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फ़ैक्ट चेक: मस्जिद खाली-रोड ब्लॉक? वायरल फोटो की सच्चाई
ये फोटो न तो गुड़गांव की किसी मस्जिद का है और न ही हरियाणा का। ये फोटो जामा मस्जिद अमरोहा का है और एक साल पुराना है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के दौरान दिशा-निर्देश थे कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ न की जाए।
राज कुमार
13 Dec 2021
Masjid

गुड़गांव में शुक्रवार नमाज को लेकर हिंदुत्ववादी संगठन और भाजपा लगातार अड़चने डाल रही है और तनाव पैदा कर रही है। भाजपा के नेता और मंत्रीगण तक इसमें शरीक हो रहे हैं और खूब हवा दे रहे हैं। मामला पिछले लंबे समय से लगातार गंभीर बनाया जा रहा है।

अभी हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बयान दिया है कि गुड़गांव में खुले में नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब इसी सिलसिले में अल्पसंख्यक मंत्रालय, योजना एवं वित्त कमेटी के चेयरपर्सन और केंद्रीय वक़्फ़ काउंसिल के सदस्य रईस पठान ने एक ट्वीट किया है। जिसमें लिखा है- मस्जिद खाली-रोड ब्लॉक? एक फोटो भी डाला है जिसमें एक खाली मस्जिद में दो-तीन लोग बैठकर नमाज़ पढ़ रहे हैं।

फोटो को देखकर लगता है कि मुसलमान जान-बूझकर मस्जिद की बजाय खुले में नमाज़ पढ़ रहे हैं। मस्जिदें खाली पड़ी हैं और इरादतन सड़कों पर नमाज़ पढ़ी जा रही है। इस ट्वीट को 4,151 बार रीट्वीट किया जा चुका है और अब तक 15.5 हज़ार लोगों ने लाइक किया है। आइये, अब इस फोटो की पड़ताल करते हैं।

जांच-पड़ताल

फोटो के बारे में खोजबीन करने पर पता चला कि ये फोटो न तो गुड़गांव की किसी मस्जिद का है और न ही हरियाणा का। इस फोटो का गुड़गांव की शुक्रवार की नमाज़ से कोई संबंध नहीं है। ये फोटो जामा मस्जिद अमरोहा का है और एक साल पुराना है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के दौरान दिशा-निर्देश थे कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ न की जाए। इसी के मद्देनज़र जामा मस्जिद अमरोहा ने तमाम मस्जिदों को हिदायत दी थी कि जुमे की नमाज़ में चार से ज्यादा लोग शामिल न हों। ये फोटो उसी दौरान का है।

जामा मस्जिद अमरोहा में कोविड दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए चार लोग जुमे की नमाज़ पढ़ रहे हैं। जामा मस्जिद अमरोहा के यूट्यूब चैनल पर 28 मार्च 2020 को एक वीडियो साझा किया गया है जिसमें ये फोटो देखा जा सकता है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय, योजना एवं वित्त कमेटी के चेयरपर्सन और केंद्रीय वक़्फ काउंसिल के सदस्य रईस पठान द्वारा ट्वीट किये गये फोटो का गुड़गांव की नमाज से कोई लेना-देना नहीं है। रईस पठान ने फोटो को गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया है। फोटो कोरोना के दौरान का है जिसकी वजह से मात्र चार लोग मस्जिद में जुमे की नमाज़ पढ़ रहे हैं। न कि मस्जिद को खाली छोड़कर सड़कों पर नमाज पढ़ने गये हुये हैं।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

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