NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
"सरकार से कुछ सब्सिडी की मांग की थी। सरकार की तरफ से पांच हज़ार रूपये देने का वादा भी किया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला।"
मोहम्मद ताहिर
11 Feb 2022
गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब

साल 2022 के आते ही देशभर में चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया था जो अभी पूरे शबाब पर है। दरअसल देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं। इस क्रम में दस फरवरी को यूपी में पहले चरण का चुनाव संपन्न भी हो चुका है।

इन 5 राज्यों में, देश के सबसे छोटा राज्य गोवा की बात करें तो यहां 14 फरवरी को चुनाव होना है। गोवा देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और यहां की इकोनॉमी बहुत कुछ पर्यटन पर निर्भर है। लॉकडाउन से पहले साल भर यहां पर्यटकों की भीड़ रहती थी। लेकिन कोरोना वायरस के कारण देशभर में लगाए गए लॉकडाउन से पर्यटन उद्योग पर संकट छा गया था। कुछ ऐसा ही हाल गोवा का भी है। कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन और अभी ओमिक्रॉन की दस्तक से घबराए पर्यटक गोवा नहीं आ पा रहे हैं। जिससे इस कारोबार से जुड़े लोगो को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही आरोप है कि सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद भी नहीं मिल रही है।

(फोटो–मोहम्मद ताहिर)

गोवा के पर्यटन की लॉकडाउन में यह हालत थी कि इसके संकट से उबरने के लिए गोवा के पर्यटन मंत्री ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री राहत कोष से पर्यटन उद्योग के लिए मदद मांगी थी।
 

हालांकि गोवा चुनाव की बात की जाए तो चुनाव में यह मुद्दे कहीं दूर दूर तक नजर आ रहे हैं। इसके उलट सभी दल जमीनी मुद्दों को छोड़ एक दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं। इन मुद्दों में गोवा की आजादी से लेकर इतिहास पर तो बहस की जा रही है, लेकिन लोगों के जमीनी मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बृहस्पतिवार को गोवा के मापुसा में एक चुनावी रैली के संबोधन में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू चाहते, तो गोवा को 1947 में जब भारत को आजादी मिली उसके कुछ “घंटों के भीतर” मुक्त किया जा सकता था, लेकिन राज्य को पुर्तगाली शासन से मुक्त होने में 15 साल लगे। मोदी ने कहा कि कांग्रेस गोवा को अपना ‘दुश्मन’ मानती रही है और वही व्यवहार अब भी जारी है। इस बार गोवा के रण में दिल्ली की आम आदमी पार्टी और बंगाल की टीएमसी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

गोवा की सड़कों पर लगे राजनीतिक पार्टियों के होर्डिंग (फोटो – मोहम्मद ताहिर)

गोवा में पर्यटन से जुड़े लोगों को होने वाले नुकसान, उनकी हालत और चुनाव से संबंधित उनके मुद्दे जानने के लिए हमने गोवा की राजधानी पणजी के कुछ टैक्सी चालकों से बातचीत की। पर्यटक न आने से इनको काफी नुकसान हुआ है और कुछ लोगों को तो लॉकडाउन में दूसरे काम भी करने पड़े।

यहां हमारी मुलाकात दत्ता गौड़े से हुई। 10 साल से गोवा में टैक्सी चलाने वाले 43 साल के दत्ता गौड़े भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, जो कोरोना के समय हुए लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।


ओल्ड गोवा में दो बच्चों और पत्नी के साथ रहने वाले दत्ता ने टैक्सी स्टैंड पर मुझे बताया, "लॉकडाउन के दौरान मछली नारियल आदि बेचकर आजीविका गुजारी। वो काम करने पड़े, जो जिंदगी में कभी नही सोचा था।"

(फोटो–मोहम्मद ताहिर)

इस बीच दत्ता भी लॉकडाउन के दौरान बीजेपी सरकार के काम से कुछ नाखुश नजर आए। दत्ता उस दौर को याद कर बताते हैं, "(लॉकडाउन में) बीजेपी ने कुछ नहीं किया। आम आदमी पार्टी की तरफ से जरूर कुछ लोग राशन देने आए थे। पहले पत्नी को कुछ पेंशन भी मिलती थी लेकिन अब वह भी नहीं मिलती।"
 

इस दौरान पणजी टैक्सी स्टैंड पर हमने कई अन्य बाइक टैक्सी चालकों से भी बात करने की कोशिश की लेकिन वह बेहद भयभीत नजर आए। उन्हें डर था कि अगर वह कुछ कहेंगे तो उन का लाइसेंस कैंसिल किया जा सकता है। इस कारण उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। साथ ही जब उनके सुपरवाइजर से हमने बात करने की कोशिश की तो उसने भी इधर उधर की बात करते हुए टाल दिया।
 

हालांकि थोड़ी देर वहीं गुजारने पर एक बाइक टैक्सी चालक से हुई सामान्य बातचीत में उसने बताया कि पहले एक हजार रूपए तक की कमाई हो जाती थी, लेकिन अब वह पांच-छह सौ रूपये ही रह गई है।

पर्यटन को हुए नुकसान और टैक्सी चालकों की हालत को बेहतर जानने के लिए पणजी टैक्सी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गुरूदास पाई से हम पणजी बस स्टेशन पर स्थित उनके चेंबर में मिले। पाई ने टैक्सी कारोबार पर कोरोना, लॉकडाऊन और उसकी वर्तमान हालत के बारे में हमसे विस्तार से बातचीत की।


(फोटो–मोहम्मद ताहिर)

पाई बताते हैं, "टैक्सी का धंधा बहुत हल्का है। कोरोना और ओमिक्रॉन के कारण टूरिस्ट नहीं आ रहे हैं, विदेशी पर्यटक ना के बराबर है जिससे पूरा टूरिज्म हिल गया है। जिससे इससे जुड़े लोगों पर रोजगार का संकट पैदा हो गया है। इसकी भरपाई के लिए हमने सरकार से कुछ सब्सिडी की मांग की थी। और उन्होंने पांच हजार रुपए देने का वादा भी किया था और इसके लिए हम से पिछले साल अगस्त-सितंबर महीने में सोशल वेलफेयर ऑफिस में फॉर्म भी भरवाए थे लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। जिस कारण लॉकडाउन में बहुत से ड्राइवरों ने सब्जी और मछली तक बेचकर अपनी आजीविका चलाई।

पाई वर्तमान बीजेपी सरकार से नाराज दिखाई देते हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने टैक्सी वालों के ऊपर और अन्य खर्चे लाद दिए हैं। जिस कारण वह आम आदमी पार्टी को सपोर्ट करने का मन बना रहे हैं।

पाई कहते हैं, "टैक्सी मीटर का अतिरिक्त भार भी हम पर डाल दिया गया है पहले जो टैक्सी मीटर पांच हजार रूपए में मिलता था उसका अब ग्यारह हजार दो सौ रुपए देना पड़ रहा है। "

यह पूछे जाने पर कि आने वाली सरकार से आप क्या चाहते हैं तो इसके जवाब में गुरुदास पाई कहते हैं, "बस हम यही चाहते हैं कि हमारे ऊपर कोई अतिरिक्त कर आदि न लगाया जाए और टैक्सी ड्राइवरों की मदद की जाए।"

(मोहम्मद ताहिर दिल्ली स्थित स्वतंत्र पत्रकार है। वे पॉलिटिक्स, ह्यूमन राइट्स, माइनॉरिटी और सामाजिक विषयों आदि को कवर करते हैं।)

 

 

goa
election
Corona
Omicron
Taxi
driver
Issues
BJP

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल

गोवा में फिर से भाजपा सरकार

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल

उत्तराखंड में बीजेपी को बहुमत लेकिन मुख्यमंत्री धामी नहीं बचा सके अपनी सीट


बाकी खबरें

  • sunil
    भाषा
    पेले से आगे निकले छेत्री, भारत ने आठवां सैफ ख़िताब जीता, महिला टीम भी चमकी
    28 Dec 2021
    भारतीय फुटबॉल को वर्ष 2021 में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली । पचास और साठ के दशक का अपना खोया गौरव लौटाने की कोशिश में जुटी टीम उस पल का इंतजार ही करती रही जो देश में इस खेल की दशा और दिशा बदल सके।
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: किसानों की आय दोगुनी होने का टूटता वादा, आत्महत्या का सिलसिला जारी
    28 Dec 2021
    बुंदेलखंड के बाँदा ज़िले में युवा किसान राम रुचि और प्रमोद पटेल ने इसी साल क़र्ज़ के दबाव में आत्महत्या कर ली। न्यूज़क्लिक ने दोनों परिवारों से मिल कर बात की और जानने की कोशिश की कि सरकार का किसानों…
  • officers of Edu dept eating MDM with students
    राजेश डोबरियाल
    उत्तराखंड: 'अपने हक़ की' लड़ाई अंजाम तक पहुंचाने को तैयार हैं दलित भोजन माता सुनीता देवी
    28 Dec 2021
    “...चूंकि क्रिसमस की बैठक में सभी पक्ष अभी क्षेत्र का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखने पर सहमत हुए हैं इसलिए वे जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रहे हैं। नियमानुसार तो सुनीता देवी की ही भोजनमाता…
  • UP Election 2022
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव 2022: बेरोज़गार युवा इस चुनाव में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं
    28 Dec 2021
    मोदी-योगी से नाउम्मीद युवाओं को विपक्ष से चाहिए रोजगार का भरोसा
  • NAND KISHOR GURJER
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव आते ही बीजेपी वालों को लोगों के खाने से क्या दिक्कत हो जाती है?
    28 Dec 2021
    ग़ाज़ियाबाद के लोनी से विधायक नंदकिशोर गुर्जर का तानाशाही रवैया एक बार फिर देखने को मिला, जब उन्होंने अपने इलाके की सभी मीट की दुकानें बंद करवा दीं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License