NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गुलशन कुमार हत्याकांड: अदालत ने निर्माता रमेश तौरानी को बरी करने का फैसला रखा बरकरार
न्यायमूर्ति एसएस जाधव और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की एक खंडपीठ ने मामले में अन्य आरोपी रऊफ के भाई अब्दुल रशीद मर्चेंट को बरी किए जाने का निचली अदालत का फैसला निरस्त कर दिया। पीठ ने इस मामले में अब्दुल रशीद मर्चेंट को भी दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
भाषा
01 Jul 2021
Ramesh Taurani
Image courtesy : The Hindu

मुंबई: बंबई उच्च न्यायानय ने बृहस्पतिवार को 1997 में संगीतकार गुलशन कुमार हत्याकांड में फिल्म निर्माता एवं ‘टिप्स इंडस्ट्रीज’ के सह-संस्थापक रमेश तौरानी को बरी करने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। साथ ही न्यायालय ने इस हत्याकांड में अब्दुल रऊफ मर्चेंट को दोषी ठहराने और उसे आजीवन कारावास की सजा देने के अदालत के फैसले की भी पुष्टि की।

न्यायमूर्ति एसएस जाधव और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की एक खंडपीठ ने मामले में अन्य आरोपी रऊफ के भाई अब्दुल रशीद मर्चेंट को बरी किए जाने का निचली अदालत का फैसला निरस्त कर दिया। पीठ ने इस मामले में अब्दुल रशीद मर्चेंट को भी दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

'कैसेट किंग' के नाम से मशहूर गुलशान कुमार की अगस्त 1997 में उपनगर अंधेरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसके प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए बदमाश अबू सलेम को पैसे दिए थे।

सत्र अदालत ने 29 अप्रैल 2022 को 19 में से 18 आरोपियों को बरी कर दिया था। निचली अदातल ने अब्दुल रऊफ मर्चेंट को भादंस की धारा 302, 307, 120(बी), 392 तथा 397 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत के दोषी ठहराया था। रऊफ ने दोषी ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी, जबकि राज्य सरकार ने तौरानी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी।

उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी और तौरानी को बरी करने का फैसला बरकरार रखा। पीठ ने, हालांकि, रऊफ की दोषसिद्धि और उस पर लगाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा, लेकिन धारा 392 और 397 के तहत उसकी सजा को रद्द कर दिया।

पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘ अब्दुल राशीद मर्चेंट को बरी किए जाने के फैसले को रद्द किया जाता है। राशीद को भादंस की धारा 302 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया जाता है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। उसे डीएन नगर थाने में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।’’

पीठ ने यह भी कहा कि अब्दुल रऊफ मर्चेंट मुकदमे के दौरान अपने आचरण को देखते हुए किसी छूट के हकदार नहीं हैं। उसने कहा, ‘‘ अपीलकर्ता रऊफ उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए छूट का हकदार नहीं होगा और बड़े पैमाने पर न्याय तथा जनता के हित में, वह किसी भी उदारता का हकदार नहीं है।’’

अदालत ने कहा कि हत्या के बाद रऊफ फरार हो गया था और उसे 2001 में गिरफ्तार किया गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘ 2009 में रऊफ को ‘फर्लो’ दिया गया, लेकिन उसके बाद उसने आत्मसमर्पण नहीं किया और 2016 में उसे फिर गिरफ्तार किया गया।’’

अदालत ने कहा कि रशीद ने अगर आत्मसमर्पण नहीं किया, तो सत्र अदालत उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करेगा।

Ramesh Taurani
Bombay High Court
Gulshan Kumar murder case

Related Stories

"पॉक्सो मामले में सबसे ज़रूरी यौन अपराध की मंशा, न कि ‘स्किन टू स्किन’ टच!"

क्रूज ड्रग्स पार्टी केस: बंबई उच्च न्यायालय ने आर्यन खान को दी जमानत

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब क्या करेंगे राज्यपाल कोश्यारी?

आज भी न्याय में देरी का मतलब न्याय न मिलना ही है

एल्गार परिषद मामले में पुणे के न्यायाधीश का क्षेत्राधिकार होने के कागजात पेश करिए :उच्च न्यायालय

फ़र्ज़ी टीकाकरण के मामलों में 'बड़ी मछली' को न छोड़ें: उच्च न्यायालय

एल्गार मामला: अदालत ने स्टेन स्वामी को अस्पताल में रखने की अवधि बढ़ाई

स्टैन स्वामी को 18 जून तक अस्पताल में भर्ती रखने का निर्देश

उच्च न्यायालय ने अमरावती से सांसद नवनीत राणा का जाति प्रमाणपत्र रद्द किया

तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी ग़ौर करने लायक क्यों है?


बाकी खबरें

  • indian economy
    अजय कुमार
    क्या 2014 के बाद चंद लोगों के इशारे पर नाचने लगी है भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीति?
    18 Nov 2021
    क्या आपको नहीं लगता कि चंद लोगों के पास मौजूद बेतहाशा पैसे की वजह से भारत की पूरी राजनीति चंद लोगों के हाथों की कठपुतली बन चुकी है।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    निर्माण कार्य बंद होने पर मज़दूरों ने की मुआवज़े की मांग, श्रीनगर एनकाउंटर और अन्य ख़बरें
    17 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी मज़ार रहेगी निर्माण कार्य बंद होने पर मज़दूर संकट में, श्रीनगर एनकाउंटर और अन्य ख़बरों पर।
  •  कॉप-26 के इरादे अच्छे, पर गरीब देशों की आर्थिक मदद पर कुछ नहीं
    न्यूज़क्लिक टीम
    कॉप-26 के इरादे अच्छे, पर ग़रीब देशों की आर्थिक मदद पर कुछ नहीं
    17 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक की इस ख़ास पेशकश में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह और न्यूज़क्लिक के मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ ने कॉप-26 में जलवायु परिवर्तन पर किए गए एग्रीमेंट पर चर्चा की है।
  • congress
    सुहित के सेन
    राहुल जहां हिंदुत्व को धर-दबोचने में सफल, लेकिन कांग्रेस सांगठनिक तौर पर अभी भी कमज़ोर
    17 Nov 2021
    जहाँ एक तरफ विचारधारा चुनावों में सफलता पाने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है, वहीं इसके लिए एक सांगठनिक नींव अपनेआप में अपरिहार्य है।
  • judge
    भाषा
    लखीमपुर हिंसा: एसआईटी जांच की निगरानी पूर्व न्यायाधीश राकेश कुमार जैन करेंगे
    17 Nov 2021
    पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए आईपीएस अधिकारियों के नामों पर भी गौर किया और जांच के लिए गठित एसआईटी में तीन आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License