NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान संसद: अब देश चलाना चाहती हैं महिला किसान
बात बोलेगी: किसान आंदोलन के इतिहास में पहली बार इस तरह की अनूठी संसद हुई, जिसकी कमान महिला किसानों के हाथ थी। यहां से संदेश बिल्कुल साफ था केंद्र की मोदी सरकार के लिए कि अब राजनीतिक दावेदारी के लिए महिला किसान संसद कर मैदान में हैं।
भाषा सिंह
26 Jul 2021
किसान संसद: अब देश चलाना चाहती हैं महिला किसान

खेतों में भी हम कमाते हैं, देश को भी हम चलाएंगे,..घरों को भी हम चलाते हैं, देश को भी हम चलाएंगे, महिला शक्ति आई है, नई रोशनी लाई है... और यह नारे लगाते हुए महिला किसानों का जत्था अपनी अनोखी और ऐतिहासिक संसद सजाने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंच गया। देश की संसद के समानांतर, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्षरत किसानों ने किसान संसद का आह्वान किया और जंतर-मंतर पर रोजाना 200 किसान प्रतिनिधियों के साथ इसे शुरू किया।

इसी क्रम में आज, सोमवार, 26 जुलाई को महिला किसान संसद बुलाई गई थी। किसान आंदोलन के इतिहास में पहली बार इस तरह की अनूठी संसद हुई, जिसकी कमान महिला किसानों के हाथ थी। यहां से संदेश बिल्कुल साफ था केंद्र की मोदी सरकार के लिए कि अब राजनीतिक दावेदारी के लिए महिला किसान संसद कर मैदान में हैं। इसके साथ-ही-साथ संदेश साथ बैठे पुरुष किसानों को भी था कि महिलाएं खेती-किसानी के नीतिगत मामलों में उनके बराबर की समझ रखती हैं। जिस परिपक्वता से महिला किसानों ने आज संसद चलाई, उसने उनकी राजनीतिक दावेदारी को बेहद मजबूत किया।

नौजवान महिला नेताओं का जोश तो देखते ही बनता था, हरियाणा की महिला ने तो बाकायदा ऐलान किया, मोदीजी, गद्दी खाली करो, हम देश को चलाकर दिखाएंगे कि कैसे शासन करना चाहिए।

ट्रॉली टाइम्स (टीकरी से निकलने वाला किसानों का अखबार) की संपादक नवकिरन नट ने इसे महिला किसान आंदोलन की लंबी लड़ाई की जीत के रूप में देखा और कहा कि महिलाएं अब सीधे राजनीति में हिस्सा मांगने की तरफ बढ़ चली हैं और उनका यह कारवां बीच में रुकना संभव नहीं है।

महिला संसद को भी पूरी तरह से संसद के प्रोटोकॉल के मुताबिक चलाया गया। सारे प्रतिनिधियों को सभापति चुनी गई महिला किसान –सांसद कहकर बोलने के लिए आमंत्रित करती थी। साथ में एक महिला देश की कृषि मंत्री के पदभार का वहन करती थीं और बहस के अंत में वह खुलकर बताती थीं कि किस तरह से मोदी सरकार अंबानी-अडानी से पैसा लेकर यह तीनों कृषि कानून लाई हैं और क्यों इसे रद्द करने में इतनी मुश्किल हो रही है।

दो सत्रों में बंटी, महिला किसान संसद में तीनों कानूनों के तमाम प्रावधानों की कमियों का जिक्र करते चर्चा हुई। इससे किस तरह महंगाई बढ़ रही है, लोगों के लिए जीवन यापन करना कितना मुश्किल हो रहा है—इन सब पर महिला किसानों ने बहुत ही विस्तृत ढंग से चर्चा को संयोजित किया। हर वक्ता को दो-तीन मिनट का ही समय दिया गया था और सबने समय का ध्यान रखते अपनी बात रखी, नये बिंदुओं के साथ अपनी बात रखी।

पहले सत्र में बिंदू, एनी राजा औऱ जगमती सांगवान ने कमान संभाली—दूसरे सत्र में मेधा पाटकर भी शामिल रहीं। विस्थापन के खिलाफ देश भर में आंदोलन का प्रतीक रही मेधा पाटकर ने महिला किसान संसद को लोकतंत्र को जिंदा रखने की सबसे कामयाब मिसाल के रूप में देखा और यह भी दोहराया कि ये आंदोलन देश को बहुत कुछ सिखा रहा है और आगे भी सिखाएगा।

ये महिला किसान सांसद नारे लगाते हुए जंतर-मंतर पहुंची थीं। रास्ते में भीषण जांच-पड़ताल और पुलिसिया देरी-अड़चन से वे भले ही बहुत परेशान थीं, लेकिन इसकी रत्ती भर भी आंच उन्होंने संसद की कार्रवाई पर नहीं आने दी। अनुशासन इतना जबर्दस्त था कि खाने का समय भी हो गया था, सबको बहुत भूख भी लगी थी—मीटिंग स्थल के बाहर लंगर भी लग गया था और पुरुषों ने पंगत में खाना भी शुरू कर दिया था, लेकिन कोई महिला किसान प्रतिनिधि तब तक नहीं उठीं, जब तब सभापति ने इस बाबत घोषणा नहीं की। इसके साथ ही वे जितनी गहराई से इन तीनों कृषि कानूनी की बारीकियों और उससे जुड़े नुकसानों पर बात रख रही थीं, उससे उनकी विषय न सिर्फ मजबूत पकड़ सामने आई, बल्कि किसानों के पक्ष में कैसे कानून बनने चाहिए—देश की जरूरतों को कैसे संबोधित किया जाना चाहिए—इसका वैकल्पिक मॉडल भी सामने आया।

गौरतलब है कि पिछले साल, 26 नवंबर से दिल्ली की सरहदों पर तीन कृषि कानूनों (पहलाः कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण),दूसराः  कृषि (सशक्तिकरण और सरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून और तीसराः आवश्यक वस्तु संशोधन कानून)-) के खिलाफ देश के अन्नदाताओं ने मोर्चा खोल रखा है। आज यानी 26 जुलाई, 2021 को इस विरोध प्रदर्शन को चलते हुए 8 महीने पूरे हो गये। 

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

farmers protest
New Farm Laws
Farm bills 2020
kisan sansad
protest on jantar mantar
BJP
Congress
Monsoon Session Parliament
Women protest
SKM
women farmers

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • National Girl Child Day
    सोनिया यादव
    राष्ट्रीय बालिका दिवस : लड़कियों को अब मिल रहे हैं अधिकार, पर क्या सशक्त हुईं बेटियां?
    24 Jan 2022
    हमारे समाज में आज भी लड़की को अपने ही घर में पराये घर की अमानत की तरह पाला जाता है, अब जब सुप्रीम कोर्ट ने पिता की प्रॉपर्टी में बेटियों का हक़ सुनिश्चित कर दिया है, तो क्या लड़कियां पराया धन की बजाय…
  • social science
    प्रभात पटनायक
    हिंदुत्व नहीं, बल्कि नए दृष्टिकोण वाला सामाजिक विज्ञान ही दिमाग को उपनिवेश से मुक्त कर सकता है
    24 Jan 2022
    समाज विज्ञान, बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि तीसरी दुनिया की समस्याएं, सबसे बढक़र सामाजिक समस्याएं हैं। और तीसरी दुनिया के दिमागों के उपनिवेशीकरण का नतीजा यह होता है कि औपनिवेशिक दौर के…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    सिर्फ साम्प्रदायिक उन्माद से प्रचार होगा बीजेपी?
    24 Jan 2022
    अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि चुनाव से पहले टीवी चैनलों द्वारा दिखाए जा रहे सर्वे पर लगाम लगाई जाए। अभिसार शर्मा आज के एपिसोड में इस मुद्दे के साथ साथ भाजपा के सांप्रदायिक प्रचार…
  • Dera Ballan
    तृप्ता नारंग
    32% दलित आबादी होने के बावजूद पंजाब में अभी तक कोई कद्दावर एससी नेता नहीं उभर सका है: प्रोफेसर रोंकी राम 
    24 Jan 2022
    पंजाब की 32% अनुसूचित आबादी के भीतर जाति एवं धार्मिक आधार पर विभाजन मौजूद है- 5 धर्मों के 39 जातियों में बंटे होने ने उन्हें अनेकों वर्षों से अपने विशिष्ट एवं व्यवहार्य राज्य-स्तरीय नेतृत्व को विकसित…
  •  Bihar Legislative Council
    फ़र्रह शकेब
    बिहार विधान परिषद में सीट बंटवारे को लेकर दोनों गठबंधनों में मचा घमासान
    24 Jan 2022
    बिहार में इस वर्ष स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र से आने वाले बिहार विधान परिषद के 24 सदस्यों यानी सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसकी अधिसूचना अभी फ़िलहाल जारी नहीं हुई है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License