आईएसपी ने 7,113.50 करोड़ रुपये मूल्य के 6,04,250 बॉंड छापे थे।प्रत्येक 1,000 और 10,000 रुपये के मूल्यवर्ग के 2,65,000 बांड थे, जो छप चुके थे। जबकि प्रत्येक 1 लाख मूल्यवर्ग के 53,000 बॉंड, प्रत्येक 10 लाख रुपये के 16,600 बॉन्ड  और प्रत्येक 1 करोड़ रुपये के 4,650 बांड आईएसपी द्वारा जारी किये गये थे।  

इसके बाद 2019 में आईएसपी ने केवल 60,000 बॉंड छापे, जिनकी क़ीमत 11,400 करोड़ रुपये थी और इनमें से एक भी बॉन्ड  का मूल्य 1,000 रुपये और 10,000 रुपये नहीं था। क्रमशः 1 लाख और 10 लाख रुपये के बॉंन्ड की छपाई को घटाकर 40,000 और 10,000 कर दिया गया। हालांकि, 1 करोड़ रुपये के  बॉन्ड बढ़कर 10,000 हो गये।

graph 1_8.JPG

अब तक कितने बॉन्ड बेचे जा चुके हैं ?

दिलचस्प बात यह है कि दो साल में छपे 6,64,250 बॉन्ड में से केवल 12,452 बॉन्ड ही अब तक दाताओं को बेचे जा सके हैं। एसबीआई ने आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब में इस बात का ख़ुलासा किया है कि 1,000 रुपये के मूल्यवर्ग के 47 बॉन्ड, 10,000 रुपये मूल्यवर्ग के 70 बॉन्ड , 1 लाख रुपये मूल्यवर्ग के 1,722 बॉन्ड, 10 लाख रुपये मूल्यवर्ग के 4,911 बॉन्ड और 1 करोड़ रुपये मूल्यवर्ग के 5,702 बॉन्ड बेचे जा चुके हैं। 6,120.3947 करोड़ रुपये के बॉन्ड 13 चरणों में बेचे गये हैं।  

graph 2_5.png

इस बात पर ग़ौर करने की ज़रूरत है कि इन बॉन्डों के छापे जाने से सरकारी ख़ज़ाने पर भारी मात्रा में धन ख़र्च होता है। आईएसपी सरकार से प्रति बॉन्ड पर 25 रुपये+ 6 + 6% जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) वसूलती है। एसबीआई ने इन लेनदेन के लिए अब तक लगभग 3.5 करोड़ रुपये का बिल बनाया है।

graph 3_1.JPG

कम मूल्यवर्ग के बांड जारी करने को लेकर भाजपा का अनुरोध

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 24 अगस्त, 2017 को तत्कालीन वित्त मंत्री, अरुण जेटली को एक पत्र लिखा था, जिसमें उसने फ़रवरी 2017 में वित्त विधेयक में चुनावी बॉन्ड लाने के लिए उन्हें बधाई दी थी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव ने उस पत्र में यह भी लिखा कि चुनावी फ़ंडिंग प्रक्रिया में भागीदारी के लिए सभी स्तरों के लोगों को सक्षम बनाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए "उच्च मूल्यवर्गो के अतिरिक्त" 2,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रुपये के छोटे-छोटे मूल्यवर्ग में भी बॉन्ड पेश किये जाने चाहिए।

उस पत्र में भाजपा द्वारा यह भी कहा गया था कि "राजनीतिक दलों की तरफ़ से बदले का सामना करने" के डर के चलते कई कंपनियां चेक या डिमांड ड्राफ़्ट के ज़रिये योगदान करने के लिए तैयार नहीं होती थीं। मंत्री को आगे कहते हुए बताया गया है कि इन बॉन्डों को उन "किसी भी सीरियल नंबर या पहचान के निशान को शामिल किये बिना छापा जाये,जिनका कि योगदानकर्ता की पहचान करने के लिए बाद में उपयोग किया जा सकता है।"

जनवरी 2018 में, सरकार ने 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में बॉन्ड पेश किये।

हालांकि बीजेपी ने राजनीतिक दलों के धन में अंशदान करने के लिए सामाजिक-आर्थिक हैसियत का ख़्याल किये बिना लोगों को "सक्षम और प्रोत्साहित" करने को लेकर छोटे-छोटे मूल्यवर्ग के बॉन्ड का अनुरोध किया था और केंद्र सरकार ने आगे बढ़कर ऐसे बॉन्ड जारी भी कर दिये। हालांकि ये सबसे कम बिके।  निचले मूल्यवर्ग के 2,65,000 बॉंडों में से 100 से भी कम बॉंड दाताओं को बेचे जा सके हैं।

जो सवाल पूछा जाना चाहिए,वह यह है कि क्या इतने सारे बॉन्डों को एकसाथ छापना करदाताओं के पैसे का सही इस्तेमाल है या नहीं ? क्या सरकार ने इतने सारे बॉन्ड छापने से पहले यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि तकरीबन कितने बॉन्ड बेचे जा सकते हैं ?

(रवि नायर एक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

अंग्रेज़ी में लिखा मूल आलेख आप नीचे लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Electoral Bonds Worth Almost Rs 19,000 Crore Printed in Past 2 Years, Reveals RTI

Electoral Bonds
RTI Reply
Finance Ministry
LokeshBatra
BJP on Bonds
SBI
Electoral bond sale

Related Stories


बाकी खबरें

  • putin
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध; अहम घटनाक्रम: रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश 
    28 Feb 2022
    एक तरफ पुतिन ने रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है, तो वहीं यूक्रेन में युद्ध से अभी तक 352 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • mayawati
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है
    28 Feb 2022
    एसपी-आरएलडी-एसबीएसपी गठबंधन के प्रति बढ़ते दलितों के समर्थन के कारण भाजपा और बसपा दोनों के लिए समुदाय का समर्थन कम हो सकता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,013 नए मामले, 119 मरीज़ों की मौत
    28 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 2 हज़ार 601 हो गयी है।
  • Itihas Ke Panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी: आज़ादी की आखिरी जंग
    28 Feb 2022
    19 फरवरी 1946 में हुई रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी को ज़्यादातर लोग भूल ही चुके हैं. 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में इसी खास म्युटिनी को ले कर नीलांजन चर्चा करते हैं प्रमोद कपूर से.
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा
    27 Feb 2022
    मणिपुर की राजधानी इंफाल में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचीं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह। ज़मीनी मुद्दों पर संघर्षशील एक्टीविस्ट और मतदाताओं से बात करके जाना चुनावी समर में परदे के पीछे चल रहे सियासी खेल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License