NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
गोवाः बहुमत के आंकड़े से पिछड़ी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी
गोवा विधानसभा में कुल सीटें 40 हैं यानी बहुमत के लिए उसे 21 सीटों की जरूरत है लेकिन किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता दिख रहा है। राज्य में बीजेपी सबसे ज्यादा 20 सीटों पर जीत हासिल कर ली है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Mar 2022
गोवाः बहुमत के आंकड़े से पिछड़ी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी
TOI

चुनाव आयोग ने गोवा के 39 सीटों के परिणाम की घोषणा कर दी है और अब एक सीट पर घोषणा करना बाकी हैं। आयोग की वेबसाइट के अनुसार इस बार के चुनाव में भी किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाई है। 40 सीटों वाली विधानसभा गोवा में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 21 सीटों की जरूरत है लेकिन राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी को 20 सीटें ही मिल पाई हैं ऐसे में वह बहुमत के आंकड़े से 1 सीट से पिछड़ गई है। उधर 2017 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन सरकार बनाने से चूकी कांग्रेस को इस बार 11 सीटें ही मिल पाई। पिछली बार के चुनाव में कांग्रेस को 17 सीट मिली थीं। वहीं आम आदमी पार्टी की बात करें तो पिछली बार के चुनाव में गोवा के मैदान में उतरी इस पार्टी को इस बार केवल दो सीटें ही मिल पाई हैं। वहीं इस बार के चुनाव में पहली बार चुनावी मैदान में हाथ आजमाई ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिल पाई है।

वहीं तीन सीटों पर निर्दलीय के खाते में चली गई है। उधर महारष्ट्रवादी गोमंतक ने दो सीटों पर जीत हासिल कर ली है जबकि गोवा फॉरवार्ड पार्टी और रिवॉल्यूशनरी गोअंस पार्टी ने एक-एक सीट हासिल की है।

देश के पांच राज्यों में से सबसे छोटे राज्य गोवा में चुनाव दूसरे चरण में 14 फरवरी को हुआ था। यहां बीजेपी का मुख्यमंत्री चेहरा संकेलिम सीट से वर्तमान सीएम प्रमोद सावंत ने कांग्रेस के धर्मेष सगलानी से बहुत कम अंतर 666 वोटों से जीत हासिल कर लिया। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे और पणजी से निर्दलीय उम्मीदवार उत्पल पर्रिकर भाजपा प्रत्याशी अतानासियो मोनसेरेट से 716 मतों से हार गए हैं। बता दें कि चुनाव से पहले मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर का भाजपा के साथ टिकट को लेकर मतभेद चला था। इस बारे में भाजपा और उत्पल पर्रिकर का विवाद सोशल मीडिया तक आ गया था। गोवा के प्रभारी देवेंद्र फड़नवीस से लेकर केंद्रीय नेताओं तक ने उत्पल पर्रिकर से बात की थी। लेकिन कुल मिलाकर बात बनी नहीं। परिणामस्वरूप उत्पल पर्रिकर ने भाजपा से इस्तीफ़ा दे दिया और पणजी से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी।

ज्ञात हो कि इस बार कांग्रेस ने राज्य में हुए चुनाव में अपनी पा्र्टी का सीएम चेहरा घोषित नहीं किया था। कांग्रेस की बात करें तो 2022 के आते-आते पार्टी की स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि विधानसभा में कांग्रेस के सिर्फ 3 विधायक बचे थें जबकि पार्टी ने 2017 के चुनाव में 17 सीटों के साथ बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। गोवा में कांग्रेस के सामने उस समय नेतृत्व का सबसे बड़ा संकट तब पैदा हो गया था जब पुराने नेता पार्टी छोड़ने लगे थे। कई बड़े दिग्गज पार्टी छोड़ चुके थे और इन हालात में चुनाव में उतरना उम्मीदवार और कार्यकर्ताओं दोनों के मनोबल को कमजोर करने के लिए काफी था। चुनाव आते-आते गोवा कांग्रेस के पास न तो कोई बड़ा चेहरा था और न मजबूत संगठन था। पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फलेरियो ने सितंबर में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। कार्यकारी अध्यक्ष अलेक्सो रेजिनाल्डो लोरेंको ने भी दिसंबर में पार्टी छोड़ दी थी। इस बार वे निर्दलीय के तौर पर कर्टोरियम से चुनाव लड़े और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मोरेनो रेबेलो को हराकर जीत हासिल कर ली।

आम आदमी पार्टी ने पिछली बार भी चुनाव लड़ा था लेकिन उसे कोई भी सीट नहीं मिली थी। इस बार भी आम आदमी पार्टी मैदान में थी और उसने दो सीटों पर कब्जा कर लिया है। आम आदमी पार्टी ने अमित पालेकर को गोवा का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन वे हार गए है। पालेकर पेशे से वकील हैं और भंडारी समाज से आते हैं। 46 साल के पालेकर ने गोवा के सांता क्रूज से चुनाव लड़ा था।

इस बार के चुनाव में टीएमसी भी मैदान में थी। हालांकि, टीएमसी के अंदर भी कम उठा-पटक नहीं हुआ है लेकिन फिर भी टीएमसी के मैदान में होने से कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ गई थी। वोट काटने के अलावा एक दिक्कत है कि कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने टीएमसी का दामन थाम लिया था।

उधर 2017 के चुनाव की बात करें तो 40 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं थी यानी बहुमत के आंकड़े 21 सीटों से चार सीटें कम ला पाई थी। लेकिन दिलचस्प रहा कि भाजपा को उससे भी कम कुल 13 सीटें मिलीं थी मतलब बहुमत से 8 सीटें कम थी। बावजूद इसके गोवा में भाजपा ने सरकार बना ली थी। जबकि साफ था कि जनता ने सरकार के खिलाफ वोट किया था। भाजपा 2012 से गोवा की सत्ता में थी।

गोवा की सबसे पुरानी पार्टी एमएजी यानी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी ने 2017 के चुनाव में तीन सीटें जीतीं थी जिसका वर्ष 2019 में भाजपा में कथित तौर पर विलय हो गया था। हालांकि उस समय इसके दो सदस्य ही भाजपा में गए जबकि एक तीसरे विधायक ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए।

वहीं जीएफपी यानी गोवा फॉरवर्ड पार्टी के पास भी तीन सीटें आईं थी जबकि निर्दलीय ने भी तीन सीटें हासिल की थी। साथ ही एनसीपी के खाते में एक सीट रही थी।

वोट शेयर की बात की जाए तो भाजपा को यहां कांग्रेस से कुछ ज्यादा वोट मिला था हालांकि सीटें कांग्रेस की ज़्यादा थीं। कांग्रेस को 17 सीटों के साथ गोवा में कुल 28.69 फीसदी वोट मिला था जबकि भाजपा को 13 सीटों के साथ 32.87 फीसद वोट मिला था।

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी को 11.41 फीसद और गोवा फॉरवर्ड पार्टी को महज़ 3.52 फीसद वोट मिला था। फिर भी सीटें दोनों की बराबर रहीं थी यानी तीन-तीन। इसी तरह निर्दलीयों को भी 11.26 फीसदी वोट हासिल हुए थे जबकि एनसीपी को 2.31 फीसदी ही वोट मिला था। जबकि अन्य के खाते में 9.93 फीसदी वोट गया था।

2017 के चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने मंथन करने में देरी कर दी थी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी से गठबंधन करने में हिचक दिखाई थी लेकिन भाजपा ने झटपट अन्य दलों से गठबंधन करके मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में सरकार भी बना ली थी। उस समय मनोहर पर्रिकर केंद्र में रक्षा मंत्री थे लेकिन भाजपा ने अन्य दलों का समर्थन पाने के लिए आनन फानन में उन्हें रक्षा मंत्री जैसा अहम पद छुड़वा कर फिर गोवा का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। इसी सबसे सबक लेकर इस चुनाव के लिए कांग्रेस पहले से ही तैयारी कर रही थी और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी व गोवा फॉरवर्ड पार्टी समेत सभी छोटे-बड़े दलों से बातचीत कर रही थी ताकि नतीजों के बाद सोचने-विचारने में फिर देर न हो जाए।

 

goa
Assembly Election 2022
BJP
Congress
Aam Admi Party

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल

गोवा में फिर से भाजपा सरकार

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल

जनादेश-2022: यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी की वापसी और पंजाब में आप की जीत के मायने


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!
    08 Feb 2022
    भारतीय रिजर्व बैंक की स्टेट फाइनेंस एंड स्टडी ऑफ़ बजट 2020-21 रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सरकार के द्वारा जन स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च किया गया है।
  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    चमोली जिले का थराली विधानसभा: आखिर क्या चाहती है जनता?
    07 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव से पहले न्यूज़क्लिक की टीम ने चमोली जिले के थराली विधानसभा का दौरा किया और लोगों से बातचीत करके समझने का प्रयास किया की क्या है उनके मुद्दे ? देखिए हमारी ग्राउंड रिपोर्ट
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म का कार्ड नाजी दौर में ढकेलेगा देश को, बस आंदोलन देते हैं राहत : इरफ़ान हबीब
    07 Feb 2022
    Exclusive इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने देश के Living Legend, विश्व विख्यात इतिहासकार इरफ़ान हबीब से उनके घर अलीगढ़ में बातचीत की और जानना चाहा कि चुनावी समर में वह कैसे देख रहे हैं…
  • Punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाबः बदहाल विश्वविद्यालयों पर क्यों नहीं बात करती राजनैतिक पार्टियाँ !
    07 Feb 2022
    पंजाब में सभी राजनैतिक पार्टियाँ राज्य पर 3 लाख करोड़ के कर्ज़े की दुहाई दे रही है. इस वित्तीय संकट का एक असर इसके विश्वविद्यालयों पर भी पड़ रहा है. अच्छे रीसर्च के बावजूद विश्वविद्यालय पैसे की भारी…
  • COVID, MSMEs and Union Budget 2022-23
    आत्मन शाह
    कोविड, एमएसएमई क्षेत्र और केंद्रीय बजट 2022-23
    07 Feb 2022
    बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए घोषित अधिकांश योजनायें आपूर्ति पक्ष को ध्यान में रखते हुए की गई हैं। हालाँकि, इसके बजाय हमें मौजूदा संकट से निपटने के लिए मांग-पक्ष वाली नीतिगत कर्रवाइयों की कहीं अधिक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License