NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सेंट्रल विस्टा निर्माण पर रोक के आग्रह वाली याचिका पर शीघ्र सुनवायी को हाईकोर्ट जाएं: न्यायालय
न्यायमूर्ति सरन ने कहा, ‘‘जब हम फेस मास्क के साथ बंद कमरों में बैठे हैं, इससे ही पता चलता है कि स्थिति गंभीर है। हम कोविड स्थिति पर कोई और टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे क्योंकि अन्य पीठों के समक्ष मामला विचाराधीन है, नहीं तो हमारी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की जा सकती है।’’
भाषा
08 May 2021
सेंट्रल विस्टा

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को याचिकाकर्ताओं से कहा कि यदि वे उस जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई चाहते हैं तो वे वापस दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करें जिसमें कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सेंट्रल विस्टा के निर्माण पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। न्यायालय ने हालांकि इससे सहमति जतायी कि स्थिति वास्तव में गंभीर है।

न्यायमूर्ति विनीत सरन ने कहा, ‘‘जब हम फेस मास्क के साथ बंद कमरों में बैठे हैं, इससे ही पता चलता है कि स्थिति गंभीर है। हम कोविड स्थिति पर कोई और टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे क्योंकि अन्य पीठों के समक्ष मामला विचाराधीन है, नहीं तो हमारी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की जा सकती है।’’

न्यायमूर्ति सरन और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्दार्थ लूथरा की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। लूथरा ने अनुरोध किया था कि शीर्ष अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय को सेंट्रल विस्टा निर्माण के खिलाफ जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए बाध्य करे।

शीर्ष अदालत उच्च न्यायालय के 4 मई के उस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवायी 13 दिन के बाद करना तय किया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह पहले उच्चतम न्यायालय के 5 जनवरी के फैसले पर गौर करना चाहती है। अदालत ने कहा था कि वह देखना चाहती है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर आगे बढ़ने की मंजूरी देते हुए शीर्ष अदालत ने क्या कहा है।

शीर्ष अदालत ने आज वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से कहा कि वह 10 मई को उच्च न्यायालय में इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए इसका उल्लेख करें।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा विचार है कि चूंकि मामला उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है और विशेष अनुमति याचिका में आदेश को जो चुनौती दी गई है वह केवल स्थगन को लेकर है, इसलिए हम मामले के गुणदोष पर गौर करने के इच्छुक नहीं हैं।’’

पीठ ने कहा कि ‘‘इन परिस्थितियों में, हम श्री लूथरा से अनुरोध करते हैं कि वह स्वयं या किसी अन्य वकील के माध्यम से याचिका दायर करें और सोमवार (10 मई) को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष इस मामले को जल्द से जल्द सुनवायी के लिए लेने का अनुरोध करें।’’

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता की इस दलील पर ध्यान दिया कि इस मामले में अत्यधिक तात्कालिकता शामिल है। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय अनुरोध पर विचार कर सकता है और आदेश पारित कर सकता है।

शुरुआत में लूथरा ने पीठ से कहा कि यह मामला अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि देश एक अभूतपूर्व मानवीय संकट का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वह राजपथ, सेंट्रल विस्टा विस्तार और उद्यान में चल रहे निर्माण कार्य को जारी रखने की प्रदान की गई अनुमति की चुनौती से चिंतित हैं।

लुथरा ने कहा, ‘‘मजदूरों को सराय काले खां और करोल बाग क्षेत्र से राजपथ और सेंट्रल विस्टा तक ले जाया जा रहा है, जहां निर्माण कार्य चल रहा है। इससे उनके बीच कोविड संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है।’’

उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीबीडब्ल्यूडी) द्वारा दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य को जारी रखने के लिए लिखे गए पत्र का उल्लेख किया कि यह समयबद्ध कार्य है।

लुथरा ने कहा, ‘‘निर्माण की इस आधार पर अनुमति दी गई थी कि यह आवश्यक गतिविधि है। निर्माण कार्य एक आवश्यक गतिविधि कैसे है? एक स्वास्थ्य आपात स्थिति में, हम श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन को खतरे में नहीं डाल सकते हैं और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर अधिक दबाव नहीं डाल सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर का उच्चतम स्तर 15 मई तक आने की आशंका जतायी जा रही है और उच्च न्यायालय ने मामले को 17 मई के लिए सूचीबद्ध किया है जिससे किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि जब देश में लॉकडाउन पर विचार कर रहा है और यहां तक कि इंडियन प्रीमियर लीग को भी स्थगित कर दिया गया है, ऐसे में निर्माण गतिविधि को अनुमति नहीं दी जा सकती।

शीर्ष अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई टाल दी है, जिसमें मौजूदा कोविड स्थिति के कारण केंद्रीय परियोजना में निर्माण कार्य रोकने के लिए केंद्र को निर्देश का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ताओं अन्या मल्होत्रा और सोहेल हाशमी ने दावा किया है कि यदि परियोजना को महामारी के दौरान जारी रहने की अनुमति दी गई तो इससे काफी संक्रमण फैल सकता है।

उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा है कि ‘‘चरमराती’’ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और निर्माण स्थल पर कार्यरत श्रमिकों का जीवन जोखिम में होने के मद्देनजर परियोजना का जारी रहना चिंता का विषय है।

अधिवक्ता गौतम खजांची और प्रद्युम्न कायस्थ के माध्यम से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि इस परियोजना में राजपथ और इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक पर निर्माण गतिविधि प्रस्तावित है।

इस परियोजना के तहत एक नए संसद भवन, एक नए आवासीय परिसर के निर्माण की परिकल्पना की गई है जिसमें प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति के आवास के साथ-साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालय के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाना है।

Central Vista
Delhi High court
COVID-19
Central Vista Project
Modi government

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट


बाकी खबरें

  • Shiromani Akali Dal
    जगरूप एस. सेखों
    शिरोमणि अकाली दल: क्या यह कभी गौरवशाली रहे अतीत पर पर्दा डालने का वक़्त है?
    20 Jan 2022
    पार्टी को इस बरे में आत्ममंथन करने की जरूरत है, क्योंकि अकाली दल पर बादल परिवार की ‘तानाशाही’ जकड़ के चलते आगामी पंजाब चुनावों में उसे एक बार फिर से शर्मिंदगी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
  • Roberta Metsola
    मरीना स्ट्रॉस
    कौन हैं यूरोपीय संसद की नई अध्यक्ष रॉबर्टा मेट्सोला? उनके बारे में क्या सोचते हैं यूरोपीय नेता? 
    20 Jan 2022
    रोबर्टा मेट्सोला यूरोपीय संसद के अध्यक्ष पद के लिए चुनी जाने वाली तीसरी महिला हैं।
  • rajni
    अनिल अंशुमन
    'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 
    20 Jan 2022
    सोगोय करते-करते लड़कियों के इतने करीब आ जाते हैं कि लड़कियों के लिए नाचना बहुत मुश्किल हो जाता है. सुनने को तो ये भी आता है कि अंधेरा हो जाने के बाद सीनियर लड़के कॉलेज में नई आई लड़कियों को झाड़ियों…
  • animal
    संदीपन तालुकदार
    मेसोपोटामिया के कुंगा एक ह्यूमन-इंजिनीयर्ड प्रजाति थे : अध्ययन
    20 Jan 2022
    प्राचीन डीएनए के एक नवीनतम विश्लेषण से पता चला है कि कुंगस मनुष्यों द्वारा किए गए क्रॉस-ब्रीडिंग के परिणामस्वरूप हुआ था। मादा गधे और नर सीरियाई जंगली गधे के बीच एक क्रॉस, कुंगा मानव-इंजीनियर…
  • Republic Day parade
    राज कुमार
    पड़ताल: गणतंत्र दिवस परेड से केरल, प. बंगाल और तमिलनाडु की झाकियां क्यों हुईं बाहर
    20 Jan 2022
    26 जनवरी को दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की झांकियां शामिल नहीं होंगी। सवाल उठता है कि आख़िर इन झांकियों में ऐसा क्या था जो इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। केरल की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License