NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कानून
भारत
राजनीति
राज्यपाल प्रतीकात्मक है, राज्य सरकार वास्तविकता है: उच्चतम न्यायालय
सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड के एक दोषी एजी पेरारिवलन को रिहा कर दिया, क्योंकि तमिलनाडु के राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सज़ा को माफ़ करने की सलाह को बाध्यकारी नहीं माना।
पारस नाथ सिंह
20 May 2022
Translated by विकास भदौरिया
SC

एक महत्वपूर्ण फैसले में, सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की खंडपीठ ने पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषियों में से एक एजी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया। जस्टिस एल नागेश्वर राव, बी.आर. गवई और ए.एस. बोपन्ना  की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए माना कि पेरारिवलन को दी गई सजा पूरी हो चुकी है। अदालत ने मामले को राज्यपाल को वापस भेजने से इनकार कर दिया क्योंकि पेरारीवलन की सजा में छूट के लिए याचिका राज्यपाल के पास ढाई साल से लंबित थी। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा राज्यपाल को ढाई साल पहले उन्हें रिहा करने की सिफारिश की गई थी। पेरारीवलन इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम जमानत पर फिलहाल बाहर हैं।

पेरारिवलन की 32 साल लंबी कैद, जिसमें से वे 16 साल मौत की सजा पर और 29 साल एकांत कारावास में रहे, जेल में उनका आचरण, और दीर्घकालीक बीमारियां ऐसे कारक हैं जिनपर सुप्रीम कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश देने के लिए विचार किया। इसके अलावा, राज्यपाल की ओर से संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत पेरारिवलन द्वारा अपनी सजा को माफ करने की मांग वाली याचिका पर निर्णय लेने में अक्षम्य देरी को भी अदालत ने बड़ा एक कारक माना।

पीठ ने कहा, "जेल में उसके आचरण के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। दो मौकों पर जब अपीलकर्ता को पैरोल पर रिहा किया गया था, उसके आचरण या रिहाई की किसी भी शर्त के उल्लंघन के बारे में कोई शिकायत नहीं की गई थी। अपीलकर्ता की ओर से दाखिल किए गए मेडिकल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह पुरानी बीमारियों से पीड़ित है। जेल में अपने अच्छे व्यवहार के अलावा, अपीलकर्ता ने खुद को शिक्षित भी किया है और अपनी +2 परीक्षा, एक स्नातक डिग्री, एक स्नातकोत्तर डिग्री, एक डिप्लोमा और आठ प्रमाणन पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है।

अदालत के समक्ष मुद्दा तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा 25 जनवरी, 2021 को राष्ट्रपति को विचारार्थ भेजे जाने की  यथार्थता था, जिसमें पेरारिवलन की सजा की छूट पर राज्य मंत्रिमंडल द्वारा की गई सिफारिश पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था।

राज्यपाल के दृष्टिकोण को अस्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति राव ने फैसला लिखते हुए, मारू राम बनाम भारत संघ (1981), समशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974) और एपुरु सुधाकर बनाम आंध्र प्रदेश सरकार (2006) में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णय का हवाला दिया। अदालत ने माना कि हमारे संविधान के तहत सरकार की कैबिनेट प्रणाली में राज्यपाल राज्य का संवैधानिक या औपचारिक प्रमुख है। और उन क्षेत्रों को छोड़कर जहां राज्यपाल को अपने विवेक से अपने कार्यों का प्रयोग करने के लिए संविधान द्वारा या उसके तहत आवश्यक है, उन्हें संविधान द्वारा या उसके तहत प्रदत्त अपनी सभी शक्तियों का प्रयोग राज्य के मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर करते हैं।  उन्होंने आगे कहा कि संवैधानिक निष्कर्ष यही है कि “राज्यपाल प्रतीकात्मक है, और राज्य सरकार वास्तविकता है”।

न्यायमूर्ति राव ने आगे कहते हैं कि अनुच्छेद 161 के तहत याचिकाएं व्यक्तियों की स्वतंत्रता से संबंधित हैं; इसलिए, अक्षम्य विलंब - जो कि कैदियों के कारण नहीं है - अक्षम्य है, क्योंकि इससे कैदी को प्रतिकूल शारीरिक रोग और मानसिक संकट पहुंचता है। विशेषकर तब जब राज्य मंत्रिमंडल ने कैदी को उसकी सजा में छूट / कम्यूटेशन का लाभ देकर रिहा करने का निर्णय ले लिया हो।”

पीठ ने यह भी माना कि केंद्र सरकार की भारत संघ बनाम श्रीहरन (2015) में न्यायालय के फैसले की समझ, कि धारा 302 के तहत दी गई सजा को माफ/ कम करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है, पूर्ण रूप से गलत है। क्योंकि इस संबंध में न तो भारतीय दंड संहिता [आईपीसी] और न ही संविधान या संसद द्वारा धारा 302 के संबंध में बनाए गए किसी भी कानून के तहत केंद्र को कोई व्यक्त कार्यकारी शक्ति प्रदान की गई है।

पीठ ने नोट किया कि "इस तरह के विशिष्ट अधिकार के अभाव में, राज्य की कार्यकारी शक्ति को ही धारा 302 के संबंध में फैसला लेने का अधिकार है, क्योंकि धारा 302  समवर्ती सूची यानि लिस्ट III की पहली एंट्री के तहत आती है।”

सूची III की एंट्री 1 - समवर्ती सूची - में आपराधिक कानून है, जिसमें संविधान के लागू होने के समय से आईपीसी में शामिल सभी अपराध शामिल हैं, लेकिन सूची I या II में निर्दिष्ट किसी भी मामले के संबंध में कानूनों का उल्लंघन और नागरिक शक्ति की सहायता में नौसेना, सैन्य या वायु सेना या संघ के किसी अन्य सशस्त्र बलों के उपयोग को छोड़कर।

पीठ ने माना कि राज्यपाल का तमिलनाडु मंत्रिमंडल की सिफारिश का विचारार्थ भारत के राष्ट्रपति को  सिफारिश के ढाई साल बाद भेजना किसी भी तरह संवैधानिक नहीं है और यह हमारी संवैधानिक पद्धति के विरुद्ध है, क्योंकि जैसा कि मारू राम मामले में उच्चतम न्यायले ने कहा था कि "राज्यपाल प्रतीकात्मक है, और राज्य सरकार वास्तविकता है”।

पेरारिवलन को एक निर्दिष्ट अदालत ने अब व्यपगत आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [टाडा] के तहत मौत की सजा सुनाई थी। 11 मई 1999 को सुप्रीम कोर्ट ने पेरारीवलन की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। हालांकि, टाडा के तहत दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया गया था।

उनकी दया याचिका को भारत के राज्यपाल और राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया था। आखिरकार, 18 फरवरी, 2014 को, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दया याचिका पर फैसला करने में अत्यधिक देरी के आधार पर मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।

सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला देखने के लिए यहां क्लिक करें।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Governor is but a Shorthand Expression for the State Government: Supreme Court

LIFE AND LIBERTY
rajiv gandhi murder
Supreme Court
laws
Criminal Law

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

एक्सप्लेनर: क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, उसके दायरे और सीमाएं, जिसके तहत पेरारिवलन रिहा हुआ

राजीव गांधी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट: घोर अंधकार में रौशनी की किरण

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश

क्या लिव-इन संबंधों पर न्यायिक स्पष्टता की कमी है?

उच्चतम न्यायालय में चार अप्रैल से प्रत्यक्ष रूप से होगी सुनवाई

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 


बाकी खबरें

  • Ram
    शंभूनाथ शुक्ल
    सबके अपने-अपने राम!
    15 Oct 2021
    राम के चरित्र का उज्ज्वल पक्ष क्या है और स्याह पक्ष कौन-सा है, जब तक यह नहीं समझा जाएगा, तब तक इस तरह लकीर पीटने से क्या फ़ायदा! नौ दिन तक राम लीला हुई और दसवें दिन रावण फुँक गया। बस क़िस्सा ख़त्म।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    डीयू शिक्षक संघ चुनाव, बनारस में छात्रों पर FIR और अन्य ख़बरें
    14 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के चुनाव, बनारस में छात्रों पर FIR अन्य ख़बरों पर।
  • bsf
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बॉर्डर राज्यों में केंद्र ने बढ़ाया BSF का दायरा, पंजाब-पश्चिम बंगाल ने बताया राज्यों पर हमला
    14 Oct 2021
    पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगे हुए राज्यों में BSF अब 50 किलोमीटर तक के दायरे में गिरफ्तारी कर सकती है, तलाशी कर सकती है, जांच कर सकती है, सामान जब्त कर सकती है। पहले बॉर्डर राज्यों पर सुरक्षा की…
  • stop
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!
    14 Oct 2021
    यह सिर्फ इसी मामले की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे देश की स्थिति है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है लेकिन जब मामले दर्ज होते हैं तो अदालतों में उन पर सुनवाई पूरी होने में सालों लग जाते हैं और…
  • varun gandhi
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन पर वरुण गांधी ने दी केंद्र सरकार को हिदायत, शेयर किया अटल बिहारी वाजपेयी का वीडियो
    14 Oct 2021
    वरुण गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक भाषण को शेयर करते हुए किसानों का समर्थन किया है और अपनी सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License