NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
ग़ाज़ीपुर बॉर्डर झड़प मामला : टिकैत ने कहा जाति आधारित दंगे भड़काने की साज़िश रच रही है भाजपा
एसकेएम की मांग है कि जिन अधिकारियों ने एसकेएम मंच से मुश्किल से 50 मीटर की दूरी पर इस विशेष स्थल पर “भाजपा नेता के स्वागत” की अनुमति दी है, उनकी पहचान की जानी चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। हथियार मिलने और वाहनों को क्षतिग्रस्त किए जाने के आरोप जाहिर तौर पर राजनीतिक मोड़ देने वाले हथकंडे हैं। विरोध कर रहे किसानों की ओर से स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Jul 2021
टिकैत

गाजीपुर सीमा पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कार्यकर्ताओं और कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को भाजपा पर जाति आधारित दंगे भड़काने की साजिश रचने का आरोप लगाया। जबकि किसान संयुक्त मोर्चे ने भी इसे शांतिपूर्ण ढंग से बैठे किसानों को भड़काने की कोशिश बताया। हालाँकि दिल्ली के बाकी बॉर्डर पर बैठे किसान आंदोलन में किसानों के जत्थे आ रहे हैं और किसान अपने आंदोलन को लगतार व्यापक कर रहे हैं। ये किसान पिछले 217 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं।  इस दौरान कई बार बीजेपी समर्थकों ने किसानों के साथ उलझने का प्रयास किया।  इससे पहले 28 जनवरी को भी कथिततौर पर कुछ बीजेपी समर्थको ने गाजीपुर बॉर्डर पर हंगामा किया था। इस तरह सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर भी कुछ मामले हुए थे।  

कल बुधवार की घटना के बाद बीकेयू की ओर से जारी बयान के अनुसार राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसान नेताओं को काले झंडे दिखाये और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। बयान में कहा गया है कि वाल्मीकि समाज के सदस्यों ने कृषि कानूनों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।

एक प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झड़प उस वक्त हुई जब भाजपा कार्यकर्ता एक फ्लाईवे पर जुलूस निकाल रहे थे, जहां प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से बीकेयू के समर्थक नवंबर 2020 से डेरा डाले हुए हैं।

किसानों ने आरोप लगाया कि यह प्रकरण सात महीने पुराने विरोध को दबाने के लिए भाजपा और आरएसएस की साजिश है। वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि जब वे भाजपा के नवनियुक्त महासचिव अमित वाल्मीकि के सम्मान में स्वागत जुलूस निकाल रहे थे तो अपशब्दों और जातिसूचक शब्दों का का इस्तेमाल किया गया जिसकी वजह से झड़प हुई।

संयुक्त मोर्चा ने भी अपने बयान में इस पर चिंता जताई और कहा कई दिनों से बीजेपी–आरएसएस के गुण्डे गाजीपुर बॉर्डर पर पर काले कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। भाजपा नेता अमित वाल्मीकि का स्वागत करने के बहाने कई भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ता और समर्थक आज गाजीपुर बॉर्डर यूपी गेट धरना स्थल पर आकर मोर्चा मंच के करीब चले गए। उन्होंने किसान आंदोलन के खिलाफ नारे भी लगाए। उन्होंने विरोध करने वाले किसानों को “गद्दार”, “राष्ट्र विरोधी”, “खालिस्तानी” और “आतंकवादी” कहकर नारे लगाए। भाजपा के गुंडों ने मोर्चा के मंच पर पथराव किया। इस स्थान पर भाजपा नेता का स्वागत करने का कोई औचित्य नहीं था और यह केवल भाजपा-आरएसएस की समय-परीक्षण की रणनीति के तहत प्रदर्शनकारी किसानों को पुलिस के साथ टकराव को भड़काने के लिए किया गया था। वे आक्रामक रूप से मंच की ओर बढ़े, डिवाइडर को पार करने की धमकी दी। इस पर किसानों ने विरोध किया और उन्हें काले झंडों से घेर लिया। किसानों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को जगह छोड़ने पर जोर दिया। पुलिस पूरे समय मूकदर्शक बनी रही। इस झड़प में, कम से कम 5 किसान घायल हो गए।

मोर्चा ने आगे अपने बयान में कहा भाजपा स्पष्ट रूप से किसी न किसी तरह से कलह और अशांति लाने की कोशिश कर रही है, जिसमें लोगों को जाति के आधार पर बांटना भी शामिल है। बीजेपी-आरएसएस की ये कायराना रणनीति जगजाहिर है और किसान इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

 एसकेएम की मांग है कि जिन अधिकारियों ने एसकेएम मंच से मुश्किल से 50 मीटर की दूरी पर इस विशेष स्थल पर “भाजपा नेता के स्वागत” की अनुमति दी है, उनकी पहचान की जानी चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। हथियार मिलने और वाहनों को क्षतिग्रस्त किए जाने के आरोप जाहिर तौर पर राजनीतिक मोड़ देने वाले हथकंडे हैं। विरोध कर रहे किसानों की ओर से स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

महाराष्ट्र में संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के कई किसान नेताओं ने मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने 5 जुलाई को आगामी राज्य विधानमंडल सत्र में एक विधानसभा प्रस्ताव के लिए दबाव डाला, जो केंद्र पर तीन काले कृत्यों को निरस्त करने और किसानों के लिए एमएसपी पर कानूनी गारंटी के लिए जोर देगा। प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के राज्य एपीएमसी अधिनियम में संशोधन की भी मांग की ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उचित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बाद व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही इस तरह के संशोधनों को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

यह बताया गया है कि केंद्र सरकार दिल्ली वायु प्रदूषण से संबंधित अध्यादेश को केंद्रीय कानून में बदलने के लिए एक विधेयक लाएगी, जो कि आगामी संसद सत्र में कथित तौर पर 19 जुलाई 2021 से होगा। एसकेएम की मांग है कि सरकार को इसे गुप्त रूप से नहीं लाना चाहिए क्योंकि इस कानून में पराली जलाने के लिए किसानों को दंडित करने का धूर्त प्रावधान है। दिसंबर 2020 के अंत में एसकेएम नेताओं और सरकार के बीच बातचीत के दौरान सरकार ने विरोध करने वाले किसानों को मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि किसानों पर जुर्माना प्रावधान लागू नही होंगे ।

सिंघू बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर और अधिक किसान धरना स्थलों पर पहुंच रहे हैं। स्थानीय हरियाणा के किसानों द्वारा दानोदा से 200 क्विंटल गेहूं दान किया गया है और इसे सिंघू बॉर्डर पर लाया जा रहा है, जो एक बार फिर किसानों के आंदोलन के स्थानीय समर्थन को प्रदर्शित करता है। हुल क्रांति दिवस में शामिल होने के लिए एआईकेकेएमएस (AIKKMS) से जुड़े किसानों का एक दल बधवार  हरियाणा से सिंघू बॉर्डर पहुंचा है ।

दूसरी तरफ हरियाणा में बीजेपी नेताओं का विरोध जारी है, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को बरवाला गांव में आयोजित बैठक को किसानों के विरोध के कारण रद्द करना पडा जबकि रातेवाली गांव मे किसानों के काले झंडे के विरोध का सामना करना पडा । किसान बड़ी संख्या में इकट्ठा होने लगे और विरोध में खड़े हो गए और भाजपा नेता का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

अन्य जगहों के किसान विभिन्न बुनियादी मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पंजाब के किसान नियमित बिजली आपूर्ति के लिए, उत्तर प्रदेश के किसान उनके द्वारा किए गए गेहूं और गन्ने की बिक्री के भुगतान के लिए, अन्य राज्यों में किसान धान की खरीद, तेलंगाना के किसान ज्वार के मुआवजे की मांग कर रहे हैं आदि।

एसकेएम को कई असाधारण व्यक्तियों पर गर्व है जो आंदोलन में प्रदर्शनकारी किसानों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं लुधियाना के गुरप्रीत सिंह सिधवान काला जिसने किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए अमरीका में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। वे पहले सिंगापुर में काम करते थे। गुरप्रीत सिंह ने फैसला किया है कि विदेश लौटने के पहले तब तक संघर्ष का हिस्सा बने रहेंगे जब तक कि सरकार आंदोलन की मांगों को पूरा नहीं कर लेती ।

Ghazipur border clash case
Ghazipur Border
farmers protest
New Farm Laws
rakesh tikait
BJP
AIKKMS

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • श्रुति एमडी
    ‘तमिलनाडु सरकार मंदिर की ज़मीन पर रहने वाले लोगों पर हमले बंद करे’
    05 Apr 2022
    द्रमुक के दक्षिणपंथी हमले का प्रतिरोध करने और स्वयं को हिंदू की दोस्त पार्टी साबित करने की कोशिशों के बीच, मंदिरों की भूमि पर रहने वाले लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
  • भाषा
    श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई
    05 Apr 2022
    "सरकारी बजट पर मतदान के दौरान गठबंधन के पास 225 सांसदों में से 157 का समर्थन था, लेकिन अब 50 से 60 सदस्य इससे अलग होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार न सिर्फ दो-तिहाई बहुमत खो देगी, बल्कि सामान्य…
  • विजय विनीत
    एमएलसी चुनाव: बनारस में बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी के आगे दीन-हीन क्यों बन गई है भाजपा?
    05 Apr 2022
    पीएम नरेंद्र मोदी का दुर्ग समझे जाने वाले बनारस में भाजपा के एमएलसी प्रत्याशी डॉ. सुदामा पटेल ऐलानिया तौर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप जड़ रहे हैं कि वो…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: आज दूसरे दिन भी एक हज़ार से कम नए मामले 
    05 Apr 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 96 हज़ार 369 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है। और एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 54 रह गयी है।
  • मुकुल सरल
    नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
    05 Apr 2022
    नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License