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यूएस जा रहे होंडुरास के प्रवासी कारवां पर ग्वाटेमाला के सुरक्षा बलों की कार्रवाई
हजारों होंडुरासवासी जो अमेरिका की जोखिम भरे यात्रा पर निकले हुए हैं वे एटा और आयोटा तूफान के शिकार हैं और उन्हें अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
पीपल्स डिस्पैच
18 Jan 2021
यूएस जा रहे होंडुरास के प्रवासी कारवां पर ग्वाटेमाला के सुरक्षा बलों की कार्रवाई

ग्वाटेमाला के सैन्य और पुलिस बलों ने 17 जनवरी को अमेरिका की ओर जाने और देश में प्रवेश करने से रोकते हुए हजारों होंडुरन प्रवासियों के कारवां पर आंसू गैस के गोले दागते हुए कार्रवाई की। ग्वाटेमाला की सरकार ने प्रवासियों के मार्ग को रेगुलेट करने के लिए होंडुरास के साथ लगी सीमा पर चिकीमूला डिपार्टमेंट में एक राजमार्ग पर विभिन्न सैन्य चौकियों को स्थापित किया। 16 जनवरी को इन प्रवासियों ने एल फॉरिडो सीमा पार कर ली और अधिकारी उन्हें रोक नहीं सके क्योंकि प्रवासियों की संख्या सुरक्षा अधिकारियों की संख्या से काफी अधिक थी। हालांकि, 17 जनवरी को वेडो होंडो शहर में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और ग्रेनेड से प्रवासियों पर कार्रवाई की जिससे जिससे सैकड़ों लोग घायल हो गए।

13, 15 और 16 जनवरी को अलग-अलग चरणों में अपने देश छोड़कर चले गए हजारों होंडुरनवासी पूर्वी ग्वाटेमाला में फंसे हुए हैं और अमेरिका-मैक्सिको सीमा की ओर अपनी यात्रा जारी रखने के लिए अधिकारियों से लड़ रहे हैं।

ग्वाटेमाला नेशनल पुलिस के अनुसार 16 जनवरी से 6,000 से 9,000 के बीच लोग ग्वाटेमाला में प्रवेश कर चुके हैं। उधर ग्वाटेमेलन माइग्रेशन इंस्टीट्यूट ने बताया कि 16 से 17 जनवरी की रात के बीच लगभग 1,000 आप्रवासियों को आप्रवासन और सुरक्षा आधिकारियों द्वारा होंडुरास भेज दिया गया।

हर साल युवा, महिलाएं और बच्चे सहित हजारों होंडुरनवासी अमेरिका में मानवीय शरण हासिल करने की उम्मीद के साथ जोखिम भरे यात्रा पर निकल पड़ते हैं। वे अपने देश में अत्यधिक गरीबी, हिंसा और अवसरों की कमी से बचने के लिए पैदल चलते हुए और कभी-कभी ट्रकों में यात्रा करते हुए लगभग 3 महीने में 4,000 किलोमीटर लंबी यात्रा करते हैं।

इस साल होंडुरास में COVID-19 महामारी के साथ ही एटा और आयोटा तूफान की तबाही की वजह से गहराए संकट के चलते सामाजिक-आर्थिक स्थिति और भी बदतर हो गई है और लोगों के अस्तित्व की उम्मीद कम हो गई है। ये तूफान नवंबर 2020 में मध्य अमेरिकी देश में पहुंचा था।

इस प्रवासी कारवां में शामिल होने वाले ज्यादातर लोग एटा और आयोटा तूफान के शिकार हैं जिन्होंने इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में सब कुछ खो दिया है और राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज़ की अतिदक्षिणपंथी सरकार की मदद के अभाव में अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं।

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