NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव
यह पहली क़िस्त है। अभी दो किस्तें आने बाकी हैं। इस क़िस्त से यह पता चला है कि कैसे नरेंद्र मोदी के काल में आजादी के बाद पहली बार आरबीआई पर विकसित देशों को फायदा पहुचाने का आरोप लगा? कैसे अरुण जेटली की अगुवाई वाले वित्त मंत्रालय ने आरबीआई की स्वायत्तता की कोई चिंता नहीं की? कैसे आरबीआई के दो गवर्नरों ने एक ही बात के लिए इस्तीफ़ा दे दिया? लेकिन सरकार ने अपनी मनमानी नहीं छोड़ी।
अजय कुमार
05 Apr 2022
RBI
Image courtesy : Hindustan Times

रिपोटर्स कलेक्टिव के पत्रकार सोमेश झा ने मोदी दौर में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की आजादी को लेकर सूचना के अधिकार के तहत मिले सूचनाओं के सहारे लम्बी छानबीन की है। इस छानबीन पर अलजजीरा तीन रिपोर्ट ले कर आएगी। पहली रिपोर्ट छप गयी है , जिसका सारांश आपके सामने पेश है।  

साल 2014 से भाजपा का दौर शुरू हुआ था। प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली। सत्ता संभालने के साल भर बाद सरकार, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से कहने लगी कि ब्याज दरों को कम किया जाए। ब्याज दर को कम करने से बैंक से कम दर पर कर्ज मिलने लगता है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का मानना था कि ब्याज दर कम करने से बढ़ती हुई महंगाई पर लगाम कसना मुश्किल हो जायेगा। इसलिए RBI ब्याज दर कम करने के बजाए महंगाई को नियंत्रित करने पर ज्यादा तवज्जो दे रही थी।

ब्याज दरों के तय करने को लेकर सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं है। मतभेद होना स्वाभाविक है। ऐसे मतभेद चलते रहते हैं। नई बात यह है कि भूतपूर्व और दिवंगत वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई में वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया पर यह आरोप लगाया कि ब्याज दरों को इस तरह से तय किया जा रहा है ताकि विकसित देशों को फायदा पहुचें।  

नई बात यह है कि सरकार ने कभी यह आरोप नहीं लगाया था कि विकसित देशों से मतलब आर्थिक तौर पर मजबूत दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने के लिए रिज़र्व बैंक काम कर रही है। नई बात यह है कि सरकार ने केंद्रीय बैंक के जरिये गोरे लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। साथ में यह मांग भी कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया किस मकसद के तहत कामकाज कर रही है? इसकी छानबीन की जाए।  

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया पैसे और बैंक की दुनिया को नियंत्रित करने को लेकर देश में ढेर सारे अहम काम करती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि मुद्रा यानी पैसे के प्रवाह को संतुलित करते रहना। ऐसा न हो कि पैसे का फैलाव बाजार में इतना ज्यादा हो जाए कि महंगाई आ जाए और ऐसा भी न हो कि पैसे का प्रवाह इतना कम हो कि मंदी आ जाए। पैसे के प्रवाह को कम करने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ब्याज दर बढाकर रखती है। बाजार में लोग और कारोबारी बैंकों से कर्ज लेना कम कर देते हैं। अगर महंगाई की परेशानी से देश झूझ रहा है तो अमूमन ब्याज दर बढ़ाकर रखने की नीति अपनाई जाती है। ऐसा करने पर महंगाई की परेशानी बेलगाम नहीं होती। पैसे की खरीदने की क्षमता कम नहीं होती।

सरकार की दखलअंदाजी भी कई कई कारणों से ब्याज दरों को लेकर बनी रहती है। जिस तरह के क्रोनी कैपिटलिज्म के माहौळ में हमारा देश चल रहा है, वैसे माहौल में ब्याज दर कम होने से कर्ज लेना आसान हो जाता है। कर्ज तो सब लोग लेते नहीं। अधिकतर वही लोग लेते हैं जो पैसे से पैसा बनाने के काम में लगे रहते हैं। कारोबारियों को फायदा होता है, उन्हें कम दर पर कर्ज मिल जाता है। पहले से लिए गए कर्ज पर कम कर्ज देना पड़ता है। इन सब में फायदा अमीरों का होता है लेकिन महंगाई बढ़ने से सबसे बड़ी मार गरीबों पर पड़ती है।

जब मोदी सरकार आई तो महंगाई की दर बहुत अधिक थी।  साल 2014 में आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन थे। कांग्रेस ने इन्हें नियुक्त किया था। इन्होनें ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की। ब्याज दर 8 प्रतिशत के आसपास रहे। महंगाई की दर गिरने लगी तो इन्होंने ब्याज दर में कटौती कर 7.25 प्रतिशत कर दिया। लेकिन अगस्त 2015 में जस का तस रहने दिया।  सरकार का दबाव था कि इसे कम किया जाए। लेकिन रघुराम राजन ने कम नहीं किया। वित्त सचिव ने लिखकर आरोप लगाया कि वह RBI के विश्लेषण और निष्कर्ष से सहमत नहीं है। ब्याज दर कम करना चाहिए। भारत में ब्याज दर ऊँचा रखकर देश में निवेश करने वालों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है. अमेरिका, यूरोप , जापान के कारोबारियों और अमीरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। विकसित देशों में ब्याज दर कम है, जबकि भारत में ब्याज दर अधिक है। इसलिए थोड़े समय के लिए विकसित देश का पैसा यहां पर जमा किया जा रहा है. वह ऊँची ब्याज दर के चलते मुनाफा कमा रहे हैं।  

इन आरोपों के बाद रघुराम राजन ने इस्तीफ़ा दे दिया। इसके बाद भाजपा सरकार के करीबी उर्जित पटेल की गवर्नर के तौर पर नियुक्ति हुई। मॉनेटरी पालिसी कमिटी की पहली बैठक में उर्जित पटेल ने ब्याज दर में 0.25 फीसदी की कटौती की। उर्जित पटेल के ही दौर में नोटबंदी का एलान हुआ। रिपोर्टों से पता चलता है कि उर्जित पटेल की नोटबंदी में कोई भूमिका नहीं थी। सरकार के नोटबंदी से कोई फायदा नहीं निकला। आरबीआई के गवर्नर होने के नाते उर्जित पटेल की चारो ओर आलोचना होने लगी। इसके बाद सरकार ने ब्याज दर कम करवाने का दाबाव डाला। कई तरह नियमों को किनारे कर आरबीआई से ब्याज दर कम करवाने की सहमति लेने की कोशिश की गयी।उर्जित पटेल ने मना कर दिया। उर्जित पटेल ने सरकार को लिखकर कहा कि सरकार को आरबीआई के कामकाज में दखल नहीं देना चाहिए। आरबीआई की सत्यनिष्ठा और साख को धक्का नहीं देना चाहिए। अगर सरकार ऐसा  करती है तो यह आरबीआई की स्वायत्तता में दखलंदाजी होगी। उस कानून के मूलभावना पर हमला होगा जिससे आरबीआई को स्वायत्तता हासिल होती है।

इस मामले और दूसरे कई मामलों पर जब उर्जित पटेल की असहमतियां बढ़ती गयी तो उर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारण बताकर इस्तीफा दे दिया। उसके बाद 24 घंटे के भीतर वित्त मंत्रलाय के प्रशासनिक अधिकारी शक्तिकांतदास गुप्ता की आरबीआई गवर्नर के तौर पर नियुक्ति हुई। शक्तिकांत दास गुप्ता को ब्याज दरों को तय करने में आरबीआई के कामकाज में सरकार के बढ़ते दखल से कोई दिक्कत नहीं थी।  

यह पहली क़िस्त है। अभी दो किस्तें आने बाकी है। इस क़िस्त से यह पता चला है कि कैसे नरेंद्र मोदी के काल में आजादी के बाद पहली बार आरबीआई पर विकसित देशों को फायदा पहुचाने का आरोप लगा? कैसे अरुण जेटली की अगुवाई वाले वित्त मंत्रालय ने आरबीआई की स्वायत्तता की कोई चिंता नहीं की? कैसे आरबीआई के दो गवर्नरों ने एक ही बात के लिए इस्तीफ़ा दे दिया? लेकिन सरकार ने अपनी मनमानी नहीं छोड़ी। अब आगे देखते हैं।

RBI
Reserve Bank of India
Narendra modi
Modi government
BJP
The Reporters' Collective

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों पर जवाबी कार्रवाई की
    08 Mar 2022
    ईरान के साथ परमाणु समझौते और मॉस्को-तेहरान के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में रूस अमेरिका से “बेहद साफ़ शब्दों” में जवाब चाहता है।
  • womens day
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी एक आशा की किरण है
    08 Mar 2022
    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2022 भारतीय महिलाओं के लिए मजबूत प्रासंगिकता के साथ राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं की एक श्रृंखला के बीच आता है। महिलाएं अपने अधिकारों को लागू करने और सार्वजनिक मंचों पर अपनी…
  • EXITPOLL
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    EXIT POLL: बिग मीडिया से उलट तस्वीर दिखा रहे हैं स्मॉल मीडिया-सोशल मीडिया
    08 Mar 2022
    पिछले डेढ़-दो महीने से जारी चुनाव खत्म हो चुके हैं अब नतीजों का इंतज़ार है, हालांकि उससे पहले जारी एग्ज़िट पोल में भाजपा की सरकार दिखाई जा रही है।
  • Ukrainian
    मोहम्मद शबीर
    यूक्रेनी सुरक्षा बलों ने युवा कम्युनिस्ट नेताओं को गिरफ्तार किया 
    08 Mar 2022
    वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ डेमोक्रेटिक यूथ और अन्य प्रगतिशील संगठनों ने यूक्रेन के लेनिनवादी कम्युनिस्ट यूथ यूनियन के नेताओं अलेक्सांद्र कोनोनोविच और मिखाइल कोनोनोविच की गिरफ्तारी की निंदा की है। 
  • प्रेम कुमार
    यूपी विधानसभा चुनाव : लाभार्थी वर्ग पर भारी आहत वर्ग
    08 Mar 2022
    लाभार्थी वर्ग और आहत वर्ग ने यूपी विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया है। इसमें कोई संदेह नहीं है। मगर, सवाल यह है कि क्या इन दोनों वर्गों के मतदाताओं ने वोट करते समय जाति, धर्म और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License