NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कच्चे तेल की तलाश की संभावनाओं पर सरकार ने उचित ख़र्च किया है?
कच्चे तेल को लेकर भारत की स्थिति क्या है? क्या वाक़ई ऐसा है कि कच्चा तेल निकालने से जुड़े वह सारे उपाय किये जा चुके हैं, जिसके बाद यह कहा जा सके कि भारत में कच्चे तेल उत्पादन को लेकर कोई बहुत बड़ी संभावना नहीं है? इस पर बहुत कम बातचीत होती है। तो चलिए कच्चे तेल से जुड़े इस पहलू को समझते हैं।
अजय कुमार
08 Apr 2022
crude oil exploration
Image courtesy : Business Standard

हम सबको लगता है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी। हम इसी सोच के तहत पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को देखते हैं। कभी भी कच्चे तेल पर नहीं सोचते हैं। पिछले 16 दिनों में पेट्रोल की कीमतों में 10  रूपये प्रति लीटर के हिसाब से इजाफा हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 100 रूपये प्रति लीटर को पार कर चुकी हैं। तकरीबन हर दिन सरकार 80 पैसे प्रति लीटर के दर कीमत बढ़ा रही है। कीमतें क्यों बढ़ा रही है? अधिकतर लोग इसका यही जवाब देंगे कि रूस और यूक्रेन की लड़ाई की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं। आने वाले समय में भी कीमतें बढ़ती रहेंगी।

लेकिन इन चर्चाओं के दौरान कभी भी इस पर बात नहीं होती है कि कच्चे तेल को लेकर भारत की स्थिति क्या है? क्या वाकई ऐसा है कि कच्चा तेल निकालने से जुड़े वह सारे उपाय किये जा चुके हैं, जिसके बाद यह कहा जा सके कि भारत में कच्चे तेल उत्पादन को लेकर कोई बहुत बड़ी संभावना नहीं है? इस पर बहुत कम बातचीत होती है। तो चलिए कच्चे तेल से जुड़े इस पहलू को समझते हैं।  

सबसे पहली बात यह है कि अगर कोई देश बहुत बड़ी मात्रा में दूसरे देश से कच्चे तेल आयात कर रहा है तो इसका मतलब है कि उस देश में तेल भंडार नहीं है, लेकिन इस निष्कर्ष पर भी तभी पंहुचा जा सकता है,जब उस देश में तेल भंडार की खोजबीन के सारे उपाय किये जा चुके हों।  

साल 2019 -20 में भारत के पास 62 करोड़ टन का तेल भंडार था। इस साल भारत ने तकरीबन 25 करोड़ टन तेल भंडार का इस्तेमाल किया। इस हिसाब से देखा जाए तो तेल भंडार ढाई साल के भीतर खत्म हो जाएगा। इसका मतलब है कि भारत कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर हमेशा निर्भर रहेगा।  ज्यादा से ज्यादा भारत चाहें तो इतना कर सकता है कि वह अपने तेल आयात की मात्रा कम कर ले. प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जब साल 2014 में चुनाव जीतकर आये तो उन्होंने यह लक्ष्य रखा कि साल 2022 तक वह भारत के तेल के आयात को 10 प्रतिशत कम कर देंगे। यानी जो तेल का आयात साल 2014 में तकरीबन 83 प्रतिशत हुआ करता था, वह कम होकर 73 प्रतिशत हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारत अपने कुल तेल का तकरीबन 85 प्रतिशत अब भी आयात करता है।अब भी यह 85 प्रतिशत के आस पास या इससे ऊपर बना रहता है।

अब सवाल बनता है कि नरेंद्र मोदी के आने के बाद भारत में कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन कितना हुआ? साल 2013 -14 में कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन 3 करोड़ 70 लाख टन का उत्पादन हुआ। साल 2019 -20 में कच्चे तेल का उत्पादन 3 करोड़ 20 लाख टन के आस पास रहा। यानी घरेलू उत्पादन पहले से बढ़ने के बजाए कम रहा। ऐसा क्यों हुआ? इस सवाल का जवाब देते हुए वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार ऑनिंद्यों  लिखतेचक्रवर्ती हैं कि सरकार ने कच्चे तेल के उत्पादन में दस प्रतिशत का लक्ष्य तो रख दिया था। लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कच्चे तेल निकालने के लिए खोजबीन अंग्रेजी में कहें तो एक्सप्लोरेशन पर जो खर्च किया जाना चाहिए वह खर्च नहीं किया।  

साल 2013 -14 में जब यूपीए की सरकार थी तो आयल एंड नैचुरल गैस कमीशन ने तेल की खोजबीन पर 11687  करोड़ रूपये खर्च किये। साल 2018 -19 आते- आते तेल की खोजबीन पर खर्च केवल 6 हजार करोड़ रूपये का रहा। यानी घरेलू तेल की खपत और मांग बढ़ी लेकिन तेल के खोजबीन पर खर्चा पहले से आधा कर दिया गया।  साल 2014 में आयल एंड नेचुरल गैस कमीशन का कैश रिज़र्व तकरीबन 10 हजार करोड़ रूपये का था। मार्च 2020 में यह कैश रिज़र्व कम होकर केवल 968 करोड़ रूपये का हो गया। ओनजीसी के कैश रिज़र्व का इस्तेमाल एचपीसीएल(HPCL) के विनियोग के लिए इस्तेमाल कर लिया गया।  अगर सरकार अपने विनियोग के लक्ष्य के पूरा करने के लिए इस तरह किसी कम्पनी का कैश का ट्रांसफर करती है तो यह कैसे मुमकिन है कि वह कम्पनी तेल की खोजबीन में पैसा निवेश कर पायेगी?

आगे ऑनिंद्यो बताते हैं कि सबसे अधिक गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से कमाई भी जबरदस्त की है। साल 2014 -15 में पेट्रोलियम सेक्टर के एक्साइज ड्यूटी से सरकार ने तकरीबन 99 हजार करोड़ रूपये की कमाई की थी। पिछले 3 साल में पेट्रोलियम सेक्टर में एक्साइज ड्यूटी पर कमाई के जरिये होने वाली कमाई का लेखा जोखा पेश करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) से साल 2018-19 में 2,10,282 करोड़ रुपये, साल 2019-20 में 2,19,750 करोड और साल 2020-21 में 3,71,908 करोड़ रूपये इकट्ठा हुए। इस दौरान भी कच्चे तेल की खोजबीन पर जमकर खर्च करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हाल पहले की ही तरह बेहाल रहा।

कहने का मतलब यह है कि भारत में कच्चे तेल की संभावनाओं को लेकर जिस तरह का काम करना चाहिए था, उस तरह का काम नहीं हो पा रहा है।  यहां पर भी सरकार को सोचना चाहिए कि क्यों इस क्षेत्र एक्सप्लोरेशन की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है?

Crude Oil
Crude Oil Exploration
Crude Oil Exploration in India
petrol price hike
Diesel Price Hike
Modi government
Narendra modi
BJP
Inflation
Crude oil Price hike

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • सोनिया यादव
    यूपी: सत्ता के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाली महिलाओं का संघर्ष हार-जीत से कहीं आगे है
    12 Mar 2022
    इन महिला उम्मीदवारों की पहचान हार-जीत से अलग इनका संघर्ष है, जो हमेशा याद रखा जाएगा। बीते पांच सालों में सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि में भले ही कोई खासा बदलाव नहीं आया हो, लेकिन उनके ख़िलाफ़ आवाज़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License