NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
भारत
महामारी काल और स्वास्थ्य सुविधाओं तक महिलाओं की कम पहुंच
संस्थान ने अपनी तमाम जांच-परिणाम के बाद ये सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाएं जरूर टीका लगवाएं। हालांकि सरकार ने क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों की कमी का हवाला देते हुए गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की अब तक अनुमति नहीं दी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Jun 2021
महामारी काल और स्वास्थ्य सुविधाओं तक महिलाओं की कम पहुंच
Image courtesy : ThePrint

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान यानी ICMR के अनुसार भारत में कोरोना की दूसरी लहर महिलाओं खासकर गर्भवती महिलाओं  के लिए अधिक घातक साबित हुई है। संस्थान ने अपने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बुधवार, 16 जून को बताया कि गर्भवती और प्रसूता (शिशुओं को जन्म देने वाली) महिलाएं कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर में पहली लहर की तुलना  कहीं अधिक प्रभावित हुईं और इस साल इस श्रेणी में लक्षण वाले मामले तथा संक्रमण से मृत्यु की दर भी अपेक्षाकृत अधिक रही है। अब सवाल ये उठता है कि जब पहली लहर में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बारे में आगाह कर चुका था तो सरकार द्वारा समय रहते इसके लिए उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए।

आपको बता दें कि ICMR ने भारत में महामारी की पहली लहर (एक अप्रैल, 2020 से 31 जनवरी, 2021 तक) और दूसरी लहर (एक फरवरी, 2021 से 14 मई तक) के दौरान गर्भवती और शिशुओं को जन्म देने वाली महिलाओं से संबंधित संक्रमण के मामलों की तुलना की है। ICMR के मुताबिक दूसरी लहर में लक्षण वाले संक्रमण के मामले 28.7 प्रतिशत थे जबकि पहली लहर में यह आंकड़ा 14.2 प्रतिशत था। गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद महिलाओं में संक्रमण से मृत्यु दर 5.7 प्रतिशत थी जो पहली लहर में 0.7 की मृत्यु दर से अधिक रही।

ICMR  का सुझाव गर्भवती महिलाएं जरूर टीका लगवाएं

संस्थान ने अपनी तमाम जांच-परिणाम के बाद यह सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाएं जरूर टीका लगवाएं। हालांकि सरकार ने क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों की कमी का हवाला देते हुए गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की अब तक अनुमति नहीं दी है। इस बारे में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह (एनटीएजीआई) विचार-विमर्श कर रहा है। जबकि  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पहले ही टीकाकरण की सिफारिश कर चुका है। ऐसे में  फिर सवाल उठता है कि आखिर महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई एक्सपर्ट्स इस लहर में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों पर कोविड के ज्यादा असर को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। जानकारों ने माना है कि दूसरी लहर का डबल म्यूटेंट वायरस गर्भवती महिलाओं के लिए घातक है। कोरोना संक्रमित महिलाओं को डिलीवरी में नॉन कोविड महिलाओं से ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या कारण है महामारी में बढ़ती समस्या का?

पीजीआई चंडीगढ़ में गायनेकोलॉजिस्ट रहीं डॉ. हरप्रीत कौर बताती हैं कि इस बार गर्भवती महिलाओं में कॉम्प्लिकेशन पहले के मुकाबले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। जो कोरोना से संक्रमित हैं उन्हें और ज्यादा दिक्कत आ रही है क्योंकि उनमें बीमारी के कारण इम्यूनिटी कम हो जाती है इसलिए उन्हें ऑक्सिजन की जरूरत के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। सबसे ज्यादा कॉम्प्लिकेशन अबॉर्शन के या अर्ली डिलीवरी (जल्दी बच्चा पैदा होना) के केस में सामने आ रहे हैं। पहले कोरोना की वजह से गर्भवती महिलाओं के रेगुलर चैकअप में दिक्कतें जरूर आ रहीं थी लेकिन मौत के आंकड़ें बहुत कम थे लेकिन इस बार गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले कहीं ज्यादा देखने को मिले हैं। इसके अलावा नवजात बच्चों में भी कमज़ोरी लो ब्लड शुगर जैसी कई दिक्कतें देखने को मिली हैं। कोविड संक्रमण के बाद उन्हें आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत तक पड़ी है।

डॉ हरप्रीत ते मुताबिक सरकार ने अभी तक प्रेग्नेंट और ब्रेस्ट फीडिंग महिलाओं के लिए टीके को हां नहीं कहा है। ऐसे में इन महिलाओं के लिए खतरा और बढ़ जाता है। अभी तक ऐसी कोई विशेष रिपोर्ट नहीं आई जिसमें टीके को गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक बताया गया हो इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी कह दिया है कि अगर गर्भवती महिलाओं को कोविड का अत्यंत खतरा हो और अगर उन्हें अन्य बीमारियां हैं तो उन्हें टीका लगाया जाना चाहिए। आईसीएमआर ने भी अब तो टीके को जरूरी बता दिया है। ऐसे में अब सरकार के ऊपर है कि वो क्या आगे क्या निर्णय लेती है।

महिलाओं की पहुंच से स्वास्थ्य सुविधाएं दूर

मालूम हो कि इस महामारी से पहले भी ज्यादातर भारतीय महिलाओं की पहुंच से स्वास्थ्य सुविधाएं दूर ही थीं। कई रिपोर्ट्स में यह साफ बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी भारतीय महिलाएं भेदभाव की शिकार हैं। रूढ़िवादी सोच के चलते महिलाएं कई बार अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बता तक नहीं पातीं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय सांख्यिकीय संस्थान, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि भारत में लैंगिक आधार पर भेदभाव की वजह से महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। शोधकर्ताओं ने 2016 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक एम्स में इलाज कराने आए 23,77,028 मरीजों के रिकॉर्ड का अध्ययन किया था। इस अध्ययन में पाया गया कि सिर्फ 33 प्रतिशत महिलाओं को ही स्वास्थ्य सेवा मिल पाती है। वहीं, पुरुषों में यह दर 67 प्रतिशत है।

महिलाओं को उचित स्वास्थ्य देखभाल नहीं मिल पाती

महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली और नई दिल्ली में सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी के अनुसार कम लिंगानुपात एक ऐसा सामाजिक पहलू है जिसकी वजह से महिलाओं को उचित स्वास्थ्य देखभाल नहीं मिल पाती है।

रंजना कहती हैं कि भारतीय समाज की मनोदशा की वजह से महिलाएं घर के अंदर काफी धैर्य बनाए और चुप्पी साधे रहती हैं। हमारे देश में महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रमुखता नहीं दी जाती है कोई भी महिलाओं के इलाज में पैसा खर्च नहीं करना चाहता है। यह दोनों तरीकों से काम करता है। एक यह कि ज्यादातर समय महिलाएं अपने स्वास्थ्य के बारे में चुप रहती हैं। दूसरी यह कि उनकी परवरिश ऐसी होती है कि वे शर्मीली बन जाती हैं और शर्मीलापन या कम आत्मसम्मान की वजह से वे इलाज कराने के लिए खुलकर कह नहीं पाती हैं।

मालूम हो कि एक ओर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार का खर्च काफी कम है तो वहीं 75% स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचा केवल शहरी क्षेत्रों में मौजूद है। ऐसे में ग्रामीण महिलाओं के लिए इन तक पहुंच और मुश्किल हो जाती है। जाहिर है देश में सबको सुरक्षित जीवन ने का अधिकार है और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सबकी पहुंच आसान करना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन सरकार इस जिम्मेदारी को कितनी बखूबी निभा रही है, इसकी सारी पोल इस महामारी के दौर में खुल चुकी है।

COVID-19
Coronavirus
pandemic and women
Healthcare Facilities
ICMR

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Minor raped in Delhi
    राज वाल्मीकि
    शर्मनाक: दिल्ली में दोहराया गया हाथरस, सन्नाटा क्यों?
    04 Aug 2021
    इस मामले में दलित संगठनों के प्रतिरोध के बाद पंडित राधेश्याम और उसके तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर पहले पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। बाद में दिल्ली महिला आयोग और…
  • अजय गुदावर्ती
    2024 में बीजेपी को हराने के लिए उसके पाले में खेलने के बजाए विपक्ष को रणनीति बनानी होगी
    04 Aug 2021
    विपक्षी एकता के बारे में चल रही नए सिरे की बातचीत के बीच, ग़ैर-भाजपा दलों को आवश्यक सामाजिक और आर्थिक मांगों को पूरा करने के वादों के साथ उसे सांस्कृतिक प्रतीकवाद से जोड़ना होगा।
  • sex trafficking bill
    सुमेधा पाल
    तस्करी विरोधी मसौदा विधेयक के अस्पष्ट प्रावधानों से पीड़ितों व अन्य गतिविधियों के अपराधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
    04 Aug 2021
    कार्यकर्ताओं और यूनियनों को इस बात का डर है कि कुछ प्रावधान का दुरुपयोग हो सकता है और उन्होंने तस्करी और सेक्स वर्क के मुद्दे को मिला देने को लेकर भी इस प्रस्तावित विधेयक की आलोचना की है।
  • NITISH -MODI
    उमेश कुमार राय
    राजनीति: जातिगत जनगणना व पेगासस पर नीतीश कुमार के बयान का मतलब
    04 Aug 2021
    साल 2024 में होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर विपक्षी पार्टियों की गोलबंदी के प्रयासों के बीच जदयू की तरफ से ऐसे बयान आने लगे हैं, जिससे भाजपा मुश्किल में दिख रही है।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 42,625 नए मामले, 562 मरीज़ों की मौत
    04 Aug 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 42,625 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 1.29 फ़ीसदी यानी 4 लाख 10 हज़ार 353 हो गयी है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License