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हरियाणा: सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद भी रेलवे प्रशासन ने संजय नगर में शुरू की तोड़फोड़
आज बुधवार सुबह ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संजय नगर बस्ती को स्टे दे दिया उसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने एक न सुनी। मजदूरों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ताओं ने एक पत्र रेलवे प्रशासन फरीदाबाद एवं डीसीपी फरीदाबाद को भेजा किंतु फरीदाबाद प्रशासन और रेलवे अथॉरिटी सुनने को राजी नहीं हुए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Sep 2021
हरियाणा: सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद भी रेलवे प्रशासन ने संजय नगर में शुरू की तोड़फोड़

न्यू टाउन फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के किनारे पर पिछले 50 वर्षों से भी ज्यादा जिंदगी बिताते असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की बस्ती पर आज यानी बुधवार 29 सितंबर की सुबह रेलवे प्रशासन ने भारी पुलिस को लेकर आठ से ज्यादा जेसीबी मशीनों के साथ धावा बोल दिया जबकि यह मामला दीपक शर्मा बनाम भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट में सुना गया।

इस बस्ती को उजड़ने से बचाने के लिए लड़ रहे मज़दूर आवास समिति ने बताया कि आज बुधवार सुबह ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संजय नगर बस्ती को स्टे दे दिया उसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने एक न सुनी। मजदूरों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ताओं ने एक पत्र रेलवे प्रशासन फरीदाबाद एवं डीसीपी फरीदाबाद को भेजा किंतु फरीदाबाद प्रशासन और रेलवे अथॉरिटी सुनने को राजी नहीं हुए।

संजय नगर बस्ती के मजदूर परिवारों ने पुनर्वास की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी शुरू किया और रेलवे प्रशासन को केवल दोपहर तक की मोहलत मांगी किंतु रेलवे प्रशासन ने पुलिस को लेकर मजदूरों पर चढ़ाई कर दी और फिर लगभग 300 से ज्यादा घरों को धराशाई कर दिया।



निर्मल गोराना ने बताया कि हरियाणा सरकार तभी कोर्ट से आदेश लेकर उसके क्रियान्वयन के लिए पूरी ताकत के साथ आगे बढ़कर खोरी गांव, महालक्ष्मी डेरा, इंदिरा नगर जैसे इलाकों को तोड़ डालती है किंतु आज जब सुप्रीम कोर्ट ने संजय नगर के मामले में स्टे दिया है तो उसको लागू करने के लिए तैयार नहीं है। आज एक ऐसी स्थिति बन चुकी है कि न तो कोर्ट के आदेशों का सही रूप में पालन किया जा रहा है और नहीं देश के मेहनतकश मजदूरों को न्याय दिया जा रहा है बस जो प्रशासन और सरकार चाहेगी उस रूप में क्रियान्वयन होगा अर्थात जिसकी लाठी उसकी भैंस। जिन रेलवे अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए।



निर्मल गोराना ने आरोप लगाया है कि फरीदाबाद में जिस गति से मजदूरों के घर उजाड़े जा रहे हैं, उस गति से सरकार पुनर्वास के बारे में चिंतित नहीं है जबकि सरकार इस राष्ट्र की संपत्ति का खुद ही नुकसान कर रही है जिसकी भरपाई सरकार को ही करनी होगी।

गुड्डी देवी ने बताया कि टाइम मिलने के बावजूद भी उसका घर तोड़ दिया गया इसलिए अब वह रेलवे के अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में केस फाइल करेगी।

याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि हरियाणा सरकार मजदूर विरोधी है और हमारे घर तोड़ रही है जबकि पुनर्वास हमारा अधिकार है जो सरकार हमसे जबरदस्ती छीन रही है।

मजदूर नेता जीतू ने बताया कि गरीब मजदूरों के पास में जो टूटे-फूटे बर्तन थे उनको भी रौंद दिया गया यह कार्य हरियाणा सरकार को शोभा नहीं देता है किंतु आज हरियाणा सरकार का और संवेदनहीन चेहरा मजदूरों के सामने आ गया है।

दलित राइट्स एक्टिविस्ट दीनदयाल ने बताया कि उनको और उनके कई साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें पुलिस छोड़ नहीं रही है जबकि दीनदयाल तो प्रयास कर रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश रेलवे प्रशासन एक बार देख ले।  

आपको बता दें कि हरियाणा के फरीदाबाद जिले में अरावली की पहाड़ियों एवं पर्यावरण के नाम पर मजदूर परिवारों के मानवाधिकारों को ताक पर रखकर इस वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में भी कई बस्तियों को उजाड़ कर फेंक दिया गया है। इनमें खोरी गांव, महालक्ष्मी डेरा, जमाई कॉलोनी शामिल हैं, जिनके निवासी पुनर्वास के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं किंतु हरियाणा सरकार और नगर निगम बेदखल मजदूर परिवारों के साथ संवेदनहीनता बरतता नजर आ रही है। वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रशासन ने भी गरीब मजदूर परिवारों को कोरोना की महामारी के दौरान बेदखल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हाल ही में रेलवे प्रशासन द्वारा इंदिरा नगर की 200 झुग्गियों को बिना पुनर्वास के बेदखल कर दिया गया। साथ ही अब  फरीदाबाद न्यू टाउन रेलवे स्टेशन के पास में बसी संजय नगर की झुग्गियों को नॉर्दन रेलवे प्रशासन द्वारा अभी 14 सितंबर 2021 को नोटिस दिया गया था। जिसके  बाद आज वहां भी बुलडोजर चलना शुरू हो गया।

दीपक शर्मा ने बताया कि संजय नगर में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर जैसे घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, हॉकर्स, फैक्ट्री मजदूर जिनके लभभग 500 से ज्यादा परिवार पिछले 50 वर्षों से रह रहे हैं। लगभग 3000 की जनसंख्या वाले संजय नगर में 575 से ज्यादा गर्भवती एवं धात्री महिलाएं हैं जबकि दो आंगनवाड़ी केंद्र एवं एक सामुदायिक केंद्र भी बना हुआ है।  

संजय नगर बस्ती निवासी ज्ञान देवी ने बताया की उनके पास वर्ष 1994 का वोटर कार्ड है। केला देवी ने बताया की वर्ष 1990 से उनका परिवार राशन कार्ड के द्वारा सरकार से राशन ले रहा है जबकि एकाएक रेलवे उजाड़ने के लिए छाती पर खड़ा है। ऐसे दौर में हमारे पास न रोजगार है न धन, न सरकार का सहयोग।

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