NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या हमारी रसोई गैस की कीमत भी सरकार की कमाई का ज़रिया बन चुकी है?
साल 2019-20 में सरकार ने एलपीजी पर सब्सिडी के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया गया था। साल 2020-21 में यह घटकर महज 14 हजार करोड़ रुपए रह गया।
अजय कुमार
20 Aug 2021
क्या हमारी रसोई गैस की कीमत भी सरकार की कमाई का ज़रिया बन चुकी है?
Image courtesy : The Indian Express

टीवी और सरकार वाले अब तालिबान के सहारे जनमानस को गढ़ने में लगे हुए हैं। हिंसक भाषा और अधकचरी जानकारियां परोस कर हिंदू-मुस्लिम में बांटने का नया प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। चौक-चौराहे से लेकर गांव-देहात सब तालिबान पर बात करते हुए इस्लाम से नफरत के शिकार में बदलते जा रहे हैं। इन सब को आगे कर पीछे से सरकारी देखरेख में वही काम होते आ रहा है जो हमेशा से होते आया है।  खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली 14.2 किलो रसोई गैस की कीमत फिर से 25 रुपए बढ़ गई है। पिछले महीने इसकी कीमत  ₹834 थी। अब बढ़कर ₹859 हो चुकी है।

यह केवल एक महीने की बात नहीं है। सरकार के पद पर बैठी मोदी सरकार के पिछले 7 साल के दौर में देखा जाए तो रसोई गैस की कीमत में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हुआ है।  1 मार्च 2014 को 14.2 किलो के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 410.5 रुपए थी जो अब 859.50 रुपए है। अगर इस निष्कर्ष पर पहुंचा जाए कि मोदी सरकार के पिछले 7 सालों के दौरान कईयों को पेट भर खाना खाने का इंतजाम करने में बहुत अधिक परेशानी सहनी पड़ी होगी तो यह गलत निष्कर्ष नहीं होगा।

अब जरा आप ही सोच कर बताइए कि जिस सरकार की नीतियों की वजह से लोगों को भरपेट खाना खाना नसीब ना हुआ हो, वह सरकार लोगों को गरीबी से निकालने, बेरोजगारों को रोजगार देने, लोगों की जिंदगी आसान करने के मामले में कितनी फिसड्डी साबित हुई होगी। इन सभी मुद्दों को बैक सीट पर डाल दिया गया है। फ्रंट पर बैठकर तालिबान के सहारे मुस्लिम नफरत की सड़क पर चलते हुए चुनावी राजनीति करने की चाल चली रही है।

रसोई गैस की कीमत निर्धारण का फार्मूला बहुत जटिल है। साधारण शब्दों में इतना समझिए कि इस फार्मूले को इंपोर्ट पार्टी प्राइस कहते हैं। इस फार्मूले के आधार पर सऊदी अरब की अरामको कंपनी द्वारा तय किए गए एलपीजी के कीमत को बेंचमार्क के तौर पर अपनाया जाता है। इस कीमत में समुद्री भाड़ा, कस्टम ड्यूटी, पोर्ट ड्यूटी सहित वह सारे खर्च जोड़े जाते है, जो एलपीजी को दूसरे देश से मंगवाने के लिए खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी बहुत सारे लागतों को कीमत में जोड़ा जाता है जैसे सिलेंडर का खर्च, देश के कोने- कोने में पहुंचाने का भाड़ा, केंद्र सरकार द्वारा लगने वाली जीएसटी।

इन सभी खर्चों को जोड़कर सरकारी तेल कंपनियां एलपीजी गैस का भाव हर महीने तय करती हैं। क्योंकि एलपीजी की खरीददारी डॉलर में होती है इसलिए अगर डॉलर ऊपर नीचे घटता बढ़ता है तब एलपीजी की कीमतों पर भी असर पड़ता है। यानी ढेर सारे कारक मिलकर के एलपीजी के कीमत को प्रभावित करते हैं।

जब भी एलपीजी की कीमत बढ़ती है तो सरकार यह कहकर अपना बचाव करती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों की वजह से कीमतों में इजाफा हो रहा है। इसे कम और अधिक करना उसके बस की बात नहीं। लेकिन यह हिसाब भी समझ से परे बात है। विपक्ष का कहना है कि पिछले 7 महीने में रसोई गैस की कीमतों में ₹265 का इजाफा किया गया है। सऊदी अरामको की एलपीजी की  कीमत 611 यूएस डॉलर प्रति मीट्रिक टन है।  यह कीमत नहीं होना चाहिए। अगर रुपए और डॉलर की विनिमय दर को समायोजित करने के बाद एलपीजी की कीमत तय की जाए तो यह तकरीबन ₹600 प्रति सिलेंडर होनी चाहिए। रसोई गैस की यही कीमत तय होनी चाहिए। लेकिन ₹860 प्रति सिलेंडर की दर से रसोई गैस बेची जा रही है। पैसों का इतना बड़ा अंतर कहा जा रहा है? विपक्ष का कहना है कि सरकार एलपीजी गैस की कीमत के नाम पर मुनाफाखोरी कर रही है। आम लोगों का गला रेतकर और उनकी कमर तोड़कर कमाई कर रही है।

प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण में कहा था कि जब एक गरीब घर की औरत चूल्हा जलाकर अपने घर का खाना बनाती है तो 400 सिगरेट के बराबर धुआं अपने अंदर खींच लेती है। मैंने अपने बचपन में यह सब देखा है। कभी-कभी तो ऐसा होता था कि मां खाना बनाती थी और धुंए से उसका चेहरा नहीं दिखता था। यह प्रधानमंत्री के भाषण के वक्तव्य हैं। जो उन्होंने उज्जवला योजना के महत्व को बताते हुए दिया था। प्रधानमंत्री से ही पूछना चाहिए कि ₹860 प्रति सिलेंडर रसोई गैस आखिरकर कौन गरीब खरीदने के लिए आसानी से तैयार हो पाएगा। इतनी बड़ी कीमत क्या कोई गरीब मां दे पाएगी?

इस सवाल को सुनते हो सकता है कि सरकार के कामकाज के समर्थक लोग सब्सिडी की याद दिलाएं। रसोई गैस में सब्सिडी का मतलब यह कि अगर कीमतें बढ़ेंगी तो उसका बोझ आम लोगों पर पड़ने नहीं दिया जाएगा। सरकार खुद खाते में पैसा भेज देगी।

यही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना थी। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले महिलाओं को फ्री में गैस सिलेंडर दिया जाएगा और सब्सिडी रेट पर सिलेंडर में गैस भरने की सहूलियत दी जाएगी। सरकार ने दावा किया था कि इस योजना की वजह से भारत के 95% लोगों तक गैस सिलेंडर पहुंच पा रहा है। भारत की बहुत बड़ी आबादी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की मजबूरी से मुक्त हुई है।

लेकिन जरा सोचिए अगर पिछले 7 साल में रसोई गैस की कीमतें बढ़कर दोगुना हो गई है, तो इस योजना से कितनी औरतों और परिवारों को लाभ पहुंचा  होगा। साल 2018 के रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ कंपैशनेट इकोनॉमिक्स के सर्वे के मुताबिक उत्तर भारत में इस योजना के लाभ लेने वाले 85 फ़ीसदी परिवारों की औरतों ने इस योजना को छोड़ दिया। साल 2019 की कैग रिपोर्ट कहती है कि उज्ज्वला योजना से लाभान्वित होने वाले परिवार साल भर में मुश्किल से तीन या चार सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। इन सभी आंकड़ों का इशारा इसी तरफ है कि रसोई गैस की बढ़ती कीमतों की वजह से भारत का गरीब समाज इस योजना का फायदा नहीं उठा सकता है। कोरोना जैसी महामारी के वक्त तो बिल्कुल भी नहीं।

जहां तक सब्सिडी की बात है तो टेक्निकली देखा जाए तो सब्सिडी खत्म नहीं हुई है। लेकिन वास्तविक तौर पर देखा जाए तो सब्सिडी खत्म हो गई है। नियम के मुताबिक 10 लाख से ऊपर की आमदनी वाले और जो स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ना चाहते हैं उनके सिवाय सभी एलपीजी पर सब्सिडी के हकदार होंगे। यह नियम है।

लेकिन हकीकत यह है कि पिछले साल से सब्सिडी मिलना बंद हो चुकी है। साल 2019-20 में सरकार ने एलपीजी पर सब्सिडी के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया था। साल 2020-21 में यह घटकर महज 14 हजार करोड रुपए रह गया। सरकार के कामकाज पर नजर रखने वाले लोग का कहना है कि धीरे-धीरे सरकार इस सब्सिडी को बंद कर देगी। 

रसोई गैस पर जीएसटी लगता है। पेट्रोल और डीजल की तरह टैक्स बढ़ाने को लेकर जीएसटी में हदबंदी है। इसमें सरकार यहां पर सब्सिडी न देने वाली नीति अपना रही है कि किसी भी तरह से उस पर बोझ न पड़े।

सबसे जरूरी बात कि महंगाई की मार लोगों पर कब पड़ रही है? जब महामारी की मार वजह से काम मिलना मुश्किल हुआ है। अर्थव्यवस्था लचर हो चली है। जब तकरीबन 34 करोड़ (अर्थशास्त्री संतोष महरोत्रा के अध्ययन के मुताबिक) लोगों की आय इतनी कम हो चुकी है कि वह गरीबी रेखा की दहलीज नीचे चले गए हैं। जब करोड़ों लोग बेरोजगार बने घूम रहे हैं, ऐसे समय में कमरतोड़ महंगाई का मतलब यही हुआ कि सरकार आम लोगों की नहीं है। 

LPG
LPG price hike
Gas Price Hike
Modi Govt
Narendra modi
Inflation

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

ध्यान देने वाली बात: 1 जून से आपकी जेब पर अतिरिक्त ख़र्च


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License