NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
ट्वीट-रूपी सैलाब के साथ छात्रों का हल्ला बोल!
बढ़ती बेरोज़गारी, घटती वेकैंसी, कम वेकैंसी की भर्ती में भी चयन आयोगों का गैरज़िम्मेदाराना रवैय्या, सालों-साल का विलंब और ऐसे ही अन्य तमाम मुद्दों पर छात्रों ने ट्विटर के माध्यम से अपना आक्रोश दर्ज कराया।
अभिषेक पाठक
25 Feb 2021
rojgar
Image courtesy: Social Media

हताश, निराश और खुद को अहसहाय महसूस करने वाले छात्रों और युवाओं की पीड़ा को जब एक अध्यापक ने आवाज़ दी, उन्हें आधार दिया तो उनकी सभी तकलीफ ट्वीट-रूपी सैलाब बनकर सामने आई है। आज यानी 25 फरवरी को देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हज़ारो-लाखों छात्रों ने 6 मिलियन से भी अधिक ट्वीट्स के साथ अपनी वेदना को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का प्रयास किया है। आज के दिन के इस विशाल कैंपेन का अंदाजा तो उसी वक़्त लग चुका था जब इस डिजिटल आंदोलन का ऐलान हुआ था और ट्वीटर कैंपेन की तय तारीख से पहले ही 21 फरवरी को 20 लाख से अधिक ट्वीट्स के साथ #modi_rojgar_do नंबर-1 पर ट्रेंडिंग में रहा।

कर्मचारी चयन आयोग(SSC) पर नॉर्मलाईज़ेशन के खराब क्रियान्वयन के आरोप से शुरू हुआ ये विवाद इस कदर बढ़ा की छात्रों का आक्रोश मात्र नॉर्मलाईज़ेशन तक सीमित न रहा। बढ़ती बेरोज़गारी, घटती वेकैंसी, कम वेकैंसी की भर्ती में भी चयन आयोगों का गैरज़िम्मेदाराना रवैय्या, सालों-साल का विलंब और ऐसे ही अन्य तमाम मुद्दों पर छात्रों ने ट्विटर के माध्यम से अपना आक्रोश दर्ज कराया।

आपको बता दें इस विशाल डिजिटल आंदोलन की शुरुआत एसएससी-छात्रों को गणित विषय पढ़ाने वाले अध्यापक अभिनय शर्मा की उस वीडियो हुई जो उन्होंने 20 फरवरी को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड की थी। अपनी वीडियों के माध्यम से उन्होनें 25 फरवरी को #modi_rojgar_do के हैशटैग से एक मेगा ट्विटर कैंपेन का आह्वान किया किसके बाद से ही लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों  और अध्यापकों ने एकता के सूत्र का एक अनूठा उदाहरण दिया और बेहद मुखर होकर देश के छात्रों-नौजवानों की आवाज़ उठाना शुरू किया।

एसएससी की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों से शुरू इस आंदोलन को तमाम अन्य परीक्षाओं के प्रतिभागियों का समर्थन प्राप्त हुआ चाहे रेलवे की तैयारी करने वाले छात्र हो या बैंकिंग के छात्र हों या अन्य राज्यस्तरीय परीक्षा के छात्र हों सभी ने बढ़चढ़कर 25 फरवरी के इस विशाल ट्विटर कैंपेन में हिस्सा लिया जिसके फलस्वरूप #modi_job_do हैशटैग 6 मिलियन से भी अधिक ट्वीटस के साथ न केवल भारत बल्कि विश्व मे नंबर-1 पर ट्रेंडिंग में रहा। हालांकि 6 मिलियन की संख्याके बाद ट्वीट्स में आई गिरावट पर छात्रों ने शंका जताते हुए साज़िश का आरोप लगाया।

image

आज के ट्विटर कैंपेन के लिए modi_rojgar_do हैशटैग तय किया गया था जिसे ठीक एक पहले बदलकर modi_job_do रख दिया गया। इस पर अपनी वीडियो संदेश के माध्यम से अभिनय ने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि सरकार रोज़गार के नाम पर पकोड़े बेचने की भी बात करती है। इसलिए 'रोज़गार' के स्थान पर 'जॉब' का इस्तेमाल किया गया।

आखिर छात्रों के इस आक्रोश क्या कारण क्या है?

इस आंदोलन के मूल कारण में जाएं तो ये विवाद एसएससी द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाईज़ेशन पॉलिसी को लेकर शुरू हुआ था जिसकी परिणति आज के इस मेगा कैम्पेन के रूप में हुई। दरअसल नॉर्मलाईज़ेशन एसएससी के द्वारा अपना गया एक फॉर्मूला है जिसके तहत कई-कई दिनों में होने वाली परीक्षा में मूल्यांकन के दौरान सभी छात्रों के बीच न्याय बरकरार रखने की बात की जाती है। चूंकि किसी एक दिन कराई गयी परीक्षा के प्रश्नपत्र का स्तर किसी दूसरे दिन कराई गई परीक्षा से भिन्न हो सकता है इसलिए इस पॉलिसी को अपनाया गया। कठिन दिन व शिफ्ट वाले छात्रों को प्राप्तांक से कुछ एक्स्ट्रा मार्क्स दिए जाते हैं जबकि अपेक्षाकृत सरल दिन व शिफ्ट वाले छात्रों को उनके प्राप्तांक से कुछ मार्क्स घटाए भी जा सकते हैं। कुछ इसी इसी तर्ज और फॉर्मूले पर न्यायपूर्ण मूल्यांकन की बात की जाती है। परंतु छात्रों का बेहद गम्भीर आरोप है कि इस फॉर्मूले के चलते एसएससी अब प्रतियोगी परीक्षा न रह कर भाग्य और किस्मत का खेल बन चुकी है। 

पूरा मामला इस प्रकार है कि एसएससी के द्वारा सीजीएल-2019 की टियर-2 परीक्षा तीन दिनों में कराई गईं। दूसरे चरण की ये परीक्षाएं क्रमशः 15 नवंबर, 16 नवंबर और 18 नवंबर, 2020 को कराई गई। छात्रों और अध्यापकों का आरोप है एसएससी इन तीन दिनों में कराई गई मेन्स परीक्षा का स्तर सामान्य रखने में नाकाम साबित हुई है और प्रश्नपत्र के स्तर में बेहद भारी अंतर पाया गया। छात्रों का कहना है 18 नवंबर की परीक्षा का स्तर 15 व 16 नवंबर की अपेक्षाकृत काफी सरल रहा जिसके कारण 18 नवंबर वाले छात्र परीक्षा में अधिक अच्छा परफॉर्म कर पाए और बाद में नॉर्मलाईज़ेशन नीति की मार इन्हीं18 नवंबर वाले छात्रों को झेलनी पड़ी। छात्रों और अध्यापकों का आरोप है कि एसएससी के नॉर्मलाईज़ेशन के खराब क्रियान्वयन के कारण छात्रों के मार्क्स अव्यवस्थित रूप से हटाए व बढ़ाये जा रहे हैं।

इसके अलावा भी छात्रों का कई मुद्दों पर एकसाथ गुस्सा फूटा है। एसएससी समेत कई चयन आयोग समयबद्ध परीक्षा कराने के लिए ज़रा भी गम्भीर नहीं हैं। जिस युवा आबादी का शक्ति की बात देश के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है उस युवा आबादी विशेषकर छात्रों के जीवन का बहुमूल्य समय परीक्षा परिणाम और जॉइनिंग के इंतजार में बीत रहा है।

एसएससी के द्वारा सीजीएल 2017 की परीक्षा के लिए 16 मई 2017 को नोटिफिकेशन निकाला गया जिसके बाद इसमें धांधली के आरोप लगे, मामला कोर्ट तक गया और 15 नवंबर 2019 को इस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी किया गया। यानि नोटिफिकेशन से लेकर फाइनल रिजल्ट तक परीक्षा के प्रोसेस में लगभग 2 साल 6 महीने का समय लगा और फाइनल रिजल्ट के बाद भी जॉइनिंग आने में औसतन 5-8 महीनों का वक़्त लगता है।

सीजीएल 2018 की परीक्षा का नोटिफिकेशन 5 मई 2018 को जारी किया गया था और नोटिफिकेशन जारी होने से लेकर अब तक करीब 2 साल 10 महीने वक़्त पूरा चुका है पर आज की तारीख तक परीक्षा का प्रोसेस पूरा नहीं हुआ।

सीजीएल 2019 का नोटिफिकेशन 22 अक्टूबर 2019 को जारी किया गया था। अब तक इसके दो ही चरण हो पाए हैं।

image

ये विडंबना ही है कि कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाईन परीक्षाओं के पूरे प्रोसेस में तीन-तीन साल का समय लग रहा है। परीक्षाओं की ये दुर्दशा एसएससी तक ही सीमित नही है। देशभर में अनेक राज्यस्तरीय परीक्षाओं का यही हाल है। प्रतियोगी परीक्षाओं को चयन आयोगों ने स्नातक पाठ्यक्रम बना दिया है।

image

घटती वेकैंसी-

बात वेकैंसी की करे तो उसमें भी साल-दर-साल गिरावट हो रही है। जहां 2012 में एसएससी-सीजीएल की 16119 वेकैंसी थी वहीं अब 2020 में घटकर 6506 रह गयी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में जहां 2013 में IBPS PO की 21680 वेकैंसी थी वो 2020 में घटकर 1167(नोटिफिकेशन के अनुसार) रह गयी।

इन्हीं सब मुद्दों को लेकर आक्रोशित छात्रों ने ट्विटर पर अपनी आवाज़ उठाई। छात्रों की मुख्य माँगे इस प्रकार हैं-

1) सीजीएल टियर-2 की परीक्षा के मार्क्स जल्द-से-जल्द जारी किए जाएं।

2) कई-कई दिनों में होने वाली परीक्षाओं का लेवल एक-समान हो।

3) परीक्षाएं लकी ड्रॉ बनकर न रह जाएं इसलिए एसएससी सीजीएल की आगामी परीक्षाओं में टियर-2 की परीक्षा एक ही दिन में कराई जाए।

4) एक समयबद्ध कैलेंडर के अनुसार परीक्षा का प्रोसेस पूरा किया जाए।

5) वेटिंग लिस्ट का प्रावधान हो।

6) परीक्षा परिणाम और जॉइनिंग एक निश्चित और तय समय-सीमा के अंदर हो।

देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों ने आज के अपने इस कैंपेन को बेहद सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। modi_job_do देश ही नहीं दुनियाभर भर में नंबर-1 ट्रेंडिंग में रहा। modi_job_do समेत टॉप 30 ट्रेंडिंग विषयों में ज़्यादातर विषय छात्र-समस्याओं से सम्बंधित थे। इन सब के बावजूद यदि छात्रों की बातों को सरकार द्वारा अनसुना और अनदेखा किया जाता है तो यकीनन ये चिंता का विषय है। जिस युवा आबादी को देश की बड़ी एक शक्ति के तौर पर देखा जाता है आज वही आबादी संघर्षरत है और सुनने वाला कोई नहीं।

image

विरोध की हर बुलंद आवाज़ को तमगे देने की बजाय सरकार को आज इन सभी मुद्दों पर संवाद की आवश्यकता है। आज के मेगा कैंपेन के पीछे मकसद भी यही था कि सरकार के कानों तक छात्रों की वेदना पहुंचे और एक सार्थक संवाद के रास्ते खुलें।

Digital Protest
unemployment
twitter trends
Student Protests
SSC
CGL
Narendra modi
BJP
#modi_rojgar_do

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान


बाकी खबरें

  • bose
    प्रबीर पुरकायस्थ
    मोदी सरकार और नेताजी को होलोग्राम में बदलना
    28 Jan 2022
    बोस की सच्ची विरासत को उनकी होलोग्राफिक छवि के साथ खत्म कर देना : बिना किसी सार और तत्व के प्रकाश तथा परछाइयों का खेल। यह लगातार मोदी सरकार की वास्तविक विरासत बनती जा रही है!
  • Taliban
    एम. के. भद्रकुमार
    पश्चिम ने तालिबान का सहयोजन किया 
    28 Jan 2022
    अफगानिस्तान में हो रही घटनाओं पर प्रतिबिंबों की श्रंखला में इस बार के लेख में इंगित  किया गया है कि कैसे पश्चिमी राजनयिकों और तालिबान अधिकारियों के एक कोर ग्रुप के बीच ओस्लो में हुए तीन दिवसीय…
  • up elections
    महेश कुमार
    यूपी चुनाव: पश्चिमी यूपी के लोग क्यों भाजपा को हराना चाहते हैं?
    28 Jan 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और किसान आंदोलन का गढ़ है। चर्चा से तो लगता है कि लोग बदलाव चाहते हैं।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः योगी का दावा ग़लत, नहीं हुई किसानों की आय दोगुनी
    28 Jan 2022
    सदन में कृषि मंत्री का लिखित जवाब और नेशनल सैंपल सर्वे दोनों ही बताते हैं कि यूपी के किसानों की आय में 2015-16 की अपेक्षा मात्र 3 रुपये मासिक की वृद्धि हुई है।
  • covid
    डॉ. ए.के. अरुण
    बजट 2022-23: कैसा होना चाहिए महामारी के दौर में स्वास्थ्य बजट
    28 Jan 2022
    कुछ अपवादों को छोड़ दें तो 85 फ़ीसद अस्पताल और उपचार केन्द्र धन के अभाव में महज़ ढाँचे के रूप में खड़े हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License