NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बंगाल विधानसभा में चुने गए आधे विधायक दागी, आधे से ज्यादा करोड़पति 
तृणमूल कांग्रेस के 91 से अधिक और भाजपा के 55 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले।
संदीप चक्रवर्ती
07 May 2021
बंगाल विधानसभा में चुने गए आधे विधायक दागी, आधे से ज्यादा करोड़पति 
केवल प्रतीकात्मक उपयोग के लिए

हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चुने गए कुल विधायकों में लगभग आधे विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। यह तदाद पिछली विधानसभाओं की तुलना में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, गठित होने वाली बंगाल विधानसभा के विधायकों की औसत आमदनी भी बढ़कर ढाई करोड़ हो गई है। यह जानकारी वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) जैसी अलाभकारी संस्था की ताजा जारी रिपोर्ट में दी गई है।

यद्यपि जनादेश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्रदेश की सत्ता में आने से रोक दिया है, लेकिन यह राजनीति के अपराधीकरण को नहीं रोक सका है। दरअसल, कई सारे विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो पिछली विधानसभाओं की तुलना में बहुत ज्यादा है। 2011 में वाममोर्चा सरकार की पराजय के बाद विधानसभा में दागी और धनाढ्य विधायकों की तादाद में भारी इजाफा हुआ है। 

दिलचस्प है कि नई विधानसभा के इस बदले चरित्र-स्वभाव का प्रभाव इसके द्वारा बनाये जाने वाले कानूनों पर भी पड़ेगा। बिना वाममोर्चा के प्रतिनिधित्व वाली यह विधानसभा एक बिल्कुल ही नया आयाम लिए होगी। 

ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की  लगातार तीसरी पारी  के साथ प्रदेश के कुल 292 विधानसभा सदस्यों में  142 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस के 91, भाजपा के 55 विधायक हैं और 1 निर्दलीय हैं। 

वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक,  2011 के पहले, मात्र 30 विधायक ऐसे थे, जिनके विरुद्ध आपराधिक मामले चल रहे थे।  2011 में जब वाम मोर्चे के लगातार 34 साल से जारी एकछत्र शासनकाल का अंत हुआ और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं तो ऐसे विधायकों की संख्या  बढ़कर 102 हो गई।  इनमें, तृणमूल कांग्रेस के  सबसे ज्यादा 69 विधायक थे जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के मात्र 7 विधायकों के विरुद्ध ही आपराधिक मामले चल रहे थे।  2016 में, यानी पिछली विधानसभा में, आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या तो बढ़कर 107 हो गई। 

इसके अलावा,  नई निर्वाचित विधानसभा में 113 विधायक,  जो  कुल कानून निर्माताओं की  29 फ़ीसदी हैं, उनके विरुद्ध हत्या,  हत्या का प्रयास करने, बलात्कार, भ्रष्टाचार और इसी तरह की अन्य संगीन जुर्म के मामले चल रहे हैं। इनमें 30 विजयी उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या का प्रयास करने के मामले घोषित हैं जबकि  उनमें से 20 विधायकों के विरुद्ध महिलाओं के प्रति अपराध के  मामले दर्ज हैं। 

 रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्वाचित 213 विधायकों में से 73 (यानी  कुल सदन का 34 फीसदी) एआईटीसी के हैं और भाजपा के विजयी 77 उम्मीदवारों में से 39 (51 फ़ीसदी) के विरुद्ध गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। रिपोर्ट के विश्लेषण के लिए डाटा भारत निर्वाचन आयोग के यहां जमा किए गए विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के हलफनामों से जुटाए गए हैं। 

 संपत्ति के मामले में यह नई विधानसभा भी  अभूतपूर्व समृद्ध है, क्योंकि इसमें करोड़पति विधायकों की तादाद पिछली सभी विधानसभाओं की तुलना में सबसे अधिक 158 ( 54 फ़ीसदी) तक पहुंच गई है। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के विजेता 62 फ़ीसदी उम्मीदवार और भाजपा के 33 फ़ीसदी विजयी उम्मीदवार करोड़पति हैं। 

 2006 की बात करें तो उस समय मात्र 7 विधायक ऐसे थे, जिनकी आमदनी एक करोड़ से ज्यादा थी।  उन 7 विधायकों में दो माकपा के,  तीन कांग्रेस के और एक डब्लूबीएसपी के थे। 

2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं तो विधानसभा में 47 करोड़पति विधायक आ गए जिनमें तृणमूल कांग्रेस के ही 37 विधायक थे। शेष 10 विधायकों में एक फॉरवर्ड ब्लॉक के और एक रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के थे जबकि सीपीएम का एक भी विधायक करोड़पति नहीं था। 2016 में बंगाल में करोड़पति विधायकों की तादाद बढ़कर 100 हो गई और 2021 में उस रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए158 विधायक करोड़पति हो गए। 

उम्मीदवारों के हलफनामे के मुताबिक इस समय चुने गए 37 से ज्यादा उम्मीदवारों की  कुल परिसंपत्ति 5 करोड़ रुपये से अधिक की है। 

 इस सूची में भी  शीर्ष  पर सुशोभित तीन  विधायक तृणमूल कांग्रेस के ही हैं। सर्वोच्च नाम  कस्बा से तृणमूल कांग्रेस के विधायक अहमद जावेद खान का है, जिनकी कुल परिसंपत्ति 32 करोड़ रुपये के मूल्य से ज्यादा है।

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक कस्बा के विधायक की परिसंपत्ति 2016 में 598 फ़ीसदी के आसपास थी, जबकि 2011 में खान की कुल परिसंपत्ति 2.16  करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं थी। 2021 में उनकी संपत्ति में लगभग 90 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है। खान के खिलाफ भी धोखाधड़ी और छल-प्रपंच के मामले समेत अनेक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। 

ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल के बेहद खास सदस्य और तृणमूल कांग्रेस नेता फिरहद हकीम की कुल परिसंपत्ति 13 करोड़ रुपये मूल्य की हो गई है, जो पिछले 5 सालों में 123 फीसद की वृद्धि है। तृणमूल के विधायक रुकबानूर रहमान (रिजावानुर रहमान के बड़े भाई, जिसने एक सम्पन्न परिवार की लड़की से शादी के बाद खुदकुशी कर ली थी) की आमदनी विगत 5 वर्षों में 2 लाख रुपये से 34 लाख रुपये हो गई है यानी 1152 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है। मुर्शिदाबाद के सागरदिघी से निर्वाचित एक अन्य तृणमूल कांग्रेस विधायक की परिसंपत्ति 8 करोड़ रुपये की है, जो पिछले पांच सालों की तुलना में 387 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है।

नए भाजपा विधायकों की औसत परिसंपत्ति 1.13 करोड़ रुपये की रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 3 करोड़ रुपये की रही है।  
 
अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Half of MLAs Elected to Bengal Assembly are Accused of Crimes; Over 50% Crorepatis

TMC
BJP
Corruption
Trinamool Congress MLAs
Assets of Bengal MLAs
West Bengal Assembly
MLAs with Criminal Cases

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: किस चीज़ से डरते हैं वे?
    09 Jan 2022
    गोरख पाण्डेय ने 43 साल पहले देश के हाकिमों से पूछा था कि “किस चीज़ से डरते हैं वे/तमाम धन-दौलत/ गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?”, आज भी ये सवाल मौज़ू है और साथ ही उसका जवाब भी।
  • UP
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव हलचल: गठबंधन के सहारे नैया पार लगाने की कोशिश करतीं सपा-भाजपा
    09 Jan 2022
    यूपी में चुनावों का ऐलान हो चुका है, सबकी नज़र सपा और भाजपा पर है, बसपा, रालोद और कांग्रेस भी चुनावी गणित में अपना अपना हिस्सा लेने की आस लगाए बैठी हैं। आइए गठबंधनों के लिए अंदर ही अंदर चल रही हलचल…
  • omicron
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...
    09 Jan 2022
    हम तो हर मेहमान का स्वागत करते हैं। आखिर 'अतिथि देवो भव', यही हमारी सभ्यता है। और अगर मेहमान विदेशी हो तो कहना ही क्या! विदेशी अतिथि तो हमें बहुत ही पसंद हैं। क्या पता, निवेश करने ही आया हो।
  • पीएम सुरक्षा चूक पर धुंध, चन्नी की चमक और सूबाई चुनाव
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    पीएम सुरक्षा चूक पर धुंध, चन्नी की चमक और सूबाई चुनाव
    08 Jan 2022
    पंजाब और पंजाबियत के बचाव में पुरजोर ढंग से बोलकर क्या मुख्यमंत्री चन्नी ने अपने सूबे में अपनी हैसियत मजबूत कर ली है? #HafteKiBaat के नये एपिसोड में इन सवालों के अलावा पांच राज्यों में चुनाव की…
  • संभावित लॉकडाउन के ख़तरे के बीच बिहार-यूपी लौटने लगे प्रवासी श्रमिक !
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संभावित लॉकडाउन के ख़तरे के बीच बिहार-यूपी लौटने लगे प्रवासी श्रमिक !
    08 Jan 2022
    घर लौटने को लेकर मुंबई में अफरातफरी का माहौल सामने आया है। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर इन श्रमिकों की भीड़ देखी गई। घर पहुंचने के लिए बिहार-उत्तरप्रदेश के इन श्रमिकों को ट्रेन में जगह नहीं मिल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License