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FinCEN फाइल्स: अमेरिकी बैंकों ने 44 भारतीय बैंकों की 2011 से 2017 के बीच संदिग्ध लेनदेन के लिए पहचान की
FinCEN फाइलों की जांच में 1999 से 2017 के बीच 2 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा कीमत के लेनदेन की पहचान हुई है। यह लेनदेन 90 वित्तीय संस्थानों द्वारा दर्ज की गई 2100 रिपोर्टों के ज़रिए सामने आया है।
पृध्वीराज रूपावत
26 Sep 2020
FinCEN फाइल्स
Image Courtesy: Business Standard

हैदराबाद: अमेरिकी बैंकों द्वारा "संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट्स- सस्पीसियस एक्टिविटी रिपोर्ट्स (SARs)" में 44 भारतीय बैंकों की निशानदेही की गई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, यह रिपोर्ट "फायनेंशियल क्राइम एंफोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN)" के पास जमा की गई हैं। FinCEN अमेरिकी राजकोष विभाग की निगरानी संस्था है।

इन रिपोर्ट्स को "FinCEN फाइल्स" नाम से बुलाया जा रहा है। इनके ज़रिए अमेरिका के राजकोष से सबंधित गुप्त दस्तावेज़ों में नई जांच शुरू हो गई हैं। इन फाइल्स को "इंटरनेशनल कंसोर्टिअम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (ICIJ)" ने बजफीड न्यूज समेत 108 दूसरे मीडिया आउटलेट्स के साथ शेयर किया है। FinCEN फाइल्स में करीब़ 2100 दस्तावेज़ों में, 1999 से 2017 के बीच, 90 वित्तीय संस्थानों द्वारा 2 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा कीमत वाले लेनदेन को दर्ज किया गया है। इनके संभावित तौर पर मनी लांड्रिंग या दूसरी आपराधिक गतिविधियों से संबंद्ध होने की संभावना है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, "एक रिकॉर्ड सेट, जिसमें संबंधित पक्षों का पता भारत में दर्ज किया गया है, उसके मुताबिक़ SARs में भारतीय बैंकों के 2000 से ज्यादा लेनदेन शामिल हैं, जिनकी कीमत एक बिलियन डॉलर (7,369 करोड़ रुपये) से ज्यादा है। यह लेनदेन 2011 से 2017 के बीच किए गए हैं। अहम बात है कि भारतीय व्यापारियों या संस्थाओं से जुड़े ऐसे हजारों लेनदेन होते हैं, जहां भारतीय देनदाता या फायदा उठाने वाले का पता विदेशों में दर्ज होता है।"

SARs में शामिल भारतीय बैंक, जिन पर संदिग्ध लेनदेन में शामिल होने के आरोप हैं, उनके नाम कुछ इस तरह हैं: पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक, HDFC बैंक, ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसलेंड बैंक व अन्य।

ऐसे अमेरिकी बैंक जिन्होंने भारतीय बैंकों के बारे में SARs दर्ज की हैं, उनमें ड्यूश बैंक ट्रस्ट कंपनी अमेरिकाज़ (DBTCA), BNY मेलॉन, सिटीबैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, जे पी मॉर्गन और अन्य शामिल हैं।

इन विदेशी बैंकों द्वारा भारतीय बैंकों की निशानदेही की वज़ह "मनी लांड्रिंग या दूसरे वित्तीय अपराधों का अधिक जोख़िम वाला क्षेत्राधिकार, मुवक्किल के प्रति विरोधी मीडिया प्रचार या सार्वजनिक जानकारी, पहचान तय ना कर पाने वाले पक्ष और पैसे के स्त्रोत या लेनदेन के उद्देश्य को सुनिश्चित ना कर पाना" बताया गया है।

FinCEN में दर्ज की गई SARs में 2012 से 2015 के बीच भूषण स्टील लिमिटेड से संबंधित 4.39 मिलियन डॉलर (32 करोड़ रुपये) का जिक्र है। इस कंपनी को इंसॉल्वेंसी कोर्ट के ज़रिए 2018 में टाटा स्टील ने खरीद लिया है।

जांच रिपोर्टों के मुताबिक़, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और द स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड जैसी सार्वजनिक कंपनियों और भारतीय एयरटेल, एस्सार जैसी बड़ी निजी कंपनियों  का उल्लेख FinCEN के पास दर्ज की गई SARs में है। इन निजी कंपनियों पर भारतीय जांच एजेंसियों की भी जांच चल रही है।

भारत में कालेधन पर बनाया गया विशेष जांच दल (SIT) FinCEN फाइल्स में सामने आए संदिग्ध लेनदेन पर नज़र बनाए हुए है और भारत में इन पर जांच की कार्रवाई करने के लिए विमर्श करने वाला है। इस SIT को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2014 में बनाया गया था। 

SARs पर आधारित लेखों की श्रंखला के पहले FinCEN ने अपने वक्तव्य में कहा, "SAR का गैरअधिकृत खुलासा अपराध है, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, कानूनी एजेंसियों की जांच प्रभावित कर सकता है और SAR जैसी रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले संस्थानों और व्यक्तियों की सुरक्षा को खतरा पैदा कर सकता है।"

लेकिन ICIJ और दूसरे मीडिया संस्थानों ने इन खुलासों को प्रकाशित कर दिया। 

ICIJ ने कहा, "FinCEN फाइल्स से पता चलता है कि बैंक अंधे होकर अपने खातों के ज़रिए उन लोगों का पैसा चला रहे हैं, जिनकी पहचान वे सुनिश्चित नहीं कर सकते, यह बैंक उन लेनदेन को बताने में भी नाकामयाब रहे हैं, जिनमें मनी लांड्रिंग के सभी तत्व मौजूद रहे हैं। बल्कि कई बार तो वित्तीय फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार में शामिल ग्राहक के साथ यह लोग व्यापार करते रहे हैं।"

न्यूयॉर्क में स्टेंडर्ड चार्टर्ड बैंक द्वारा दर्ज की गई SAR पर आधारित एक दूसरी रिपोर्ट में इंडियन एक्सप्रेस ने बताया, "FinCEN फाइल्स से पाकिस्तानी नागरिक अल्ताफ खानानी द्वारा सफलतापूर्वक चलाए जाने वाले मनी लांड्रिंग के जाल का खुलासा हुआ है। खानानी को भगौड़े आतंकी दाऊद इब्राहिम का मुख्य निवेशक बताया जाता है।"

जांच रिपोर्टों के मुताबिक़, ड्यूश बैंक, बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन, स्टेंडर्ड चार्टर्ड, जेपी मॉर्गन और HSBC लगातार नियमों का उल्लंघन करते रहे हैं। ICIJ ने बताया, "इन बैंकों ने खतरनाक और ताकतवर खिलाड़ियों से मुनाफा कमाना जारी रखा, जबकि अमेरिकी प्रशासन इन वित्तीय संस्थानों पर कालेधन को रोकने में असफल होने पर पहले भी जुर्माना लगा चुका है।"

ICIJ का कहना है कि FinCEN फाइल्स में "FinCEN के पास 2011 से 2017 के बीच वित्तीय संस्थानों द्वारा दर्ज की गई 12 मिलियन संदिग्ध गतिविधि रिपोर्टों में से केवल 0.02 फ़ीसदी ही शामिल हैं।"

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

FinCEN Files: US Banks Red-Flagged 44 Indian Banks for Suspicious Transactions Between 2011 and 2017

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