NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
हरियाणा : 23 मार्च और भारत बंद के मद्देनज़र किसानों-मज़दूरों ने निकाली पदयात्रा
गुरुवार को हांसी से शुरू हुई पदयात्रा 23 मार्च को दिल्ली के बॉर्डर पर ख़त्म होगी। ऐसी ही यात्राएं पंजाब और यूपी से भी निकाली जाएंगी।
रौनक छाबड़ा
19 Mar 2021
हरियाणा : 23 मार्च और भारत बंद के मद्देनज़र किसानों-मज़दूरों ने निकाली पदयात्रा

हरियाणा के हांसी क्षेत्र में 1857 में हुई 'आज़ादी की पहली लड़ाई' में लोगों के बलिदान की कहानी मशहूर है। अंग्रेज़ी हुकूमत ने इस जगह पर 'सैनिक विद्रोह' में शामिल होने के जुर्म में 100 लोगों को रोड रोलर से रौंद दिया था। यह ऐतिहासिक सड़क, जिसे लाल सड़क के नाम से जाना जाता है, लोगों के संघर्ष की गवाही देती है।

गुरुवार की दोपहर को स्थानीय लोगों ने नरेंद्र मोदी द्वारा लाये गए तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के अगले पड़ाव की शुरूआत की।

1857 के शहीदों के स्मारक के पास, कई किसान और मज़दूर मौजूद थे। वे संयुक्त किसान मोर्चा और हरियाणा के मज़दूर संगठनों के आह्वान पर अपनी मांगों को लेकर पदयात्रा शुरू कर रहे थे।

यह पदयात्रा 3 हिस्सों में निकाली जाएगी, हांसी के अलावा यह यात्रा उत्तर प्रदेश के मथुरा और पंजाब के खटकर कलां से भी निकेलगी और 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहीदी दिवस वाले दिन दिल्ली के प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचेगी।

ग़ौरतलब है कि खटकर कलां भगत सिंह का पुश्तैनी गांव है।

जब हांसी की लाल सड़क से यात्रा शुरू हुई, लोगों के मन में यह भावना था कि अगर कॉरपोरेट हाउस 'साझे दुश्मन' हैं तो मोदी सरकार की 'क्रूर' नीतियों का सबसे बुरा प्रभाव जनता पर पड़ेगा।

इसलिये प्रदर्शनकारी बार बार यही बात दोहरा रहे थे कि केंद्र का 'विकास' का विचार 'जन-विरोधी' है और इसका हर तरह से विरोध किया जाना चाहिये।

हिसार ज़िले की सरोज कुमारी(40) ने कहा, "मोदी सरकार सब कुछ बेच रही है, हर पीएसयू को बेच रही है जिससे सबका जीवनयापन प्रभावित हो रहा है।"

कुमारी जो पेशे से वकील है, ने कहा, "क्या हमको किसान आंदोलन से जुड़ने और इसे जन आंदोलन बनाने के लिए और किसी कारण की ज़रूरत है?"

इसे तरह से रोहनात गांव के ईश्वर ने दावा किया कि अगर मोदी सरकार उनकी बात नहीं सुनती है जिन्होंने उनको 'वोट दिया और सत्ता में लाये' तो 'विद्रोह' होगा।

47 साल के ईश्वर ने कहा, "1857 के शहीदों की तरह अगर नौबत आएगा तो हम भी अपना जीवन क़ुर्बान करने से पीछे नहीं हटेंगे।"

रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली की सरहदों पर नवंबर 2020 से शुरू हुए प्रदर्शन में अब तक क़रीब 300 किसानों की मौत हो चुकी है।

गुरुवार को हिसार में मौजूद नेताओं में से ज़्यादातर ऑल इंडिया किसान सभा(एआईकेएस) के नेता थे, जो संयुक्त किसान मोर्चा के साथ है। यहाँ शहीद भगत सिंह की भतीजी गुरजीत कौर भी मौजूद थीं।

ऑल इंडिया किसान सभा(एआईकेएस) के अध्यक्ष अशोक धावले ने न्यूज़क्लिक से कहा कि पदयात्रा से किसान आंदोलन मज़बूत होगा और इसमें ज़्यादा से ज़्यादा 'युवा और मज़दूर' जुड़ेंगे। उन्होंने कहा, "यह भारत बंद की तैयारी में भी अहम किरदार अदा करेगा।"

संयुक्त किसान मोर्चा ने 10 से ज़्यादा ट्रेड यूनियन के समर्थन के साथ 26 मार्च को देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है।

गुरजीत कौर ने कहा, "किसान आंदोलन को लगातार गए बढ़ाने का श्रेय जनता को दिया जाना चाहिये, वही लोग दिल्ली की सरहदों पर बारिश, सर्दी और गर्मी के बावजूद बैठे हुए हैं।" उन्होंने मोदी सरकार को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने जल्द से जल्द इसका हल नहीं निकाला तो एक 'विद्रोह' होगा।

ऑल इंडिया एग्रीकल्चर वर्कर्स यूनियन के विक्रम सिंह ने कहा कि इस प्रदर्शन ने "जन आंदोलन" की शक्ल ले ली है। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार के ख़िलाफ़ हर ज़िले तक पहुंच गया है, उन ज़िलों तक भी जहाँ बीजेपी की मज़बूत पकड़ देखी जाती है।"

इस दौरान, प्रदर्शनकारियों की यात्रा के साथ-साथ शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए नारे लगाए जा रहे थे, और मोदी सरकार को "अंग्रेज़ी हुकूमत" जैसा बताया जा रहा था।

यह यात्रा 20 किमी तय कर के गुरुवार की रात को हिसार-रोहतक ज़िला बॉर्डर के पास सोरखी गांव में पहुंची।

इन नारों का सार यह नारा था: "मोदी सरकार भगाओ, देश बचाओ।"

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Haryana: Farmers, Workers Take Out Padyatra Ahead of Bharat Bandh Call on March 23

farmers
Farmer protests
Farm Laws
Hansi
Padyatra
Samyukt Kisan Morcha
All India Kisan Sabha
Narendra modi

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

किसान आंदोलन: मुस्तैदी से करनी होगी अपनी 'जीत' की रक्षा

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा


बाकी खबरें

  • women in politics
    तृप्ता नारंग
    पंजाब की सियासत में महिलाएं आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जगह बना रही हैं 
    31 Jan 2022
    जानकारों का मानना है कि अगर राजनीतिक दल महिला उम्मीदवारों को टिकट भी देते हैं, तो वे अपने परिवारों और समुदायों के समर्थन की कमी के कारण पीछे हट जाती हैं।
  • Indian Economy
    प्रभात पटनायक
    बजट की पूर्व-संध्या पर अर्थव्यवस्था की हालत
    31 Jan 2022
    इस समय ज़रूरत है, सरकार के ख़र्चे में बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी मेहनतकश जनता के हाथों में सरकार की ओर से हस्तांतरण के रूप में होनी चाहिए और सार्वजनिक शिक्षा व सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हस्तांतरणों से…
  • Collective Security
    जॉन पी. रुएहल
    यह वक्त रूसी सैन्य गठबंधन को गंभीरता से लेने का क्यों है?
    31 Jan 2022
    कज़ाकिस्तान में सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO) का हस्तक्षेप क्षेत्रीय और दुनिया भर में बहुराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बदलाव का प्रतीक है।
  • strike
    रौनक छाबड़ा
    समझिए: क्या है नई श्रम संहिता, जिसे लाने का विचार कर रही है सरकार, क्यों हो रहा है विरोध
    31 Jan 2022
    श्रम संहिताओं पर हालिया विमर्श यह साफ़ करता है कि केंद्र सरकार अपनी मूल स्थिति से पलायन कर चुकी है। लेकिन इस पलायन का मज़दूर संघों के लिए क्या मतलब है, आइए जानने की कोशिश करते हैं। हालांकि उन्होंने…
  • mexico
    तान्या वाधवा
    पत्रकारों की हो रही हत्याओंं को लेकर मेक्सिको में आक्रोश
    31 Jan 2022
    तीन पत्रकारों की हत्या के बाद भड़की हिंसा और अपराधियों को सज़ा देने की मांग करते हुए मेक्सिको के 65 शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License