NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शिकंजा : प्रशांत भूषण, तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ 2009 के अवमानना मामले में सुनवाई अब 4 अगस्त को
उच्चतम न्यायालय ने एक समाचार पत्रिका को दिए साक्षात्कार में शीर्ष न्यायालय के कुछ मौजूदा और पूर्व न्यायाधीशों पर कथित तौर पर आक्षेप लगाने के लिए नवंबर 2009 में भूषण और तेजपाल को अवमानना का नोटिस जारी किया था। मामले को मई 2012 में आखिरी सुनवाई के बाद आज इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
भाषा
24 Jul 2020
SC

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कार्यकर्ता-वकील प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल के वरिष्ठ वकीलों द्वारा और समय मांगने के बाद उनके खिलाफ 2009 के अवमानना मामले में सुनवाई चार अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को कहा कि वह कथित तौर पर अवमानना करने वाले व्यक्तियों की पैरवी कर रहे वकीलों को तैयारी के लिए समय देगी और उसने मामले की सुनवाई चार अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

मामले में मध्यस्थ वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि उन्हें वीडियो कांफ्रेंस के जरिए दलीलें देने में काफी दिक्कत होती है और अगर सामान्य रूप से सुनवाई शुरू होने के बाद मामले को सुना जाए तो बेहतर होगा।

उन्होंने कहा कि वह अदालतों की डिजिटल माध्यम से हो रही सुनवाइयों को लेकर सुविधाजनक महसूस नहीं करते।

भूषण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि यह मामला पिछले 9-10 वर्षों से लंबित था और उन्हें इसकी तैयारी के लिए समय की जरूरत है।

पीठ ने कहा कि संविधान पीठ तक के मामले वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सुने जा रहे हैं।

तरुण तेजपाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘अगर हमने नौ वर्षों तक इंतजार किया तो अब मुझे समझ नहीं आता कि इतनी क्या जल्दी है।’’

इस पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि अदालत मामले की सुनवाई में जल्दबाजी नहीं करेगी।

जब धवन ने कहा कि उनके पास मामले के सभी रिकॉर्ड नहीं हैं और शायद अदालत के पास ये रिकॉर्ड हैं तो इस पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि श्रीमान धवन आपकी बहुत अच्छी याददाश्त हैं और आप दलीलें देना बहुत अच्छे तरीके से शुरू कर सकते हैं।’’

पीठ ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण से कहा कि वह बहुत बुजुर्ग हैं और उन्हें इस मामले में दलीलें नहीं देनी चाहिए।

सिब्बल ने अदालत से मामले में तैयारी के लिए थोड़ा समय देने का फिर से अनुरोध किया।

इसके बाद न्यायालय ने कहा कि वह तैयारी के लिए मामले में पैरवी करने के लिए वकीलों को थोड़ा और समय दे रहा है और उसने मामले पर अगली सुनवाई के लिए चार अगस्त की तारीख तय कर दी।

उच्चतम न्यायालय ने एक समाचार पत्रिका को दिए साक्षात्कार में शीर्ष न्यायालय के कुछ मौजूदा और पूर्व न्यायाधीशों पर कथित तौर पर आक्षेप लगाने के लिए नवंबर 2009 में भूषण और तेजपाल को अवमानना का नोटिस जारी किया था।

मामले को मई 2012 में आखिरी सुनवाई के बाद शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।

शीर्ष न्यायालय ने न्यायपालिका के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक ट्वीट करने के लिए कार्यकर्ता-वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उन्हें 22 जुलाई को नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने कहा कि उनके बयानों से प्रथम दृष्टया ‘‘न्याय के प्रशासन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।’’

Supreme Court
prashant bhushan
Tarun Tejpal

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • PUNJAB
    शिव इंदर सिंह
    कृषि कानूनों की वापसी के बाद क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग?
    29 Nov 2021
    कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद पंजाब में जश्न का माहौल है। पंजाब के लोग इसे किसान आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। लेकिन भाजपा के प्रति विरोध और गुस्से का भाव कम होने का नाम नहीं ले रहा।
  • civil society
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खुला पत्र : क्या नागरिक समाज देश का दुश्मन है?
    29 Nov 2021
    अखिल भारतीय और केन्द्रीय सेवाओं के पूर्व सिविल सेवकों के समूह ने देशवासियों के नाम एक खुला पत्र जारी करके नागरिक समाज को देश और शासन के दुश्मन के रूप में रेखांकित किए जाने पर चिंता जताई है।
  • Munawar Faruqui
    सत्यम् तिवारी
    "अनेकता में एकता" वाले देश भारत में अल्पसंख्यकों की हैसियत क्या है?
    29 Nov 2021
    मुनव्वर फ़ारूक़ी, चर्च की घटना या नमाज़ में ख़लल डालने की ख़बरें सिर्फ़ 3 घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि यह उन सैकड़ों हज़ारों घटनाओं की झलक भर हैं जो देश के हर कोने में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ घटित हो रही हैं।
  • Yogi
    सोनिया यादव
    यूपी: परीक्षाओं का पेपर लीक और रद्द होना योगी सरकार की बड़ी विफलता है!
    29 Nov 2021
    सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरों टॉलरेंस के दावे के बीच बार-बार सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के मामले कैसे सामने आ रहे हैं, क्या सरकार की नीयत और नीति अलग-अलग है?
  • kisan andolan
    ओँकार सिंह
    तमाम मुश्किलों के बीच किसानों की जीत की यात्रा और लोकतांत्रिक सबक़
    29 Nov 2021
    जब एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मांग और अधिकार की लड़ाई को देशद्रोह के खांचे में फिट किया जा रहा था, तब किसान आंदोलन संघर्ष की संजीवनी के रूप में उभरा। साल भर सड़क पर दमन और क्रूरता की हदें झेलकर अंतत…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License