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फ़िरोज़ाबाद में डेंगू, वायरल बुखार का क़हर; स्वास्थ्य सुविधा चरमाराई, बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
फ़िरोज़ाबाद ज़िला संदिग्ध डेंगू और वायरल बुखार के क़हर की चपेट में है, और अधिकांश मरीज़ दस साल से कम उम्र के बच्चे हैं।
सौरभ शर्मा
16 Sep 2021
Translated by महेश कुमार
फ़िरोज़ाबाद में डेंगू, वायरल बुखार का क़हर; स्वास्थ्य सुविधा चरमाराई, बच्चे सबसे अधिक प्रभावित

फ़िरोज़ाबाद : उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद शहर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में 13 सितंबर की रात तीन साल की बच्ची अभि सविता को उसके माता-पिता और चाचा के लिए लाए थे। अभि के शरीर का तापमान बहुत अधिक था और वह बेहोशी की हालत में थी। 

स्थानीय मुख्य विकास अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर, आधे घंटे बाद, डॉक्टरों ने अभि को उच्च-स्तरीय अस्पताल में रेफर कर दिया क्योंकि उसकी हालत तेजी से बिगड़ रही थी और मेडिकल कॉलेज में उसके इलाज के लिए पर्याप्त चिकित्सा के संसाधन नहीं थे।

“डॉक्टरों ने हमें उसे आगरा के एक बड़े अस्पताल में ले जाने के लिए कहा। अभि के चाचा गोविंद सविता ने एम्बुलेंस में बैठते हुए बताया कि अभि के प्लेटलेट्स 30,000 तक गिर गए हैं और हम आगरा जा रहे हैं” एम्बुलेंस सेवा को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं ने मुफ्त में प्रदान की थी। 

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर दूर मध्य-पश्चिम उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद जिले में सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाएं संदिग्ध डेंगू और वायरल बुखार के मामलों से भरी पड़ी हैं। भर्ती किए जा रहे मरीजों में अधिकतर 10 साल से कम उम्र के बच्चे हैं।

13 सितंबर की रात को न्यूज़क्लिक ने पाया कि लगभग एक दर्जन माता-पिता अपने बीमार बच्चों के साथ मेडिकल कॉलेज में आ रहे हैं। बहुत तेज बुखार वाले बच्चों को भर्ती कराया जा रहा था, जबकि अन्य को दवा दी जा रही थी।

करीब दस साल के अमन कुमार को फ़िरोज़ाबाद मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी रूम के बाहर फर्श पर पड़ा देखा गया। जब तक मीडिया ने हस्तक्षेप नहीं किया तब तक कोई भी डॉक्टर या अन्य चिकित्सा कर्मी का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया था।

अमन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि उसे पिछले चार दिनों से बुखार चल रहा था; उस रात, उसे पेट में तेज दर्द हुआ और उसने एक-दो बार उल्टी भी की। उन्हें एम्बुलेंस में आपातकालीन कक्ष से लगभग 200 मीटर दूर बाल रोग वार्ड में भर्ती किया गया।

बाल रोग वार्ड में पहुंचने के बाद अमन की हालत बिगड़ गई और कोई डॉक्टर उस पर ध्यान  नहीं दे रहा था। उसकी माँ रोने लगी, और असहाय पिता अपने बच्चे के इलाज के लिए हर डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारियों से भीख माँगने लगा। इसके बाद ही उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया जा सका। 

यह केवल अमन कुमार या अभि सविता की कहानी नहीं है, बल्कि सैकड़ों उन अन्य बच्चों की भी कहानी है, जो संदिग्ध डेंगू और वायरल बुखार के क़हर के कारण बिस्तर पर पड़े हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, फ़िरोज़ाबाद जिले में लगभग 12,000 लोग बीमार हैं और बिस्तर पर पड़े हैं।

फ़िरोज़ाबाद के जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह के अनुसार, इस बुखार से अब तक करीब 60 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निवारक उपाय किए जा रहे हैं।

प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि “जिले में हालत अब पहले मुक़ाबले स्थिर है। प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज में बेड की संख्या बढ़ा दी है। 90 से अधिक स्थानों पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और जिले में जहां भी मच्छरों के प्रजनन के मैदान देखे जा रहे हैं वहां के विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छता का काम भी चल रहा है।“ 

आधिकारिक जानकारी के अनुसार फिलहाल 400 बच्चे मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जिनमें से 120 डेंगू के मरीज हैं।

जिलाधिकारी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि निजी अस्पतालों और अन्य जगहों पर भी कुछ लोगों की मौत हुई है और मरने वालों की संख्या में उनका डेटा शामिल नहीं है। प्रशासन उन सभी का पता लगाने की कोशिश कर रहा है और शाद बाद में ये आंकड़े बढ़ सकते हैं, इसके साथ ही  मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए एक मृत्यु लेखा समिति भी गठित की गई थी।

इस बीच, मेडिकल कॉलेज परिसर के अंदर और बाल रोग वार्ड के पीछे सुअरों को गंदगी में घूमते देखा गया। इस बारे में पूछने पर जिलाधिकारी बिना जवाब दिए वहां से चले गए।

द न्यूज़क्लिक ने उस रात दो बच्चों की मौत देखी, एक असहाय पिता अपनी बेहोश बेटी को साइकिल पर घर ले जा रहा था, कई एम्बुलेंस रोते हुए माँ-बाप/रिशतेदारों के साथ सायरन बजाते हुए अधिक रोगियों को लेकर अस्पताल पहुँच रही थी, और ये एम्बुलेंस बच्चों को पड़ोसी आगरा शहर के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक ले जा रही थी।

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति विश्वास की कमी

जिले की बीमार ग्रामीण आबादी को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की तुलना में गैर-पंजीकृत चिकित्सकों पर अधिक भरोसा है। उदाहरण के लिए, जब यह रिपोर्टर बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन (बीएचएमएस) में स्नातक ए कुमार के क्लिनिक में पहुंचा, तो लगभग आधा दर्जन लोग वहां चारपाई पर लेटे हुए थे, उनके हाथों में एक आईवी लगाया हुआ था और दीवारों और खिड़कियों के साहरे सलाईन वाटर की बोतलें लटकी हुई थी।  .

सूफीपुर गांव में, गैर-पंजीकृत चिकित्सक ए कुमार ने न्यूज़क्लिक को बताया कि वे हर रोज  लगभग पांच से छह रोगियों का इलाज करते हैं और डेंगू रोगियों को यहां से सरकारी सुविधाओं में रेफर किया जाता है।

उन्होंने बताया कि "कई झोलाछाप डॉक्टर गांव में काम कर रहे हैं, और मैं लोगों का इलाज कर रहा हूं क्योंकि उनमें से कई बीमार हैं और सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा हैं।“  

जिला प्रशासन ने आठ झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कर 200 से अधिक अपंजीकृत क्लीनिकों को नोटिस भेजा है.

कुमार के क्लिनिक में इलाज करा रहे सात वर्षीय लड़के के पिता किशोरी लाल ने बताया कि वह सरकारी अस्पताल नहीं गए क्योंकि वहां एक लड़की की मौत हो गई थी.

उन्होंने कहा, "मैं एक अदना सा मज़दूर हूं, और मेरे पास बड़े अस्पताल में इलाज कराने के लिए अधिक पैसे नहीं हैं, इसलिए मैं यहां आ गया और मेरे बेटे को इस इलाज से काफी राहत मिली है।"

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सलमान खान ने बताया कि डेंगू का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है और डॉक्टर केवल लक्षणों का इलाज कर रहे हैं। “यह डेंगू के डेन 2 वायरस जैसा दिखता है जो एक उत्परिवर्तित रूप है। यह अत्यधिक संक्रामक है और इसकी मृत्यु दर काफी ऊंची है। माता-पिता को बहुत सावधान रहने की जरूरत है और इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों के पास नहीं जाना चाहिए।"

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, इस वर्ष, उत्तर प्रदेश में जुलाई 2021 तक डेंगू के 160 मामले दर्ज किए गए हैं।

ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार, फ़िरोज़ाबाद जोकि सबसे अधिक  प्रभावित जिला है में 19 सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 220 उप-केंद्र और तीन अस्पताल हैं। इसी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा केंद्र आबादी की तुलना में लगभग दोगुनी आबादी का इलाज़ करते हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि उप-केंद्र में 8,413 लोगों का इलाज़ किया जा सकता है जबकि इसे 5,000 लोगों को संभालना पड़ रहा है; इसी प्रकार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता 60,696 की है जबकि वे 30,000 आबादी को सँभाल रहे हैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता 1.2 लाख आबादी की है जबकि वे 2,45,857 आबादी को संभालते हैं। 

मृत्यु और तबाही

14 सितंबर की सुबह बाल रोग वार्ड के बाहर एक बुजुर्ग महिला रो रही थी। उसकी सात वर्षीय पोती ने अस्पताल में तेज बुखार के कारण दम तोड़ दिया था। उसे यह कहते हुए सुना गया कि "मेरी पोती ठीक हो रही थी और अब वह मर चुकी है।“

यह सब देख बुढ़िया को सांत्वना देने के लिए वहां काफी संख्या में लोग जमा हो गए थे और जनता ने प्रशासन को साफ-सफाई की घोर कमी और उनके लंबे-चौड़े दावों को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया था। 

वहां मौजूद एक बुजुर्ग ने कहा, 'अखबार छाप रहे हैं कि सफाई का काम हर जगह हो रहा है, लेकिन 13 नामित वार्डों के अलावा गांवों में कोई काम नहीं हुआ है और इसलिए लोग बीमार पड़ रहे हैं। 

इसी बीच रिपोर्टर को अभि सविता के घर से फोन आया और उन्होंने मदद की गुहार लगाई। “सर, हमें आगरा के अस्पताल में प्रवेश नहीं मिल रहा है। हम अभि को एक निजी क्लिनिक में ले आए हैं और वे कह रहे हैं कि अभि अब जान नहीं है। कृपया सहायता कीजिए…"

रिपोर्टर मदद के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ दिनेश कुमार प्रेमी के पास पहुंचा, लेकिन उन्होंने कहा, "सभी का इलाज़ किया जा रहा है और मीडिया को सकारात्मक खबरें पहुंचाने की जरूरत है।" सीएमओ ने कोई मदद नहीं की और इसके पंद्रह मिनट बाद अभि को मृत घोषित कर दिया गया। उसके चाचा ने मौत के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है।

अभि के चाचा ने कहा कि “अगर उसे समय पर इलाज़ मिल गया होता तो वह आज जीवित होता।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Firozabad Faces Onslaught of Dengue, Viral Fever With Insufficient Health Facilities; Children Most Affected

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