NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को दिल्ली में ‘किसान परेड’
शनिवार को किसान नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उनकी प्रस्तावित परेड ‘किसान परेड’ के नाम से होगी और यह गणतंत्र दिवस परेड के बाद शुरू होगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Jan 2021
मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को दिल्ली में ‘किसान परेड’

दिल्ली: सरकार के साथ अगले दौर की वार्ता से पहले अपने रुख को और सख्त करते हुए प्रदर्शनकारी किसानों के संगठनों ने शनिवार को कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा होगा, तब दिल्ली की ओर ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन राष्ट्रीय राजधानी में होंगे और गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर होने वाली परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।

शनिवार दोपहर राजधानी दिल्ली के प्रेस क्लब में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं ने अपने आगामी कार्यक्रम का खुलासा किया। किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि उनकी प्रस्तावित परेड ‘ किसान परेड’ के नाम से होगी और यह गणतंत्र दिवस परेड के बाद शुरू होगी।

गौरतलब है कि सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के बीच अगले दौर की वार्ता चार जनवरी को प्रस्तावित है। संगठनों ने कहा शुक्रवार को कहा था कि अगर गतिरोध दूर करने के लिए होने वाली बैठक असफल होती है तो उन्हें ठोस कदम उठाना होगा।

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का किसानों की 50 प्रतिशत मांगों को स्वीकार करने का दावा ‘सरासर झूठ’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अब तक लिखित में कुछ नहीं मिला है।’’

बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के बीच प्रस्तावित बिजली विधेयक एवं पराली जलाने पर जुर्माना के मुद्दे पर कथित तौर पर सहमति बनी थी, लेकिन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले  ने कहा कि यह कहना अनुचित होगा कि यह केवल किसान हैं, हालांकि आंदोलन का नेतृत्व किसान जरूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह लोगों का आंदोलन है और अब आम लोगों की आवाज को दरकिनार करना असंभव है। जब तक कानूनों को रद्द नहीं किया जाता और एमएसपी कानून पारित नहीं किया जाता, तबतक हम वापस नहीं जा रहे हैं। लंबे समय तक लोगों को उत्पीड़ित और अपमानित किया गया। हम इसे अब स्वीकार नहीं करेंगे। पिछले 35 सालों से नवउदारवादी नीतियों के वजह से 4 लाख किसानों ने आत्महत्या की है। क्योंकि वो कर्ज में थे।  

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘‘पिछली बैठक में हमने सरकार से सवाल किया कि क्या वह 23 फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘नहीं। फिर आप देश की जनता को क्यों गलत जानकारी दे रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अबतक हमारे प्रदर्शन के दौरान करीब 50 किसान ‘शहीद’ हुए हैं।’’

गौरतलब है कि दिल्ली की सीमा पर तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हजारों किसान कड़ाके की सर्दी के बावजूद गत 37 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसानों का साफ मानना है कि तीन नए कानून खेती-किसानों को गुलामी को ओर धकेल देंगे। इससे धीरे-धीरे मंडी व्यवस्था और एमएसपी समाप्त हो जाएगी और वे उद्योगपतियों की दया पर आश्रित हो जाएंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को तीव्र और गहरा करने के लिए 26 जनवरी 2021 तक अपनी कार्य योजना की घोषणा की है। जो इस प्रकार है :-

4 जनवरी - सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत

6 जनवरी - केएमपी राजमार्ग पर ट्रैक्टर मार्च, सरकार के साथ वार्ता में प्रगति के आधार पर;

7 से 20 जनवरी - देश जागृति अभियान पखवाड़ा - राष्ट्रव्यापी कार्य - जिला स्तरीय धरना, रैलियां, प्रेस कॉन्फ्रेंस आदि।

18 जनवरी - महिला किसान दिवस।

23 जनवरी - सुभाष चंद्र बोस जयंती - किसान चेतना दिवस।

26 जनवरी ; दिल्ली और देश भर में किसानों की गणतंत्र परेड ।

# अगले हफ्ते कुछ निश्चित तारीख - अगर सरकार के साथ कोई प्रगति नहीं होती है, तो शाहजहांपुर सीमा नाकाबंदी को दिल्ली की ओर ले जाया जाएगा

# पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम जारी रहेंगे:

#अडानी / अंबानी के उत्पादों और सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा

# एनडीए के सहयोगियों को एनडीए छोड़ने और बीजेपी के साथ साझेदारी छोड़ने के लिए प्रदर्शन जारी रहेगा
#पंजाब और हरियाणा में टोल प्लाजा को टोल-फ्री रखा जाएगा

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

farmers protest
Farm bills 2020
Farm Laws
Farmer Government Meeting
farmers protest update

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

कृषि क़ानूनों के निरस्त हो जाने के बाद किसानों को क्या रास्ता अख़्तियार करना चाहिए

इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा


बाकी खबरें

  • Ukraine
    सी. सरतचंद
    यूक्रेन युद्ध की राजनीतिक अर्थव्यवस्था
    01 Mar 2022
    अन्य सभी संकटों की तरह, यूक्रेन में संघर्ष के भी कई आयाम हैं जिनकी गंभीरता से जांच किए जाने की जरूरत है। इस लेख में, हम इस संकट की राजनीतिक अर्थव्यवस्था की पृष्ठभूमि की जांच करने की कोशिश करेंगे।
  • Chamba Tunnel
    सीमा शर्मा
    जाने-माने पर्यावरणविद् की चार धाम परियोजना को लेकर ख़तरे की चेतावनी
    01 Mar 2022
    रवि चोपड़ा के मुताबिक़, अस्थिर ढलान, मिट्टी के कटाव और अनुक्रमित कार्बन(sequestered carbon) में हो रहे नुक़सान में बढ़ोत्तरी हुई है।
  • UP Election
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: 'कमंडल' पूरी तरीके से फ़ेल: विजय कृष्ण
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव में इन दिनों सत्ताधारी भाजपा जनता पार्टी के राज्य बिगड़ते जातीय समीकरणों पर काफी चर्चा चल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार जिन जातीय समीकरणों ने भाजपा को 2017 में सत्ता दिलाने में…
  • Manipur Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर चुनावः जहां मतदाता को डर है बोलने से, AFSPA और पानी संकट पर भी चुप्पी
    28 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने नौजवानों की राजनीतिक आकांक्षाओं और उम्मीदों को टटोला, साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता ओनिल से जाना पानी संकट और ड्रग्स पर भाजपा की चुप्पी का सबब। साथ ही भारत…
  • Modi
    सोनिया यादव
    काशी में पीएम मोदी ने 'राजनीतिक गिरावट' की कही बात, लेकिन भूल गए ख़ुद के विवादित बोल
    28 Feb 2022
    चुनावी रैलियों में पीएम मोदी ने भले ही बीजेपी के स्टार प्रचारक के तौर पर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों को ख़ुश किया होगा, लेकिन एक पीएम के तौर पर वो इस पद की गरिमा को गिराते ही नज़र आते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License