NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
माननीय प्रधानमंत्री जी, ताली बजाने और दिया जलाने के बाद अब स्वास्थ्यकर्मियों की भी चिंता कर लीजिए!
ये स्वास्थ्यकर्मी ही कोरोना से लड़ने वाले असली योद्धा हैं। इस महामारी से हमारी लड़ाई का अंतिम नतीजा उनके मनोबल और कौशल से ही निकलेगा। ऐसे में उन्हें बर्ख़ास्त करने और ज़रूरी सुरक्षा किट न मिलने की खबरें दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Apr 2020
modi

दिल्ली: उत्तर प्रदेश में बांदा के राजकीय मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिग के जरिए रखे गए 26 स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले हफ्ते शुक्रवार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। ये सभी कर्मचारी कोरोना वायरस संक्रमितों के इलाज में लगाए जाने पर कोरोना सुरक्षा किट की मांग को लेकर पिछले दो दिनों से हड़ताल पर थे।

उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशक अज्ञात गुप्ता ने राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा के प्राचार्य के नाम शुक्रवार को लिखे पत्र में बर्खास्त किए गए 26 आउटसोर्सिग स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा है, 'आप लोगों द्वारा देश में मौजूद विषम हालात के बावजूद मनमाने तरीके से हड़ताल की जा रही है, जबकि वर्तमान समय में प्रदेश में एस्मा कानून लागू है। आपके इस कृत्य से राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अत: अनुबंध के आधार पर सभी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं।'

वहीं, इस एकतरफा कार्रवाई पर बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मियों में रोष है। बर्खास्त स्वास्थ्यकर्मियों ने आरोप लगाया, “राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कोरोना आइसोलेशन वार्ड में बिना सुरक्षा किट उपलब्ध कराए ही सभी आउटसोर्सिग कर्मियों की ड्यूटी लगाई थी। ऐसे में अपनी सुरक्षा को देखते हुए कोरोना सुरक्षा किट की मांग को लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मी दो दिन से हड़ताल पर थे। लेकिन कॉलेज प्रिंसिपल की साजिश की वजह से विभाग ने उनकी बर्खास्तगी की है, जिसे न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।”

पिछले हफ्ते यही दिल्ली में हुआ।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) द्वारा संचालित हिंदू राव अस्पताल के चार कॉन्ट्रैक्चुअल डॉक्टरों ने कथित रूप से निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) मुहैया नहीं कराने के कारण इस्तीफा दे दिया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की मांगों को सुनने के बजाय उन पर कार्रवाई की बात की।

91513938_10157909823591855_797764577226915840_n_0.jpg

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल प्रशासन ने कहा है इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा और डॉक्टरों एवं नर्सों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

हिंदू राव अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी एक ऑफिस ऑर्डर में कहा गया, ‘कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों एवं नर्सों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाएंगे और उनके नामों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए दिल्ली मेडिकल काउंसिल ऑफिस और नर्सिंग काउंसिल ऑफ इंडिया के ऑफिस में भेजा जाएगा।’

कुछ ऐसा ही बिहार के पटना स्थित एनएमसीएच का हुआ।

83 जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय, बिहार स्वास्थ्य विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर कहा है, "अस्पताल में पीपीई और N95 मास्क डॉक्टरों को नहीं मिल पा रहा है तो मरीज़ों को कहां से मिलेगा?"

डॉक्टरों ने पत्र में ख़ुद के भी संक्रमित हो जाने की चिंता जताई। इसलिए सेल्फ़ क्वारंटीन पर जाने की मांग की।

दरअसल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की यह मांग इसलिए भी बहुत ज़रूरी है कि अब तक दिल्ली में ही कोरोना से संक्रमित होने वाले डॉक्टरों की संख्या आठ से ज्यादा हो गई है। इसमें एम्स, गंगाराम और मोहल्ला क्लीनिक में काम करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में स्वास्थ्यकर्मी और अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों को क्वारंटाइन में भेजा गया है।

ऐसा सिर्फ भारत में नहीं हो रहा है। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का इलाज करने वाले डॉक्टर और नर्स खतरे में हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षित कपड़े, मास्क और ग्लव्स पहनने के बावजूद डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बाकी लोगों के मुकाबले संक्रमण के ज़्यादा शिकार हो रहे हैं। भारत में तो डॉक्टर अभी इन बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

बीबीसी के मुताबिक डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2002-03 में फैले सार्स संक्रमण के दौरान 21 फीसदी संक्रमित लोग स्वास्थ्यकर्मी थे।

कुछ ऐसा ही हाल कोविड-19 के मरीज़ों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का भी है। इटली में 6,200 से ज़्यादा कोरोना संक्रमित लोग स्वास्थ्यकर्मी हैं। स्पेन में लगभग 6,500 (लगभग 12%) संक्रमित लोग भी स्वास्थ्यकर्मी ही हैं।

मार्च की शुरुआत में चीन ने बताया था कि 3,300 के करीब स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हुए थे। इसका मतलब है कि 4-12% के लगभग संक्रमित लोग हेल्थकेयर स्टाफ हैं।

भारत में भी हालात चिंताजनक ही हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार को इसके बारे में पता नहीं है। पिछले महीने के अंत में डिपार्टमेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉ‌र्म्स एंड पब्लिक ग्रिवेंसेज की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने कि जम्मू-कश्मीर, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) और मेडिकल सुविधाओं की कमी है।

इसके अलावा बहुत सारे डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर भी सुरक्षा उपकरणों की कमी के बारे में लिखा है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार नीति आयोग ने कोविड-19 से लड़ाई के लिए अगले दो महीने बड़े पैमाने पर मेडिकल उपकरणों की जरूरत बताई है। नीति आयोग के मुताबिक जून तक भारत को 2.7 करोड़ N95 मॉस्क, 1.5 करोड़ पीपीई, 16 लाख डॉयगनोस्टिक किट और 50 हजार वेंटीलेटर की जरूरत पड़ेगी।  

फिलहाल ये स्वास्थ्यकर्मी ही कोरोना से लड़ने वाले असली योद्धा हैं। इस महामारी से हमारी लड़ाई का अंतिम नतीजा उनके मनोबल और कौशल से ही निकलेगा। ऐसे में उन्हें बर्खास्त करने और जरूरी सुरक्षा किट न मिलने की खबरें दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

उनका मनोबल बढ़ाने के लिए ताली बजाने और दिया जलाने जैसे प्रयास बढ़िया हैं, लेकिन उससे बेहतर यह होगा कि उन्हें इस लड़ाई के लिए जरूरी हथियार यानी सुरक्षाकिट मुहैया कराया जाय। प्रधानमंत्री जी, अब आप सबसे पहले यही चिंता कर लीजिए!

COVID-19
Coronavirus
Corona Crisis
Narendra modi
Thali or Taali
9 minutes Drama
Coronavirus Epidemic
health care facilities
PPE

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Hijab
    अजय कुमार
    आधुनिकता का मतलब यह नहीं कि हिजाब पहनने या ना पहनने को लेकर नियम बनाया जाए!
    14 Feb 2022
    हिजाब पहनना ग़लत है, ऐसे कहने वालों को आधुनिकता का पाठ फिर से पढ़ना चाहिए। 
  • textile industry
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः "कानपुर की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री पर सरकार की ग़लत नीतियों की काफ़ी ज़्यादा मार पड़ी"
    14 Feb 2022
    "यहां की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री पर सरकार की ग़लत नीतियों की काफ़ी ज़्यादा मार पड़ी है। जमीनी हकीकत ये है कि पिछले दो साल में कोरोना लॉकडाउन ने लोगों को काफ़ी परेशान किया है।"
  • election
    ओंकार पुजारी
    2022 में महिला मतदाताओं के पास है सत्ता की चाबी
    14 Feb 2022
    जहां महिला मतदाता और उनके मुद्दे इन चुनावों में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं, वहीं नतीजे घोषित होने के बाद यह देखना अभी बाक़ी है कि राजनीतिक दलों की ओर से किये जा रहे इन वादों को सही मायने में ज़मीन पर…
  • election
    सत्यम श्रीवास्तव
    क्या हैं उत्तराखंड के असली मुद्दे? क्या इस बार बदलेगी उत्तराखंड की राजनीति?
    14 Feb 2022
    आम मतदाता अब अपने लिए विधायक या सांसद चुनने की बजाय राज्य के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए मतदान करने लगा है। यही वजह है कि राज्य विशेष के अपने स्थानीय मुद्दे, मुख्य धारा और सरोकारों से दूर होते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 34,113 नए मामले, 346 मरीज़ों की मौत
    14 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.12 फ़ीसदी यानी 4 लाख 78 हज़ार 882 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License