NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
गुजरात : तापी में वेदांत के ज़िंक प्लांट पर हुई जन-सुनवाई कैसे हुई 'हिंसक'
जिंक प्लांट से जुड़ी परियोजना के प्रभाव को लेकर आसपास के आदिवासी गांवों में मिट्टी की उर्वरता और आजीविका के बारे में कई आशंकाएं पैदा हो गई हैं। उन्हें लगा कि जन-सुनवाई के दौरान उनके सभी प्रश्नों को नहीं सुना गया।
दमयन्ती धर
09 Jul 2021
Translated by महेश कुमार
गुजरात : तापी में वेदांत के ज़िंक प्लांट पर हुई जन-सुनवाई कैसे हुई 'हिंसक'

5 जुलाई को, गुजरात के तापी जिले में वेदांत समूह ने एक स्मेल्टर प्लांट हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड चालू करने के बारे में एक सार्वजनिक जन-सुनवाई की थी जिसमें हिंसा भड़क गई, पुलिस ने उत्तेजित ग्रामीणों को "तितर-बितर" करने के लिए 50 से अधिक आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया, उनमें से कुछ ने कथित तौर पर पथराव भी किया।

गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) ने इस जन-सुनवाई का आयोजन किया था, जबकि एक  रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी ग्रामीणों ने महामारी के कारण इसे स्थगित करने की मांग की थी।

5 जुलाई को क्या ग़लत हुआ?

गुजरात में पर्यावरण पर काम करने वाले एक एक्टिविस्ट् कृष्णकांत चौहान ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "सुबह से ही माहौल तनावपूर्ण और डरावना था, क्योंकि जनसुनवाई के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। जनसुनवाई के लिए बनाए गए अस्थायी तंबू को कंपार्टमेंट  में बाँट दिया था, जिनमें बड़ी स्क्रीन लगी थी ताकि वहाँ मौजूद लोग चल रही कार्यवाही को देख सके।”

स्थिति कैसे खराब हुई, इस बारे में बताते हुए, चौहान ने कहा, कि कई ग्रामीणों को लगा कि उनकी बात सुनी नहीं जा रही है क्योंकि “तंबू के प्रत्येक कम्पार्टमेंट को एक-दूसरे से पूरी तरह से अलग कर दिया गया था। कलेक्टर और अधिकारी एक कम्पार्टमेंट में बैठे थे। ऐसा कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि ग्रामीण केवल सुने, लेकिन सवाल नहीं पुछे। एक निश्चित संख्या में ग्रामीणों को प्रवेश करने की अनुमति देने के बाद, अन्य लोगों के लिए प्रवेश भी बंद कर दिया गया था। जो ग्रामीण अंदर नहीं जा सके, उन्होंने टेंट के आसपास इकट्ठा होना शुरू कर दिया और हाईवे जाम कर दिया।

जन-सुनवाई के कुछ समय बाद, जीपीसीबी अधिकारियों ने घोषणा कर दी कि उन्होंने सभी बयानों को दर्ज़ कर लिया है। “उन्होंने कहा कि उन्हें छह लिखित बयान मिले हैं और इसलिए जन-सुनवाई की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। इस पर आपत्ति जताने वाले ग्रामीणों में काफी हंगामा हुआ। जीपीसीबी के एजी पटेल, जो जनसुनवाई के लिए कलेक्टर के सचिव थे, ने अचानक कहा कि कार्यवाही स्थगित कर दी गई है।

चौहान ने कहा, इस बीच, स्मेल्टर परियोजना के आसपास और तंबू के बाहर जमा हूस गांवों के आदिवासियों में गुस्सा व्याप्त हो गया और भीड़ लगभग 800-900 से बढ़कर लगभग 5,000 हो गई थी।

"उन्होंने कहा कि उन्हें अधिकारियों और उनकी कार्यवाही पर भरोसा नहीं है, क्योंकि उन्हें जन-सुनवाई में शामिल ही नहीं किया गया। जैसे ही स्थानीय नेता बाहर आए और सड़क खाली करने के लिए उनसे बात करने की कोशिश की, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बिना किसी उकसावे के लाठीचार्ज करना शुरू कर दिया। तभी भीड़ हिंसक हो गई, पथराव हुआ और पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।”

पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा कि ग्राम प्रधानों ने घटनाओं के इस तरह के मोड़ लेने की चेतावनी पहले ही दे दी थी, क्योंकि समुदाय के भीतर क्षेत्र की पारिस्थितिकी और आजीविका पर जिंक स्मेल्टर प्लांट के प्रभाव को लेकर डर पैदा हो गया था।

“स्थानीय आदिवासी नेताओं और कम से कम 35 गांवों के सरपंचों ने इस तरह की स्थिति की चेतावनी पहले ही दे दी थी। जनसुनवाई से दो दिन पहले, दोसवाड़ा के सरपंचों और अन्य ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलने का प्रयास किया था ताकि उन्हें सूचित किया जा सके कि लोग बड़ी संख्या में आएंगे क्योंकि वे क्षेत्र में स्मेल्टर प्लांट बनने से काफी आशंकित हैं। उन्होंने महामारी को देखते हुए जनसुनवाई स्थगित करने का भी अनुरोध किया था। इस संबंध में कलेक्टर को तत्काल ईमेल भी भेजा गया था। सुनवाई में मौजूद सरपंचों ने एक बार सुनवाई की तारीख को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया क्योंकि लोग डरे हुए थे और परियोजना के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी, ”चौहान ने कहा, जो दोसवाड़ा गांव, तापी में जन सुनवाई में खुद शामिल हुए थे।

इस बीच सोनगढ़ थाने में 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 332, 333, 353, 143, 147, 149, 269, 88, 427 और 440 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि 14 पुलिस कर्मी घायल हुए हैं।

घटना के बाद, गुजरात सरकार के औद्योगिक विस्तार ब्यूरो (iNdextB) की प्रबंध निदेशक, नीलम रानी ने कहा: “तापी जिले के दोसवाड़ा में जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य में विशेष रूप से महामारी के बाद की दुनिया में रोजगार पैदा करना, रोजगार लाना और आर्थिक विकास को मजबूत करना समय की मांग है।”

उन्होने कहा: "हम उद्योग के विकास के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और व्यापार को आसान बनाने के लिए समर्थन का विस्तार करेंगे। एक जिम्मेदार सरकारी निकाय के रूप में, हमारे समुदायों का कल्याण और पर्यावरण पर ध्यान देना हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि सर्वोत्तम मानकों का पालन किया जाए।

विशेष रूप से, कई आदिवासी समूह तापी जिले के दोसवाड़ा गांव में वेदांत समूह के जिंक स्मेल्टर प्लांट का विरोध कर रहे हैं।

आदिवासी एकता और विकास आंदोलन के बैनर तले तापी जिले के 45 गांवों के सरपंच 30 जून को जिलाधिकारी एचके वाधवानिया से मिलने भी गए थे, लेकिन तीन घंटे इंतजार करने के बाद वे वापस लौट आए। सरपंचों का समूह अपने अध्यक्ष प्रग्नेश गामित की अगुवाई में रेजिडेंट अपर कलेक्टर (आरएसी) को एक ज्ञापन सौंपना चाहता था।

इससे पहले रानीखंबा ग्राम पंचायत की ओर से कलेक्टर को एक और ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें जिक्र किया गया था कि स्मेल्टर प्लांट से कई गांवों के प्रभावित होने की आशंका है.

एक अन्य संगठन, आदिवासी पंच, जिसमें स्थानीय आदिवासी शामिल हैं, जो संयंत्र का विरोध कर रहे हैं, ने कहा कि स्थानीय समुदाय, जो मुख्य रूप से आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, को डर है कि संयंत्र से रसायन का स्राव गांवों की उपजाऊ भूमि को दूषित कर देगा।  

रोमेल सुतारिया, एक आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता, ने न्यूज़क्लिक को बताया, “कई आदिवासी युवा वेदांत की अन्य परियोजनाओं के बारे में काफी शोध कर रहे हैं और तूतीकोरिन (तमिलनाडु) और राजस्थान में उनकी परियोजनाओं के प्रभावों के बारे में जानकर काफी आशंकित हैं। उनके डर में जो सबसे बड़ी बात है, वह यह है कि कारखाने से लेड, कैडमियम, आर्सेनिक और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे रसायन लोगों के सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करेंगे।”

सुतारिया ने कहा, “इसके अलावा जीपीसीबी द्वारा प्रकाशित पर्यावरण प्रभाव रिपोर्ट न केवल देर से प्रकाशित हुई,  बल्कि अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी जिसे कोई भी स्थानीय पढ़ या समझ नहीं सकता था। बड़ी  रिपोर्ट 20 जून को प्रकाशित की गई थी, जबकि पर्यावरण प्रभाव रिपोर्ट को जन-सुनवाई से कम से कम 45 दिन पहले प्रकाशित किया जाना था।”

वेदांत समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने तापी जिले के दोसवाड़ा गांव में 415 एकड़ में फैले 300 केटीपीए (किलो टन प्रति वर्ष जस्ता) स्मेल्टर संयंत्र स्थापित करने के लिए 5,000-10,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी। अक्टूबर 2020 में गुजरात सरकार और कंपनी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। संयंत्र के पहले चरण में 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और 2022 के अंत तक इसके चालू होने की उम्मीद है।

जिस भूमि पर प्रस्तावित जिंक कारख़ाना स्थापित करने की योजना है, उसे 25 साल पहले गुजरात सरकार ने औद्योगिक एस्टेट की स्थापना के लिए अधिग्रहित किया था। हालांकि, तब से भूमि बिना किसी इस्तेमाल के खाली पड़ी है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Gujarat: How GPCB’s Public Hearing on Vedanta’s Zinc Plant in Tapi Turned ‘Violent’

Vedanta Zinc Plant
Tapi Plant protest
GPCB Public hearing
Gujarat tribals protest
Gujarat Government

Related Stories

गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया


बाकी खबरें

  • lakshmibai college teacher Dr Neelam
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डीयू : दलित शिक्षक का आरोप विभागाध्यक्ष ने मारा थप्पड़, विभागाध्यक्ष का आरोप से इनकार
    18 Aug 2021
    "शिक्षण संस्थानों में यह कोई पहली ऐसी घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी समाज के निचले तबके से आने वाले छात्र और शिक्षक इस प्रकार के जातिगत हमलों और जातिसूचक टिप्पणियों का सामना करते आये हैं।…
  • Farmers
    रूबी सरकार
    प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से लूट, उतना पैसा दिया नहीं जितना ले लिया
    18 Aug 2021
    कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट कहती है कि निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, अगर इसकी तुलना की जाए तो…
  • taiban
    पीपल्स डिस्पैच
    तालिबान द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद अफ़ग़ानवासियों को अपने भविष्य की चिंता
    18 Aug 2021
    कई मीडिया संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका ने रविवार को देश में अरबों डॉलर की अफ़ग़ान संपत्ति को फ्रीज़ कर दिया है।
  • संदीपन तालुकदार
    नया शोध बताता है कि सबसे पहले चीन में बने थे सिक्के
    18 Aug 2021
    शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने कांसे से बने छोटे फावड़े के आकार के सिक्कों की खोज की है जो लगभग 2,600 साल पहले चीन में बड़े पैमाने पर बनाए गए थे।
  • afgan
    अजय कुमार
    कैसे अमेरिका का अफ़ग़ानिस्तान में खड़ा किया गया 20 साल का झूठ भरभरा कर ढह गया?
    18 Aug 2021
    सबसे गहरी सच्चाई तो यही है कि भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति कुछ भी कहें कि उन्होंने अफगानिस्तान की कई स्तर पर मदद की। लेकिन हकीकत यह है कि बम, बारूद, गोली और सेना के बलबूते समाज को नहीं बदला जा सकता।…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License