NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तमिलनाडु और केरल के बीच मुल्लापेरियार बांध के संघर्ष का इतिहास
पश्चिम की ओर बहने वाली पेरियार नदी को पश्चिमी घाट के पूर्व में अर्ध-शुष्क कृषि भूमि की ओर मोड़ने के लिए एक बांध बनाने का विचार बहुत पुराना है। एक स्थानीय प्रशासक प्रदानी मुथिरुलप्पा पिल्लई ने वर्ष 1789 में इसकी परिकल्पना की थी।
श्रुति एमडी
11 Dec 2021
mullaperiyar
मुल्लापेरियार बांध से पानी का बहाव। (फोटो क्रेडिट: प्रकाश आर)

केरल द्वारा पानी न छोड़े जाने की बार-बार अपील किए जाने के बावजूद, तमिलनाडु द्वारा अप्रत्याशित रूप से रात में बांध के शटर खोले जाने के बाद अंतर-राज्यीय मुल्लापेरियार बांध को लेकर एक बार फिर संघर्ष बढ़ गया है। तमिलनाडु द्वारा 6 दिसम्बर की रात 9 बजे पानी छोड़े जाने से केरल के इडुक्की जिले के डाउनस्ट्रीम गांवों में सैकड़ों घर जलमग्न हो गए थे। 

यह उदाहरण मुल्लापेरियार बांध को लेकर केरल और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराने संघर्ष का एक हिस्सा है। दोनों राज्यों में संघर्ष की जड़ यह है कि बांध विशेष रूप से केरल के इडुक्की जिले में स्थित है, लेकिन इस पर नियंत्रण तमिलनाडु सरकार का है। लेकिन ऐसा क्यों है? 

इस संघर्ष की सही प्रकृति को समझने के लिए बांध के इतिहास की एक झलक जरूरी है। 

शुरूआती साल

पश्चिम की ओर बहने वाली पेरियार नदी को पश्चिमी घाट के पूर्व में अर्ध-शुष्क कृषि भूमि की ओर मोड़ने के लिए एक बांध बनाने का विचार बहुत पुराना है। एक स्थानीय प्रशासक प्रदानी मुथिरुलप्पा पिल्लई ने वर्ष 1789 में इसकी परिकल्पना की थी। वे मद्रास प्रेसीडेंसी के तहत रामनाद एस्टेट के नाबालिग जमींदार मुथुरामलिंग सेतुपति के एक शक्तिशाली मंत्री थे। 

इस तरह के बांध की परिकल्पना इसलिए की गई थी क्योंकि पेरियार नदी का अतिरिक्त पानी बेकार ढंग से अरब सागर में बह रहा था। उसी समय, मद्रास प्रेसीडेंसी के तत्कालीन मदुरा क्षेत्र में केवल मानसून पर निर्भर जिलों को भीषण सूखे का सामना करना पड़ा था। 

कैप्टन जेएल कॉडवेल, जो मद्रास सेना के मद्रास इंजीनियर्स के हिस्सा थे, उन्होंने वर्ष 1808 में इस बांध को बनाने के लिए उपयुक्त स्थान की खोज की थी। यह इडुक्की जिले के थेक्कडी शहर में पश्चिमी घाट के इलायची पहाड़ियों पर समुद्र तल से 2,890 फीट ऊपर स्थित है। 

जबकि पानी को मोड़ने के लिए एक बांध का विचार अच्छा था, पर यह आसान काम नहीं था। सबसे पहले, यह एक बहुत ही महंगा मामला था, जिसमें असुरक्षित घने जंगलों के अंदर जा कर बांध बनाने के लिए कई वर्षों तक कठोर श्रम की आवश्यकता थी। दूसरे, बांध को अंग्रेजों द्वारा त्रावणकोर क्षेत्र में बनाया जाना था, जो एक रियासत थी और वह ब्रिटिश साम्राज्य की सीमा से बाहर थी।

मद्रास प्रेसीडेंसी ने पेरियार पर बांध बनाने का पहला औपचारिक प्रयास 1850 में किया था। लेकिन अस्वस्थकर हालात में काम करने का हवाला देते हुए मजदूरों द्वारा ज्यादा मजदूरी की मांग करने के बाद इसका इरादा छोड़ दिया गया था। लेकिन, योजना अभी विचाराधीन थी।

फिर आया, 1877 का वह कुख्यात मद्रास अकाल, जब वायसराय लॉर्ड रॉबर्ट बुलवर लिटन के निर्मम कार्यकाल में चार से पांच मिलियन लोगों ने भूख से छटपटा कर दम तोड़ दिया था, इसके बाद पानी के अधिक स्रोतों की जरूरत थी। इसकी वजह से भी बांध बनाने में देरी हुई।

बांध निर्माण

वर्षों की हीलाहवाली के बाद, पेरियार बांध (तब इसी नाम से जाना जाता था) के निर्माण को 1882 में आखिरकार मंजूरी दी गई। मेजर जॉन पेनीक्यूइक एक संशोधित परियोजना तैयार करने के प्रभारी थे, जिसे अंततः वर्ष 1884 में अनुमोदित किया गया था।

ऐसा कहा जाता है कि ब्रिटिश सरकार को त्रावणकोर स्टेट से कोई 24 वर्षों तक बातचीत करनी पड़ी थी, तब जा कर 29 अक्टूबर 1886 को 999 वर्षों तक के लिए पट्टे पर जमीन लेने के लिए त्रावणकोर के महाराजा विशाखम थिरुनल राम वर्मा और ब्रिटिश भारत के राज्य सचिव के के बीच दस्तावेज पर दस्तखत किए थे।

इस समझौते ने मुल्लापेरियार बांध की 100 एकड़ के दायरे में आने वाले जल और 8,000 हजार एकड़ में फैले जलाशय के समस्त जल पर ब्रिटिश सरकार का पूर्ण अधिकार दे दिया। ब्रिटिश सरकार इसकी एवज में प्रति एकड़ 5 रुपये के हिसाब से सालाना 40,000 रुपये कर देती थी। बांध का निर्माण 1887 में शुरू किया गया। यह बांध चट्टान, चूना पत्थर और जले हुए ईंट के पाउडर से बनाया गया था। 

पेनीक्यूइक के लिए नदी का बहाव मोड़ना एक बड़ी चुनौती थी, और पानी के प्रवाह को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अस्थायी तटबंध लगातार बाढ़ आने से नष्ट हो गए थे। इस समस्या के कारण, ब्रिटिश अधिकारियों ने बांध के लिए धन पर रोक लगा दी।

थेनी में अवस्थित पेनीक्यूइक स्मारक में जॉन पेनीक्यूइक की मूर्ति। (फोटो सौजन्य: कैजुअल वॉकर)

ऐसा लोक विश्वास है कि पेनीक्यूइक ने बांध का निर्माण जारी रखने और उसे पूरा करने के लिए इंग्लैंड में अपनी पत्नी के गहने और संपत्ति बेचकर धन जुटाया था।

आजादी के बाद

अंग्रेजों के 1947 में भारत छोड़ गए। इसके बाद त्रावणकोर और कोचीन केरल से भारत संघ में 1956 में शामिल हो गए। नई राज्य सरकार ने कहा कि ब्रिटिश राज और त्रावणकोर के बीच पहले हस्ताक्षरित समझौता अमान्य था और इसे नवीनीकृत करने की आवश्यकता है। 

कई असफल प्रयासों के बाद, इसे 1970 में नवीनीकृत किया गया था और इसमें प्रति एकड़ 5 रुपये कर को बढ़ाकर 30 रुपये एकड़ कर दिया गया था। साथ ही, मुल्लापेरियार के पानी से उत्पन्न बिजली के लिए प्रति किलोवाट 12 रुपये प्रति घंटे की दर से कर का निर्धारण कर दिया था। इस नई दर से तमिलनाडु अगले 50 वर्षों के लिए कर के रूप में सालाना 10 लाख रुपये की राशि का भुगतान कर रहा है।

हालांकि, 1979 में मोरवी डैम के फेल होने के बाद इस पूरी चर्चा ने एक अलग ही रंग ले लिया, जिसमें 15,000 लोग गुजरात में मर गए थे। केरल सरकार ने मुल्लापेरियार बांध के ज्यादा पुराने होने और उसके भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में स्थित होने को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई थीं। यह आशंका जताई जाने लगी थी कि यह 6 ˈमैग्‌निट्‌यूड्‌ से अधिक तीव्रता वाले भूकंप का सामना नहीं कर सकता है।

तब से, तमिलनाडु पीडब्ल्यूडी द्वारा केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की सिफारिश के मुताबिक बांध के सुदृढ़ीकरण उपायों को अपनाया गया है। 

बांध के भंडारण स्तर को लेकर विवाद होता रहा है। 2011 में सीडब्ल्यूसी ने तमिलनाडु सरकार को 152 फीट जल भंडारण की बजाए 142.2 फीट और फिर मरम्मत का काम करने के लिए 136 फीट तक कम करने का आदेश दिया।

तमिलनाडु के लिए तो मुल्लापेरियार बांध और डायवर्टेड पेरियार जल उसके थेनी, मदुरै, शिवगंगा, डिंडीगुल और रामनाड जिलों के लिए जीवन रेखा के रूप में कार्य करते हैं, जो पीने के लिए और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराते हैं। वहीं, केरल के लिए, यह सैकड़ों साल से भी अधिक पुराना बांध जिसमें कई संरचनात्मक खामियां हैं, अब अगर वह टूटता है तो उसे 3.5 लाख लोगों के लिए खतरा है।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

History of the Conflict-Ridden Mullaperiyar Dam

Periyar River
Kerala
tamil nadu
dams
Colonial Empire
floods
Travancore
History Mullaperiyar dam
British Raj
Cochin

Related Stories

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

तमिलनाडु : विकलांग मज़दूरों ने मनरेगा कार्ड वितरण में 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'

सीताराम येचुरी फिर से चुने गए माकपा के महासचिव

केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे

तमिलनाडु राज्य और कृषि का बजट ‘संतोषजनक नहीं’ है

तमिलनाडु के चाय बागान श्रमिकों को अच्छी चाय का एक प्याला भी मयस्सर नहीं

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत

केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया


बाकी खबरें

  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव दूसरा चरण:  वोट अपील के बहाने सियासी बयानबाज़ी के बीच मतदान
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कितने अहम हैं, ये दिग्गज राजनेताओं की सक्रियता से ही भांपा जा सकता है, मतदान के पहले तक राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ओर से वोट के लिए अपील की जा रही है, वो भी बेहद तीखे…
  • unemployment
    तारिक़ अनवर
    उत्तर प्रदेश: क्या बेरोज़गारी ने बीजेपी का युवा वोट छीन लिया है?
    14 Feb 2022
    21 साल की एक अंग्रेज़ी ग्रेजुएट शिकायत करते हुए कहती हैं कि उनकी शिक्षा के बावजूद, उन्हें राज्य में बेरोज़गारी के चलते उपले बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
  • delhi high court
    भाषा
    अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
    14 Feb 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पिछले वर्ष सीटों की संख्या, प्राप्त आवेदनों और दाखिलों की संख्या को लेकर एक संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दाखिल करें।’’ अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
  • ashok gehlot
    भाषा
    रीट पर गतिरोध कायम, सरकार ने कहा ‘एसओजी पर विश्वास रखे विपक्ष’
    14 Feb 2022
    इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई विशेष चर्चा पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल के विधायकों ने सदन में नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रखा। ये विधायक तीन कार्यदिवसों से इसको लेकर सदन में प्रदर्शन कर…
  • ISRO
    भाषा
    इसरो का 2022 का पहला प्रक्षेपण: धरती पर नज़र रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित
    14 Feb 2022
    पीएसएलवी-सी 52 के जरिए धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License