NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
...यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़/ न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई
भारतीय उपमहाद्वीप के शानदार शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का आज जन्मदिन है। 110वीं सालगिरह। इस मौके पर फिर पढ़ते हैं उनकी एक बेहतरीन नज़्म “निसार मैं तेरी गलियों के अए वतन…” जो आज और भी मौज़ूं है।
न्यूज़क्लिक डेस्क
13 Feb 2021
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

निसार मैं तेरी गलियों के अए वतन, कि जहाँ

चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले

जो कोई चाहने वाला तवाफ़ को निकले

नज़र चुरा के चले, जिस्म-ओ-जाँ बचा के चले

 

है अहल-ए-दिल के लिये अब ये नज़्म-ए-बस्त-ओ-कुशाद

कि संग-ओ-ख़िश्त मुक़य्यद हैं और सग आज़ाद

 

बहोत हैं ज़ुल्म के दस्त-ए-बहाना-जू के लिये

जो चंद अहल-ए-जुनूँ तेरे नाम लेवा हैं

बने हैं अहल-ए-हवस मुद्दई भी, मुंसिफ़ भी

किसे वकील करें, किस से मुंसिफ़ी चाहें

 

मगर गुज़रनेवालों के दिन गुज़रते हैं

तेरे फ़िराक़ में यूँ सुबह-ओ-शाम करते हैं

 

बुझा जो रौज़न-ए-ज़िंदाँ तो दिल ये समझा है

कि तेरी मांग सितारों से भर गई होगी

चमक उठे हैं सलासिल तो हमने जाना है

कि अब सहर तेरे रुख़ पर बिखर गई होगी

 

ग़रज़ तसव्वुर-ए-शाम-ओ-सहर में जीते हैं

गिरफ़्त-ए-साया-ए-दिवार-ओ-दर में जीते हैं

 

यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़

न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँ ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग में फूल

न उनकी हार नई है न अपनी जीत नई

 

इसी सबब से फ़लक का गिला नहीं करते

तेरे फ़िराक़ में हम दिल बुरा नहीं करते

 

ग़र आज तुझसे जुदा हैं तो कल बहम होंगे

ये रात भर की जुदाई तो कोई बात नहीं

ग़र आज औज पे है ताल-ए-रक़ीब तो क्या

ये चार दिन की ख़ुदाई तो कोई बात नहीं

 

जो तुझसे अह्द-ए-वफ़ा उस्तवार रखते हैं

इलाज-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-निहार रखते हैं

 

-         फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

(कविता कोश से साभार)

Faiz Ahmed Faiz
110th Birth Anniversary
nazm

Related Stories

फ़ैज़: हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है... आजिज़ी सीखी ग़रीबों की हिमायत सीखी

विशेष: एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाज़ें दो

...मेरे महबूब यहीं आके मिला कर मुझसे

तुम किसानों को सड़कों पे ले आए हो/ अब ये सैलाब हैं/ और सैलाब तिनकों से रुकते नहीं

हल चलाने वालों का कोई हल नहीं है, क्यों?

ईद मुबारक...आइए हाथ उठाएँ हम भी, हम जिन्हें रस्म-ए-दुआ याद नहीं...

तिरछी नज़र : "हम देखेंगे...", कि हमें कुछ भी न दिखे

मैं हिन्दुस्तान की बेटी हूं... हर रंग में मैं मिलती हूं

उसने गोली चलाई और कहा, 'सर जी! हालात कंट्रोल में हैं'…

'कव्वाली यहां नहीं चलेगी'...क्यों नहीं चलेगी? क्योंकि योगी जी आने वाले हैं!


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    मुद्दा: बिखरती हुई सामाजिक न्याय की राजनीति
    11 Apr 2022
    कई टिप्पणीकारों के अनुसार राजनीति का यह ऐसा दौर है जिसमें राष्ट्रवाद, आर्थिकी और देश-समाज की बदहाली पर राज करेगा। लेकिन विभिन्न तरह की टिप्पणियों के बीच इतना तो तय है कि वर्तमान दौर की राजनीति ने…
  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License