NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असम में छह और महीने के लिए ‘अफ्सपा’ का विस्तार
असम में अफ्सपा नवंबर 1990 में लागू हुआ था और राज्य सरकार द्वारा समीक्षा के बाद प्रत्येक छह महीने पर इसका विस्तार किया जाता रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
25 Feb 2021
असम में छह और महीने के लिए ‘अफ्सपा’ का विस्तार

गुवाहाटी: असम सरकार ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) के तहत राज्य की मौजूदा ‘अशांत क्षेत्र’ स्थिति को 27 फरवरी से छह और महीने के लिए बढ़ाने का बुधवार को फैसला किया।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून, 1958 की धारा तीन के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए असम के राज्यपाल ने समूचे असम राज्य को 27 फरवरी से आगे छह महीने के लिए ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया है।’’

विज्ञप्ति में कोई खास कारण नहीं बताया गया है लेकिन सूत्रों ने कहा कि अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव और राज्य के कुछ हिस्से में गोला-बारूद की बरामदगी के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

असम में अफ्सपा नवंबर 1990 में लागू हुआ था और राज्य सरकार द्वारा समीक्षा के बाद प्रत्येक छह महीने पर इसका विस्तार किया जाता रहा है।

पूर्वोत्तर में अफ्सपा असम, नगालैंड, मणिपुर (इंफाल नगर परिषद इलाके को छोड़कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगडिंग और तिरप जिलों तथा असम की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के आठ थाना क्षेत्र वाले इलाकों में लागू है।

असम में अफ्स्पा उस वक्त लागू किया गया था जब उग्रवाद राज्य में अपने चरम पर था। पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित कर राज्य में सेना की तैनाती कर दी गई।

क्या है अफ्स्पा?

अफस्पा को संसद में 1958 में पारित किया गया जिसके तहत देश के सुरक्षाबलों को घोषित अशांत क्षेत्रों में कार्रवाई संबंधी विशेषाधिकार दिए गए हैं। 

इसमें धारा-4 के अनुसार सुरक्षाबलों को बिना अनुमति किसी भी स्थान की तलाशी लेने और खतरे की स्थिति में उसे नष्ट करने, बिना अनुमति किसी की गिरफ्तारी करने और यहां तक कि कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर गोली चलाने जैसे अधिकार प्राप्त हैं।

समय-समय पर नागरिक समाज द्वारा देश भर में अफस्पा को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध होता रहा है.  ज्ञात हो कि सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने 4 नवंबर, 2000 से अफस्पा के खिलाफ अनशन शुरू किया था, जब कथित रूप से असम राइफल के जवानों की मुठभेड़ में 10 नागरिकों के मारे जाने की घटना सामने आई थी। इरोम शर्मिला ने 16 वर्षों बाद 2016 में अफस्पा के हटने के बाद अपना अनशन खत्म किया था।

Assam
AFSPA
Assam Government

Related Stories

असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?

असम : विरोध के बीच हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन चाय के पौधे उखाड़ने का काम शुरू

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार

असम की अदालत ने जिग्नेश मेवाणी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

क्या AFSPA को आंशिक तौर पर हटाना होगा पर्याप्त ?

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM

मणिपुर चुनाव : मणिपुर की इन दमदार औरतों से बना AFSPA चुनाव एजेंडा

मणिपुरः जो पार्टी केंद्र में, वही यहां चलेगी का ख़तरनाक BJP का Narrative

मणिपुर चुनावः जहां मतदाता को डर है बोलने से, AFSPA और पानी संकट पर भी चुप्पी

मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा


बाकी खबरें

  • New year
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...
    02 Jan 2022
    नहीं-नहीं, हम ओमिक्रॉन की बात नहीं कर रहे हैं। ओमिक्रॉन हमारे नये साल का सगुन नहीं बिगाड़ सकता। हम बात कर रहे हैं...
  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: हैप्पी न्यू ईयर सरकार जी!
    02 Jan 2022
    एक व्यंग्यकार के लिए नव वर्ष के अवसर पर व्यंग्य लिखते हुए शुभकामनाएं देना बहुत ही मुश्किल काम है। यह इतना ही मुश्किल काम है जितना मुश्किल काम है सरकार जी के लिए कुछ भी करना।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    2022 में सत्ता, सियासत और समाज
    01 Jan 2022
    नया साल भारत की सत्ता-राजनीति और समाज के लिए कैसा होगा? जनतंत्र का क्या होगा हाल? सत्ताधारियो और विपक्षियों के समक्ष क्या-क्या हैं बड़ी चुनौतियां? कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के सियासत की कैसी…
  • jewar airport
    न्यूज़क्लिक टीम
    जेवर एयरपोर्ट: दूसरे फेज़ के अधिग्रहण में किसान कर रहे बेहतर मुआवज़े की माँग
    01 Jan 2022
    जेवर एयरपोर्ट निर्माण के दूसरे फेज़ में 6 गाँव की 1344 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण की ज़रूरत हैI इन गाँव के किसान 26 दिसंबर को एक महापंचायत में जुटे जिसमें इस बात पर आम सहमति बनाने की कोशिश हुई कि वे…
  • अनिल जैन
    साल 2021: भारत के 'तालिबानीकरण' की परियोजना सरकारी शक्ल लेती दिखी!
    01 Jan 2022
    हर कैलेंडर वर्ष अपने दामन में तमाम तरह की कड़वी-मीठी यादें समेटते हुए बिदा होता है। ये यादें अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को लेकर भी होती हैं और राष्ट्रीय घटनाओं को लेकर भी। राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक, वि
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License