NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
समाज
भारत
राजनीति
प्रख्यात शोधकर्ता और लेखिका गेल ओमवेट का निधन
अमेरिकी मूल की भारतीय विद्वान, समाजशास्त्री एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आदिवासियों पर अपने लेखन के लिए जानी जाती थीं।
भाषा
25 Aug 2021
Gail Omvedt

पुणे: जातिगत अध्ययनों पर प्रख्यात शोधकर्ता डॉ. गेल ओमवेट (81) का लंबी बीमारी के बाद बुधवार को महाराष्ट्र के सांगली जिले में निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

डॉ. ओमवेट (81), जिन्होंने अपने गांव कासेगांव में अंतिम सांस ली, ने बतौर विद्यार्थी अमेरिका से लौटने और 1970 के दशक में भारत में बसने के बाद जातिगत अध्ययन का बीड़ा उठाया। उन्होंने, एक मार्क्सवादी विद्वान एवं कार्यकर्ता भरत पाटनकर से शादी की तथा यह दंपति गांव में रहा।

एक सहयोगी ने बताया कि पहली बार पीएचडी छात्रा के रूप में महाराष्ट्र में जाति एवं महात्मा फुले के आंदोलन का अध्ययन करने आईं ओमवेट भारत में जाति एवं अस्पृश्यता व्यवस्था से बहुत दुखी हुईं और उत्पीड़ित जातियों की मुक्ति के लिए काम करने के लिए महाराष्ट्र में बस गईं। अमेरिकी मूल की भारतीय विद्वान, समाजशास्त्री एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आदिवासियों पर अपने लेखन के लिए जानी जाती थीं।

ओमवेट एक प्रख्यात लेखिका थीं और उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उनकी पीएचडी थीसिस ने महात्मा फूले के ‘सत्यशोधक’ आंदोलन को दुनिया के सामने पेश किया और उनकी पुस्तक, ‘दलित और लोकतांत्रिक क्रांति’ युवा छात्रों के बीच लोकप्रिय हो गई। फुले-आंबेडकरवादी आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्तित्व, वह कई आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल थीं।

मिनियापोलिस में जन्मीं, डॉ ओमवेट अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद भारत लौटीं और खुद को दलितों, गरीबों-वंचितों, किसानों, महिलाओं और अन्य सार्वजनिक नेक कार्यों के लिए विभिन्न सामाजिक आंदोलनों में झोंक दिया।

ओमवेट-पाटनकर दंपति ने 1980 के दशक की शुरुआत में श्रमिक मुक्ति दल की स्थापना की और इस अवधि के दौरान वह एक भारतीय नागरिक बन गईं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक विषयों पर कई किताबें लिखीं, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाया और विभिन्न समाचार पत्रों के लिए कॉलम लिखे, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, ऑक्सफैम एनओवीआईबी और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों के लिए काम किया। उन्होंने समाजशास्त्र विभाग के तहत पुणे विश्वविद्यालय में फुले-आंबेडकर पीठ का नेतृत्व किया। उन्होंने कोपेनहेगन में एशियाई अध्ययन संस्थान में भी पढ़ाया।

दलित इंटलेक्चुअल कलेक्टिव ने कहा कि वह भारत के सबसे मौलिक विचारकों में से एक थीं।

उनके निधन पर इतिहासकार रामचंद्र गुहा, माकपा नेता सीताराम येचुरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शोक प्रकट किया।

डॉ. ओमवेट के निधन पर शोक प्रकट करते हुए ठाकरे ने कहा कि भारत में विभिन्न सामाजिक आंदोलनों, संत साहित्य, लोक परंपराओं में उनका योगदान और महिला अधिकारों पर उनके कार्य हमेशा याद किए जाएंगे।

Gail Omvedt
researcher
author
caste studies
Marxist
Jyotiba Phule
Mahatma Phule
Maharashtra
American origin
Indian scholar

Related Stories

महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता

महाराष्ट्र: ‘काला जादू’ के शक में 7 दलितों की पिटाई, 70 साल के बुजुर्ग को भी नहीं छोड़ा

कोरकू आदिवासी बहुल मेलघाट की पहाड़ियों पर कोरोना से ज्यादा कोरोना के टीके से दहशत!

विडंबना: मेलघाट टाइगर रिज़र्व के चलते उजड़े कई आदिवासी गांवों का 20 साल बाद भी नहीं हुआ पुनर्वास

बाबा साहेब अंबेडकर: “शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो”


बाकी खबरें

  • मिनेसोटा में क़रीब 250 पाइपलाइन-विरोधी प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया
    पीपल्स डिस्पैच
    मिनेसोटा में क़रीब 250 पाइपलाइन-विरोधी प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया
    10 Jun 2021
    आदिवासी समूह और पर्यावरण एक्टिविस्ट उत्तर पश्चिमी मिनेसोटा में एनब्रिज के स्वामित्व वाली तेल पाइपलाइन परियोजना के अंतिम चरण के निर्माण का विरोध कर रहे हैं।
  • भाईचारिक सांझ का प्रतीक पंजाब का ज़िला मालेरकोटला
    शिव इंदर सिंह
    भाईचारिक सांझ का प्रतीक पंजाब का ज़िला मालेरकोटला
    10 Jun 2021
    पंजाबियों व सिखों का मालेरकोटला के साथ एक अनोखा रिश्ता है, यह पंजाब की ऐतिहासिक विरासत का शानदार हिस्सा है। पंजाब की इस ऐतिहासिक भाईचारिक सांझ के बारे योगी की टिप्पणी गैर-जरूरी व् भद्दी है।
  • एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पूर्व मुक्केबाज डिंको सिंह का निधन
    भाषा
    एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पूर्व मुक्केबाज डिंको सिंह का निधन
    10 Jun 2021
    डिंको ने 1998 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और उन्हें उसी साल अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। खेलों में उनके योगदान के लिये उन्हें 2013 में पदम श्री से सम्मानित किया गया था। भारतीय…
  • पेरूः कैस्टिलो ने राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता, फुजीमोरी का मानने से इनकार
    पीपल्स डिस्पैच
    पेरूः कैस्टिलो ने राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता, फुजीमोरी का मानने से इनकार
    10 Jun 2021
    99.998% मतों की गिनती पूरी होने के साथ वामपंथी उम्मीदवार पेड्रो कैस्टिलो को 50.204% वोट मिले हैं, जबकि अतिदक्षिणपंथी कीको फुजीमोरी को 49.796% वोट मिले।
  • यूरोपीय ट्रेड यूनियनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक संगठनों ने नाटो विरोधी प्रदर्शन का आह्वान किया
    पीपल्स डिस्पैच
    यूरोपीय ट्रेड यूनियनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक संगठनों ने नाटो विरोधी प्रदर्शन का आह्वान किया
    10 Jun 2021
    पूरे यूरोप के ट्रेड यूनियनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक संगठनों ने युद्ध और ब्रुसेल्स में अगले नाटो शिखर सम्मेलन के ख़िलाफ़ कई कार्यक्रम किए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License