NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
आंदोलन
उत्पीड़न
कानून
कोविड-19
समाज
भारत
राजनीति
एल्गार मामला : परिजनों ने मुख्यमंत्री से की कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग
एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में जेल में बंद कार्यकर्ताओं के परिजनों ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मांग की कि महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर आरोपियों को रिहा किया जाना चाहिए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 May 2021
Political Prisoners

मुंबई: एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में जेल में बंद कार्यकर्ताओं के परिजनों ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मांग की कि महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर आरोपियों को रिहा किया जाना चाहिए।

पत्र पर कार्यकर्ताओं-आनंद तेलतु्म्बडे, गौतम नवलखा, स्टैन स्वामी, सुधा भारद्वाज और रोना विल्सन सहित 15 कार्यकर्ताओं के परिजनों के हस्ताक्षर हैं।

पुरुष आरोपी फिलहाल नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में, जबकि महिला विचाराधीन कैदी मध्य मुंबई स्थित भायखला जेल में बंद हैं।

पत्र में कहा गया है कि कार्यकर्ता विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं और उनमें से एक ज्योति जगताप को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है।

परिजनों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है, ‘‘हम सभी संबंधित परिस्थितियों में उनकी (आरोपी कार्यकर्ताओं) सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं जहां हर किसी को खतरा है। इसलिए, हम आपसे विनम्र निवेदन करते हैं कि हमारे परिवार के सदस्यों की रिहाई के लिए समय पर और आवश्यक कदम उठाएं।’’

इस बीच, आरोपियों में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर हैनी बाबू को जेल अधिकारी आंखों की जांच के लिए एक अस्पताल ले गए।
यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया कि इससे शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास अगले दिन हिंसा भड़की।

पुणे पुलिस ने दावा किया कि सम्मेलन माओवादियों द्वारा समर्थित था।

आपको बता दें कि इसी मामले में देश के कई बुद्धजीवियों, पत्रकारों, लेखकों सहित समाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी हुई है।  हालांकि, किसी भी मामले में पुलिस कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है। इसमें आनन्द तेलतुम्बड़े के अतिरिक्त, सुधा भारद्वाज, सोमा सेन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस, फादर स्टेन स्वामी, सुधीर धावले वरवरा राव, रोना विल्सन, गौतम नवलखा, जैसे बुद्धिजीवी भी शामिल हैं। यह सभी, आम लोगों के सम्मानपूर्वक जीने के हक के पक्ष में, कोर्ट से लेकर सड़क तक संघर्षशील रहे हैं। ये लोग स्वास्थ्य-शिक्षा मुफ्त मिले, इसके लिए निजीकरण का विरोध करते रहे हैं और उन आदिवासियों के साथ खड़े हुए जिनकी जीविका के संसाधन को छीन कर पूंजीपतियों के हवाले किया जाता रहा है। इसलिए ये लोग शासक वर्ग के आंखों के किरकिरी बने हुए थे।

सुधा भरद्वाज, सोमा सेन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस, फादर स्टेन स्वामी, सुधीर धावले, वरवरा राव, रोना विल्सन भीमा कोरेंगांव केस में जून और सितम्बर, 2018 से ही महाराष्ट्र के जेलों में बंद हैं। जबकि उस केस के असली गुनाहगार संभाजी भिंडे और मिलिन्द एकबोटे बाहर हैं।

महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद केन्द्र सरकार ने इस केस को एनआईए के हाथों में सुपुर्द कर दिया था। 18 माह बाद लम्बी कानूनी प्रक्रिया झेलने के बाद 14 अप्रैल 2020, को गौतम नवलखा और आनन्द तेलतुम्बड़े को एनआईए के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। तब से ही ये दोनों भी जेल में हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Political Prisoners
Sudha Bharadwaj
Rona Wilson
Anand Teltumbde
elgar parishad
Bhima Koregaon

Related Stories

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

स्टेन स्वामी की मौत के ख़िलाफ़ देशभर में उठ रही आवाज़; एल्गार मामले के अन्य आरोपियों ने जेल में भूख हड़ताल की

फादर स्वामी ने एनआईए को "झूठे सबूतों" के बारे में बताया था: सहकर्मी


बाकी खबरें

  • yogi
    रोहित घोष
    यूपी चुनाव: योगी आदित्यनाथ बार-बार  क्यों कर रहे हैं 'डबल इंजन की सरकार' के वाक्यांश का इस्तेमाल?
    25 Feb 2022
    दोनों नेताओं के बीच स्पष्ट मतभेदों के बावजूद योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी के नाम का इसतेमाल करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि नरेंद्र मोदी अब भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि योगी…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर, युद्ध और दांवः Ukraine पर हमला और UP का आवारा पशु से गरमाया चुनाव
    24 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने Ukraine पर Russia द्वारा हमले से अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की हार पर चर्चा की। साथ ही, Uttar Pradesh चुनावों में आवारा पशु, नौकरी के सवालों पर केंद्रित होती…
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022 : आवारा पशु हैं एक बड़ा मुद्दा
    24 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक के इस ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडे से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। डॉ पांडेय ने…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    अमेरिकी लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव, दुनिया पर क्या असर डाल सकता है?
    24 Feb 2022
    अमेरिका के लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव अगर बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो दुनिया के बहुत से मुल्कों में आम लोगों के जीवन जीने की लागत बहुत महँगी हो जाएगी।
  • Tribal Migrant Workers
    काशिफ काकवी
    मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी
    24 Feb 2022
    गन्ना काटने वाले 300 मज़दूरों को महाराष्ट्र और कर्नाटक की मिलों से रिहा करवाया गया। इनमें से कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License