NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
फैक्ट फाइडिंग : CAA विरोध और उत्तर प्रदेश; 41 नाबालिगों को हिरासत में रखकर उत्पीड़न?
क्विल फॉउंडेशन, बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था हक और सिटिज़न्स अगेंस्ट हेट की तरफ से एक नयी फैक्ट फाइंडिंग इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Feb 2020
CAA UP
Image courtesy: The Indian Express

संशोधित नागरिकता कानून के ख़िलाफ़ पूरे देश में आंदोलन जारी है। दिसंबर से ये सिलसिला चल रहा है। देश के अलग-अलग इलाकों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और सरकारों की तरफ से इस विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गयी। लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकर ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ बहुत ही क्रूर ढंग से कार्रवाई की। सरकार की क्रूर कार्रवाई की गवाह बनी सोशल मीडिया पर इस सिलसिले के कई सारे वीडियो और तस्वीरें हैं। जिन्हें आप कभी भी देख सकते हैं। इस क्रूरता के खिलाफ सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया और पुलिस दमन पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इसी कड़ी में क्विल फॉउंडेशन, बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था हक और सिटिज़न्स अगेंस्ट हेट की तरफ से एक नयी फैक्ट फाइंडिंग इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है।

यह नई रिपोर्ट संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ 18 साल से कम बच्चों के साथ की गए पुलिसिया दमन पर आधारित है। इस फैक्ट फाइंडिंग टीम में शामिल लोगों ने 10 से 24 जनवरी 2020 तक उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर, फिरोजाबाद और बिजनौर का दौरा किया।

क्या कहती है रिपोर्ट?

इन संगठनों के मुताबिक इनकी जांच में पता चला कि तकरीबन 41 नाबालिगों को हिरासत में रखा गया। आरोप है कि इन्हें हिरासत में टॉर्चर किया गया। इनमें से 22 नाबालिग को बिजनौर में हिरासत में रखा गया था। मुजफ्फरनगर में 14 नाबालिगों को हिरासत में रखा गया। इनमें से चार नाबलिगों को जब डिटेंशन से 12 दिन बाद छोड़ दिया गया तब इनपर एफआईआर दर्ज कर दी गई।

दो नाबालिग अभी भी फिरोज़ाबाद पुलिस की हिरासत में है। अभी इन्हें किसी तरह की क़ानूनी मदद नहीं मिली है और न ही किसी तरह का मीडिया कवरेज मिला है।लखनऊ में पुलिस की गोली से घायल दो नाबालिगों को हिरासत में रखा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान वाराणसी में एक आठ साल का बच्चा भगदड़ में मर गया। पुलिस बलों के कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के बीच इस लड़के को दफनाया गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस का दमनात्मक रवैया

-हिरासत में रखे जिन नाबालिगों से भी टीम ने बात की सबने यह कहा कि पुलिस ने उन्हें लाठियों से मारा है। वे सभी अपने शरीर पर गहरे निशान लेकर वापस घर लौटे। सबके शरीर किसी हिस्से में फ्रैक्चर है।

- बिजनौर में ठंड में रात का तापमान छह डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। बिजनौर में जिन्हें हिरासत में रखा गया था, सोने के लिए कुछ भी नहीं मुहैया करवाया गया। कड़कड़ाती ठंड में इन्होंने बिना गरम कपड़े के रात गुजारी। जब भी इन्होंने सोने की कोशिश की तो पुलिस द्वारा इन्हें मारा गया।

- नाबलिगों को पानी पीने और खाना खाने से रोका गया। पेशाब करने से रोका गया। शौच जाने पर पानी नहीं दिया गया।

- मुजफ्फनगर में नाबलिगों ने रोज़ा के लिए उपवास रखा लेकिन उन्हें अपना उपवास तोड़ने के लिए पानी नहीं दिया गया। जयश्री राम बुलवाने के लिए इनके साथ जोर- जबरदस्ती की गयी।

- ज्यादातर मामलों में यूपी पुलिस ने नाबालिगों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से धमकी दी। सबको कहा कि वह किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन में शामिल न हो।  

- मुजफ्फरनगर में नाबालिगों को उनके अभिभावकों के हस्ताक्षर के बाद ही छोड़ा गया। हलफनामों में यह लिखवाया गया कि पुलिस के हाथों से कोई गलत व्यवहार या यातना नहीं दी गयी है।

- वाराणसी में पुलिस कार्रवाई में एक नाबालिग की मौत हो गयी। इस खबर को दबा दिया गया। सुरक्षा बलों की निगरानीं में इस लाश को कब्रिस्तान में दफना दिया गया।

कानूनों का उल्लंघन

किशोर न्याय अधिनियम (2015) के तहत किसी भी नाबालिग के साथ पुलिस को किसी भी तरह की कार्रवाई करने का हक नहीं है। अगर नाबालिग ने कोई गलती की है तो उसे जिला किशोर न्याय बोर्ड के पास ले जाना जरूरी है। लेकिन यहां पर पुलिस ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। यह कानून हर नाबालिग को निजता का अधिकार देता है कि उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जाए। नाबलिगों को लेकर वैश्विक कानून भी ऐसे ही हैं, उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन सभी कानूनों का उल्लंघन किया है।

मांग

20 दिसंब, 2019 के बाद नाबालिगों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस तरह की क्रूरता की है, उसकी तीन महीनें के भीतर न्यायिक जाँच होनी चाहिए। और जिन पुलिस वालों ने इसमें सज़ा पाने लायक काम किया है , उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

UttarPradesh
Protest against CAA
Protest against NRC
NRC-CAA-NPR
Harassment detaining minors
UP police
Yogi Adityanath
yogi sarkar
BJP
Narendra modi
Amit Shah

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?


बाकी खबरें

  • crime against children
    सबरंग इंडिया
    2020 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.28 लाख से अधिक मामले, फिर भी इस मुद्दे पर घोर सन्नाटा
    23 Sep 2021
    दिल्ली के श्मशान में दलित बच्ची से दुष्कर्म और हत्या का खौफनाक खुलासा, राजस्थान में एक और बच्ची से रेप की खबर आई सामने
  •  Bengal
    भाषा
    बंगाल : बस के नहर में गिरने से छह प्रवासी मजदूरों की मौत
    23 Sep 2021
    पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में एक बस के नहर में गिरने से छह प्रवासी मजदूरों की मौत हो गयी
  • SC
    भाषा
    पेगासस मामला : न्यायालय स्वतंत्र जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर अगले हफ्ते सुनाएगा फैसला
    23 Sep 2021
    पीठ ने कहा, ‘‘हम अगले सप्ताह तक तकनीकी विशेषज्ञ दल के सदस्यों के नाम तय कर पाएंगे और फिर अपना आदेश देंगे।’’
  • Uttarakhand
    अजीत सिंह
    अक्षय ऊर्जा योजना की आड़ में कंपनियों ने कब्ज़ा ली सरकारी और ग्रामीणों की ज़मीनें
    23 Sep 2021
    गांव वालों की तरफ से शिकायत से जुड़ी सारी प्रक्रिया पूरा करने के बाद भी जिलाधिकारी का कहना है कि उन्हें मामले का पता ही नहीं है।
  • Will Taliban Rule in Afghanistan
    अमिताभ रॉय चौधरी
    क्या तालिबानी हुकूमत से तापी परियोजना में आएगी जान, भारत को होगा फायदा?
    23 Sep 2021
    अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के साथ, तापी (तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत) गैस पाइप लाइन परियोजना को गति मिल सकती है, जो अंततः भारत को फायदा दे सकती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License