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राजनीति
मांगें न माने जाने पर किसान संगठनों का 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान
किसान आंदोलन कितना आगे बढ़ेगा या पीछे हटेगा इसका पूरा दारोमदार किसान नेताओं और सरकार के बीच शनिवार की बैठक पर है। किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि अगर बैठक में कोई बात नहीं बनती तो किसान न केवल आंदोलन तेज़ करेंगे, बल्कि 8 दिसंबर को भारत बंद भी करेंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Dec 2020
किसान

नयी दिल्ली: किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि अगर कल, 5 दिसंबर की बैठक में कोई बात नहीं बनती तो किसान न केवल आंदोलन तेज़ करेंगे, बल्कि 8 दिसंबर को भारत बंद भी करेंगे। उधर, दिल्ली समेत देशभर में किसान आंदोलन का समर्थन बढ़ता जा रहा है। अभी दो दिसंबर को वाम दलों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया था, आज दिल्ली में नागरिकों सहित श्रमिकों, महिलाओं, छात्रों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और अन्य लोगों ने किसानों के साथ एकजुटता जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। 

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने आज, शुक्रवार को कहा कि यदि सरकार हमारी मांगों को कल शनिवार की बैठक में स्वीकार नहीं करती है, तो हम नये कृषि कानूनों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर देंगे। किसान नेता हरविंदर सिंह लखवाल ने कहा कि हमने दिल्ली की शेष सड़कों को अवरूद्ध करने की योजना बनाई है। किसान संगठनों की एक बैठक के बाद उन्होंने कहा कि मांगें न माने जाने की सूरत में आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान करने का फैसला लिया गया है।

उम्मीद है कि सरकार मांगें मान लेगी, अन्यथा किसानों का आंदोलन जारी रहेगा : टिकैत

उधर, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को कहा कि किसानों को उम्मीद है कि पांच दिसंबर को पांचवें चरण की वार्ता के दौरान सरकार उनकी मांगें मान लेगी और ऐसा नहीं होने पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।

टिकैत ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘सरकार और किसानों के बीच बृहस्पतिवार को हुई बैठक के दौरान किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। सरकार तीनों कानूनों में संशोधन करना चाहती है लेकिन हम चाहते हैं कि ये कानून वापस लिए जाएं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकार हमारी मांगों पर सहमत नहीं हुई तो हम विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। देखते हैं शनिवार की बैठक में क्या नतीजा निकलता है।’’

दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर हरियाणा, पंजाब और दूसरे राज्यों के हजारों किसान लगातार नौ दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसानों के प्रतिनिधियों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच बृहस्पतिवार को हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका। दोनों पक्ष शनिवार को फिर से बैठक करेंगे।

किसानों को आशंका है कि नए कानूनों से एपीएमसी मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इसी के साथ कॉरपोरेट खेती छोटे किसानों के लिए एक बड़ा ख़तरा है। हालांकि, सरकार ने कहा है कि नए कानून से किसानों के लिए नए अवसर के द्वार खुलेंगे और कृषि क्षेत्र में नयी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होगा।

पंजाबी गायक हरभजन मान ने राज्य सरकार के पुरस्कार को स्वीकार करने से इनकार किया

चंडीगढ़: पंजाबी गायक एवं अभिनेता हरभजन मान ने नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए शुक्रवार को घोषणा की कि वह राज्य सरकार के ‘शिरोमणि पंजाबी’ पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेंगे।

पंजाब भाषा विभाग ने बृहस्पतिवार को मान को इस पुरस्कार के लिए चुना था। विभाग ने साहित्य और कला की 18 विभिन्न श्रेणियों के लिए साहित्य रत्न और शिरोमणि पुरस्कारों की घोषणा की थी।

मान ने ट्विटर पर कहा, ‘‘हालांकि मैं चुने जाने के लिए आभारी हूं। मैं विनम्रतापूर्वक भाषा विभाग का शिरोमणि गायक पुरस्कार स्वीकार नहीं कर सकता। लोगों का प्यार मेरे करियर का सबसे बड़ा पुरस्कार है, और अभी से हम सभी का ध्यान तथा प्रयास किसानों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए समर्पित होना चाहिए।”

मान के साथ कई पंजाबी गायक और कलाकार किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

गायक मान दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे।

मान ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘आपको उनकी ऊर्जा, उत्साह और आशावाद का अनुभव करने के लिए वहां रहना होगा। प्रतिकूल परिस्थितियों में वे मुस्कुराते हैं और खुशी के क्षण साझा करते हैं।’’

सरकार को किसानों के प्रदर्शन का जल्द समाधान निकालना चाहिए : धर्मेंद्र

मुंबई:  प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कृषि कानूनों पर किसानों के प्रदर्शन का समाधान जल्द निकालने का आग्रह किया। एक दिन पहले ही उन्होंने ऐसे एक ट्वीट को हटा दिया था।

84 वर्षीय अभिनेता ने बृहस्पतिवार को सरकार से प्रदर्शनों का जल्द समाधान निकालने का आग्रह किया था और दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों का भी जिक्र किया।

उन्होंने एक पोस्ट में लिखा था, ‘‘मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि कृपया किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान निकालें। दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। यह पीड़ादायी है।’’

हालांकि उन्होंने बिना वजह बताए पोस्ट को हटा लिया।

शुक्रवार को एक उपयोगकर्ता ने इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट डाला और कहा कि धर्मेंद्र ने किस कारण से ट्वीट हटा लिया।

धर्मेंद्र ने कहा, ‘‘मैंने ट्वीट इसलिए हटा लिया क्योंकि मैं इस तरह की टिप्पणियों से दु:खी हूं। आप मुझे दिल से गाली बक सकते हैं। मैं खुश हूं कि आप खुश हैं। मैं अपने किसान भाइयों के लिए दु:खी हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए। कोई हमारी बात नहीं सुन रहा।’’

एक उपयोगकर्ता ने दावा किया कि धर्मेंद्र ने अपने अभिनेता बेटे और गुरदासपुर से भाजपा सांसद सनी देओल के कहने पर पोस्ट हटाया होगा, इस पर उन्होंने जवाब दिया, ‘‘मैं आपकी मानसिकता के बारे में कुछ नहीं कहूंगा।’’

दिल्ली की सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने के लिये न्यायालय में याचिका

नयी दिल्ली: हमेशा की तरह आम आदमी की परेशानी के नाम पर एक बार फिर किसानों के धरने को हटाने के लिए अदालत का रुख किया जा रहा है।

नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की तमाम सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को तत्काल वहां से हटाने का प्राधिकारियों को निर्देश देने के लिये उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को एक याचिका दायर की गयी। याचिका में कहा गया है कि सड़क मार्ग अवरूद्ध होने की वजह से लोगों को आवागमन में कठिनाईयां हो रही हैं और इस तरह से बड़ी संख्या में किसानों के जमावड़े से कोविड-19 के मामलों में भी वृद्धि हो सकती है।

याचिका में प्राधिकारियों को दिल्ली सीमा की सड़कों को खुलवाने, विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को निर्धारित स्थान पर भेजने और कोविड-19 मामलों के प्रसार को रोकने के लिये धरना स्थल पर सामाजिक दूरी बनाने तथा मास्क लगाने के लिये दिशा निर्देश देने अनुरोध न्यायालय से किया गया है।

यह याचिका कानून के छात्र ऋषभ शर्मा ने दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने इन किसानों को बुराड़ी में निरंकारी मैदान में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी थी लेकिन इसके बावजूद किसानों ने दिल्ली की सीमाओं को अवरूद्ध कर दिया है।

अधिवक्ता ओम प्रकाश परिहार के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है, ‘‘दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे इस विरोध प्रदर्शन की वजह से प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरूद्ध कर दिया है और सीमाओं को बंद कर दिया है जिसकी वजह से वाहनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। यही नहीं, इस वजह से सरकार और प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में इलाज के लिये आने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।’’

याचिका में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन करके सड़क अवरूद्ध करने के खिलाफ दायर याचिका पर शीर्ष अदालत के सात अक्टूबर के फैसले का भी हवाला दिया गया है। इस मामले मे न्यायालय ने कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिये कब्जा नहीं किया जा सकता और एक निश्चित स्थान पर ही अपनी असहमति और विरोध प्रकट करना होगा।

याचिका में सरकार के कोविड-19 दिशा निर्देशों का हवाला देते हुये याचिका में कहा गया है कि महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र नहीं होने के परामर्श दिये जाने के बावजूद लाखों किसान दिल्ली की सीमा पर एकत्र हैं और इससे कोरोना के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने दिल्ली की सीमा पर इतनी बड़ी संख्या में एकत्र लोगों को तितर बितर करने और उन्हें पहले से ही निर्धारित स्थान पर भेजने के लिये तत्काल निर्देश देने का अनुरोध किया।

याचिका के अनुसार कोविड के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि को ध्यान में रखते हुये जरूरी है कि यह विरोध प्रदर्शन तुरंत बंद किया जाये और कोरोना वायरस महामारी खत्म होने के बाद किसान फिर प्रदर्शन कर सकते हैं।

किसानों के हित में ‘काले कानूनों’ को तत्काल वापस ले सरकार: किसान कांग्रेस

नयी दिल्ली: कांग्रेस की किसान इकाई ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह देश भर के किसानों के हित में कृषि संबंधी तीनों ‘काले कानूनों’ को तत्काल वापस ले।

अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोलंकी ने यह भी कहा कि उनका संगठन शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगा।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘पिछले दिनों जब कृषि विधेयक पारित हुए थे तब हमनें प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया था। ये तीनों काले कानून किसानों की मुसीबत बढ़ाने वाले हैं। इनसे सिर्फ पूंजीपतियों को फायदा होगा।’’

सोलंकी ने सरकार से आग्रह किया कि वह किसानों के हित में इन काले कानूनों को तत्काल वापस ले।

सोलंकी ने कहा, ‘‘हमारा संगठन दिल्ली के निकट पिछले एक हफ्ते से डटे किसानों की सेवा में भी लगा है। हम आगे भी किसानों को हर संभव सहयोग करेंगे।’’

कृषि कानूनों के विरोध में पटना में प्रदर्शन करेगा राजद

पटना: बिहार में विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने शुक्रवार को कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में शनिवार को वह यहां प्रदर्शन करेगा। इन कानूनों के खिलाफ देश के उत्तरी इलाकों में बड़े प्रदर्शन जारी हैं।

पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख जगदानंद सिंह ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की मौजूदगी में यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘गांधी मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना आयोजित किया जाएगा, जिनके दृष्टिकोण प्रस्तावित कानून के कारण खतरे में है। इस कानून का मकसद कृषि क्षेत्र में बड़ी कंपनियों को छूट देना है।’’

यादव ने संवाददाता सम्मेलन में राज्य भर के किसानों से जारी आंदोलन को समर्थन देने की अपील की और दावा किया कि नीतीश कुमार सरकार द्वारा एक दशक से अधिक समय पहले एपीएमसी मंडियों को समाप्त करने और खरीद के लिए पीएसीएस (प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी) को अधिकृत करने से बिहार का कृषि क्षेत्र पहले से दबाव में है।

यादव ने आरोप लगाया, ‘‘यह समझने की जरूरत है कि राज्य की सरकार किसानों के हितों का घोर उल्लंघन कर रही है। नयी व्यवस्था ने उन्हें स्पष्ट रूप से समस्याओं में डाल दिया है। और मुख्यमंत्री की पार्टी ने संसद में विवादास्पद विधेयक का समर्थन कर अपनी प्राथमिकताएं दर्शाई हैं।’’

उन्होंने अपने धुर विरोधी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की भी आंदोलनरत किसानों की मंशा पर सवाल उठाने के लिए आलोचना की।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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