NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
किसानों, स्थानीय लोगों ने डीएमके पर कावेरी डेल्टा में अवैध रेत खनन की अनदेखी करने का लगाया आरोप
खनन की अनुमति 3 फ़ीट तक कि थी मगर 20-30 फ़ीट तक खनन किया जा रहा है।
श्रुति एमडी
18 May 2022
Translated by महेश कुमार
Illegal mining
सीपीआई (एम) के नेतृत्व में स्थानीय लोगों और किसानों ने तमिलनाडु के मयिलादुथुराई में कावेरी डेल्टा में रेत के अंधाधुंध खनन का विरोध किया। छवि सौजन्य: पी षणमुगम

कावेरी डेल्टा जिलों के किसानों और स्थानीय लोगों ने सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार पर नदी बेसिन में रेत के अंधाधुंध खनन के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया है।

अदालत के आदेशों और अवैध गतिविधियों की पुष्टि करने वाली कई रिपोर्टों के मिलने के बावजूद, इस क्षेत्र में खनन की तीन फीट की अनुमत सीमा के मुकाबले 20-30 फीट गहरे तक रेत का खनन किया जा रहा है, जबकि इसे फरवरी 2020 में संरक्षित कृषि क्षेत्र घोषित कर दिया गया था।

रेत का बेरोकटोक खनन भूजल स्तर को प्रभावित कर रहा है, जो भूमि को खारा बना रहा है, लेकिन बावजूद इसके कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई)  अधिक रेत खदानों की मांग कर रही है।

रेत की लूट का विरोध

2,000 से अधिक स्थानीय लोगों और किसानों ने भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व में 5 मई को कलेक्टर कार्यालय के सामने आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में भाग लिया, और इसके माध्यम से कावेरी नदी की उत्तरी शाखा कोलिडम नदी में मयिलादुथुराई जिले के सामने अवैध रेत खनन को समाप्त करने की मांग की है। 

मयिलादुथुराई के माकपा के सचिव, टी श्रीनिवासन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "कोलिडम नदी में तट पर जलाशय के ठीक बगल में दो खदानें हैं, जो अवैध है"। “वे रेत खनन के लिए अनुमत सीमा से 30 से 35 गुना अधिक लूट रहे हैं या खनन कर रहे हैं। यह ख़तरनाक है। पानी का खारापन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि जितना अधिक वे खोदते हैं, उतना ही अधिक खारा पानी मीठे पानी में मिल जाता है। उस पानी का उपयोग खेती और पीने के लिए नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, खनन से नदी एक दलदल वाली भूमि बन जाएगी।”

श्रीनिवासन के अनुसार, कोलिडम नदी मयिलादुथुराई, तंजावुर, पुदुक्कोट्टई, शिवगंगई और रामनाथपुरम जिलों में लगभग 2.5 करोड़ लोगों को पीने के पानी का प्रदान करती है। “स्पष्ट रूप से रेत लूट के प्रमाण के बावजूद, स्थानीय द्रमुक सदस्य इसे गाद निकालने की प्रक्रिया बता रहे  हैं। वे इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि बाढ़ को रोकने के लिए गाद निकालना जरूरी है।"

इसके अलावा, रेत को कथित रूप से काला बाजार में 10,000 रुपये से 11,000 रुपये प्रति यूनिट बेचा जा रहा है जबकि सरकारी दर 1,000 रुपये प्रति यूनिट है।

पारिस्थितिक प्रभाव

मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के एक सेवानिवृत्त फेकल्टी सदस्य और जल प्रबंधन के विशेषज्ञ एस. जनकराजन ने कहा कि, “रेत, जिसे जमा करने में बहुत समय लगता है, बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पानी को संग्रहीत करता है और नदी के किनारे का जलभृत बनाता है। यहां तक ​​कि अगर नदी सूख भी जाती है, तो भी जलभृत पानी रोके रखता है जिसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।”

जनकराजन ने बताया कि, रेत की मात्रा के आधार पर, "उस हद तक ही खनन किया जा सकता जिस हद तक जलभृत अछूता रहे। पल्लार नदी में एक बहुत समृद्ध जलभृत था लेकिन हमने उसे खो दिया।" दूसरी ओर, "नदी के प्रवाह के वेग को अपस्ट्रीम से डाउनस्ट्रीम तक बनाए रखने के लिए नियमित रूप से गाद निकालना आवश्यक है। प्रवाह में रोज़ाना की गिरावट और गुरुत्वाकर्षण को बनाए रखना होगा। यदि कुछ स्थानों पर अत्यधिक गाद निकाल दी जाती है, तो पानी फंस जाएगा और प्रवाह में बाधा उत्पन्न होगी।

जनकराजन ने कहा कि, गाद निकालने के नाम पर “अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है। यह नदी और स्थानीय क्षेत्र दोनों के लिए बुरा है। जलभराव सूख जाएगा। कई जगहों पर मिट्टी दिखाई दे रही है जिसके बाद पानी नहीं बह पाएगा। इसे इस मुकाम तक कभी नहीं पहुंचना चाहिए था।”

धमकियों के सामने नहीं झुकना 

श्रीनिवासन ने आरोप लगाया कि खनिकों का विरोध करने वालों को एजेंट धमका रहे हैं। "वे कहते हैं, 'तुम खुले में नहीं घूम पाओगे।' वे सोशल मीडिया पर हमें गालियां दे रहे हैं। हमने संबंधित अधिकारियों को तीन ज्ञापन सौंपे हैं। पुलिस ने कहा है कि उनके हाथ बंधे हुए हैं।"

सत्ता में आने से पहले, डीएमके ने मांग की कि कावेरी डेल्टा को संरक्षित कृषि क्षेत्र घोषित किया जाए। 2020 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, एआईएडीएमके के मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीसामी ने कावेरी डेल्टा के आठ जिलों को एक विशेष संरक्षित कृषि क्षेत्र में वर्गीकृत किया था।

12 मई को तमिलनाडु संरक्षित कृषि क्षेत्र विकास प्राधिकरण की पहली बैठक में सीएम एमके स्टालिन ने बड़े वादे करते हुए कहा था कि सरकार, कावेरी डेल्टा में कृषि गतिविधियों को प्रभावित करने वाले किसी भी उद्योग को अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा, "यह सरकार किसानों और कृषि के हितों की रक्षा करने और कृषि से जुड़े उद्योगों में रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने पर केंद्रित रहेगी।" हालांकि, हकीकत इससे काफी अलग है।

माकपा ने दोहराया है कि स्टालिन को राज्य विधानसभा में अवैध रेत खनन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करनी चाहिए। मांग पूरी नहीं होने पर पार्टी जल्द ही अगला विरोध प्रदर्शन करेगी।

Sand Mining in Cauvery Basin
DMK Government
Tamil Nadu protected agricultural zone
farmers
Cauvery Delta
MK Stalin
AIADMK

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

तमिलनाडु : विकलांग मज़दूरों ने मनरेगा कार्ड वितरण में 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • J&K
    जसविंदर सिद्धू
    'कश्मीर में नागरिकों की हत्याओं का मक़सद भारत की सामान्य स्थिति की धारणा को धूमिल करना है'—मिलिट्री थिंक-टैंक के निदेशक
    20 Oct 2021
    मौजूदा हालात सीपीओ (केंद्रीय पुलिस संगठन) बलों के लिए और ज़्यादा समस्यायें पैदा करने वाले इसलिए हैं क्योंकि अब सेना को उन इलाक़ों में तैनात नहीं किया जाता है, जिन इलाक़ों में इमारतें हैं या घनी आबादी…
  • पार्थ एस घोष
    कैसे कश्मीर, पाकिस्तान और धर्मनिर्पेक्षता आपस में जुड़े हुए हैं
    20 Oct 2021
    हिंदुत्व को बढ़ावा देना पाकिस्तान की सैन्य-नौकरशाही एजेंसी द्वारा बिछाए गए जाल में फंसने जैसा है। धर्मनिर्पेक्षता को नकारना दक्षिण एशिया के सामाजिक ताने-बाने की बर्बादी का कारण बन सकता है।
  • Bhutan
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत के निर्णयों को प्रभावित करने वाले नैरेटिव और ज़मीनी हक़ीक़त में इतना अंतर क्यों है? 
    20 Oct 2021
    भूटान और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को थिम्पू में हस्ताक्षरित 'रोडमैप' ने तो भारत के डोकलाम-नैरेटिव में एक बड़ा सुराख कर दिया है, इतना बड़ा कि उस से होकर अब…
  • valmiki
    राज वाल्मीकि
    महर्षि वाल्मीकि जयंती के बहाने स्वच्छकार समाज को धर्मांध बनाए रखने की साज़िश!
    20 Oct 2021
    ये समाज कभी नहीं सोचेगा कि ये आमंत्रित अतिथिगण जिन महर्षि वाल्मीकि जी की इतनी प्रशंसा कर रहे हैं, जिनके पदचिह्नों पर चलने का उपदेश दे रहे हैं, उनकी तस्वीर तक अपने घर में नहीं लगाते हैं। जिस स्वच्छकार…
  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर : कश्मीर हिंसा या सिंघु लिंचिंगः साज़िश ही साज़िश
    19 Oct 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने कश्मीर में बढ़ती हिंसा और सिंघु बॉडर में हुई लिंचिग के पीछे की साज़िश पर कश्मीर के नेता यूसुफ़ तारागामी और अर्थशास्त्री नवशरण कौर से बातचीत की। एक तरफ़ किसान…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License