NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
कृषि-क़ानून : इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद, यूपी के किसानों को भेजा गया पर्सनल बॉन्ड का नोटिस 
मुज़फ़्फ़रनगर में हुई महापंचायत के बाद आंदोलन से जुड़े कम से कम 200 किसानों को नोटिस दिए गए और कहा गया कि वे सब दो लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरें जिससे प्रदेश में "शांति व्यवस्था सुनिश्चित" की जा सके।
अब्दुल अलीम जाफ़री, सुमेधा पाल
09 Feb 2021
Translated by महेश कुमार
कृषि-क़ानून : इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद, यूपी के किसानों को भेजा गया पर्सनल बॉन्ड का नोटिस 

अब जब पूरे भारत का व्यापक किसान आंदोलन विश्व का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने लगा है तो उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारी किसानों में भय का माहौल पैदा करने की मुहिम शुरू हो गई है। यह भय संगठनों और किसान आंदोलन के नेताओं के खिलाफ ज़मानती बांड जारी करके चलाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान नेताओं को नए नोटिस दिए गए हैं, कि उन्हें "शांति बनाए रखने" के निजी मुचलका भरना पड़ेगा। जबकि युवा प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें भयभीत किया जा रहा है, लेकिन किसान नेताओं ने पीछे न हटने की कसम खाई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक बड़ी महापंचायत के बाद और कृषि-कानूनों  के खिलाफ किसान-आंदोलन से जुड़े कम से कम 200 किसानों को इस तरह के नोटिस व्हेजे गए हैं और उनसे दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है ताकि प्रदेश में "शांति सुनिश्चित" की जा सके। प्रशासन ने कहा है कि ये बांड पंचायत स्तर पर शांति सुनिश्चित करने के लिए भरवाए जा रहे हैं और अगर सार्वजनिक संपत्ति का कोई नुकसान होता है तो इसे नेताओं से वसूला जा सकता है।

हालाँकि, ये सिर्फ किसान नेता ही नहीं हैं बल्कि छोटे वालिंटियर भी हैं जो अपने परिवारों के साथ आंदोलन में शारीक होने का खामियाजा भुगत रहे हैं।

"हम अपने भविष्य के लिए चिंतित हैं" - वालंटियर्स

अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक सीतापुर, लखीमपुर और शाहजहाँपुर और कई अन्य जिलों में नोटिस भेजे गए हैं। हालांकि इस तरह के नोटिस इस साल के जनवरी में भी भेजे गए थे, युवाओं के मुताबिक तब से पुलिस अधिकारी आए दिन थाने में बुलाते हैं और पेश होने के साथ भारी रकम भी मांगते हैं।

सीतापुर से 22 वर्षीय हरविंदर सिंह (नाम बदला हुआ), जो गाजीपुर के विरोध स्थल पर सेवा कर रहे थे, उन्हें भी एक ऐसा ही नोटिस मिला और पांच लाख रुपये का बांड भरने को कहा गया। उनके पिता ने स्थिति को सँभाल लिया लेकीन कई अन्य लोगों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

न्यूजक्लिक से बात करते हुए, उन्होंने बताया: “मुझे इस साल जनवरी में भी नोटिस भेजा गया था। मेरे माता-पिता ने तब मामले को सुलझा लिया था, हालांकि, कई अभी भी पुलिस से डरे हुए हैं। पूरे जिले में कई घरों को नोटिस भेजे गए हैं, और अब तक हजारों नोटीस जारी किए जा चुके हैं। जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हे रोजाना फोन आते हैं कि वे अपना बयान दर्ज़ करें और साथ ही रकम का भुगतान भी करें। बिना किसी गलती के सरकार हम पर नकेल कसती रहती है। मेरे पिता एक किसान हैं, मैं किसान आंदोलन की सेवा में दिल्ली सीमा पर काम कर रहा था; लेकिन अब हमें अपने भविष्य का डर हैं।”

 उन्होंने बताया कि, "दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध में शामिल होने से पहले ही उन सबको नोटिस भेज दिए गए थे, गांवों में नज़र रखी जा रही है कि कौन आंदोलन में भाग ले रहा है,"।  

एक वॉलंटियर को भेजा गया नोटिस 

नोटिस को सही ठहराते हुए, सीतापुर के एसडीएम अमित भट्ट ने न्यूज़क्लिक को बताया कि नोटिस का किसानों के आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। “उत्तर प्रदेश में जल्द ही पंचायत चुनाव होने वाले हैं। ये नोटिस आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीसी की धारा 107 और 116 के तहत जारी किए जा रहे हैं। नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही लगभग 700 और लोगों को इस तरह के नोटिस जारी किए जाएंगे।''

कानूनी हस्तक्षेप के बावजूद नोटिस जारी 
पिछले हफ्ते, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य के अधिकारियों से पूछा था कि एसडीएम ट्रैक्टरों वाले किसानों को नोटिस क्यों जारी कर रहे थे, जिसमें उन्हें "भारी रकम के व्यक्तिगत बांड" भरने को कहा गया था। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि "उसने उन किसानों के खिलाफ कार्यवाही करने का फैसला त्याग दिया है जिनके पास ट्रैक्टर होने के नाते नोटिस जारी किए गए थे, और किसान आंदोलन के मद्देनजर उनसे 'भारी रकम वाले व्यक्तिगत बॉन्ड' (प्रत्येक से 10 लाख तक की राशि) भरने को कहा गया था।"

लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नज़र नहीं आता है। 

पश्चिमी यूपी के किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की धमकी और दादागिरी की शिकायत की क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले तीन दिनों में 50 से अधिक किसान नेताओं को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं।

राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के पूर्व विधायक वीरपाल राठी को भी 31 जनवरी को बागपत जिले की  बड़ौत तहसील में हुई एक महापंचायत में भाग लेने से एक दिन पहले छह अन्य लोगों के साथ नोटिस थमा दिया गया था। सरकार ने किसानों को आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए ये नोटिस जारी किए थे। 30 जनवरी को मुझे नोटिस मिला और जब मैंने जिला प्रशासन से  बात करने के लिए उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने नोटिस न जारी करने की बात कही। इस तरह के हथकंडों को अपना कर प्रशासन किसानों के खिलाफ कानून का दुरुपयोग कर रहा है ताकि उनकी आवाज़ को दबाया जा सके।”

वीरपाल राठी को मिला नोटिस 

जब से प्रशासन ने महापंचायतों में शामिल होने के लिए नोटिस भेजना शुरू किया है तब से गन्ना बेल्ट में गुस्सा और असंतोष बढ़ा है।

बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने न्यूजक्लिक को बताया: “इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने सूचित किया है कि उसने सीतापुर के 162 किसानों के खिलाफ कार्यवाही त्याग दी है, जिन्हें 10 लाख रुपये के व्यक्तिगत बांड के नोटिस भेजे गए थे। फिर महापंचायत में भाग लेने के लिए प्रशासन ने किसानों को नोटिस क्यों जारी किए?" टिकैत ने कहा कि यह अदालत की अवमानना है। बीकेयू के प्रवक्ता ने आगे कहा कि किसान इस तरह के नोटिसों से नहीं डरेंगे और कृषि-कानूनों का विरोध करेंगे।

कई किसानों ने आरोप लगाया है कि आगरा पुलिस ने बिना कोई कॉपी दिए उनसे कागजात पर जबरन हस्ताक्षर करवाए हैं। उन्हें स्थानीय अदालत के समक्ष पेश होने को कहा गया है। आगरा के एक किसान नेता, श्याम सिंह चाहर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और "5 लाख रुपये का ज़मानती बॉन्ड भरवाया गया ताकि वे आंदोलन में शरीक न हों और कानून की हद में रहें।  

श्याम सिंह को भेजा नोटिस 

“जिला प्रशासन मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दे रहा है। उन्होंने मुझसे पाँच लाख का बॉन्ड भरने को कहा है। महिलाओं सहित कई अन्य किसान हैं, जिन्हें पांच लाख रुपये के बांड जमा करने का आदेश दिया गया था। उन्हें पता है कि हमारे पास इतनी रकम नहीं है, ”चाहर ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सवाल दागा कि आखिर प्रशासन किसानों के विरोध से क्यों डरता है। “पुलिस मुझे और मेरे परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रही है। उन्होंने मुझे किसान आंदोलन से दूर रहने को कहा है। मैं तीन कृषि-कानूनों के खिलाफ सार्वजनिक सभा करना जारी रखूंगा। मैं अंजाम से नहीं डरता हूं, ”चाहर ने कहा। 

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड के बाद, दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं सहित 50 से अधिक अन्य लोगों को नोटिस भेजा है।

दिल्ली पुलिस ने पहले 44 लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किए थे। दिल्ली पुलिस की टीमें राष्ट्रीय राजधानी के बाहर कई स्थानों सहित “पंजाब और हरियाणा में जांच कर रही हैं, ताकि हिंसा में शामिल लोगों को पकड़ा जा सके। वे लाल किले पर झण्डा फहराने वालों की भी तलाश कर रहे हैं।”

दिसंबर महीने में भी किसान नेताओं को कृषि-कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने और अन्य किसानों को "उकसाने" से रोकने के लिए 50 लाख रुपये का व्यक्तिगत बांड जमा करने को कहा गया था। बाद में यूपी पुलिस ने बताया कि यह "लिपिकीय त्रुटि" थी और इसे घटाकर 50,000 रुपये कर दिया गया था। हालांकि, नेताओं ने कहा कि इस तरह के नोटिस जारी करना "लोकतांत्रिक विरोध" का गला घोटना है। 

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Farm Laws: Despite Allahabad HC Order, UP Farmers Served Notices for Personal Bonds

Farm Laws
BKU
UP Farmers
Kisan Mahapanchayat
farmers protest
Farm Bills
UP
rakesh tikait
Western UP
Police notices
BJP
Narendra modi
Yogi Adityanath

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • BIRBHUMI
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है
    30 Mar 2022
    शायद पहली बार टीएमसी नेताओं ने निजी चर्चा में स्वीकार किया कि बोगटुई की घटना से पार्टी की छवि को झटका लगा है और नरसंहार पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री के लिए बेहद शर्मनाक साबित हो रहा है।
  • Bharat Bandh
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के द्वारा आवाह्न पर किए गए दो दिवसीय आम हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और…
  • IPTA
    रवि शंकर दुबे
    देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'
    29 Mar 2022
    किसानों और मज़दूरों के संगठनों ने पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल की। जिसका मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। वहीं हड़ताल के समर्थन में कई नाटक मंडलियों ने नुक्कड़ नाटक खेलकर जनता को जागरुक किया।
  • विजय विनीत
    सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी
    29 Mar 2022
    "मोदी सरकार एलआईसी का बंटाधार करने पर उतारू है। वह इस वित्तीय संस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। कारपोरेट घरानों को मुनाफा पहुंचाने के लिए अब एलआईसी में आईपीओ लाया जा रहा है, ताकि आसानी से…
  • एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई
    29 Mar 2022
    इज़रायली विदेश मंत्री याइर लापिड द्वारा दक्षिणी नेगेव के रेगिस्तान में आयोजित अरब राजनयिकों का शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक परिघटना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License