NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
गोवा: सीएम सावंत का रेप को लेकर दिया बयान सिर्फ विवादित ही नहीं, असंवेदनशील भी है!
विपक्ष सरकार पर खराब कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है तो वहीं सरकार कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय मां-बाप को ही नसीहत दे रही है।
सोनिया यादव
29 Jul 2021
Pramod Sawant
image credit- Social media

“जब 14 साल के बच्चे पूरी रात समुद्र तट पर रहते हैं तो माता-पिता को आत्ममंथन करने की जरूरत है। हम सिर्फ इसलिए ही सरकार और पुलिस पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते, कि बच्चे नहीं सुनते।"

ये बयान मोरल पुलिसिंग कर रहे किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का है। सीएम सावंत गोवा में रविवार, 25 जुलाई की रात बेनॉलिम बीच पर दो नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप और मारपीट की घटना का जिम्मेदार लड़कियों के मांं-बाप को बता रहे हैं। सावंत के मुताबिक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना माता-पिता की जिम्मेदारी है और उन्हें अपने बच्चों खासतौर से नाबालिगों को रात-रात भर बाहर नहीं रहने देना चाहिए।

आपको बता दें कि सीएम सावंत के इस असंवेदशील बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है। विपक्ष सरकार पर खराब कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है तो वहीं सरकार कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय मां-बाप को ही नसीहत दे रही है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया खबरों के मुताबिक बुधवार, 28 जुलाई को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण नोटिस पर चर्चा के दौरान कहा कि जब 14 साल के बच्चे पूरी रात समुद्र तट पर रहते हैं, तो माता-पिता को आत्ममंथन करने की जरूरत है। हम सिर्फ इसलिए ही सरकार और पुलिस पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते, कि बच्चे नहीं सुनते।

गृह विभाग का भी प्रभार संभालने वाले सीएम सावंत ने आगे कहा, "हम सीधे तौर पर पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हैं लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि एक पार्टी के लिए समुद्र तट पर गए 10 युवाओं में चार पूरी रात वहां रुकते है और बाकी के छह घर चले जाते हैं। दो लड़के तथा दो लड़कियां पूरी रात वहां रहे। नाबालिगों को समुद्र तटों पर रात नहीं बितानी चाहिए।”

विपक्ष का सरकार से सवाल - हमें क्यों डरना चाहिए?

सीएम के इस बयान के बाद गोवा कांग्रेस के प्रवक्ता अल्टोन डी’कोस्टा ने कहा कि तटीय राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो गई है। उन्होंने सवाल पूछा कि रात में घूमते समय हमें क्यों डरना चाहिए? अपराधियों को जेल में होना चाहिए और कानून का पालन करने वाले नागरिकों को स्वतंत्र रूप से घूमना चाहिए।

वहीं, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विधायक विजय सरदेसाई ने कहा, “यह घृणित है कि मुख्यमंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं। नागरिकों की सुरक्षा पुलिस और राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। अगर वे हमें यह प्रदान नहीं कर सकते हैं, तो मुख्यमंत्री को पद पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है।”

इस संबंध में निर्दलीय विधायक रोहन खोंटे ने ट्वीट किया, "यह हैरान करने वाली बात है कि गोवा के मुख्यमंत्री यह दावा करते हुए रात में बच्चों को बाहर जाने देने के लिए माता-पिता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं कि रात को बाहर जाना सुरक्षित नहीं है। अगर राज्य सरकार हमारी सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे सकती तो कौन दे सकता है? गोवा का महिलाओं के लिए सुरक्षित होने का इतिहास रहा है लेकिन बीजेपी की सरकार में यह तमगा खो रहा है।”

गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब किसी प्रतिष्ठित पद पर बैठे किसी व्यक्ति ने कोई संवेदनहीन टिप्पणी की हो। इससे पहले भी कई बार मान-मर्यादा और इज्जत के नाम पर महिलाओं को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश की गई है। बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के लिए उनके कपड़ो और चाल-चलन को दोषी बताया गया है।

पीड़ित को प्रताड़ित करने का ट्रेंड

हाल ही में हाथरस मामले में आए योगी सरकार के मंत्री और बीजेपी विधायकों के शर्मसार कर देने वाले बयान अभी भी गूगल पर मौजूद हैं। पीड़ित को प्रताड़ित करने का ये ट्रेंड देश में कई सालों से चला आ रहा है। इससे पहले भी कुलदीप सिंह सेंगर, स्वामी चिन्मयानंद, संभाजी भीड़े जैसे कई मामलों में पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को ही कटघरे में खड़ा किया गया है। आए दिन मंत्री और नेता अपनी फूहड़ बातों से महिलाओं की अस्मिता, मान-सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं, आरोपियों का बचाव और महिलाओं को मर्यादा का पाठ पढ़ा रहें हैं। हालांकि बड़बोले नेताओं की बातों से भी ज्यादा दुखद इन मामलों में महिला नेत्रियों की चुप्पी है, जो महिला नेतृत्व के नाते भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

इसे भी पढ़ें: ये नेता आख़िर महिलाओं को समझते क्या हैं!

महिला नेत्रियों की चुप्पी ज्यादा दुखद है!

वैसे महिला नेत्रियों को खुद भी इन बातों से अक्सर दो-चार होना पड़ता है। कभी वज़न तो कभी पहनावे, रूप रंग या बर्ताव को लेकर भी अकसर महिलाएँ और महिला राजनेता पुरुष नेताओं के हाथों अश्लील, अभद्र और तौहीन भरी टिप्पणओं की शिकार होती रही हैं। बावजूद इसके सभी एक साथ पार्टी भावना से ऊपर उठकर इसकी निंदा नहीं कर पातीं।

साल 2018 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में आधार पर बयान दे रहे थे, तभी कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगीं। मुस्कुराते हुए मोदी बोले, "सभापति जी रेणुका जी को आप कुछ मत कहिए रामायण सीरियल के बाद ऐसी हंसी सुनने का आज सौभाग्य मिला है।"

बाद में केंद्र सरकार में राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने फ़ेसबुक पर एक वीडियो शेयर कर रेणुका चौधरी की हंसी की तुलना रामायण के किरदार शूर्पणखा से कर डाली। इसके बाद भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने रामायण में शूर्पणखा की नाक काटे जाने का दृश्य भी ट्विटर पर शेयर किया।

2018 में ही जब जया बच्चन को समाजवादी पार्टी की ओर से राज्य सभा में फिर से नामांकित किया गया तो बीजेपी नेाता नरेश अग्रवाल ने जया बच्चन को 'फिल्मों में नाचने वाली' बता दिया। हालांकि इन्हीं जया बच्चन को सिनेमा में योगदान के लिए पदमश्री सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

आम से लेकर खास तक सब आपत्तिजनक बयान का शिकार हैं!

जया बच्चन अकेली अभिनेत्री और सांसद नहीं है जिन्हें लेकर आपत्तिजनक बयान दिया गया हो। 2012 में गुजरात चुनावों के नतीजों पर चल रही एक टीवी बहस के दौरान काँग्रेस सांसद संजय निरुपम ने स्मृति ईरानी को कहा था, "कल तक आप पैसे के लिए ठुमके लगा रही थीं और आज आप राजनीति सिखा रही हैं।"

बाद में आलोचना होने पर संजय निरुपम ने सफ़ाई देते हुए कहा था कि लोग केवल एक टिप्पणी को ना देखें और अगर संदर्भ समझना हो तो पूरा कार्यक्रम देखें।

महिलाओं पर विवादित बयानों की ये फ़ेहरिस्त लंबी है.. मसलन मुलायम सिंह का बलात्कार पर बयान कि 'लड़कों से ग़लती हो जाती है और इसके लिए उन्हें मौत की सज़ा नहीं देना चाहिए' या सांसद साक्षी महाराज की टिप्पणी कि हिंदू महिलाओं को अपने धर्म की रक्षा करने के लिए 'कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए।

आपत्तिजनक बयानों पर कार्रवाई हो!

ऐसे बयानों के बावजूद अकसर ये राजनेता हल्की फुल्की फ़टकार के बाद बच निकलते हैं। ये बयान कभी महिलाओं की बॉडी शेमिंग करते नज़र आते हैं तो कभी बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को मामूली बताने की कोशिश और साथ ही ये संदेश भी जाता है कि महिलाओं के बारे में हल्के और आपत्तिजनक बयान देना सामान्य बात है।

ऐसा नहीं है कि दूसरे देशों में ऐसा नहीं होता। ब्रिटेन जैसे कई देशों में अकसर ऐसे बयानों पर कार्रवाई होती है। मिसाल के तौर पर 2017 में यूरोपियन संसद के एक सांसद ने बयान दिया था कि महिलाओं को कम पैसा मिलना चाहिए क्योंकि वो कमज़ोर, छोटी और कम बुद्धिमान होती हैं। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और उन्हें मिलने वाला भत्ता भी बंद हो गया था। अब देखना ये है कि अपने देश में ऐसी कार्रवाई या व्यवस्था के लिए महिलाओं को और कितना लंबा सफर तय करना पड़ता है।

CM Pramod Sawant
goa
derogatory remarks against women
woman safety
crimes against women
sexual violence
Goa Gangrape

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं


बाकी खबरें

  • Bank union strike
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बैंक यूनियनों का ‘निजीकरण’ के ख़िलाफ़ दो दिन की हड़ताल का ऐलान
    06 Dec 2021
    दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने सरकार को 16 व 17 दिसंबर की हड़ताल का नोटिस दे दिया है। 
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: स्वास्थ्य विभाग का नया ‘संकल्प पत्र, सरकारी ब्लड बैंकों से नहीं मिलेगा निःशुल्क ख़ून, स्वास्थ्य जन संगठनों ने किया विरोध
    06 Dec 2021
    राजधानी रांची स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में लोगों को पैसों से ब्लड मिल रहा है। बीपीएल व आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ किसी भी गरीब-लाचार अथवा धनवान व्यक्ति को समान रूप से प्रदेश के किसी भी सरकारी…
  • Babasaheb
    बादल सरोज
    65 साल बाद भी जीवंत और प्रासंगिक बाबासाहब
    06 Dec 2021
    जाति के बारे में उनका दृष्टिकोण सर्वथा वैज्ञानिक था। उन्होंने जाति व्यवस्था का तब तक का सबसे उन्नत विश्लेषण किया था। वे अपने जमाने के बड़े नेताओं में अकेले थे, जिसने जाति व्यवस्था के ध्वंस यानि…
  • vinod dua
    शंभूनाथ शुक्ल
    मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!
    06 Dec 2021
    हम लोगों ने जब पत्रकारिता शुरू की थी, तब इमरजेंसी के दिन थे। लोगों में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रति ग़ुस्सा था और लोग आंदोलन कर रहे थे। किंतु धार्मिक आधार पर बँटवारे की कोई बात नहीं थी। कोई…
  • india and bangladesh
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत-बांग्लादेश संबंध का मौजूदा दौर
    06 Dec 2021
    नई दिल्ली के मौन प्रोत्साहन से प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की घरेलू राजनीति को उनके सत्तावादी शासन के मामले में निर्णायक रूप से फ़ायदा हुआ है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License