NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
वनाधिकार: मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे सैकड़ों आदिवासियों को प्रशासन ने रोका
माकपा जिला सचिव प्रशांत झा का कहना है कि प्रशासन के रवैये से यह साफ जो चुका है कि कम-से-कम वनाधिकार के सवाल पर कांग्रेस-भाजपा में कोई अंतर नहीं है। पिछली भाजपा सरकार की तरह ही इस बार की कांग्रेस सरकार में भी आदिवासियों के साथ हुए 'ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने की कोई राजनैतिक इच्छाशक्ति नहीं है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Jan 2021
वनाधिकार: मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे सैकड़ों आदिवासियों को प्रशासन ने रोका

कोरबा (छत्तीसगढ़)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व में वनाधिकार के सवाल पर मुख्यमंत्री से अपनी बात कहने और ज्ञापन देने जा रहे सैकड़ों आदिवासियों को आज प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया और मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया। मुख्यमंत्री के दौरे में शायद यह पहली बार हुआ है कि किसी राजनीतिक पार्टी ने वनाधिकार के मुद्दे पर प्रदर्शन की घोषणा की हो और सैकड़ों आदिवासियों को बीच रास्ते में ही प्रशासन को बलपूर्वक रोकना पड़ा हो। इससे आदिवासियों के बीच सरकार की किरकिरी तो हुई ही है, यह मुद्दा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।

आम नागरिकों में यह चर्चा है कि एक ओर तो पूरी प्रशासनिक ताकत झोंक कर मुख्यमंत्री की बात सुनने के लिए भीड़ जुटाई गई, वहीं दूसरी ओर वनाधिकार और जनसमस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे आदिवासी किसानों को बलपूर्वक रोका गया है।

माकपा ने कहा है कि वनाधिकार के मुद्दे पर कोरबा में सरकारी दावों की पोल खुल गई है। पूरे जिले में वन भूमि पर बसे आदिवासियों की बेदखली का अभियान चल रहा है। पुराने आवेदनों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है और नए आवेदन पत्र तो लिए ही नहीं जा रहे हैं। इस मामले पर मुख्यमंत्री का अपने प्रशासन पर ही कोई नियंत्रण नहीं है। माकपा नेताओं ने आगामी दिनों में वन भूमि से बेदखल लोगों को पुनः काबिज कराने की मुहिम छेड़ने की घोषणा की है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में लॉकडाउन के दौरान पाली विकासखंड के उड़ता गांव में वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को बेदखल करने और रैनपुर में गलत तरीके से दावों को खारिज कर कब्जाधारियों को बेदखल करने का मामला सामने आया है। कोरबा निगम के क्षेत्र में वन भूमि पर बसे आदिवासियों को पट्टा देने के लिए तो प्रशासन तैयार ही नहीं है। इन घटनाओं को केंद्र में रखकर माकपा ने वनाधिकार का मुद्दा उठाया था और सैकड़ों आदिवासियों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की घोषणा की थी।

माकपा जिला सचिव प्रशांत झा का कहना है कि प्रशासन के रवैये से यह साफ जो चुका है कि कम-से-कम वनाधिकार के सवाल पर कांग्रेस-भाजपा में कोई अंतर नहीं है। पिछली भाजपा सरकार की तरह ही इस बार की कांग्रेस सरकार में भी आदिवासियों के साथ हुए 'ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने की कोई राजनैतिक इच्छाशक्ति नहीं है। उनका कहना है कि वनाधिकार के मामले में कोरबा जिला प्रशासन और वन विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा से जुड़े लगभग पचास गांवों के 500 से अधिक किसान इस मुद्दे पर गंगानगर में एकत्रित हुए। रैली शुरू होने से पहले गंगानगर में सभा भी हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे। सभा को माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, पार्षद राजकुमारी कंवर, सूरती कुलदीप, सीटू नेता वी एम मनोहर, एस एन बेनर्जी, जनाराम कर्ष, छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर, मान सिंह कंवर, हेम सिंह, दिलहरण चौहान, नंदलाल कंवर, दीपक साहू, जनवादी महिला समिति की प्रदेश संयोजक धनबाई कुलदीप आदि ने संबोधित किया।

सभा के बाद सभी ट्रेक्टरों में सवार होकर मुख्यमंत्री से मिलने कोरबा के लिए रवाना हुए। लेकिन पांच किमी. चलने के बाद ही उनके काफिले को प्रशासन ने रोक दिया। मुख्यमंत्री से एक प्रतिनिधिमंडल को मिलाने के माकपा नेताओं के आग्रह को भी उसने स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद  किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। 

माकपा ने प्रदर्शन करते हुए दीपका तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम  ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कोरबा नगर निगम के सबसे पिछड़े क्षेत्र बांकीमोंगरा में विकास के लिए 50 बिस्तरों का अस्पताल और शासकीय कॉलेज खोलने, भूविस्थापितों की समस्याएं हल करने और बंद पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने की भी मांग की गई है।

इस प्रदर्शन को आयोजित करने में शत्रुहन दास, रामप्रसाद, नरेंद्र साहू, हुसैन, दिलहरण बिंझवार, पुरुषोत्तम कंवर, रघु, संजय, देवकुंवर, तेरसबाई, डी एल टण्डन, कान्हा अहीर आदि कार्यकर्ताओं की प्रमुख भूमिका रही।

माकपा द्वारा दीपका तहसीलदार के जरिये मुख्यमंत्री को दिया गया ज्ञापन इस प्रकार है :

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आपका ध्यान इस क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहती है :

1. वनाधिकार के संबंध में :

कोरबा जिले में वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन की स्थिति बहुत खराब है। शासन की घोषित मंशाओं के विपरीत यहां प्रशासन काम कर रहा है। नतीजन, न तो नए आवेदन स्वीकार किये जा रहे हैं और न ही पुराने आवेदनों पर कोई कार्यवाही हो रही है। बेदखली जो रही है, सो अलग।

उदाहरणार्थ : 

1.1. हाल ही में पाली विकासखंड के उड़ता ग्राम में लॉक फऊँ की अवधि में वन भूमि में काबिज किसानों को बेदखल करने का मामला सामने आया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली पर रोक लगाई हुई है।

1.2. पाली विकासखंड के रैनपुर गांव में कई बार आदिवासियों ने पूरे सबूतों के साथ आवेदन दिए हैं। आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है, बल्कि गोठान बनाने के नाम पर उन्हें उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

1.3. कोरबा नगर निगम क्षेत्र में बहुत बड़ा वन क्षेत्र आता है, जिस पर हजारों परिवार बसे हैं। जिला प्रशासन शहरी क्षेत्र बताकर वनाधिकार देने से इंकार करता है, जबकि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

आपसे अनुरोध है कि इन ठोस प्रकरणों पर ठोस कार्यवाही का निर्देश देते हुए वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन को तेज करने का निर्देश प्रशासन को देंगे। माकपा का अनुरोध है कि वनाधिकार दावों के निरस्त प्रकरणों पर पुनर्विचार किया जाए तथा नए आवेदन पत्रों पर समय-सीमा के भीतर कार्यवाही की जाएं। 

2. विस्थापितों की भूमि समस्या के संबंध में :

2.1. एसईसीएल और विभिन्न निजी उद्योगों द्वारा बड़े पैमाने पर स्थानीय निवासियों की भूमि अधिग्रहित की गई है, लेकिन कई वर्षों से पुनर्वास के प्रकरण लंबित हैं। ये विस्थापित लोग जहां जिसको जैसी जगह मिली, वहां बसने के लिए मजबूर थे। इनकी तादाद नगर पालिक निगम कोरबा अन्तर्गत मड़वाढ़ोढा, कुचेना, भैरोताल, सुमेधा, दादरपारा, गंगानगर आदि गांवों में अधिक है। आपसे अनुरोध है कि इन गांवों में बसे विस्थापित किसानों को काबिज जमीन का स्थाई पट्टा दिया जाये तथा इन गांवों में बुनियादी मानवीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।

2.2. इस क्षेत्र में ऐसे भी बहुतायत प्रकरण हैं कि कोयला खदान समेत अन्य उद्योगों के लिए अधिग्रहित जमीन पर आज भी किसानों का भौतिक कब्जा है, जबकि ऐसी खदानें और उद्योग बंद हो चुके हैं। अतः नए भूमि अधिग्रहण कानून की भावना के अनुसार ऐसे जमीनों को मूल खातेदारों को वापस किया जाए।

3. बिजली बिल के संबंध : 

आप जानते हैं कि प्रदेश में मार्च से सितंबर माह तक लॉकडाउन ही था और गरीब लोग रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे थे। ऐसे में बिजली बिलों को पटाना उनके लिए नामुमकिन था। अब लोगों के पास भारी-भरकम बिजली बिल आ रहे हैं। माकपा मांग करती है कि गरीब परिवारों का बकाया बिजली बिल माफ किया जाये।

4. बांकीमोंगरा क्षेत्र के विकास के संबंध में : 

कोरबा निगम क्षेत्र में माकपा के समर्थन पर कांग्रेस की निगम सरकार टिकी है। माकपा के समर्थन लेते हुए कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से निगम के सबसे पिछड़े क्षेत्र बांकीमोंगरा के विकास के लिए काम करने का वादा किया था, लेकिन इस वादे के अनुरूप आज तक कोई पहलकदमी नहीं हुई है। अतः माकपा मांग करती है कि बांकी मोंगरा में 50 बिस्तरों का अस्पताल और एक शासकीय कॉलेज खोला जाएं।

5. बंद उद्योगों को चालू करने के संबंध में : 

कोरबा जिला को पूरे देश का औद्योगिक तीर्थ कहा जाता है। जिले में उद्योगों के माध्यम से अरबों रुपये का निवेश हुआ है और किसानों की जमीन अधिग्रहित कर उद्योगों की स्थापना की गई है। बीपीसीसी, वंदना पावर जनरेशन, फर्टिलाइजर आदि कंपनियां बंद पड़े हैं, जिसके कारण हजारों मजदूर परिवारों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। अतः माकपा इन बंद पड़े उद्योगों को चालू करने की मांग करती है और जो उद्योग शुरू नहीं हो सकते, उन उद्योगों की जमीन मूल खातेदारों को वापस की जाए।

Chattisgarh
Marxist Communist Party
CPI-M
Forest Rights
bhupesh baghel
Chhattisgarh Kisan Sabha
aadiwasi

Related Stories

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

अमित शाह का शाही दौरा और आदिवासी मुद्दे

सालवा जुडूम के कारण मध्य भारत से हज़ारों विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग 

सोनी सोरी और बेला भाटिया: संघर्ष-ग्रस्त बस्तर में आदिवासियों-महिलाओं के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा

स्पेशल रिपोर्ट: पहाड़ी बोंडा; ज़िंदगी और पहचान का द्वंद्व

केंद्रीय बजट में दलित-आदिवासी के लिए प्रत्यक्ष लाभ कम, दिखावा अधिक

हर साल दलित और आदिवासियों की बुनियादी सुविधाओं के बजट में कटौती हो रही है :  बीना पालिकल

जयपाल सिंह मुंडा: आदिवासी समाज की राजनीति और विचारधारा की प्राणवायु

झारखंड: ‘स्वामित्व योजना’ लागू होने से आशंकित आदिवासी, गांव-गांव किए जा रहे ड्रोन सर्वे का विरोध


बाकी खबरें

  • पब्लिक का पैसा, सेठों के हाथ
    न्यूज़क्लिक टीम
    पब्लिक का पैसा, सेठों के हाथ
    16 Jul 2021
    पिछले दो दशकों में कई कंपनियों ने सरकारी बैंकों से करोड़ों रूपये का क़र्ज़ लिया और उसे कभी लौटाया नहींI अब सरकारी बैंक कुछ पैसा वापस लेकर इस कर्ज़े को रफादफा कर रहे हैंI इससे जनता का पैसा बड़े…
  • सरकार बनाने में विफल रहने के बाद लेबनान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री हरीरी का इस्तीफ़ा
    पीपल्स डिस्पैच
    सरकार बनाने में विफल रहने के बाद लेबनान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री हरीरी का इस्तीफ़ा
    16 Jul 2021
    केवल सात महीने सत्ता में रहे प्रधानमंत्री हसन दिआब द्वारा बेरूत विस्फोटों के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा देने के बाद लेबनान में पिछले साल अगस्त से कार्यवाहक सरकार थी।
  • "दिल्ली 2041 के लिए डीडीए का मास्टर प्लान कामगार वर्ग की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम"
    रौनक छाबड़ा
    "दिल्ली 2041 के लिए डीडीए का मास्टर प्लान कामगार वर्ग की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम"
    16 Jul 2021
    गुरुवार को 'मैं भी दिल्ली' कैंपेन ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुलाकर दिल्ली-2041 के मसौदे पर चर्चा की। यह एक क़ानूनी दस्तावेज़ है, जिसके पास दिल्ली में शहरी विकास को बदलने की ताक़त है।
  • इंटरकल्चरल एजुकेशन लॉ लागू करने की मांग को लेकर इक्वाडोर के शिक्षक भूख हड़ताल पर
    पीपल्स डिस्पैच
    इंटरकल्चरल एजुकेशन लॉ लागू करने की मांग को लेकर इक्वाडोर के शिक्षक भूख हड़ताल पर
    16 Jul 2021
    इस क़ानून में शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट में वृद्धि का प्रावधान है, ये समावेशी और गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा की गारंटी देता है, शिक्षकों के मूल वेतन में वृद्धि करता है। इसमें कोविड-19 महामारी के कारण…
  • अल्जीरिया में 100 से अधिक हिरक प्रदर्शनकारी रिहा
    पीपल्स डिस्पैच
    अल्जीरिया में 100 से अधिक हिरक प्रदर्शनकारी रिहा
    16 Jul 2021
    इस सामूहिक रिहाई से पहले, सरकार विरोधी हिरक विरोध प्रदर्शनों या अन्य विपक्षी समूहों में समर्थन या भाग लेने के लिए अल्जीरियाई सरकार द्वारा 300 से अधिक राजनीतिक क़ैदियों को हिरासत में लिया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License