NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसानों का संघर्ष तेज़, रोज़ाना होगा क्रमिक अनशन, 23 को मनाया जाएगा ‘किसान दिवस’
किसानों ने अपना संघर्ष और तेज़ कर दिया है। सोमवार सुबह से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है। अब किसान अलग-अलग समूहों में रोज़ भूख-हड़ताल करेंगे। इसके अलावा 23 दिसंबर को आम लोगों से भी एक वक़्त का भोजन न बनाने की अपील की गई है।
मुकुंद झा
21 Dec 2020
किसानों का संघर्ष तेज़

इस हाड़कंपा देने वाली सर्दी के बावजूद केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। दिल्ली और आसपास में रविवार को पारा 3.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया जो इस मौसम में अब तक का सबसे न्यूनतम तापमान था। लेकिन सरकार और उसके नुमाइन्दे इन किसनो की मांग पर विचार करने के बजाय चुनावी चकल्लस और बाकी तमाम हथकंडे अपना कर इस अंदोलन को ख़त्म कराने की जुगत में लगी दिख रही है।

उधर, किसान अपना संघर्ष और तेज़ कर रहा है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगी दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन करे रहे किसानों ने सोमवार सुबह से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। किसान नेताओं के अनुसार प्रदर्शन कर रहे किसान अलग-अलग समूहों में भूख-हड़ताल करेंगे हर समूह में 11 लोग रहेंगे।

इस बीच सरकार ने किसानों को बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर पत्र भेजा है, हालांकि उसमें किसी भी तारीख का ज़िक्र नहीं है। किसान नेताओं ने इसे सरकार का ढोंग कहा। उन्होंने कहा हम बातचीत के लिए हमेशा तैयार थे सरकार ही समय नहीं दे रही है अभी भी सरकार ने पत्र भेजा है समय दिया ही नहीं है।

शाहजहांपुर बॉर्डर पर अखिल भारतीय किसान सभा के नेता अमराराम व पेमाराम के नेतृत्व में 13 दिसंबर से पड़ाव शुरू हुआ था, जो आज नौवें दिन में प्रवेश कर गया। इस दिसंबर में जमाव बिंदु तापमान के बावजूद किसानों के हौसले बुलंद हैं। उपस्थिति दिनों दिन ज्यादा होती जा रही है। आज किसान मोर्चा कि संयुक्त बैठक के आह्वान पर शाहजहांपुर बॉर्डर पर अमराराम के नेतृत्व में 11 साथी क्रमिक अनशन पर बैठे। इसी तरह बाकी मोर्चों पर भी किसान अनशन पर बैठे हैं। अब यह क्रम रोज़ चलेगा।

अनशन से पूर्व अमराराम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की "यह आंदोलन आम आदमी व किसानों के लिए आर-पार की लड़ाई है। इन काले कानूनों को वापस लेने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। किसान जीतेगा और सरकार हारेगी हिंदुस्तान अडानी-अंबानी की जागीर नहीं, यह एक अरब 35 करोड़ लोगों का देश है जिसको बड़ी मेहनत से किसानों और मजदूरों ने बनाया है।"

अमराराम ने आगे कहा, "राजस्थान के अन्नदाता से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या मे बॉर्डर पर पहुंच कर किसानों के इस महाकुंभ में अपनी उपस्थिति की दर्ज कराएं ताकि इस आंदोलन से सरकार को काले कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सके।”

सड़क पर किसान,सरकार चुनाव प्रचार और आंदोलन को कमज़ोर करने में व्यस्त

आपको बता दें कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान बीते करीब चार हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं और नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। जबकि सरकार और सत्ताधारी बीजेपी चुनावी कार्यक्रम में व्यस्त है।

इसका उदाहरण हमे रविवार को देखने को मिला जब देश के गृहमंत्री बंगाल में चुनावी सभा कर रहे थे। इसमें कोई बुराई नहीं कि वो चुनावी सभा करें, लेकिन सवाल यह है कि कोरोना का बहाना बनाकर इस सरकार ने संसद का सत्र बुलाने से इंकार किया है। इसलिए सवाल तो बनता है कि अगर संसद सत्र के लिए कोरोना है तो फिर चुनावी सभा में कैसे नहीं है?

हालांकि ये बात साफ़ हो गई है कि सरकार यह सब नाटक केवल नए कृषि विधयेक पर चर्चा से बचने के लिए कर रही है। लेकिन किसान इसबार सरकार के हर चाल की तोड़ लेकर आया है।

आंदोलन पर डिजिटिल स्ट्राइक की कोशिश

आंदोलन के दौरान फ़ेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म जो खुद के निष्पक्ष होने का दावा करते हैं, वो भी सत्ता के पक्ष में दिखी जब रविवार देर शाम उसने किसानों के अपने पेज किसान एकता मोर्चा के एक लाइव सेशन के दौरन उनके पेज को समाज के लिए ठीक न बताते हुए डिलीट कर दिया। हालांकि सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ मज़बूत मुहिम ने फेसबुक को मजबूर किया कि वो इस पेज को दोबारा बहाल करे। यह तिकड़म सरकार पर उल्टी पड़ती दिखाई दी क्योंकि जब से यह पेज़ रिस्टोर हुआ है इसके लाइक की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ी है।

किसानों को धमकाने और डराने का काम कर रही है बीजेपी की राज्य सरकारें!

किसान नेताओं ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में दिल्ली चलो को लेकर तैयारी कर रहे किसानों को योगी सरकार ने 50 लाख का नोटिस भेजा है। हालांकि बाद में सफाई दी कि वो 50 लाख नहीं 50 हज़ार था। लेकिन यह भी शायद ही पहली बार ही हुआ है कि दिल्ली अंदोलन करने जाने को लेकर तैयारी कर रहे किसानो को नोटिस भेजा गया हो।

दूसरी तरफ हरियाणा सरकार भी अंदोलन करे रहे किसानो को परेशान कर रही है। जबकि हरियाणा बीजेपी ने अंदोलन को तोड़ने के लिए गड़े मुर्दे उखाड़ने शुरू कर दिए। उन्होंने एसवाईएल मुद्दे को लेकर धरना दिया, हालांकि उनके इस धरने में गिनती को लोग ही पहुंचे। किसानों ने वहां पहुंचकर भी प्रदर्शन शुरू कर दिया जिससे बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर गया।

इस बीच, कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहां) ने रविवार को कहा कि एक केंद्रीय एजेंसी ने उससे उसकी पंजीकरण की जानकारी जमा करने को कहा है, जो उसे विदेशी धनराशि प्राप्त करने की इजाजत देती है।

बीकेयू (एकता-उग्राहां) के अध्यक्ष जोगिंदर उग्राहां और इसके महासचिव सुखदेव सिंह ने केंद्र सरकार की मांग के बारे में खुलासा किया और आरोप लगाया कि ‘‘केंद्र सभी रणनीति का उपयोग कर रहा है क्योंकि उनका एकमात्र उद्देश्य आंदोलन को विफल करना है।’’

विदेशी अंशदान (नियमन) कानून (एफसीआरए) विदेशी निधि प्राप्त करने वाले किसी भी संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य करता है।

सुखदेव सिंह ने कहा, ‘‘केंद्र के तहत आने वाले एक विभाग ने एक ई-मेल भेजा है, जो हमें पंजाब में हमारे बैंक की शाखा के माध्यम से प्राप्त हुआ है। ई-मेल में कहा गया है कि हमें विदेशों से मिले दान के संबंध में पंजीकरण विवरण देना चाहिए, अन्यथा इसे वापस भेज दिया जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बैंक प्रबंधक ने मुझे वह ई-मेल दिखाया जो विदेशी मुद्रा विभाग द्वारा भेजा गया है।’’

केंद्र की मांग के समय पर सवाल उठाते हुए, सिंह ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन केंद्र के खिलाफ है और वे वह सभी बाधाएं उत्पन्न करने की कोशिश करेंगे, जो वे कर सकते हैं। वे सभी हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि उनका एकमात्र उद्देश्य आंदोलन को विफल करना है।’’

25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी राजमार्गों पर टोल वसूली रोकेंगे किसान

केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में अपने आंदोलन को तेज करते हुए किसान यूनियनों ने रविवार को घोषणा की कि वे 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी राजमार्गों पर टोल वसूली नहीं करने देंगे।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाला ने बताया कि किसान 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी राजमार्गों पर टोल वसूली नहीं करने देंगे।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी टोल बूथ पर हम टोल वसूली नहीं होने देंगे, हम उन्हें ऐसा करने से रोकेंगे। 27 दिसंबर को हमारे प्रधानमंत्री अपने ‘मन की बात’ करेंगे और हम लोगों से अपील करना चाहते हैं कि उनके भाषण के दौरान ‘थालियां’ बजाएं।’’

भाकियू नेता राकेश टिकैत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम लोगों से अनुरोध करते हैं कि इस दिन वे एक वक़्त का भोजन न पकाएं।’’

इसके अलावा देश भर में किसानों ने रविवार को श्रद्धांजलि दिवस भी मनाया और उन किसानों को श्रद्धांजलि दी जिनकी मौत इस आंदोलन के दौरान हुई है।

किसान संगठनों ने दावा किया है कि आंदोलन में शामिल 30 से अधिक किसानों की दिल का दौरा पड़ने और सड़क दुर्घटना जैसे विभिन्न कारणों से मौत हुई है। किसानों ने कुछ स्थानों पर ‘अरदास’ भी की।

(समाचार एजेंसी भाषा के कुछ इनपुट के साथ)

farmers protest
farmers protest update
Farm bills 2020
Kisan Diwas
Kisan Diwas 23 December
Protest on Delhi Border
BJP
Modi Govt
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • कार्टून क्लिक: सम्मान निधि नहीं एमएसपी का क़ानून चाहिए
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: सम्मान निधि नहीं एमएसपी का क़ानून चाहिए
    02 Aug 2021
    किसान प्रधानमंत्री से न कोई अतिरिक्त सम्मान मांग रहे हैं, न सम्मान निधि, वे बस उनके ऊपर थोपे जा रहे तीन दमनकारी कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और अपने हक़ के तौर पर एमएसपी का क़ानून…
  • इज़रायल द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के विरोध में 17 फ़िलिस्तीनी क़ैदी भूख हड़ताल पर
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायल द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के विरोध में 17 फ़िलिस्तीनी क़ैदी भूख हड़ताल पर
    02 Aug 2021
    फ़िलिस्तीनी क़ैदियों के अधिकार समूहों के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 540 फ़िलिस्तीनियों को इज़रायल द्वारा प्रशासनिक हिरासत की अवैध नीति के तहत क़ैद कर रखा गया है।
  • ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमले में शामिल होने के इज़रायली आरोपों से ईरान का इनकार
    पीपल्स डिस्पैच
    ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमले में शामिल होने के इज़रायली आरोपों से ईरान का इनकार
    02 Aug 2021
    इज़रायल, अमेरिका और यूके ने कोई सबूत दिए बिना ईरान पर पिछले हफ्ते ओमानी तट के पास इज़रायल के स्वामित्व वाले तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के लिए आरोप लगाया था जिसमें चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई थी।
  • 2022 विधानसभा चुनाव से पहले दक्षिण गुजरात में  पटेलों को लुभाने पर आप-भाजपा का ज़ोर
    दमयन्ती धर
    2022 विधानसभा चुनाव से पहले दक्षिण गुजरात में  पटेलों को लुभाने पर आप-भाजपा का ज़ोर
    02 Aug 2021
    फरवरी में हुए नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) ने जिन 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह नतीजे सूरत की 12 विधानसभा सीटों में से तीन पर पार्टी को बढ़त दे रही हैं।
  • हमारे समय का सबसे बड़ा मुक़ाबला मानवता और साम्राज्यवाद के बीच है
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    हमारे समय का सबसे बड़ा मुक़ाबला मानवता और साम्राज्यवाद के बीच है
    02 Aug 2021
    23 जुलाई 2021 को, न्यूयॉर्क टाइम्स में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के नाम क्यूबा के ख़िलाफ़ अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की माँग करते हुए एक पूरे पेज
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License