NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
पीएचडी और एमफिल में एडमिशन के नए मानदंडों को लेकर एचसीयू छात्रसंघ की भूख हड़ताल जारी
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (एचसीयू) में पीएचडी और एमफिल में एडमिशन के नए मानदंडों से 64 आरक्षित सीटें खाली रहने के खिलाफ छात्र संघ भूख हड़ताल कर रहा है। छात्र नेताओं ने मांगे न माने जाने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Oct 2020
एचसीयू छात्रसंघ की भूख हड़ताल जारी

हैदरबाद आजकल भारी बारिश से भयंकर बाढ़ से परेशान है और इस भारी बारिश में हैदराबाद सेंट्रल विश्वविद्यालय (एचसीयू) के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पीएचडी और एमफिल में एडमिशन के नए मानदंडों के परिणामस्वरूप आने वाले शैक्षणिक वर्ष में लगभग 71 पीएचडी और एमफिल सीटें खाली रहेंगी। इसमें भी 64 सीटें आरक्षित वर्ग की है। इसके परिणाम स्वरूप रविवार से एचसीयू छात्र संघ के आह्वान पर छात्र क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने मांग की हैं कि प्रशासन तुरंत इस नए मानदंड को वापस ले क्योंकि सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोग हाशिए के समुदायों से हैं।

क्या है पूरा मामला

नए सत्र में शोधार्थी छात्रों के एडमिशन के लिए एचसीयू प्रशासन ने 8 सितंबर को नई गाइडलाइन जारी किया। जिसके मुताबिक एडमिशन के लिए साक्षात्कार से पहले निर्धारित पाठ्यक्रमों के लिए लिए जाने वाले लिखित परीक्षा में छात्रों को न्यूनतम अंक लाने होंगे, शुक्रवार को इन परीक्षा के परिणामों की घोषणा हुई। जिसके मुतबिक बड़ी संख्या में छात्रों को एडमिशन नहीं मिल सकेगा, जबकि बड़ी तादाद में सीटें खाली रह जाएंगी। हालंकि प्रशासन ने कहा है कि , "यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) विनियम 2016 के अनुसार कोई भी उम्मीदवार (योग्य) नहीं पाया गया"।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा हाल ही में एक परिपत्र में कहा गया है कि सामान्य वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 50 % कट ऑफ अंक और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों और विकलांग व्यक्तियों के लिए (पीडब्ल्यूडी)के लिए 45% कट ऑफ अंक जरूरी होंगे। छात्रों ने प्रवेश में न्यूनतम "कट ऑफ" आधारित करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अनुसूचित जाति और जनजाति सहित हाशिए के वर्गों को उच्च शिक्षा बेदखल करने की कोशिश और आरक्षण को कुचलने की साज़िश है।

8c399ccc-fb6d-4440-82f6-016bea8c2531.jpg

नई पद्धति ने आरक्षण नीति की भावना का स्पष्ट उल्लंघन

छात्र संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने "कट ऑफ" पद्धति को लाकर आरक्षण नीति का घोर उल्लंघन किया है।

आपको बता दें यूजीसी द्वारा इस नीति को 2016 में भी लाया गया था परन्तु एचसीयू में यह छात्र संघ के विरोध के कारण लागू नहीं हो पाया था। हालांकि सरकार ने इस बार कोरोना महामारी का फायदा उठाते बिना किसी चर्चा के इसे लागू कर दिया है।

इस पर छात्र संघ ने कहा है कि 2017 में 78वीं शैक्षणिक परिषद (एसी) में आरक्षण के नियम को लागू करने के लिए 1:6 अनुपात के साथ साक्षात्कार के लिए बुलाकर सीटें भरने का संकल्प लिया, यानि एक सीट के लिए 6 उम्मीदवारों को साक्षत्कार के लिए बुलाया जाता था। लेकिन हाल ही में कोरोना काल में 86वीं एसी आभासी (वर्चुअल ) बैठक, जिसमें छात्र संघ प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था, ने कट ऑफ पद्धति लाने का निर्णय लिया है।

छात्र संघ अध्यक्ष अभिषेक नंदन ने कहा "प्रशासन का निर्णय भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह आरक्षण नीति और 2018 में यूजीसी नियमों के संशोधन का उल्लंघन करता है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी आरक्षित सीट खाली नहीं छूटनी चाहिए। हम मांग करते हैं कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों को तुरंत साक्षात्कार केली 1: 6 अनुपात अनुसार दूसरी सूची जारी करनी चाहिए।"

उन्होंने बताया, "नई पद्धति ने आरक्षण नीति की भावना का स्पष्ट उल्लंघन किया है। कम से कम 71 सीटें खाली रहने वाली है, जिनमें 64 एससी, एसटी, ओबीसी छात्रों की हैं।" उच्च शिक्षा को हाशिए के वर्गों के लिए एक दूर की कौड़ी बनाने के लिए यह बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार सुनियोजित साज़िश है।"

छात्र संघ ने कुलपति को एक पत्र लिखा और कहा कि  “हमारे विश्वविद्यालय में, प्रत्येक और प्रत्येक स्कूल /विभाग/ केंद्र स्वायत्त प्रवेश प्रक्रियाओं का पालन करते है। जैसा कि कुछ विभाग वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) प्रश्नों के साथ निगेटिव मार्किंग का पालन करते हैं, कुछ नेगेटिव मार्किंग के बिना ऑब्जेक्टिव प्रवेश परीक्षा का अनुसरण करते हैं, और अन्य विभागों में प्रवेश विवरणात्मक (डिस्क्रिप्टिव) यानि किसी प्रश्न का लिखित विस्तृत उत्तर मोड में होता है। इस स्थिति में सभी विभागों के लिए एक केंद्रीकृत और अनिवार्य कट ऑफ लाना पूरी तरह से अतार्किक और गलत है।"

1458a559-2885-4193-8bf6-711957f82b7c.jpg

कट-ऑफ को लागू परन्तु आरक्षित सीटों के लिए विशेष एडमिशन अभियान चलने पर चुप्पी !

छात्रों का यह भी कहना है कि वे विश्वविद्यालय को यह याद दिलाना चाहते हैं कि वो यूजीसी विनियमन के नाम पर कट-ऑफ को लागू करना चाहते हैं। लेकिन वो यूजीसी विनियमन के इस कथन को नहीं मानते है जिसके मुताबिक 'यदि छूट के बावजूद, एससी /एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आवंटित सीटें, अलग-अलग श्रेणी में शेष रहती हैं, तो संबंधित विश्वविद्यालय सामान्य श्रेणी के प्रवेश को बंद करने की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष श्रेणी के लिए एक विशेष एडमिशन अभियान शुरू करेंगे। संबंधित विश्वविद्यालय पात्रता शर्तों के साथ अपनी स्वयं की प्रवेश प्रक्रिया तैयार करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन श्रेणियों के तहत अधिकांश सीटें भरी जा सके।'

आगे सवाल करते है कि “यदि विश्वविद्यालय विनियमन का पालन करना चाहते हैं तो वे इस भाग का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं?"

छात्रों ने कहा कि वो अपनी क्रमिक भूख हड़ताल जारी रखेंगे और अगर उन्हें प्रशासन से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने में संकोच नहीं करेंगे।

हालांकि अभी तक एचसीयू प्रशासन ने इसको लेकर मीडिया से कोई बातचीत नहीं की है।

Hyderabad
Hyderabad Central University
HCU
Student Protests
hunger strike
student union

Related Stories

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर

उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं

डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध

बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

इंटरकल्चरल एजुकेशन लॉ लागू करने की मांग को लेकर इक्वाडोर के शिक्षक भूख हड़ताल पर

बिहार : मेरिट लिस्ट घोटाला के ख़िलाफ़ नौजवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री ने मानी गलती


बाकी खबरें

  • Privatisation
    अजय कुमार
    महाशय आप गलत हैं! सुधार का मतलब केवल प्राइवेटाइजेशन नहीं होता!
    12 Dec 2021
    भारत के नीतिगत संसार में सुधार का नाम आने पर प्राइवेटाइजेशन को खड़ा कर दिया जाता है। इसका नतीजा यह हुआ है कि भारत की बीहड़ परेशानियां प्राइवेटाइजेशन की वजह से खड़ी हुई गरीबी की वजह से जस की तस बनी…
  • god and man
    शंभूनाथ शुक्ल
    ईश्वर और इंसान: एक नाना और नाती की बातचीत
    12 Dec 2021
    मैंने अगला प्रश्न किया, कि क्या तुम मानते हो कि दुनिया में कोई ईश्वर है? अब वह थोड़ा झिझका और बोला, ‘कोई है तो जो हम सब को बनाता है’। मैंने एक जिज्ञासा उठाई, कि मनुष्य का पैदा होना एक बायोलॉजिकल…
  • unemployment
    रूबी सरकार
    ‘काम नहीं तो वोट नहीं’ के नारों के साथ शिक्षित युवा रोज़गार गारंटी बिल की उठाई मांग
    12 Dec 2021
    युवाओं का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के 3 माह के भीतर सरकार को नौकरी मुहैया कराना चाहिए अथवा जब तक शिक्षित को नौकरी न मिले, तब तक सरकार की ओर से स्किल्ड लेबर की न्यूनतम मजदूरी के बराबर करीब साढ़े नौ…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    खुशहाली की बजाय बेहाली,संविधान से उलट राजसत्ता और यूपी का रिकार्ड
    11 Dec 2021
    वैश्विक असमानता रिपोर्ट के नये तथ्य और आंकड़े भारत की सामाजिक आर्थिक स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करते हैं. आखिर आजादी के इन चौहत्तर वर्षो में हमारे समाज में इस कदर असमानता और दुर्दशा क्यों बढ़ी है?…
  • kisan andolan
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: किसानो, कुछ तो रहम करो...लिहाज करो!
    11 Dec 2021
    मनाएं, किसान अपनी जीत का जश्न। बस, सरकार को हराने का शोर नहीं मचाएं। इस शोर से दुनिया भर में छप्पन इंच की छाती वालों की बदनामी होगी सो होगी, देश में मजदूरों-वजदूरों और न जाने किस-किस को कैसा गलत…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License